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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

उदयसिंहकाहरण । ५२१ ५
भारी गाथा नलराजा की देखो महाभारत में जाय ३५
द्वापर शकुनी के सँग खेल्यो कुन्ती पुत्र युधिष्ठिरराय ॥
हारि द्रौपदी महाराजा गे खैंचा चीर दुशासन आय ३६
मानिकै शासन दुर्योधन का पहुँचे बनोवास फिरिजाय ॥
काटिकै संकट महाराज सब कीन्हेनि महाभारत फिरि आय ३७
यहु दुखदाई पंसासारी खेलन लागि बनाफरराय ॥
जादू डारी सुभिया बेड़िनि भे तब सुवा लहुरवा भाय ३८
डारिकै पिंजरा मा ऊदन का सुभिया कूच दीन करवाय ॥
जायकै पहुँची फिरि दिल्ली मा जहँ पर बसैं पिथौरा राय ३६
जहाँ कचहरी दिल्लीपतिकी सुभिया गई यतन सों धाय ॥
करी बन्दगी महाराजा को दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ४०
सुभिया बोली फिरि पिरथी ते राजन साँच देयँ बतलाय ॥
डारिकै जादू हम ऊदन पर औ मेला ते लई चुराय ४१
पै डर हमरे है आल्हा का स्वामी जगा देउ बतलाय ॥
डारिकै सिरकी हम दिल्ली मा निर्भय बसी पिथौरा राय ४२
इतना सुनिकै पिरथी बोले सुभिया कूच देउ करवाय ॥
जो सुनिपै हैं आल्हा ठाकुर हम ते रारि मचै हैं आय ४३
इतना सुनिकै सुभिया चलिभै डेरन फेरि पहुँची आय ॥
कूच करावा फिरि दिल्ली ते सब दरबार भँझावा जाय ४४
कहूँ ठिकाना जब लाग्योना सुन्नागढ़ै गयी तब धाय ॥
जहाँ कचहरी गजराजा की सुभिया तहाँ पहुँची जाय ४५
हाथ जोरिकै महाराजा के आपन हाल दीन बतलाय ॥
जगा चाहती हम सुन्नागढ़ यह इककाज हमारो आय ४६
इतना सुनिकै राजा बोले सुभिया कूच जाउ करवाय ॥

६ , आल्हखण्ड । ५२२
जो सुनि पै हैं आल्हा ठाकुर हमते रारि मचै हैं आय ४७
सुनिकै बातें गजराजा की सुभिया कूच दीन करवाय ॥
झारखण्ड के फिरि जंगल मा डेराजाय दीन गड़वाय ४८
चौकी पहरा करि जादू के निर्भय बसी तहाँ सुखपाय ॥
सुनवाँ सोचै ह्याँ महलन मा आये नहीं लहुरा भाय ४६
पता लगावों मैं ऊदन का जावों देश देश को धाय ॥
यहै सोचिकै रानी सुनवाँ चिल्हियाबनीसरगमड़राय ५०
पहिले ढूँढ़ा त्यहि बिठूर का पाछे गयी कामरू धाय ॥
सिलहट बिजहट मौरँग भुन्ता दिल्लीशहरलखा फिरिजाय ५१
पता न पायो जब ऊदन का पहुँची झारखण्ड में आय ॥
तहाँ पै डेराहैंड बेड़िनि के सुनवाँ बैठि बरगदे जाय ५२
पेड़ बरगदा के नीचे मा सुभिया पलँग लीन बिछवाय ॥
लैकै पिंजरा फिरि सुवना का मानुष तुरतै दीन बनाय ५३
खेलै चौपरि सँग ऊदन के सुभिया बोली बचन सुनाय ॥
व्याह हमारे सँगमा करिये मानो कही बनाफरराय ५४
भजिये अल्ला बिसमिल्ला को ऊदन रटो खुदाय खुदाय ॥
तब सुख पैहौ तुम देहीं का नाहीं खाल लेउँ खिचवाय ५५
खुदा खैरियत तुम्हरी करि हैं बिसमिल भलाकरी सबकाल ॥
बाबा आदम संकट टारी मेटी अली भली जंजाल ५६
बातें सुनिकै ये बेड़िनि की बोला देशराज का लाल ॥
खुदा खुदाई चहु दिखलावैं बिसमिलआयजायँततकाल५७
ऊदन व्याहैं नहिं बेड़िनि को कबहूँ राम नाम बिसराय ॥
देश आरिया के क्षत्री हम कैसे मुसलमान ह्वैजायँ ५८
जब छुइजावैं मुसलमान को तबहीं तुरत करें अस्नान ॥

