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राजयोग (स्वामी विवेकानन्द - पातञ्जल योगसूत्र भाष्य सहित)

राजयोग (स्वामी विवेकानन्द - पातञ्जल योगसूत्र भाष्य सहित)

Raja Yoga - Swami Vivekananda with Patanjali Yoga Sutras

by स्वामी विवेकानन्द / महर्षि पतञ्जलि

DevanagariHindipublished307 pages

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२८८राजयोग

'ये ध्यान कर रहे हैं', अतएव ध्यान बैठे हुए पुरुष में ही सम्भव है)।

अचलत्वं चापेक्ष्य ॥९॥

अर्थ—क्योंकि ध्यानी पुरुष की तुलना निश्चल पृथ्वी के साथ की गई है।

स्मरन्ति च ॥१०॥

अर्थ—क्योंकि स्मृति में भी यही बात कही गई है।

यत्रैकाग्रता तत्राविशेषात् ॥११॥

अर्थ—जहाँ एकाग्रता होती हो, उसी स्थान में बैठकर ध्यान करना चाहिए, कारण, किस स्थान में बैठकर ध्यान करना होगा इसका कोई विशेष विधान नहीं है।

इन कुछ उद्धृत अंशों को देखने से यह ज्ञात हो जायगा कि अन्यान्य भारतीय दर्शन योग के बारे में क्या कहते हैं।