आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
॥श्री गणेशाय नमः॥
अथ आल्हखण्ड ॥
ठाकुरउदयसिंहजीकाहरणवर्णन ॥
सवैया ॥
बज्रसे अंग ओ बानर हय अरु बीरन में बलवान महा ।
रणमण्डल कोउ न जाय सकै ज्यहि ठौर जबै यहु बीर रहा ॥
सप्त समुन्दर नाँघि अगाध दशकन्धर को पुर जाय दहा ।
आयहु फेरि जबै लखिते रघुनाथ ते साँच हवाल कहा १
सुमिरन ॥
तुम्हैं बहादुर मैं ध्यावत हौं अञ्जनि पूत वीर हनुमान ॥
तुम्हीं गोसइयाँ दीनबन्धु हौ नितप्रतिकरौं चरणकोध्यान १
सरबरि तुम्हरी का दुनिया मा दूसर कौन बहादुर ज्वान ॥
शरण तुम्हारी मा आयन है साँचे वीर बली हनुमान २
गदा प्रहारी हे असुरारी मारी दुष्ट लङ्किनी नारि ॥
पर्शंत पाँयन मकरी तरिगै लायो पर्वत श्रृंग उखारि ३
बड़े पियारे रघुनन्दन के वन्दन करौं जोरि दोउ हाथ ॥
अक्षत चन्दन धूप दीप सों पूजन करौं मानसी नाथ ४
२ आल्हखण्ड । ५१८
करो मनोरथ पूरण हमरे सबविधि माननीय हनुमान ॥
छूटि सुमिरनी गै हनुमत कै ऊदन हरण सुनो अब ज्वान ५
अथ कथाप्रसंग ॥
'एक समैया की बातें हैं परिगै पर्व दशहरा आय ॥
सुनवाँ बोली तब ऊदन ते साँची सुनो बनाफरराय १
मोरि लालसा यह डोलति है मज्जन करों बिठूरै जाय ॥
आयसु लैके तुम दादा की देवर मोहिं देउ हनवाय २
यह मन भायगई ऊदन के आल्हा महल पहुँचे जाय ॥
हाथ जोरि अरु बिनती करिकै बोला तहाँ लहुरवाभाय ३
सुनवाँ भौजी की इच्छा है हमको गंग देउ हनवाय ॥
आयसु पावैं जो दादा की तौ हम जायँ बिठूरै धाय ४
इतना सुनिकै आल्हा बोले मानों साँच लहुरवा भाय ॥
देश देश.के राजा अइहैं करिहौं कलह तहाँपर जाय ५
त्यहिते बैठो घर अपने मा ऊदन साँच दीन बतलाय ॥
पर्व दशहरा की फिरि अइहै औरे साल हनायो जाय ६
इतना सुनिकै ऊदन बोले दादा सुनो बनाफरराय ॥
पगिया हमरी कछु अरुझीना जो तहँ रारि मचैवे जाय ७
बाचा हारे हम भौजी ते तुमको गंग देब हनवाय ॥
मोहिं भरोसा है दादा को करिहौ पूर मनोरथ भाय ८
बातें सुनिकै बघऊदन की दीन्ह्यो हुकुम बनाफरराय ॥
'हुकुम पायकै ऊदन ठाकुर लीन्हीं तुरत फौज सजवाय ६
सजी पालकी तहँ ठाढ़ी थीं सुनवाँ फुलवा भई सवार ॥
घोड़ बेंदुला का चढ़वैया औ जगनायक भयो तयार १०
सवालाख दल ऊदन लैके तुरतै कूच दीन करवाय ॥
उदयसिंहकाहरण । ५१६ ३
बाजैं डंका अह्तंका के हाहाकार शब्द गा छाय ११
आठ रोजकी मैजलि करिकै पहुँचा तहाँ बनांफरराय ॥
तम्बू गड़िगा तहँ ऊदन का भारी ध्वजा रहा फहराय १२
सुभिया बेड़िनि झुन्रागढ़ ते पहुँची सबऊ बिठूरै जाय ॥
करै तमाशा सो तम्बुन में पावै द्रव्य तहाँ अधिकाय १३
जहँपर तम्बू था ऊदन का - सुभिया तहाँ पहुँची आय ॥
रूप देखिकै बघऊदन का दीन्ह्यो नाच रंग बिसराय १४
कछु नहिं भावै सुभिया मनमा ठगिनी भई तहाँपर आय ॥
औरी नटिनी सँग जे आईं तिनका नाच दीनकरवाय १५
अपना बैठे तहँ सोचति है कैसे मिलैं बनाफरराय ॥
जादू डारौं जो ऊदन पर तबहुँन काजसिद्धदिखलाय १६
जाहिर जादू मा सुनवाँ है हमरे जाय प्राण पर आय ॥
मनमा सोचै मनै बिसूरै मनमा बार बार पछिताय १७
डारि मोहनी दी लश्कर मा जेवर डिब्बा लीन उठाय ॥
दीन रुपैया ऊदन ठाकुर नटिनिन कूचदीन करवाय १८
चढ़ीं पालकी सुनवाँ फुलवा गंगा उपर पहुँचीं जाय ॥
मज्जन कीन्ह्यो उदयसिंह तहँ विप्रनदानदीन अधिकाय १९
मज्जन कीन्ह्यो जगनायक जी प्रातःकृत्य कीन हर्षाय ॥
दान मान दै सब विप्रन को सबहिन कूचदीनकरवाय २०
लखा तमाशा औ मेला खुब तम्बुन फेरि पहुँचे आय ॥