उदयसिंहकाहरण । ५२३ ७
बेवश हैकै पिंजरा आयन ताते छूटिगयो सब मान ५६
पढ़ै फारसी हम बिद्या ना अपनौ धर्म करैं प्रतिपाल ॥
नित प्रति ध्यावैं रघुनन्दन को पूरणब्रह्म सुरासुर पाल ६०
खाल न रहै जो देहीमा केवल प्राण करैं विश्राम ॥
तबहूँ मुख सों ऊदन ठाकुर कवहूँ न लेयँ खुदाको नाम ६१
निर्भय बातें सुनि ऊदन की बरगद डार दीन टँगवाय ॥
बहुतक बाँसन हनि हनि मारा ऊदन जपो खुदाय खुदाय ६२
सुनिकै बातें ये सुमिया की बोला फेरि बनाफरराय ॥
ऊदन ब्याहैं नहिं बेड़िनि को कवहूँ राम नाम बिसराय ६३
बात न दूसरि हम अब कहिबे चहु तन धजीधजीउड़िजाय ॥
ऊदन ब्याहैं नहिं बेड़िनि को कवहूँ राम नाम बिसराय ६४
सुनिकै बातें उदयसिंह की तुरतै सुवना लीन बनाय ॥
डारिकै पिंजरामा ऊदन का टाँगा फेरि बरगदा आय ६५
देखि दुर्दशा यह ऊदन की सुनवाँ बार बार पछिताय ॥
डारि मशान दियो सुनवाँ ने पाछे पिंजरा लीन उठाय ६६
लैकै पिंजरा कछु दूरी मा सुनवाँ गई तड़ाका धाय ॥
सुवना लैकै फिरि पिंजरा ते मानुष तुरतै दीन बनाय ६७
सुनवाँ बोली फिरि ऊदन ते क्यों नहिं देवर जपो खुदाय ॥
काहे बिज्में तुम बेड़िनि में नित प्रति सहौ बाँसके घाय ६८
चलिये देवर अब मोहबे को तुम्हरी बार बार बलिजायँ ॥
सुनिकै बातें ये सुनवाँ की बोले फेरि बनाफर राय ६९
चोरी चोरा ना हम जैहैं तुमते साँच देयँ बतलाय ॥
लैकै फौजैं दादा आवैं हमरी कैद लेयँ छुड़वाय ७०
ऐसे ऊदन अब जैहैं ना नित प्रति सहैं बाँसके घाय ॥

८ आल्हखण्ड । ५२४
सुवा बनावो अब मानुष ते टाँगो फेरि बरगदा जाय ७१
इतना सुनिकै रानी सुनवाँ टाँगा फेरि बरगदा आय ॥
चील्ह रूप ह्वै उड़ि तहँनाते पहुँची फेरि मोहोबे जाय ७२
मानुष ह्वैकै फिरि महलनमा इन्दल पूत लीन बुलवाय ॥
कहि समुझावा सब इन्दल ते बप्पै खबरि जनावो जाय ७३
सुनिकै बातें ये माता की इन्दल पूत चला शिरनाय ॥
जहाँ कचहरी है आल्हा कै इन्दल पूत पहुँचा आय ७४
बड़े प्यार सों आल्हाठाकुर अपने पास लीन बैठाय ॥
फिरि शिर सूंघ्यो आल्हाठाकुर बोल्यो मधुरवचनमुसुकाय ७५
काह लालसा है बचुवा कै सो अब बेगि देउ बतलाय ॥
इतना सुनिकै इन्दलठाकुर कहिगा यथातथ्य सब गाय ७६
सुनिकै आल्हा बोलन लागे है यहु दुष्ट लहुरवा भाय ॥
करकति छाती दुख सुनिकै अब त्यहिते कैद छुड़ावब जाय ७७
इतना कहिकै आल्हा ठाकुर डंका तुरत दीन बजवाय ॥
सजिगालश्करफिरिआल्हाका तुरतै कूच दीन करवाय ७८
बनिकै चिल्हिया सुनवाँ रानी आधे सरग रही मड़राय ॥
जाय बरगदा के फिरि पहुँची चुप्पे बैठि डारपै जाय ७६
डारि मशान दयो सुभियादल तुरतै पिंजरा लीन उठाय ॥
कछु दूरिचलि झारखण्ड ते फूँका मन्त्र तहाँपर जाय ८०
मानुष ह्वैकै फिरि बघऊदन ठाढ़े भये शीश को नाय ॥
तब समुझावा रानी सुनवाँ लश्करगयो तुम्हारो आय ८१
चील्हरूप ह्वै रानी सुनवाँ बैठी एकडार पै जाय ॥
तहँने चलिकै ऊदन ठाकुर आगे मिले फौजमें आय ८२
लादू चौंरी सुभिया वाली सबियाँ हाल कहा समुझाय ॥

उदयसिंहकाहरण । ५२५ ६
इतना सुनिकै सुभिया बेड़िनि तुरतै उठी तड़ाका धाय ८३
सहुवा बीरन को बुलवावा औ सब हाल दीन बतलाय ॥
करो तयारी समरभूमि की आये लड़न बनाफरराय ८४
खबरि फैलिगै यह बेड़ियन-मा हैंगे डेढ़ सहस तय्यार ॥
झीलम बखतर सबहिन पहिरा सबहिन बाँधिलीन हथियार ८५
कोउकोउबेड़ियाचढ़िहाथिनमा कोउ कोउ घोड़भये असवार ॥
बहुतक बेड़िया हैं पैदल मा लीन्हे हाथ ढाल तलवार ८६
गड़िगा तम्बू ह्वाँ आल्हा का भारी ध्वजा रहा फहराय ॥
बाजै डंका अहर्तंका का हाहाकार शब्दका छाय ८७
देवा ऊदन इन्द्दल ठाकुर तीनों भये बेगि तय्यार ॥
हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार ८८
दुहुँ दल तुरतै इकठौरी भे लागी चलन तहाँ तलवार ॥
कहुँ कहुँ भाला कहुँ कहुँ बरछी कहुँ कहुँ मारैं ज्वान् कटार ८६
कटि भुजदण्डै गिरैं खेत में उठि उठि रुण्ड करें तलवार ॥
मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ६०
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्त की धार ॥
ना मुहँ फेरैं मोहबे वाले नादल बेड़ियनकात्यहिबार ६१
बड़े लड़ैया ई बेड़िया हैं इनते हारिगयी तलवार ॥
को गति वरणै तहँ इन्द्दल कै सबदिशिकरै भड़ाभड़मार ६२
सुनवाँ सुभिया कै वरणी में जादुन दऊ बड़ी हुशियार ॥
आगी पानी अरु आँधी की पुरियन होय तहाँपर मार ६३
चलै सिरोही रणमण्डल मा क्षत्री गरु करैं ललकार ॥
कहुँ ज्वालपकनि बिजली चमकनि तड़पै चहूँदिशा तलवार ६४
क्षत्री गाजैं डंका बाजैं बाजैं तहाँ शूर सरदार ॥

