आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
पृष्ठ 526, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ेंउदयसिंहकाहरण । ५२५ ६
इतना सुनिकै सुभिया बेड़िनि तुरतै उठी तड़ाका धाय ८३
सहुवा बीरन को बुलवावा औ सब हाल दीन बतलाय ॥
करो तयारी समरभूमि की आये लड़न बनाफरराय ८४
खबरि फैलिगै यह बेड़ियन-मा हैंगे डेढ़ सहस तय्यार ॥
झीलम बखतर सबहिन पहिरा सबहिन बाँधिलीन हथियार ८५
कोउकोउबेड़ियाचढ़िहाथिनमा कोउ कोउ घोड़भये असवार ॥
बहुतक बेड़िया हैं पैदल मा लीन्हे हाथ ढाल तलवार ८६
गड़िगा तम्बू ह्वाँ आल्हा का भारी ध्वजा रहा फहराय ॥
बाजै डंका अहर्तंका का हाहाकार शब्दका छाय ८७
देवा ऊदन इन्द्दल ठाकुर तीनों भये बेगि तय्यार ॥
हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार ८८
दुहुँ दल तुरतै इकठौरी भे लागी चलन तहाँ तलवार ॥
कहुँ कहुँ भाला कहुँ कहुँ बरछी कहुँ कहुँ मारैं ज्वान् कटार ८६
कटि भुजदण्डै गिरैं खेत में उठि उठि रुण्ड करें तलवार ॥
मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ६०
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्त की धार ॥
ना मुहँ फेरैं मोहबे वाले नादल बेड़ियनकात्यहिबार ६१
बड़े लड़ैया ई बेड़िया हैं इनते हारिगयी तलवार ॥
को गति वरणै तहँ इन्द्दल कै सबदिशिकरै भड़ाभड़मार ६२
सुनवाँ सुभिया कै वरणी में जादुन दऊ बड़ी हुशियार ॥
आगी पानी अरु आँधी की पुरियन होय तहाँपर मार ६३
चलै सिरोही रणमण्डल मा क्षत्री गरु करैं ललकार ॥
कहुँ ज्वालपकनि बिजली चमकनि तड़पै चहूँदिशा तलवार ६४
क्षत्री गाजैं डंका बाजैं बाजैं तहाँ शूर सरदार ॥