उखरि ग तम्बू फिरि ऊदन का लश्कर कूच दीन करवाय २१
बाजैं डंका अह्तंका के हाहाकार शब्द गे छाय ॥
अस्त दिवाकर जब पश्चिम भे तम्बूदीन तहाँ गड़वाय २२
उत्तम नदिया हैं यमुनाजी उतरे जहाँ बनाफरराय ॥
१ आल्हखण्ड । ५२०
डिब्बा दीख्यो नहिं जेवर को सुनवाँ गई सनाकाखाय २३
तुरत बनाँफर उदयसिंह को अपने पास लीन बुलवाय ॥
कहि समुझावा तहँ ऊदन ते डिब्बा नहीं परै दिखलाय २४
एक लाख का सब गहना है कैसी करैं बनाफरराय ॥
डिब्बा भूलाहै बिठूर मा मोको याद भयो यहँ आय २५
काह बतावों मैं देवर ते करिये कैसो कौन उपाय ॥
धीरज राखो अपने मनमा बोले वचन ल्हुरवाभाय २६
तुरत बुलायो जगनायक को औ सब हाल कह्यो समुझाय ॥
हम तो जावत हैं बिठूर को तुम अब कूचजाउ करवाय २७
यह मन भायगई जगना के ऊदन गये बिठूरै आय ॥
कैयो दिनका धावा करिकै जगना अटा मोहोबे जाय २८
रहा न मेला कछु लौटेमा सिरकी पाल परे दिखराय ॥
तिनमा नटिनी औ नट ठहरे गे तिन पास बनाफरराय २६
सुभिया दीख्यो जब ऊदन का भै मन खुशी तबै अधिकाय ॥
कहाँते आयो औ कहँ जैहौ ठाकुर हाल देउ बतलाय ३०
सुनिकै बातें ये सुभिया की बोले फेरि बनाफरराय ॥
नगर मोहोबा के हम ठाकुर आयन आजु बिठूर नहाय ३१
जब तुम नाचन गइ तम्बूमा गहनो गयो हमार हिराय ॥
पतालगावन त्यहि आयन है तुमते साँच दीन बतलाय ३२
इतना सुनिकै सुभिया बोली मानो साँच बनाफरराय ॥
पँसासारी हमते खेलो हम फिरि पतादेवलगवाय ३३
खेल पसारा सुभिया बेड़िनि बैठे तहाँ ल्हुरवाभाय ॥
जुआँ युद्धसों साँचे क्षत्री कबहूँ न धरैं पछारी पाँय ३४
नल औ पुष्कल आगे खेल्यो झेल्योदुःख नृपति अधिकाय ॥
उदयसिंहकाहरण । ५२१ ५
भारी गाथा नलराजा की देखो महाभारत में जाय ३५
द्वापर शकुनी के सँग खेल्यो कुन्ती पुत्र युधिष्ठिरराय ॥
हारि द्रौपदी महाराजा गे खैंचा चीर दुशासन आय ३६
मानिकै शासन दुर्योधन का पहुँचे बनोवास फिरिजाय ॥
काटिकै संकट महाराज सब कीन्हेनि महाभारत फिरि आय ३७
यहु दुखदाई पंसासारी खेलन लागि बनाफरराय ॥
जादू डारी सुभिया बेड़िनि भे तब सुवा लहुरवा भाय ३८
डारिकै पिंजरा मा ऊदन का सुभिया कूच दीन करवाय ॥
जायकै पहुँची फिरि दिल्ली मा जहँ पर बसैं पिथौरा राय ३६
जहाँ कचहरी दिल्लीपतिकी सुभिया गई यतन सों धाय ॥
करी बन्दगी महाराजा को दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ४०
सुभिया बोली फिरि पिरथी ते राजन साँच देयँ बतलाय ॥
डारिकै जादू हम ऊदन पर औ मेला ते लई चुराय ४१
पै डर हमरे है आल्हा का स्वामी जगा देउ बतलाय ॥
डारिकै सिरकी हम दिल्ली मा निर्भय बसी पिथौरा राय ४२
इतना सुनिकै पिरथी बोले सुभिया कूच देउ करवाय ॥
जो सुनिपै हैं आल्हा ठाकुर हम ते रारि मचै हैं आय ४३
इतना सुनिकै सुभिया चलिभै डेरन फेरि पहुँची आय ॥
कूच करावा फिरि दिल्ली ते सब दरबार भँझावा जाय ४४
कहूँ ठिकाना जब लाग्योना सुन्नागढ़ै गयी तब धाय ॥
जहाँ कचहरी गजराजा की सुभिया तहाँ पहुँची जाय ४५
हाथ जोरिकै महाराजा के आपन हाल दीन बतलाय ॥
जगा चाहती हम सुन्नागढ़ यह इककाज हमारो आय ४६
इतना सुनिकै राजा बोले सुभिया कूच जाउ करवाय ॥
६ , आल्हखण्ड । ५२२
जो सुनि पै हैं आल्हा ठाकुर हमते रारि मचै हैं आय ४७
सुनिकै बातें गजराजा की सुभिया कूच दीन करवाय ॥
झारखण्ड के फिरि जंगल मा डेराजाय दीन गड़वाय ४८
चौकी पहरा करि जादू के निर्भय बसी तहाँ सुखपाय ॥
सुनवाँ सोचै ह्याँ महलन मा आये नहीं लहुरा भाय ४६