१० | आल्हाखण्ड | ५२६
को गति बरणै तहँ बेड़ियन कै उनतो भली मचाई रार ६५
इनहुन दुर्गति तिनकी कीन्ही कायर छोड़ि भागि मैदान ॥
कटि कटि कल्ला गिरैं बलेड़ा घैहा होयँ अनेकन ज्वान ६६
पाँचसै बेड़िया घायल हैगे सब दल रहिगा एकहजार ॥
तीनसै क्षत्रिय मोहबेवाले जूझे समर तहाँ त्यहिवार ६७
रानी सुनवाँ सुमिया बेड़िनि जादुन करैं तहाँपर रार ॥
कोऊ काहूते कमती ना दोऊ जादुन में हुशियार ६८
बीरमहम्मद की पुरिया को सुमिया छाँड़ि दीन त्यहिवार ॥
नारसिंह की जादू लैके सुनवाँ तजा तुरतललकार ९९
चिल्हिया हैकै सुनवाँ सुमिया दूनन खूब कीन मैदान ॥
लड़ते लड़ते दूनों चिल्हिया पहुँचींजायतुरतअसमान १००
लड़ते लड़ते द्वउ ऊपर ते नीचे गिरीं तड़ाका आय ॥
बड़ी लड़ाई भै पंजन ते अद्भुत समर कहानाजाय १०१
जहाँ लड़ाई द्वउ चिल्हियनकी इन्दल तहाँ पहुँचा आय ॥
सुनवाँ बोली तहँ इन्दल ते बेटा मूड़ देउ बगदाय १०२
इन्दल बोले तब सुनवाँ ते कैसे देवैं मूड़ गिराय ॥
जो हम मारैं यहि तिरिया को तौ रजपूती धर्मनशाय १०३
हाथ मेहरियन पर छाँड़ैं ना कबहूँ बीर समर में माय ॥
कैसे मारैं हम तिरिया को माता सोचो और उपाय १०४
इतना सुनिकै सुनवाँ बोली बेटा जूरा लेउ उड़ाय ॥
वातैं सुनिकै ये सुनवाँ की जूरा काटि लीन त्यहिठायाँ १०५
जीवन दान दीन सुमियाको सोऊ भागि तड़ाकाधाय ॥
जादू झूठी भई सुमिया की तबसोलागितहाँपछिताय १०६
ऊदन देबाकी मारुन मा बेड़िया भागे खेत बराय ॥

उदयसिंहकाहरण । ५२७ ११
जो कोउ भागतहै सम्मुख ते त्यहिना हनैं बनाफरराय १०७
मारे मारे तलवारिन ते बिड़िया चिरियाकरें निदान ॥
खेत छूटिगा सब बिड़ियन ते जीता उदयसिंह मैदान १०८
बाजे डंका अहंतंका के हैगा घोर शोर घमसान ॥
जितने क्षत्री मोहबेवाले डेरन आयगये ते ज्वान १०६
चील्ह रूप है सुनवाँ रानी महलन आयगयी तत्काल ॥
कूच करायो फिरि लश्कर को बेटा देशराज के लाल ११०
आल्हा ठाकुर पचशब्दा पर इन्द्ल पपिहापर असवार ॥
घोड़ बेंदुला पर ऊदन हैं कम्मरपरी नाँगि तलवार १११
यहु अलबेला भीषमवाला देवा मैनपुरी चौहान ॥
घोड़ मनोहर पर सोहतहै रणमा बड़ालड़ैयाज्वान ११२
कैयो दिनकी मैजलि करिकै झुन्नागढ़ै पहुँचे आय ॥
गड़िगा तम्बू तहँ आल्हा का भारी ध्वजारहा फहराय ११३
ढोल नगारा तुरही बाजीं हाहाकार शब्दगा छाय ॥
गा हरिकारा तब झुन्नागढ़ राजै खबरिजिनावा जाय ११४
आल्हा ऊदन मोहबे वाले धूरे परे हमारे आय ॥
आवैं फौजें झारखण्ड ते अबतो नगर मोहोबे जायँ ११५
सुनिकै बातें हरिकारा की पलकी तुरत लीन मँगवाय ॥
इशरत मुहरें इक हीरा लै पलकी चढ़ा तड़ाकाधाय ११६
जहाँ बनाफर आल्हा ठाकुर राजा तहाँ पहुँचा आय ॥
आदर करिकै आल्हा ठाकुर अपने पास लीन बैठाय ११७
द्वरि अशर्फी दी सम्मुखमा हीरा हाथ दीन पकराय ॥
सखियाँ गाया तब ऊदन की आल्हा यथातथ्यगे गाय ११८
बड़े प्रेम सों दोऊ ठाकुर बोलैं प्रीति रीति के भाय ॥

