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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 520

उदयसिंहकाहरण । ५१६ ३
बाजैं डंका अह्तंका के हाहाकार शब्द गा छाय ११
आठ रोजकी मैजलि करिकै पहुँचा तहाँ बनांफरराय ॥
तम्बू गड़िगा तहँ ऊदन का भारी ध्वजा रहा फहराय १२
सुभिया बेड़िनि झुन्रागढ़ ते पहुँची सबऊ बिठूरै जाय ॥
करै तमाशा सो तम्बुन में पावै द्रव्य तहाँ अधिकाय १३
जहँपर तम्बू था ऊदन का - सुभिया तहाँ पहुँची आय ॥
रूप देखिकै बघऊदन का दीन्ह्यो नाच रंग बिसराय १४
कछु नहिं भावै सुभिया मनमा ठगिनी भई तहाँपर आय ॥
औरी नटिनी सँग जे आईं तिनका नाच दीनकरवाय १५
अपना बैठे तहँ सोचति है कैसे मिलैं बनाफरराय ॥
जादू डारौं जो ऊदन पर तबहुँन काजसिद्धदिखलाय १६
जाहिर जादू मा सुनवाँ है हमरे जाय प्राण पर आय ॥
मनमा सोचै मनै बिसूरै मनमा बार बार पछिताय १७
डारि मोहनी दी लश्कर मा जेवर डिब्बा लीन उठाय ॥
दीन रुपैया ऊदन ठाकुर नटिनिन कूचदीन करवाय १८
चढ़ीं पालकी सुनवाँ फुलवा गंगा उपर पहुँचीं जाय ॥
मज्जन कीन्ह्यो उदयसिंह तहँ विप्रनदानदीन अधिकाय १९
मज्जन कीन्ह्यो जगनायक जी प्रातःकृत्य कीन हर्षाय ॥
दान मान दै सब विप्रन को सबहिन कूचदीनकरवाय २०
लखा तमाशा औ मेला खुब तम्बुन फेरि पहुँचे आय ॥
उखरि ग तम्बू फिरि ऊदन का लश्कर कूच दीन करवाय २१
बाजैं डंका अह्तंका के हाहाकार शब्द गे छाय ॥
अस्त दिवाकर जब पश्चिम भे तम्बूदीन तहाँ गड़वाय २२
उत्तम नदिया हैं यमुनाजी उतरे जहाँ बनाफरराय ॥