पता लगावों मैं ऊदन का जावों देश देश को धाय ॥
यहै सोचिकै रानी सुनवाँ चिल्हियाबनीसरगमड़राय ५०
पहिले ढूँढ़ा त्यहि बिठूर का पाछे गयी कामरू धाय ॥
सिलहट बिजहट मौरँग भुन्ता दिल्लीशहरलखा फिरिजाय ५१
पता न पायो जब ऊदन का पहुँची झारखण्ड में आय ॥
तहाँ पै डेराहैंड बेड़िनि के सुनवाँ बैठि बरगदे जाय ५२
पेड़ बरगदा के नीचे मा सुभिया पलँग लीन बिछवाय ॥
लैकै पिंजरा फिरि सुवना का मानुष तुरतै दीन बनाय ५३
खेलै चौपरि सँग ऊदन के सुभिया बोली बचन सुनाय ॥
व्याह हमारे सँगमा करिये मानो कही बनाफरराय ५४
भजिये अल्ला बिसमिल्ला को ऊदन रटो खुदाय खुदाय ॥
तब सुख पैहौ तुम देहीं का नाहीं खाल लेउँ खिचवाय ५५
खुदा खैरियत तुम्हरी करि हैं बिसमिल भलाकरी सबकाल ॥
बाबा आदम संकट टारी मेटी अली भली जंजाल ५६
बातें सुनिकै ये बेड़िनि की बोला देशराज का लाल ॥
खुदा खुदाई चहु दिखलावैं बिसमिलआयजायँततकाल५७
ऊदन व्याहैं नहिं बेड़िनि को कबहूँ राम नाम बिसराय ॥
देश आरिया के क्षत्री हम कैसे मुसलमान ह्वैजायँ ५८
जब छुइजावैं मुसलमान को तबहीं तुरत करें अस्नान ॥
उदयसिंहकाहरण । ५२३ ७
बेवश हैकै पिंजरा आयन ताते छूटिगयो सब मान ५६
पढ़ै फारसी हम बिद्या ना अपनौ धर्म करैं प्रतिपाल ॥
नित प्रति ध्यावैं रघुनन्दन को पूरणब्रह्म सुरासुर पाल ६०
खाल न रहै जो देहीमा केवल प्राण करैं विश्राम ॥
तबहूँ मुख सों ऊदन ठाकुर कवहूँ न लेयँ खुदाको नाम ६१
निर्भय बातें सुनि ऊदन की बरगद डार दीन टँगवाय ॥
बहुतक बाँसन हनि हनि मारा ऊदन जपो खुदाय खुदाय ६२
सुनिकै बातें ये सुमिया की बोला फेरि बनाफरराय ॥
ऊदन ब्याहैं नहिं बेड़िनि को कवहूँ राम नाम बिसराय ६३
बात न दूसरि हम अब कहिबे चहु तन धजीधजीउड़िजाय ॥
ऊदन ब्याहैं नहिं बेड़िनि को कवहूँ राम नाम बिसराय ६४
सुनिकै बातें उदयसिंह की तुरतै सुवना लीन बनाय ॥
डारिकै पिंजरामा ऊदन का टाँगा फेरि बरगदा आय ६५
देखि दुर्दशा यह ऊदन की सुनवाँ बार बार पछिताय ॥
डारि मशान दियो सुनवाँ ने पाछे पिंजरा लीन उठाय ६६
लैकै पिंजरा कछु दूरी मा सुनवाँ गई तड़ाका धाय ॥
सुवना लैकै फिरि पिंजरा ते मानुष तुरतै दीन बनाय ६७
सुनवाँ बोली फिरि ऊदन ते क्यों नहिं देवर जपो खुदाय ॥
काहे बिज्में तुम बेड़िनि में नित प्रति सहौ बाँसके घाय ६८
चलिये देवर अब मोहबे को तुम्हरी बार बार बलिजायँ ॥
सुनिकै बातें ये सुनवाँ की बोले फेरि बनाफर राय ६९
चोरी चोरा ना हम जैहैं तुमते साँच देयँ बतलाय ॥
लैकै फौजैं दादा आवैं हमरी कैद लेयँ छुड़वाय ७०
ऐसे ऊदन अब जैहैं ना नित प्रति सहैं बाँसके घाय ॥
८ आल्हखण्ड । ५२४
सुवा बनावो अब मानुष ते टाँगो फेरि बरगदा जाय ७१
इतना सुनिकै रानी सुनवाँ टाँगा फेरि बरगदा आय ॥
चील्ह रूप ह्वै उड़ि तहँनाते पहुँची फेरि मोहोबे जाय ७२
मानुष ह्वैकै फिरि महलनमा इन्दल पूत लीन बुलवाय ॥
कहि समुझावा सब इन्दल ते बप्पै खबरि जनावो जाय ७३
सुनिकै बातें ये माता की इन्दल पूत चला शिरनाय ॥
जहाँ कचहरी है आल्हा कै इन्दल पूत पहुँचा आय ७४
बड़े प्यार सों आल्हाठाकुर अपने पास लीन बैठाय ॥
फिरि शिर सूंघ्यो आल्हाठाकुर बोल्यो मधुरवचनमुसुकाय ७५
काह लालसा है बचुवा कै सो अब बेगि देउ बतलाय ॥
इतना सुनिकै इन्दलठाकुर कहिगा यथातथ्य सब गाय ७६
सुनिकै आल्हा बोलन लागे है यहु दुष्ट लहुरवा भाय ॥
करकति छाती दुख सुनिकै अब त्यहिते कैद छुड़ावब जाय ७७