१२ आल्हखण्ड । ५२८
बिदा मांगिकै फिरि आल्हासों राजा चढ़ा पालकी जाय ११६
गा महराजा मुन्नागढ़ मा तम्बुन स्वये बनाफरराय ॥
राति बसेरा करि मुन्नागढ़ भुरहीं कूच दीन करवाय १२०
कैयो दिनकी मैजलि करिकै मोहबे गये बनाफरराय ॥
सौसौ तोपैं दर्गी सलामी जबघरगयेउदयसिंहराय १२१
को गति वरणै त्यहि समयाकै हमरे बून कही ना जाय ॥
ऊदनहरण पूर अब ह्रैगा ध्यावैं तुम्हें शारदा माय १२२
कण्ठ में बैठो तुम महरानी भूले अक्षर देउ बताय ॥
आशिर्वाद देउँ मुंशीसुत जीवो प्रागनरायण भाय १२३
रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥
मालिक ललिते के तबलौं तुम यशसों रहौ सदा भरपूर १२४
माथ नवावों पितु माता को जिनबल पूर कीन यह गाथ ॥
नहीं भरोसा निज भुजबल का स्वामी रामचन्द्र रघुनाथ १२५
पूर तरंग यहाँ सों ह्रैगा सुमिरों तुम्हें भवानीकन्त ॥
राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छा यही मोरि भगवन्त १२६
इति श्रीलखनऊनवासि (सी,आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजबावूप्रागना-
रायणजीकीआज्ञानुसारउनामप्रदेशान्तर्गतपँड़रीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भव
बुधकृपाशङ्करसूनु पं० ललिताप्रसादकृतऊदनहरण
वर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥
उदयसिंहकाहरणसमाप्त ॥
इति ॥

अथ आल्हखण्ड ॥
बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्धवर्णन ॥
सवैया ॥
ब्याकुल गंध्रब नागसबै नरदेव अदेव लहे दुखभारा।
गोतनु धारि गयी पिरथी अरथी सँग देवन लै त्यहिबारा ॥
वाणि भई तबहीं नभते ललिते अवधेशके होब कुमारा ।
ध्यावत ब्रह्म सुरासुर जाहि स्वई प्रभु राम लियो अवतारा १
सुमिरन ॥
दोउ पद बन्दौं रामचन्द्र के जिनबल चलाजाउँ भवपार ॥
राम न होते जो दुनियामा बेड़ा कौन लगावत पार १
कौन समुन्दर को मथिडारत चौदारतन लेत निकराय ॥
कोथों मारत दशकन्धर को धारत कौन धर्मपथ आय २
कोथों तारत इनपापिन को जिनकीदशाकही ना जाय ॥
मारा मारा कहि तरिगे जो पापी बालमीकि असभाय ३
गीधअजामिलगतिगणिकाकी सबकोविदितभलीविधिआय ॥
१४

५. पञ्चम भाग: आल्हा का संन्यास, अमरत्व वरदान व महाकाव्य उपसंहार

२ आल्हाखण्ड । ५३०
ये सब पापी हैं प्रथमै के तरिगे रामचरण को ध्याय ४
स्वई भरोसा धरि जियरेमा नितप्रति धरों चरणपरमाथ ॥
पारलगायो भवसागर ते स्वामी रामचन्द्र रघुनाथ ५
छोड़ि सुमिरनी अब रघुबर कै बेला गौन कहौं सब गाय ॥
ब्रह्मा ठाकुर दिल्ली जैहैं पैहैं विजय पिथौराराय ६
अथ कथाप्रसंग ॥
एक समैया इक औसर मा बैठे सभा रजा परिमाल ॥
आल्हा ऊदन इन्द्दल देवा लाखनि साथ और नरपाल १
को गति बरणै त्यहि समयाकै भारी लाग राजदरवार ॥
त्यही समैया त्यहि औसरमा आवा उरई का सरदार २
आवो आवो बैठो बैठो राजै कीन बहुत सतकार ॥
बैठिग ठाकुर उरई वाला आला चुगुलन मा सरदार ३
बिना बुलाये ते बोला फिरि तुम सुनिलेउ रजापरिमाल ॥
औसर ऐसो फिरि पैहौ ना ब्रह्मा गौनलेउ यहिकाल ४
बैठि कनौजी लाखनिराना बैठे देशराज के 'लाल ॥
लैकै वीरा यहि औसर मा तुम धरिदेउ रजापरिमाल ५
कौन बहादुर यहि समया मा बेला गौन चबावै पान ॥
स्यावासि स्यावासि माहिलठाकुर तुम्हरे बचन ठीक परमान ६
इतना कहिकै परिमालिक जी तुरतै धरा तहाँपर पान ॥
है कोउ क्षत्री तेहेवाला लेवै पान आन सो ज्वान ७
सुनिकै बातें परिमालिक की सब कोउ गये सनाकाखाय ॥
बोलि न आवा क्यहु ठाकुरते आनन गये तुरत मुरझाय ८
चारि घरीदिन यहिविधि बीता कोउ न पान पास समुहान ॥
तवै बहादुर द्यावलि वाला पहुँचा उदयसिंह तहँ ज्वान ६

बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५३१ ३
माहिल बोले तब ब्रह्मा ते ठाकुर काह धरावो नाम ॥
पान चबावो तुम दिल्ली का नाहीं उदयसिंह का काम १०
जाति कुलीने नहिं ऊदन हैं नहिं विश्वासयोग यहिकाल ॥
इन्हें निकारयो परिमालिक है खोटे देशराज के लाल ११
मतलब इन ते जो रहिहैं ना पिरथी करी बहुत सनमान ॥
अगुवाकारी होयँ बनाफर तौ सब लड़ैं बीर चौहान १२
पान चबावों तुम जल्दी सों देबे बिदा तुरत करवाय ॥
इतना सुनिकै ब्रह्मा चलिभे पहुँचे पाननिकट फिरिआय १३
लै कै बीरा तहँ ऊदनते ब्रह्मा गये तड़ाकाखाय ॥
आल्हा-मनमा कायल द्वैगे ऊदन बहुत गये शरमाय १४
दूनों भाई चले तड़ाका दशहरि पुरै पहुँचे आय ॥
आल्हा बोले तहँ ऊदन ते यह गति भई लछुरवा भाय १५
बड़ बड़ राजन के सम्मुख मा ब्रह्मा लीन्ह्यो पान छिनाय ॥
घटिहा राजा मोहबे वाला कैसी हँसी दीन करवाय १६
तुम नहिं मोहवे ऊदन जावो हट्का रहे लछुरवाभाय ॥
कहा हमारा तुम माना ना ताका पायगयो फलआय १७
इतना कहिकै आल्हा ठाकुर सोये बिकट नींद को पाय ॥
कछू दिनौना के बीते मा गौना समय पहुँचा आय १८
मल्हना निश्चय तब ठहरायो जैहैं नहीं बनाफरराय ॥
बिना बनाफर उदयसिंह के लैहै कौन बिदा करवाय १६
यहै सोचिकै मल्हना रानी लाखनिराना लीन बुलाय ॥
आल्हा ऊदन दुउ रूठे हैं जान्ने आप कन्नौजीराय २०
हूँ दिन बाकी नहिं गौना के याकी कौन करी तदबीर ॥
जब सुधि आवै इन बातन की तबहीं होय करेजे पीर २१

[Page Header]
४ आल्हाखण्ड । ५३२

आश हमारी अब तुमहीं लग साँची सुनो कनौजीराय ।.
तुम जो जावो ब्रह्मा सँग मा तौ सबकाम सिद्धिहैजाय २२
सुनिकै बातें ये मल्हना की बोले फेरि कनौजीराय ॥
हम चलिजैबे ब्रह्मा सँग मा लैबे विदा मातु करवाय २३
इतना कहिकै लाखनि चलिभे अपनी फौज पहुँचे आय ॥
बाजा डङ्का इत ब्रह्मा का हाहाकार शब्द गा छाय २४
उतै कनौजी लाखनिराना अपनी फौज लीन सजवाय ॥
यह सुधि पाई उदयसिंह जब आये तबै तड़ाकाधाय २५
औ यह बोले लखराना ते मानो कही कनौजीराय ॥
साथी हमरे की ब्रह्मा के जोतुमफौजलीनसजवाय २६
पहिले लड़िकै हमरे सँगमा पाछे धरयो अगारी पाँय ॥
इतना सुनिकै सय्यद् बोले तुम सुनिलेउ कनौजीराय २७
संग न जावो तुम ब्रह्मा के सम्मन यहै ठीक ठहराय ॥
करो लड़ाई तुम ऊदन ते तौ सब जैहैं काज नशाय २८
हितू तुम्हारे नहिं ब्रह्मा हैं जैसे हितू बनाफरराय ॥
कहा मानिकै यह सय्यद् का लाखनि फेंटदीनखुलवाय २६
भई अठारह उरई वाले मोहबे अये तड़ाकाधाय ॥
बड़ बड़ शूरन को सँग लैके ब्रह्मा कूच दीन करवाय ३०
सात दिनौना के अरसा माँ दिल्ली गये बँदेलेराय ॥
दिल्ली केरे फिरि ढाँड़े गा लश्कर ब्रह्मा दीन डराय ३१
गड़िगा तम्बू तहँ ब्रह्मा का भारी ध्वजा रहा फहराय ॥
माहिल पहुँचे फिरि दिल्ली मा जहँ पर बैठ पिथौरा राय ३२
बड़ी खातिरी पिरथी कीन्ही अपने पास लीन बैठाय ॥
काहे आये उरई वाले आपन हाल देउ बतलाय ३३

[Header] बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ४३१

इतना सुनिकै माहिल बोले मानो साँच पिथौराराय ॥
ब्रह्मा आये हैं गौने को फौजैं परीं डाँड़ पर आय ३४
पहिले बीरा ऊदन लीन्ह्यो सो ब्रह्मा ने लीन छिनाय ॥
अब मन तुम्हरे जैसी आवै तैसी कहो पिथौराराय ३५
इतना सुनिकै पिरथी बोले माहिल साँच देयँ बतलाय ॥
बिना लड़ाई के गौना कहु कैसे देयँ पिथौरा राय ३६
करें लड़ाई अब सैंभराभरि पाछे बिदा लेयँ करवाय ॥
यह कहि दीजो तुम ब्रह्मा ते माहिल बार बार समुझाय ३७
इतना सुनिकै ब्रह्मानँद ते माहिल खबरि जनाई आय ॥
बिना लड़ाई के मनिहैं ना यहु महराज पिथौराराय ३८
इतना सुनिकै ब्रह्मा ठाकुर कागज कलमदान मँगवाय ॥
लिखिकै चिट्ठी दी धावन को धावन चला तड़ाका धाय ३६
जहाँ कचहरी पृथीराज की धावन अटा तड़ाका आय ॥
हाथ जोरिकै धावन तुरतै चिट्ठी तहाँ दीन पकराय ४०
बाँचत चिट्ठी ब्रह्मानँद की पिरथी क्रोध कीन अधिकाय ॥
शूर चौंड़िया को बुलवायो औ सबहालकह्योसमुझाय ४१
तुरतै डंका को बजवावो सबियाँ फौज लेउ सजवाय ॥
बाँधि जँजीरन तुम ब्रह्मा का हमका बेगि दिखावो आय ४२
हुकुम पिथौरा का पावनखन डंका तुरत दीन बजवाय ॥
बाजे डंका अहतंका के हाहाकार शब्द गा छाय ४३
सजिसजितोपें खेतन चलिभईं हाथिन होन लागि असवार ॥
झीलमबखतरपहिरी सिपाहिन हाथ म लई ढाल तलवार ४४
दुइ दुइ भाला इक इक बरछी कोउ कोउ बाँधी तीनकटार ॥
वीर तमंचा कड़ाबीन औ गदकागुर्ज लीन त्याहिवार ४५

