आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५३१ ३
माहिल बोले तब ब्रह्मा ते ठाकुर काह धरावो नाम ॥
पान चबावो तुम दिल्ली का नाहीं उदयसिंह का काम १०
जाति कुलीने नहिं ऊदन हैं नहिं विश्वासयोग यहिकाल ॥
इन्हें निकारयो परिमालिक है खोटे देशराज के लाल ११
मतलब इन ते जो रहिहैं ना पिरथी करी बहुत सनमान ॥
अगुवाकारी होयँ बनाफर तौ सब लड़ैं बीर चौहान १२
पान चबावों तुम जल्दी सों देबे बिदा तुरत करवाय ॥
इतना सुनिकै ब्रह्मा चलिभे पहुँचे पाननिकट फिरिआय १३
लै कै बीरा तहँ ऊदनते ब्रह्मा गये तड़ाकाखाय ॥
आल्हा-मनमा कायल द्वैगे ऊदन बहुत गये शरमाय १४
दूनों भाई चले तड़ाका दशहरि पुरै पहुँचे आय ॥
आल्हा बोले तहँ ऊदन ते यह गति भई लछुरवा भाय १५
बड़ बड़ राजन के सम्मुख मा ब्रह्मा लीन्ह्यो पान छिनाय ॥
घटिहा राजा मोहबे वाला कैसी हँसी दीन करवाय १६
तुम नहिं मोहवे ऊदन जावो हट्का रहे लछुरवाभाय ॥
कहा हमारा तुम माना ना ताका पायगयो फलआय १७
इतना कहिकै आल्हा ठाकुर सोये बिकट नींद को पाय ॥
कछू दिनौना के बीते मा गौना समय पहुँचा आय १८
मल्हना निश्चय तब ठहरायो जैहैं नहीं बनाफरराय ॥
बिना बनाफर उदयसिंह के लैहै कौन बिदा करवाय १६
यहै सोचिकै मल्हना रानी लाखनिराना लीन बुलाय ॥
आल्हा ऊदन दुउ रूठे हैं जान्ने आप कन्नौजीराय २०
हूँ दिन बाकी नहिं गौना के याकी कौन करी तदबीर ॥
जब सुधि आवै इन बातन की तबहीं होय करेजे पीर २१