इतना कहिकै आल्हा ठाकुर डंका तुरत दीन बजवाय ॥
सजिगालश्करफिरिआल्हाका तुरतै कूच दीन करवाय ७८
बनिकै चिल्हिया सुनवाँ रानी आधे सरग रही मड़राय ॥
जाय बरगदा के फिरि पहुँची चुप्पे बैठि डारपै जाय ७६
डारि मशान दयो सुभियादल तुरतै पिंजरा लीन उठाय ॥
कछु दूरिचलि झारखण्ड ते फूँका मन्त्र तहाँपर जाय ८०
मानुष ह्वैकै फिरि बघऊदन ठाढ़े भये शीश को नाय ॥
तब समुझावा रानी सुनवाँ लश्करगयो तुम्हारो आय ८१
चील्हरूप ह्वै रानी सुनवाँ बैठी एकडार पै जाय ॥
तहँने चलिकै ऊदन ठाकुर आगे मिले फौजमें आय ८२
लादू चौंरी सुभिया वाली सबियाँ हाल कहा समुझाय ॥
उदयसिंहकाहरण । ५२५ ६
इतना सुनिकै सुभिया बेड़िनि तुरतै उठी तड़ाका धाय ८३
सहुवा बीरन को बुलवावा औ सब हाल दीन बतलाय ॥
करो तयारी समरभूमि की आये लड़न बनाफरराय ८४
खबरि फैलिगै यह बेड़ियन-मा हैंगे डेढ़ सहस तय्यार ॥
झीलम बखतर सबहिन पहिरा सबहिन बाँधिलीन हथियार ८५
कोउकोउबेड़ियाचढ़िहाथिनमा कोउ कोउ घोड़भये असवार ॥
बहुतक बेड़िया हैं पैदल मा लीन्हे हाथ ढाल तलवार ८६
गड़िगा तम्बू ह्वाँ आल्हा का भारी ध्वजा रहा फहराय ॥
बाजै डंका अहर्तंका का हाहाकार शब्दका छाय ८७
देवा ऊदन इन्द्दल ठाकुर तीनों भये बेगि तय्यार ॥
हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार ८८
दुहुँ दल तुरतै इकठौरी भे लागी चलन तहाँ तलवार ॥
कहुँ कहुँ भाला कहुँ कहुँ बरछी कहुँ कहुँ मारैं ज्वान् कटार ८६
कटि भुजदण्डै गिरैं खेत में उठि उठि रुण्ड करें तलवार ॥
मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ६०
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्त की धार ॥
ना मुहँ फेरैं मोहबे वाले नादल बेड़ियनकात्यहिबार ६१
बड़े लड़ैया ई बेड़िया हैं इनते हारिगयी तलवार ॥
को गति वरणै तहँ इन्द्दल कै सबदिशिकरै भड़ाभड़मार ६२
सुनवाँ सुभिया कै वरणी में जादुन दऊ बड़ी हुशियार ॥
आगी पानी अरु आँधी की पुरियन होय तहाँपर मार ६३
चलै सिरोही रणमण्डल मा क्षत्री गरु करैं ललकार ॥
कहुँ ज्वालपकनि बिजली चमकनि तड़पै चहूँदिशा तलवार ६४
क्षत्री गाजैं डंका बाजैं बाजैं तहाँ शूर सरदार ॥
१० | आल्हाखण्ड | ५२६
को गति बरणै तहँ बेड़ियन कै उनतो भली मचाई रार ६५
इनहुन दुर्गति तिनकी कीन्ही कायर छोड़ि भागि मैदान ॥
कटि कटि कल्ला गिरैं बलेड़ा घैहा होयँ अनेकन ज्वान ६६
पाँचसै बेड़िया घायल हैगे सब दल रहिगा एकहजार ॥
तीनसै क्षत्रिय मोहबेवाले जूझे समर तहाँ त्यहिवार ६७
रानी सुनवाँ सुमिया बेड़िनि जादुन करैं तहाँपर रार ॥
कोऊ काहूते कमती ना दोऊ जादुन में हुशियार ६८
बीरमहम्मद की पुरिया को सुमिया छाँड़ि दीन त्यहिवार ॥
नारसिंह की जादू लैके सुनवाँ तजा तुरतललकार ९९
चिल्हिया हैकै सुनवाँ सुमिया दूनन खूब कीन मैदान ॥
लड़ते लड़ते दूनों चिल्हिया पहुँचींजायतुरतअसमान १००
लड़ते लड़ते द्वउ ऊपर ते नीचे गिरीं तड़ाका आय ॥
बड़ी लड़ाई भै पंजन ते अद्भुत समर कहानाजाय १०१
जहाँ लड़ाई द्वउ चिल्हियनकी इन्दल तहाँ पहुँचा आय ॥
सुनवाँ बोली तहँ इन्दल ते बेटा मूड़ देउ बगदाय १०२
इन्दल बोले तब सुनवाँ ते कैसे देवैं मूड़ गिराय ॥
जो हम मारैं यहि तिरिया को तौ रजपूती धर्मनशाय १०३
हाथ मेहरियन पर छाँड़ैं ना कबहूँ बीर समर में माय ॥
कैसे मारैं हम तिरिया को माता सोचो और उपाय १०४
इतना सुनिकै सुनवाँ बोली बेटा जूरा लेउ उड़ाय ॥