६ आल्हखण्ड । ५३४
कच्छी मच्छी नकुला सब्जा हरियल मुश्की घोड़ अपार ॥
ताजी तुर्की पँचकल्यानी इनपर होन लागि असवार ४६
अंगद पंगद मकुना भौंरा सजिगे श्वेतवरण गजराज ॥
सोहैं अँवारी तिन हाथिन पर बहुतन हौदा रहे विराज ४७
को गति बरणै त्यहि समया कै मानो कोप कीन सुरराज ॥
बाजैं डंका अह्तंका के मानों गिरैं उपर ते गाज ४८
पहिल नगाड़ा में जिनबन्दी दुसरे फाँदि भये असवार ॥
तिसर नगाड़ा के बाजत खन चलिभे सबै शूर सरदार ४९
खर ,खर खर खर कै रथदौरे रवन्ना चले पवन की चाल ॥
हाथी चिंघेरै घोड़ा हींसे कीन्हेनिशब्दबहुतनरपाल ५०
गुस्ती धावन तहँ ब्रह्मा का. तम्बुन अटा तड़ाका आय ।
खबरि सुनाई यह ब्रह्मा को की दल अवै चँदेलेराय ५१
इतना सुनिकै ब्रह्मा ठाकुर फौजैं तुरत लीन सजवाय ॥
बाजे डंका अह्तंका के बंकन शंक दीन बिसराय ५२
ई निरशंका मोहबे वाले , बाँधेनि तुरत ढाल तलवार ॥
साजा ठाढ़ा हरनागर था ब्रह्मा फाँदि भये असवार ५३
पहिली लड़ाई भै तोपन कै पाछे चलन लागि तलवार ॥
कहुँ कहुँ भाला कहुँ कहुँ बरछी मारन लागि शूर सरदार ५४
तीर तमंचन की मारुइ भई कोताखानी चलीं कटार ॥
तेगा चमकै बर्दवान का ऊना चलै बिलाइति क्यार ५५
को गति बरणै त्यहि समयामा बाजै छपक छपक तलवारे ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्त की धार ५६
ना मुहँ फेरैं दिल्ली वाले ना ई मोहबे के सरदार ॥
मुण्डन केरे मुड़ चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ५७

[Header] बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५३५

को गति बरनै जगनायक कै मारे घूमि घूमि तलवार ॥
ब्रह्मा ठाकुर के मुर्चा मा कोउ न ठाढ़ होय सरदार ५८
लरिका मरिगे पृथीराज के क्षत्रिन छाँड़ि दीन मैदान ॥
धाँधू चौंड़ा त्यहि समया मा भारी कीन घोर घमसान ५६
भा खलभल्ला औ हल्लाअति लल्ला डारि भागि हथियार ॥
ना मुहँ फेरैं दिल्ली वाले ना ई मोहबे के सरदार ६०
कीरति प्यारी के भूखे हैं दोऊ दिशिमा परम जुझार ॥
फिरि फिरि मारैं औ ललकारै यहु मल्हना को राजकुमार ६१
घोड़ा मारै भल टापन ते ऊपर आप करै तलवार ॥
ब्रह्माठाकुर के मुर्चा मा क्षत्री डारि भागि हथियार ६२
देखि तमाशा चौंड़ा धाँधू रहिगे चुप्प साधि त्यहि बार ॥
यहु निरशंकी परिमालिक का बहुतन पठै दीन यमद्वार ६३
रण अभिलाषा नहिं काहू के सब कउ गये मनैमन हार ॥
ठाकुर बेढब जगनायक है मैने जौनु चँदेले क्यार ६४
धाँधू ठाकुर के मुर्चा मा दूनों हाथ करै तलवार ॥
चौंड़ा ब्राह्मण इकवन्ता से बीरन रहा तहाँ ललकार ६५
रोज केतकी कहुँ फूलै ना चंपा रोज न लागै डार ॥
गई जवानी फिरि मिलिहै ना ना फिरि रोजचलै तलवार ६६
कीरति जैहै सब दुनिया मा जो कउ लड़ै शूर सरदार ॥
आखिर देही यह रहि है ना जोरी जोरन जोर हजार ६७
सदा न फूलै यह बन त्वरई यारो सदा न सावन होय ॥
सदा न पैहौ यह नर देही यारो सदा न जीवै कोय ६८
ऐसा बोल चौंड़ा कहि कहि क्षत्रिन दीन्हे खूब जुझाय ॥
ब्रह्मा ठाकुर त्यहि समया मा भारी हाँक कहा गुहराय ६६

