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राजयोग (स्वामी विवेकानन्द - पातञ्जल योगसूत्र भाष्य सहित)

Raja Yoga - Swami Vivekananda with Patanjali Yoga Sutras

by स्वामी विवेकानन्द / महर्षि पतञ्जलि

DevanagariHindipublished307 pages
Page 305Permalink
२८८राजयोग

'ये ध्यान कर रहे हैं', अतएव ध्यान बैठे हुए पुरुष में ही सम्भव है)।

अचलत्वं चापेक्ष्य ॥९॥

अर्थ—क्योंकि ध्यानी पुरुष की तुलना निश्चल पृथ्वी के साथ की गई है।

स्मरन्ति च ॥१०॥

अर्थ—क्योंकि स्मृति में भी यही बात कही गई है।

यत्रैकाग्रता तत्राविशेषात् ॥११॥

अर्थ—जहाँ एकाग्रता होती हो, उसी स्थान में बैठकर ध्यान करना चाहिए, कारण, किस स्थान में बैठकर ध्यान करना होगा इसका कोई विशेष विधान नहीं है।

इन कुछ उद्धृत अंशों को देखने से यह ज्ञात हो जायगा कि अन्यान्य भारतीय दर्शन योग के बारे में क्या कहते हैं।

१३. भारत में विवेकानन्द—भारतीय व्याख्यान (द्वि स) ५.००

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हमारे अन्य प्रकाशन

१-२ श्रीरामकृष्णलीलामृत— (विस्तृत जीवनी)—(चतुर्थ सस्करण)
दो भागो में, प्रत्येक भाग का मूल्य रु. ५.००

३-५ श्रीरामकृष्णवचनामृत—तीन भागो में—अनु० पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी,
'निराला', नयनाभिराम सचित्र जैकेट सहित, प्रथम भाग
(चतुर्थ सस्करण)—मूल्य रु ६ ५०, द्वितीय भाग
(द्वि स)—मूल्य रु ६.००, तृतीय भाग
(द्वि स)—मूल्य रु ७.००

६. माँ सारदा—(श्रीरामकृष्ण देव की लीला-सहधर्मिणी का सुरम्य
अलौकिक और पावन जीवन-चरित), मूल्य रु. ४ ५०

७. विवेकानन्द-चरित—(विस्तृत जीवनी)—सत्येन्द्रनाथ मजूमदार
—आर्ट पेपर के सुन्दर जैकेट सहित, (तृतीय सस्करण)
मूल्य रु ६.००

८ विवेकानन्दजी के सग में (वार्तालाप)—शरच्चन्द्र चक्रवर्तीकृत—
आकर्षक जैकेट सहित,—तृतीय सस्करण—मूल्य रु ५.२५

९-१० धर्म-प्रसग में स्वामी शिवानन्द—स्वामी अपूर्वानन्द द्वारा सकलित,
दो भागो मे, प्रत्येक भाग का मूल्य रु २.७५

११. परमार्थ-प्रसग—स्वामी विरजानन्द, (आर्ट पेपर पर छपी हुई)
सजिल्द, मूल्य रु ३.२५

स्वामी विवेकानन्दकृत पुस्तके

१२. देववाणी (अमरीकी शिष्यो को दिए गये उपदेश) (द्वि स.) २.७५
१३. भारत में विवेकानन्द—भारतीय व्याख्यान (द्वि स) ५.००

१४ पत्रावली (प्रथम भाग)<br>द्वितीय सस्करण, ५.२५२१ धर्मविज्ञान (द्वि स) १.६२
१५. पत्रावली (द्वितीय भाग)<br>द्वितीय सस्करण, ४.२५२२ हिन्दू धर्म (तृ स) १.५०
१६. ज्ञानयोग (द्वि स) ३.००२३ स्वामी विवेकानन्दजी से<br>वार्तालाप (द्वि स.) १.३७
१७. कर्मयोग (च स.) १.४०२४ आत्मानुभूति तथा उसके मार्ग<br>(च. स) १.२५
१८. प्रेमयोग (च स) १.३७२५ परिव्राजक (च स) १.२५
१९. भक्तियोग (च स.) १.३७२६ प्राच्य और पाश्चात्य<br>(पचम म) १.२५
२०. सरल राजयोग<br>(तृ. स) ०.५०२७. महापुरुषो की जीवनगाथायें<br>(अष्टम स) १.२५
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(२)

२८ व्यावहारिक जीवन में वेदान्त (द्वि. म) १.१५४६. भारतीय नारी (च स) ०.७५.
२९ विविध प्रसङ्ग १.१२४७ पवहारी बाबा (द्वि स) ० ५०
३० धर्मरहस्य (तृ स) १ २५४८. ईशदूत ईसा (द्वि स.) ०.४०
३१ जाति, संस्कृति और समाजवाद (द्वि म) १ २५४९. विवेकानन्दजी के सान्निध्य में,- ० ९०
३२ स्वाधीन भारत! जय हो! (तृ स) १ ५०पॉकेट साइज पुस्तकें
३३ विवेकानन्दजी की कथाएं (तृ स) १ ६०५० शक्तिदायी विचार (तृ. म.) ० ६२
३४ चिन्तनीय बातें १.००५१ मेरी समरनीति (द्वि स) ० ६५.
३५ भगवान् रामकृष्ण, उनका सङ्घ (द्वि स) ०.६२५२ विवेकानन्दजी के उद्गार (द्वि स.) ० ६५.
३६ शिक्षा (तृ स) ०.६२५३ श्रीरामकृष्ण-उपदेश-स्वामी ब्रह्मानन्द द्वारा संकलित,- (च. स) ० ७५.
३७ कवितावली (द्वि स) ०.६२५४. रामकृष्ण संघ— आदर्श और इतिहास— (द्वि. स.) स्वामी तेजसानन्द, ० ७५
३८ हमारा भारत (द्वि स) ० ६५५५ साधु नागमहाशय (भगवान् श्रीरामकृष्ण के अन्तरंग गृही शिष्य का जीवन-चरित) १ ५०
३९ मेरे गुरुदेव (प स) ० ६२५६ गीतातत्त्व-स्वामी सारदानन्द,- २ ३७
४०. वर्तमान भारत (प स) ० ५०५७ भारत में शक्ति-पूजा— स्वामी सारदानन्द, १ २५.
४१ शिकागो वक्तृता (सप्तम स) ०.६२५८ वेदान्त—सिद्धान्त और व्यवहार, (द्वि स) स्वामी सारदानन्द ० ५०
४२ हिन्दू धर्म के पक्ष में (तृ स) ० ७५
४३ मरणोत्तर जीवन (तृ स) ० ५०
४४. मेरा जीवन तथा ध्येय (तृ स) ०.५०
४५ मन की शक्तियाँ तथा जीवन-गठन की साधनायें (तृ. स.) ० ४०

श्रीरामकृष्ण आश्रम, धन्तोली, नागपुर-१