वातैं सुनिकै ये सुनवाँ की जूरा काटि लीन त्यहिठायाँ १०५
जीवन दान दीन सुमियाको सोऊ भागि तड़ाकाधाय ॥
जादू झूठी भई सुमिया की तबसोलागितहाँपछिताय १०६
ऊदन देबाकी मारुन मा बेड़िया भागे खेत बराय ॥
उदयसिंहकाहरण । ५२७ ११
जो कोउ भागतहै सम्मुख ते त्यहिना हनैं बनाफरराय १०७
मारे मारे तलवारिन ते बिड़िया चिरियाकरें निदान ॥
खेत छूटिगा सब बिड़ियन ते जीता उदयसिंह मैदान १०८
बाजे डंका अहंतंका के हैगा घोर शोर घमसान ॥
जितने क्षत्री मोहबेवाले डेरन आयगये ते ज्वान १०६
चील्ह रूप है सुनवाँ रानी महलन आयगयी तत्काल ॥
कूच करायो फिरि लश्कर को बेटा देशराज के लाल ११०
आल्हा ठाकुर पचशब्दा पर इन्द्ल पपिहापर असवार ॥
घोड़ बेंदुला पर ऊदन हैं कम्मरपरी नाँगि तलवार १११
यहु अलबेला भीषमवाला देवा मैनपुरी चौहान ॥
घोड़ मनोहर पर सोहतहै रणमा बड़ालड़ैयाज्वान ११२
कैयो दिनकी मैजलि करिकै झुन्नागढ़ै पहुँचे आय ॥
गड़िगा तम्बू तहँ आल्हा का भारी ध्वजारहा फहराय ११३
ढोल नगारा तुरही बाजीं हाहाकार शब्दगा छाय ॥
गा हरिकारा तब झुन्नागढ़ राजै खबरिजिनावा जाय ११४
आल्हा ऊदन मोहबे वाले धूरे परे हमारे आय ॥
आवैं फौजें झारखण्ड ते अबतो नगर मोहोबे जायँ ११५
सुनिकै बातें हरिकारा की पलकी तुरत लीन मँगवाय ॥
इशरत मुहरें इक हीरा लै पलकी चढ़ा तड़ाकाधाय ११६
जहाँ बनाफर आल्हा ठाकुर राजा तहाँ पहुँचा आय ॥
आदर करिकै आल्हा ठाकुर अपने पास लीन बैठाय ११७
द्वरि अशर्फी दी सम्मुखमा हीरा हाथ दीन पकराय ॥
सखियाँ गाया तब ऊदन की आल्हा यथातथ्यगे गाय ११८
बड़े प्रेम सों दोऊ ठाकुर बोलैं प्रीति रीति के भाय ॥
१२ आल्हखण्ड । ५२८
बिदा मांगिकै फिरि आल्हासों राजा चढ़ा पालकी जाय ११६
गा महराजा मुन्नागढ़ मा तम्बुन स्वये बनाफरराय ॥
राति बसेरा करि मुन्नागढ़ भुरहीं कूच दीन करवाय १२०
कैयो दिनकी मैजलि करिकै मोहबे गये बनाफरराय ॥
सौसौ तोपैं दर्गी सलामी जबघरगयेउदयसिंहराय १२१
को गति वरणै त्यहि समयाकै हमरे बून कही ना जाय ॥
ऊदनहरण पूर अब ह्रैगा ध्यावैं तुम्हें शारदा माय १२२
कण्ठ में बैठो तुम महरानी भूले अक्षर देउ बताय ॥
आशिर्वाद देउँ मुंशीसुत जीवो प्रागनरायण भाय १२३
रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥
मालिक ललिते के तबलौं तुम यशसों रहौ सदा भरपूर १२४
माथ नवावों पितु माता को जिनबल पूर कीन यह गाथ ॥
नहीं भरोसा निज भुजबल का स्वामी रामचन्द्र रघुनाथ १२५
पूर तरंग यहाँ सों ह्रैगा सुमिरों तुम्हें भवानीकन्त ॥
राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छा यही मोरि भगवन्त १२६
इति श्रीलखनऊनवासि (सी,आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजबावूप्रागना-
रायणजीकीआज्ञानुसारउनामप्रदेशान्तर्गतपँड़रीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भव
बुधकृपाशङ्करसूनु पं० ललिताप्रसादकृतऊदनहरण
वर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥
उदयसिंहकाहरणसमाप्त ॥
इति ॥
अथ आल्हखण्ड ॥
बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्धवर्णन ॥
सवैया ॥
ब्याकुल गंध्रब नागसबै नरदेव अदेव लहे दुखभारा।
गोतनु धारि गयी पिरथी अरथी सँग देवन लै त्यहिबारा ॥
वाणि भई तबहीं नभते ललिते अवधेशके होब कुमारा ।
ध्यावत ब्रह्म सुरासुर जाहि स्वई प्रभु राम लियो अवतारा १
सुमिरन ॥