८ आल्हाखण्ड । ५३६
पावैं पिछाड़ी का डाखो ना यारो राख्यो धर्म हमार ॥
मारो मारो ओ रजपूतो देहैं विजय अवश्य करतार ७०
इतना कहिकै ब्रह्मा ठाकुर लाग्यो करन आप तलवार ॥
ब्रह्माठाकुर के मुर्चा मा कोउ न ठाढ़ होय सरदार ७१
जैसे भेड़िन भेड़हा पैठै जैसे अहिर बिडारै गाय ॥
तैसे मारे ब्रह्मा ठाकुर रणमा कोउ न रोकै पायँ ७२
ब्रह्माठाकुर के मारुन मा कोऊ शूर नहीं समुहाय ॥
लश्कर भाग्यो पृथीराज का पायो विजय चंदेलेराय ७३
त्यही समैया त्यहि औसर मा माहिल उरई का सरदार ॥
लिल्ली घोड़ी पर चढ़ि बैठ्यो तिकतिककरनलागत्यहिवार७४
जहाँ कचहरी पृथीराज की भारी लाग राज दरबार ॥
उतरिकै घोड़ीते भुइँ आवा पहुँचा उरई का सरदार ७५
आवत दीख्यो जब माहिल को राजा कीन बड़ा सत्कार ॥
आवो आवो उरई वाले माहिल राजा हितू हमार ७६
इतना कहिकै महराजा ने अपने पास लीन बैठाय ॥
'माहिल बोले त्यहि समया मा मानो कही पिथौराराय ७७
लड़िकै जिनिहौ ना ब्रह्माते चहुवल देयँ तुम्हें करतार ॥
धाँधू चौंड़ा सब कोउ हारे जीता पूतु चंदेले क्यार ७८
बड़े लड़ैया मोहबेवाले उनके बांट परी तलवार ॥
उड़न बछेड़ा जिनके घर मा तिनते लड़ै कौन सरदार ७९
पिस्थी बोले तब माहिल ते ठाकुर उरई के सरदार ॥
कौन उपाय करैं यहि औसर ज्यहिमा विजयदेयँकरतार ८०
इतना सुनिकै माहिल बोले ओ महराज पिथौराराय ॥
रूप जनाना करि ताहर का डोला आपु देउ पठवाय ८१

बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध। ५३७ ६
गाफिल देखें जब ब्रह्मा का तबहीं कैदलेयँ करवाय ॥
इतना सुनि कै ताहर बोले सम्मत नीक नहीं यह भाय ८२
रूप जनाना हम करिबे ना चहु तन धजीधजी उड़िजाय ॥
कीरति जैहै सब दुनिया ते औ रजपूती धर्म नशाय ८३
इतना सुनिकै चौंड़ा बोला हम बनिजाब जनानाभाय ॥
बिना बयारी जूना टूटै औ बिन औषध बहै वलाय ८४
साम दाम औ दण्ड भेद सों नितप्रति चतुरकरतहैं काम ॥
मोहिं पियारी यह कीरति है जीतैं शत्रु होय जगनाम ८५
सुनिकै बातें ये चौंड़ा की बोला पृथीराज चौहान ॥
स्याबासिस्याबासि चौंड़ा बकशी तुम्हरे बचन मोहिं परमान ८६
सुनी पिथौरा की बातें ये चौंड़ा चला तड़ाका धाय ॥
जायकै पहुँच्यो रंगमहल में सबियाँ जेवर लीन मँग़ाय ८७
अनवट बिछिया पाँयन पहिरे पहिरे कड़ा छड़ा त्यहिबार ॥
धरि परुपान दऊ पैरन मा त्यहिपर पायजेब झनकार ८८
किंकिणि पहिरी करिहाँयें मा कण्ठम पहिरि मोतियनहार ॥
बाजू जोसन बाँधि बजुल्ला दोऊ भुजन कीन श्रृंगार ८६
बनी पछेला पहुँची ककना दूनों हाथन करें बहार ॥
आठ अँगुरियन छल्ला पहिरे अँगुठा लीन आरसीधार ६०
चुरियाँ पहिरी दउ हाथन मा तिनबिच लीन पनेरियाडार ॥
नथुनी लटकन बेसरि पहिरी कानन करनफूल शृङ्गार ६१
बेंदा धारयो फिरि माथे मा बँदियाँ शिरपर करें बहार ॥
मिस्सी रगरी सब दाँतन मा चौंड़ा बना जनाना यार ६२
सिया ओधि धरि छाती मा चोलीबन्द लीन कसवाय ॥
चीरी सारी काशमीर की शोभा कही बूत ना जाय ६३

१० आल्हाखण्ड । ५३८
दुलाहिनि बनिकै चौंड़ा बकशी तुरतै चढ़ा पालकी जाय ॥
जहरबुझाई लीन कटारी सो सारी में धरी चुराय ६४
ताहर बैठे दल गंजन पर धाँधू हाथी पर असवार ॥
झीलमबखतर पहिरिसिपाहिन हाथ म लई ढाल तलवार ६५
चली पालकी फिरि चौंड़ा की लश्कर कूच दीन करवाय ॥
इक हरकारा ताहर पठयो औ सवहाल दीनबतलाय ६६
खबरि जनावो तुम ब्रह्मा को बेला बिदा लेयँ करवाय ॥
आवत डोला है वेलाका इकले अत्रो चँदेलेराय ६७
इतना सुनिकै धावन चलिभा तम्बुन फेरि पहुंचा आय ॥
खवरि जनाई सब ब्रह्मा को जो कछु ताहर दीन बताय ६८
सुनिकै बातें हरकारा की हरनागर पर भयो सवार ॥
घरी अढ़ाई के अरसा मा पहुँचा मोहबे का सरदार ६६
आवत दीख्यो जब ब्रह्मा का ताहर बोले बचन उदार ॥
आवो आवो ब्रह्मा ठाकुर तुमते हारिगयी तलवार १००
डोला लाये हम बहिनी का ठाकुर बिदालेउ करवाय ॥
कौन डसरिहा हाँ तुम्हरो है जो अब रारि मचावैआय १०१
लड़ि भिड़ि तुमने हम हारे सब तब यह ठीक लीन ठहराय ॥
रंडा बैठै जो बहिनी मम तौ सब जैहैं काम नशाय १०२
यहै सोचिकै गहराजा ने डोला यहाँ दीन पठवाय ॥
बड़ी खुशहाली भै राजा के संग न आये बनाफरराय १०३
जो कहुँ औते ऊदन ठाकुर तौ हाँ होत युद्ध अविकाय ॥
बड़ी खुशहाली भै राजा के जोतुमलीन्ह्योपानछिनाथ १०४
अब यह डोला है बहिनी का मोहबे आपु देउ पठवाय ॥
मुनि मुनि बातें ये ताहर की ब्रह्मा तुरत गये पतियाय १०५

बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५३६ ११
भलओअनभल जबजसहोवय तबतस बुद्धि जाय बौराय ॥
सुनान हन्ना क्यहु सुवरण का नाकयहु दीख नैनसों जाय १०६
रचा विधाता नहिं कबहुंथा मारन हेतु गये रघुराय ॥
यह अनहोनी हम दिखलाई सोचोसदास्वजनजनभाय १०७
होनहार बश ब्रह्मा हैके डोला निकटगये नगचाय ॥
तबहीं चौंड़ा उठि पलकी ते बाँये दीन कटारीघाय १०८
दहिने सांगहनी धाँधू ने ताहर मार्यो तीरचलाय ॥
तीनों घायपरे ब्रह्मा के तुरतै गिरे मूर्च्छाखाय १०९
यह गति दीखी जब ब्रह्मा की रोवनलागि मोहबियाज्वान ॥
तबललकार्यो जगनायकजी होवो खड़े समर चौहान ११०
दगाते मार्यो तुम ब्रह्माको हमरे साथ करो तलवार ॥
जियत न जाई कउ दिल्ली का सबका डरों जानसों मार १११
तौ तौ मैने चंदेले का नहिं ई डारौं मुच्छ मुड़ाय ॥
सुनिकै बातें जगनायक की ताहर कूच दीन करवाय ११२
ताहर नाहर के जातैखन जगना अटा तहाँ पर जाय ॥
मूर्च्छित दीख्यो ब्रह्मानँदको पलकी उपर दीन पौढ़ाय ११३
लै कै पलकी जगनायक जी तम्बुन फेरि पहुँचेआय ॥
जागी मूर्च्छा तहँ ब्रह्मा की बोले तुरत चंदेलेराय ११४
कूच करायो नहिं लश्कर को मोहबे खबरि देउ पठवाय ॥
सुनिकै बातें ये ब्रह्मा की धावन तुरत लीन बुलवाय ११५
कही हकीकति सब धावन ते तुरतै चला शीशकोनाय ॥
जहाँ कचहरी परिमालिक की धावन तहाँ पहुँचा आय ११६
कही हकीकति महराजाते तुरतै गिरे पछाराखाय ॥
बीछी काट्यो या बर्रै ने मानो डसा भुजंगम आय ११७

९२ आल्हाखण्ड । ५४०
बिपदा आई फिरि मोहबेमा फैली बात महल में जाय ॥
सुनी हकीकति रानी मल्हना महलन गिरी मूर्च्छाखाय ११८
बारह रानी चंदेले की रोवैं तहाँ पछारखाय ॥
ख्याति रोवैं घर अपने मां सपनेसरिसजगतदिखलाय ११९
साँचो स्वपना जग हम देखैं कोउन पूत पतोहू भाय ॥
आज मरैं दिन दूसर काल्ही याही साँच परै दिखलाय १२०
इयहिते भैया यहि दुनिया मा कबहुँन करै उपरको शीश ॥
सम्मत हमरो यह साँचा है नितप्रतिभजैरामजगदीश १२१
सोउन बाचा यहि दुनिया मा बाहू गये जासु के बीश ॥
सहसन बाहुनका अर्जुन भा ताकाहनावशिजगदीश १२२
काह हकीकति नरपामर की जो करिलेय उपर को शीश ॥
रहिगा ठाकुर ना सिरसा का कलियुगवीरधीरअवनीश १२३
ताते चाही नर देही को झुकि २ झुकतर झुकि जाय ॥
त्यों त्यों त्यों त्यों ऊपर जावै ज्यों २ शीश झुकावत जाय १२४
जैसे तरुवर है रसालको बौरन भार रहा गरुवाय ॥
ज्यों ज्यों बाढ़ फल रसालके त्योंत्योंझुकत २झुकिजाय १२५
ज्यों ज्यों पकिपकि टपकतआवैं त्यों त्यों डार उपरको जाय ॥
ऐसो सम्मत यह साँचा है साँचासमयगयोनगन्याय १२६
नहीं तो आल्हा को थाल्हाकरि ललिने धर्म देत दिखलाय ॥
काह हकीकति नर पामर की जोअभिमानकरतरहिजाय १२७
सुनी पाठ है जिन दुर्गा की खिन हना वीर समुदाय ॥
धर्म यथारथकी बातें सब अबकोस्वजनदेयदिखलाय १२८
ताते गाथा यह सब छूटा लूटा दुःख मोहोबा आय ॥
खबरि पहुँचीगै दथहरिपुरमा आल्हानिकटतड़ाका जाय १२६