आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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को गति बरणै तहँ बेड़ियन कै उनतो भली मचाई रार ६५
इनहुन दुर्गति तिनकी कीन्ही कायर छोड़ि भागि मैदान ॥
कटि कटि कल्ला गिरैं बलेड़ा घैहा होयँ अनेकन ज्वान ६६
पाँचसै बेड़िया घायल हैगे सब दल रहिगा एकहजार ॥
तीनसै क्षत्रिय मोहबेवाले जूझे समर तहाँ त्यहिवार ६७
रानी सुनवाँ सुमिया बेड़िनि जादुन करैं तहाँपर रार ॥
कोऊ काहूते कमती ना दोऊ जादुन में हुशियार ६८
बीरमहम्मद की पुरिया को सुमिया छाँड़ि दीन त्यहिवार ॥
नारसिंह की जादू लैके सुनवाँ तजा तुरतललकार ९९
चिल्हिया हैकै सुनवाँ सुमिया दूनन खूब कीन मैदान ॥
लड़ते लड़ते दूनों चिल्हिया पहुँचींजायतुरतअसमान १००
लड़ते लड़ते द्वउ ऊपर ते नीचे गिरीं तड़ाका आय ॥
बड़ी लड़ाई भै पंजन ते अद्भुत समर कहानाजाय १०१
जहाँ लड़ाई द्वउ चिल्हियनकी इन्दल तहाँ पहुँचा आय ॥
सुनवाँ बोली तहँ इन्दल ते बेटा मूड़ देउ बगदाय १०२
इन्दल बोले तब सुनवाँ ते कैसे देवैं मूड़ गिराय ॥
जो हम मारैं यहि तिरिया को तौ रजपूती धर्मनशाय १०३
हाथ मेहरियन पर छाँड़ैं ना कबहूँ बीर समर में माय ॥
कैसे मारैं हम तिरिया को माता सोचो और उपाय १०४
इतना सुनिकै सुनवाँ बोली बेटा जूरा लेउ उड़ाय ॥
वातैं सुनिकै ये सुनवाँ की जूरा काटि लीन त्यहिठायाँ १०५
जीवन दान दीन सुमियाको सोऊ भागि तड़ाकाधाय ॥
जादू झूठी भई सुमिया की तबसोलागितहाँपछिताय १०६
ऊदन देबाकी मारुन मा बेड़िया भागे खेत बराय ॥