दोउ पद बन्दौं रामचन्द्र के जिनबल चलाजाउँ भवपार ॥
राम न होते जो दुनियामा बेड़ा कौन लगावत पार १
कौन समुन्दर को मथिडारत चौदारतन लेत निकराय ॥
कोथों मारत दशकन्धर को धारत कौन धर्मपथ आय २
कोथों तारत इनपापिन को जिनकीदशाकही ना जाय ॥
मारा मारा कहि तरिगे जो पापी बालमीकि असभाय ३
गीधअजामिलगतिगणिकाकी सबकोविदितभलीविधिआय ॥
१४
५. पञ्चम भाग: आल्हा का संन्यास, अमरत्व वरदान व महाकाव्य उपसंहार
२ आल्हाखण्ड । ५३०
ये सब पापी हैं प्रथमै के तरिगे रामचरण को ध्याय ४
स्वई भरोसा धरि जियरेमा नितप्रति धरों चरणपरमाथ ॥
पारलगायो भवसागर ते स्वामी रामचन्द्र रघुनाथ ५
छोड़ि सुमिरनी अब रघुबर कै बेला गौन कहौं सब गाय ॥
ब्रह्मा ठाकुर दिल्ली जैहैं पैहैं विजय पिथौराराय ६
अथ कथाप्रसंग ॥
एक समैया इक औसर मा बैठे सभा रजा परिमाल ॥
आल्हा ऊदन इन्द्दल देवा लाखनि साथ और नरपाल १
को गति बरणै त्यहि समयाकै भारी लाग राजदरवार ॥
त्यही समैया त्यहि औसरमा आवा उरई का सरदार २
आवो आवो बैठो बैठो राजै कीन बहुत सतकार ॥
बैठिग ठाकुर उरई वाला आला चुगुलन मा सरदार ३
बिना बुलाये ते बोला फिरि तुम सुनिलेउ रजापरिमाल ॥
औसर ऐसो फिरि पैहौ ना ब्रह्मा गौनलेउ यहिकाल ४
बैठि कनौजी लाखनिराना बैठे देशराज के 'लाल ॥
लैकै वीरा यहि औसर मा तुम धरिदेउ रजापरिमाल ५
कौन बहादुर यहि समया मा बेला गौन चबावै पान ॥
स्यावासि स्यावासि माहिलठाकुर तुम्हरे बचन ठीक परमान ६
इतना कहिकै परिमालिक जी तुरतै धरा तहाँपर पान ॥
है कोउ क्षत्री तेहेवाला लेवै पान आन सो ज्वान ७
सुनिकै बातें परिमालिक की सब कोउ गये सनाकाखाय ॥
बोलि न आवा क्यहु ठाकुरते आनन गये तुरत मुरझाय ८
चारि घरीदिन यहिविधि बीता कोउ न पान पास समुहान ॥
तवै बहादुर द्यावलि वाला पहुँचा उदयसिंह तहँ ज्वान ६
बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५३१ ३
माहिल बोले तब ब्रह्मा ते ठाकुर काह धरावो नाम ॥
पान चबावो तुम दिल्ली का नाहीं उदयसिंह का काम १०
जाति कुलीने नहिं ऊदन हैं नहिं विश्वासयोग यहिकाल ॥
इन्हें निकारयो परिमालिक है खोटे देशराज के लाल ११
मतलब इन ते जो रहिहैं ना पिरथी करी बहुत सनमान ॥
अगुवाकारी होयँ बनाफर तौ सब लड़ैं बीर चौहान १२
पान चबावों तुम जल्दी सों देबे बिदा तुरत करवाय ॥
इतना सुनिकै ब्रह्मा चलिभे पहुँचे पाननिकट फिरिआय १३
लै कै बीरा तहँ ऊदनते ब्रह्मा गये तड़ाकाखाय ॥
आल्हा-मनमा कायल द्वैगे ऊदन बहुत गये शरमाय १४
दूनों भाई चले तड़ाका दशहरि पुरै पहुँचे आय ॥
आल्हा बोले तहँ ऊदन ते यह गति भई लछुरवा भाय १५
बड़ बड़ राजन के सम्मुख मा ब्रह्मा लीन्ह्यो पान छिनाय ॥
घटिहा राजा मोहबे वाला कैसी हँसी दीन करवाय १६
तुम नहिं मोहवे ऊदन जावो हट्का रहे लछुरवाभाय ॥
कहा हमारा तुम माना ना ताका पायगयो फलआय १७
इतना कहिकै आल्हा ठाकुर सोये बिकट नींद को पाय ॥
कछू दिनौना के बीते मा गौना समय पहुँचा आय १८
मल्हना निश्चय तब ठहरायो जैहैं नहीं बनाफरराय ॥
बिना बनाफर उदयसिंह के लैहै कौन बिदा करवाय १६
यहै सोचिकै मल्हना रानी लाखनिराना लीन बुलाय ॥
आल्हा ऊदन दुउ रूठे हैं जान्ने आप कन्नौजीराय २०
हूँ दिन बाकी नहिं गौना के याकी कौन करी तदबीर ॥
जब सुधि आवै इन बातन की तबहीं होय करेजे पीर २१
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४ आल्हाखण्ड । ५३२
आश हमारी अब तुमहीं लग साँची सुनो कनौजीराय ।.
