आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध। ५३७ ६
गाफिल देखें जब ब्रह्मा का तबहीं कैदलेयँ करवाय ॥
इतना सुनि कै ताहर बोले सम्मत नीक नहीं यह भाय ८२
रूप जनाना हम करिबे ना चहु तन धजीधजी उड़िजाय ॥
कीरति जैहै सब दुनिया ते औ रजपूती धर्म नशाय ८३
इतना सुनिकै चौंड़ा बोला हम बनिजाब जनानाभाय ॥
बिना बयारी जूना टूटै औ बिन औषध बहै वलाय ८४
साम दाम औ दण्ड भेद सों नितप्रति चतुरकरतहैं काम ॥
मोहिं पियारी यह कीरति है जीतैं शत्रु होय जगनाम ८५
सुनिकै बातें ये चौंड़ा की बोला पृथीराज चौहान ॥
स्याबासिस्याबासि चौंड़ा बकशी तुम्हरे बचन मोहिं परमान ८६
सुनी पिथौरा की बातें ये चौंड़ा चला तड़ाका धाय ॥
जायकै पहुँच्यो रंगमहल में सबियाँ जेवर लीन मँग़ाय ८७
अनवट बिछिया पाँयन पहिरे पहिरे कड़ा छड़ा त्यहिबार ॥
धरि परुपान दऊ पैरन मा त्यहिपर पायजेब झनकार ८८
किंकिणि पहिरी करिहाँयें मा कण्ठम पहिरि मोतियनहार ॥
बाजू जोसन बाँधि बजुल्ला दोऊ भुजन कीन श्रृंगार ८६
बनी पछेला पहुँची ककना दूनों हाथन करें बहार ॥
आठ अँगुरियन छल्ला पहिरे अँगुठा लीन आरसीधार ६०
चुरियाँ पहिरी दउ हाथन मा तिनबिच लीन पनेरियाडार ॥
नथुनी लटकन बेसरि पहिरी कानन करनफूल शृङ्गार ६१
बेंदा धारयो फिरि माथे मा बँदियाँ शिरपर करें बहार ॥
मिस्सी रगरी सब दाँतन मा चौंड़ा बना जनाना यार ६२
सिया ओधि धरि छाती मा चोलीबन्द लीन कसवाय ॥
चीरी सारी काशमीर की शोभा कही बूत ना जाय ६३