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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 524

उदयसिंहकाहरण । ५२३ ७
बेवश हैकै पिंजरा आयन ताते छूटिगयो सब मान ५६
पढ़ै फारसी हम बिद्या ना अपनौ धर्म करैं प्रतिपाल ॥
नित प्रति ध्यावैं रघुनन्दन को पूरणब्रह्म सुरासुर पाल ६०
खाल न रहै जो देहीमा केवल प्राण करैं विश्राम ॥
तबहूँ मुख सों ऊदन ठाकुर कवहूँ न लेयँ खुदाको नाम ६१
निर्भय बातें सुनि ऊदन की बरगद डार दीन टँगवाय ॥
बहुतक बाँसन हनि हनि मारा ऊदन जपो खुदाय खुदाय ६२
सुनिकै बातें ये सुमिया की बोला फेरि बनाफरराय ॥
ऊदन ब्याहैं नहिं बेड़िनि को कवहूँ राम नाम बिसराय ६३
बात न दूसरि हम अब कहिबे चहु तन धजीधजीउड़िजाय ॥
ऊदन ब्याहैं नहिं बेड़िनि को कवहूँ राम नाम बिसराय ६४
सुनिकै बातें उदयसिंह की तुरतै सुवना लीन बनाय ॥
डारिकै पिंजरामा ऊदन का टाँगा फेरि बरगदा आय ६५
देखि दुर्दशा यह ऊदन की सुनवाँ बार बार पछिताय ॥
डारि मशान दियो सुनवाँ ने पाछे पिंजरा लीन उठाय ६६
लैकै पिंजरा कछु दूरी मा सुनवाँ गई तड़ाका धाय ॥
सुवना लैकै फिरि पिंजरा ते मानुष तुरतै दीन बनाय ६७
सुनवाँ बोली फिरि ऊदन ते क्यों नहिं देवर जपो खुदाय ॥
काहे बिज्में तुम बेड़िनि में नित प्रति सहौ बाँसके घाय ६८
चलिये देवर अब मोहबे को तुम्हरी बार बार बलिजायँ ॥
सुनिकै बातें ये सुनवाँ की बोले फेरि बनाफर राय ६९
चोरी चोरा ना हम जैहैं तुमते साँच देयँ बतलाय ॥
लैकै फौजैं दादा आवैं हमरी कैद लेयँ छुड़वाय ७०
ऐसे ऊदन अब जैहैं ना नित प्रति सहैं बाँसके घाय ॥