तुम जो जावो ब्रह्मा सँग मा तौ सबकाम सिद्धिहैजाय २२
सुनिकै बातें ये मल्हना की बोले फेरि कनौजीराय ॥
हम चलिजैबे ब्रह्मा सँग मा लैबे विदा मातु करवाय २३
इतना कहिकै लाखनि चलिभे अपनी फौज पहुँचे आय ॥
बाजा डङ्का इत ब्रह्मा का हाहाकार शब्द गा छाय २४
उतै कनौजी लाखनिराना अपनी फौज लीन सजवाय ॥
यह सुधि पाई उदयसिंह जब आये तबै तड़ाकाधाय २५
औ यह बोले लखराना ते मानो कही कनौजीराय ॥
साथी हमरे की ब्रह्मा के जोतुमफौजलीनसजवाय २६
पहिले लड़िकै हमरे सँगमा पाछे धरयो अगारी पाँय ॥
इतना सुनिकै सय्यद् बोले तुम सुनिलेउ कनौजीराय २७
संग न जावो तुम ब्रह्मा के सम्मन यहै ठीक ठहराय ॥
करो लड़ाई तुम ऊदन ते तौ सब जैहैं काज नशाय २८
हितू तुम्हारे नहिं ब्रह्मा हैं जैसे हितू बनाफरराय ॥
कहा मानिकै यह सय्यद् का लाखनि फेंटदीनखुलवाय २६
भई अठारह उरई वाले मोहबे अये तड़ाकाधाय ॥
बड़ बड़ शूरन को सँग लैके ब्रह्मा कूच दीन करवाय ३०
सात दिनौना के अरसा माँ दिल्ली गये बँदेलेराय ॥
दिल्ली केरे फिरि ढाँड़े गा लश्कर ब्रह्मा दीन डराय ३१
गड़िगा तम्बू तहँ ब्रह्मा का भारी ध्वजा रहा फहराय ॥
माहिल पहुँचे फिरि दिल्ली मा जहँ पर बैठ पिथौरा राय ३२
बड़ी खातिरी पिरथी कीन्ही अपने पास लीन बैठाय ॥
काहे आये उरई वाले आपन हाल देउ बतलाय ३३
[Header] बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ४३१
इतना सुनिकै माहिल बोले मानो साँच पिथौराराय ॥
ब्रह्मा आये हैं गौने को फौजैं परीं डाँड़ पर आय ३४
पहिले बीरा ऊदन लीन्ह्यो सो ब्रह्मा ने लीन छिनाय ॥
अब मन तुम्हरे जैसी आवै तैसी कहो पिथौराराय ३५
इतना सुनिकै पिरथी बोले माहिल साँच देयँ बतलाय ॥
बिना लड़ाई के गौना कहु कैसे देयँ पिथौरा राय ३६
करें लड़ाई अब सैंभराभरि पाछे बिदा लेयँ करवाय ॥
यह कहि दीजो तुम ब्रह्मा ते माहिल बार बार समुझाय ३७
इतना सुनिकै ब्रह्मानँद ते माहिल खबरि जनाई आय ॥
बिना लड़ाई के मनिहैं ना यहु महराज पिथौराराय ३८
इतना सुनिकै ब्रह्मा ठाकुर कागज कलमदान मँगवाय ॥
लिखिकै चिट्ठी दी धावन को धावन चला तड़ाका धाय ३६
जहाँ कचहरी पृथीराज की धावन अटा तड़ाका आय ॥
हाथ जोरिकै धावन तुरतै चिट्ठी तहाँ दीन पकराय ४०
बाँचत चिट्ठी ब्रह्मानँद की पिरथी क्रोध कीन अधिकाय ॥
शूर चौंड़िया को बुलवायो औ सबहालकह्योसमुझाय ४१
तुरतै डंका को बजवावो सबियाँ फौज लेउ सजवाय ॥
बाँधि जँजीरन तुम ब्रह्मा का हमका बेगि दिखावो आय ४२
हुकुम पिथौरा का पावनखन डंका तुरत दीन बजवाय ॥
बाजे डंका अहतंका के हाहाकार शब्द गा छाय ४३
सजिसजितोपें खेतन चलिभईं हाथिन होन लागि असवार ॥
झीलमबखतरपहिरी सिपाहिन हाथ म लई ढाल तलवार ४४
दुइ दुइ भाला इक इक बरछी कोउ कोउ बाँधी तीनकटार ॥
वीर तमंचा कड़ाबीन औ गदकागुर्ज लीन त्याहिवार ४५
६ आल्हखण्ड । ५३४
कच्छी मच्छी नकुला सब्जा हरियल मुश्की घोड़ अपार ॥
ताजी तुर्की पँचकल्यानी इनपर होन लागि असवार ४६
अंगद पंगद मकुना भौंरा सजिगे श्वेतवरण गजराज ॥
सोहैं अँवारी तिन हाथिन पर बहुतन हौदा रहे विराज ४७
को गति बरणै त्यहि समया कै मानो कोप कीन सुरराज ॥
बाजैं डंका अह्तंका के मानों गिरैं उपर ते गाज ४८
पहिल नगाड़ा में जिनबन्दी दुसरे फाँदि भये असवार ॥
तिसर नगाड़ा के बाजत खन चलिभे सबै शूर सरदार ४९
खर ,खर खर खर कै रथदौरे रवन्ना चले पवन की चाल ॥
हाथी चिंघेरै घोड़ा हींसे कीन्हेनिशब्दबहुतनरपाल ५०
गुस्ती धावन तहँ ब्रह्मा का. तम्बुन अटा तड़ाका आय ।
खबरि सुनाई यह ब्रह्मा को की दल अवै चँदेलेराय ५१
इतना सुनिकै ब्रह्मा ठाकुर फौजैं तुरत लीन सजवाय ॥
बाजे डंका अह्तंका के बंकन शंक दीन बिसराय ५२
ई निरशंका मोहबे वाले , बाँधेनि तुरत ढाल तलवार ॥
साजा ठाढ़ा हरनागर था ब्रह्मा फाँदि भये असवार ५३
पहिली लड़ाई भै तोपन कै पाछे चलन लागि तलवार ॥
कहुँ कहुँ भाला कहुँ कहुँ बरछी मारन लागि शूर सरदार ५४
तीर तमंचन की मारुइ भई कोताखानी चलीं कटार ॥
तेगा चमकै बर्दवान का ऊना चलै बिलाइति क्यार ५५
को गति बरणै त्यहि समयामा बाजै छपक छपक तलवारे ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्त की धार ५६
ना मुहँ फेरैं दिल्ली वाले ना ई मोहबे के सरदार ॥
मुण्डन केरे मुड़ चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ५७
[Header] बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५३५
को गति बरनै जगनायक कै मारे घूमि घूमि तलवार ॥
ब्रह्मा ठाकुर के मुर्चा मा कोउ न ठाढ़ होय सरदार ५८
लरिका मरिगे पृथीराज के क्षत्रिन छाँड़ि दीन मैदान ॥
धाँधू चौंड़ा त्यहि समया मा भारी कीन घोर घमसान ५६
भा खलभल्ला औ हल्लाअति लल्ला डारि भागि हथियार ॥
ना मुहँ फेरैं दिल्ली वाले ना ई मोहबे के सरदार ६०
कीरति प्यारी के भूखे हैं दोऊ दिशिमा परम जुझार ॥
फिरि फिरि मारैं औ ललकारै यहु मल्हना को राजकुमार ६१
घोड़ा मारै भल टापन ते ऊपर आप करै तलवार ॥
ब्रह्माठाकुर के मुर्चा मा क्षत्री डारि भागि हथियार ६२
देखि तमाशा चौंड़ा धाँधू रहिगे चुप्प साधि त्यहि बार ॥
यहु निरशंकी परिमालिक का बहुतन पठै दीन यमद्वार ६३
रण अभिलाषा नहिं काहू के सब कउ गये मनैमन हार ॥
ठाकुर बेढब जगनायक है मैने जौनु चँदेले क्यार ६४
धाँधू ठाकुर के मुर्चा मा दूनों हाथ करै तलवार ॥
चौंड़ा ब्राह्मण इकवन्ता से बीरन रहा तहाँ ललकार ६५
रोज केतकी कहुँ फूलै ना चंपा रोज न लागै डार ॥
गई जवानी फिरि मिलिहै ना ना फिरि रोजचलै तलवार ६६
कीरति जैहै सब दुनिया मा जो कउ लड़ै शूर सरदार ॥
आखिर देही यह रहि है ना जोरी जोरन जोर हजार ६७
सदा न फूलै यह बन त्वरई यारो सदा न सावन होय ॥
सदा न पैहौ यह नर देही यारो सदा न जीवै कोय ६८
ऐसा बोल चौंड़ा कहि कहि क्षत्रिन दीन्हे खूब जुझाय ॥
ब्रह्मा ठाकुर त्यहि समया मा भारी हाँक कहा गुहराय ६६
८ आल्हाखण्ड । ५३६
पावैं पिछाड़ी का डाखो ना यारो राख्यो धर्म हमार ॥
मारो मारो ओ रजपूतो देहैं विजय अवश्य करतार ७०
इतना कहिकै ब्रह्मा ठाकुर लाग्यो करन आप तलवार ॥
ब्रह्माठाकुर के मुर्चा मा कोउ न ठाढ़ होय सरदार ७१
जैसे भेड़िन भेड़हा पैठै जैसे अहिर बिडारै गाय ॥
तैसे मारे ब्रह्मा ठाकुर रणमा कोउ न रोकै पायँ ७२
ब्रह्माठाकुर के मारुन मा कोऊ शूर नहीं समुहाय ॥
लश्कर भाग्यो पृथीराज का पायो विजय चंदेलेराय ७३
त्यही समैया त्यहि औसर मा माहिल उरई का सरदार ॥
लिल्ली घोड़ी पर चढ़ि बैठ्यो तिकतिककरनलागत्यहिवार७४
जहाँ कचहरी पृथीराज की भारी लाग राज दरबार ॥
उतरिकै घोड़ीते भुइँ आवा पहुँचा उरई का सरदार ७५
आवत दीख्यो जब माहिल को राजा कीन बड़ा सत्कार ॥
आवो आवो उरई वाले माहिल राजा हितू हमार ७६
इतना कहिकै महराजा ने अपने पास लीन बैठाय ॥
'माहिल बोले त्यहि समया मा मानो कही पिथौराराय ७७
लड़िकै जिनिहौ ना ब्रह्माते चहुवल देयँ तुम्हें करतार ॥
धाँधू चौंड़ा सब कोउ हारे जीता पूतु चंदेले क्यार ७८
बड़े लड़ैया मोहबेवाले उनके बांट परी तलवार ॥
उड़न बछेड़ा जिनके घर मा तिनते लड़ै कौन सरदार ७९
पिस्थी बोले तब माहिल ते ठाकुर उरई के सरदार ॥
कौन उपाय करैं यहि औसर ज्यहिमा विजयदेयँकरतार ८०
इतना सुनिकै माहिल बोले ओ महराज पिथौराराय ॥
रूप जनाना करि ताहर का डोला आपु देउ पठवाय ८१