यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
आठवां अध्याय
आठवां अध्याय
सोमरस की रक्षा के लिए विष्णु से प्रार्थना १ ९४
इंद्र की उपासना २ ९४
कल्याणकारक आदित्य देव की स्तुति ३-५ ९४-९५
सुख के लिए सविता से प्रार्थना ६-७ ९५
सोम की स्तुति ८-१२ ९५-९६
पाप से मुक्त करने की याचना १३ ९६
वर्चस्व की कामना १४-१६ ९६-९७
सविता देव की उपासना १७ ९७
देवों के लिए सुगम यज्ञ सदन १८ ९७
अग्नि से हवि ग्रहण करने की प्रार्थना १९-२० ९७
शुद्ध वायु के लिए प्रार्थना २१ ९७
यज्ञ देव की स्तुति २२ ९७-९८
वरुण की उपासना २३ ९८
असुरों से यज्ञ की रक्षा २४ ९८
सोम की स्तुति २५-२७ ९८-९९
गर्भ एवं जरायु की पूर्णता एवं विविधता २८-३० ९९
मरुद्गण की स्तुति ३१-३२ ९९
सोलह कलाओं वाले इंद्र की स्तुति ३३-३७ ९९-१००
वर्चस्ववान अग्नि ३८ १००-१०१
इंद्र और सोम की स्तुति ३९-४१ १०१
महिमाशालिनी देवी की स्तुति ४२ १०२
गोवध निषेध ४३ १०२
इंद्र की स्तुति ४४ १०२
वाचस्पति की स्तुति ४५ १०२
विश्वकर्मा की उपासना ४६ १०२-१०३
सोम का वर्णन ४७-५० १०३
गायों की स्तुति ५१ १०३-१०४
सोम की स्तुति ५२ १०४
इंद्र की स्तुति ५३ १०४
विभिन्न देवों की स्तुति ५४-६१ १०४-१०६
यज्ञ का विस्तार ६२ १०६
पशु व अन्नादि की याचना ६३ १०६
नौवां अध्याय
सविता देव की स्तुति १ १०७
सोम और सोम पात्र का वर्णन २-४ १०७-१०८
हविष्यान्न से पूर्ण रथ की स्थापना ५ १०८
यज्ञ वृद्धि की कामना ६ १०८
बलवान अग्नि का वर्णन ७-९ १०८-१०९
सत्यमार्ग के प्रेरक सविता देव की स्तुति १० १०९
बृहस्पति की विजय कामना ११-१२ १०९-११०
युद्ध में विजय की कामना १३-१९ ११०-१११
सुख एवं आयु वृद्धि की कामना २०-२१ १११
पृथ्वी की उपासना २२ १११-११२
सोम का राजत्व २३ ११२
परमात्मा की स्तुति २४-२७ ११२
अग्नि देव की स्तुति २८ ११३
इच्छापूर्ति की कामना २९ ११३
विभिन्न विजयों का वर्णन ३०-३४ ११३-११४
देवों और दिशाओं के लिए आहुतियां ३५-३६ ११४-११५
अग्नि से शत्रुओं को हराने का निवेदन ३७ ११५
सुख एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना ३८-४० ११५
दसवां अध्याय
राष्ट्रदायी जल की महत्ता १-४ ११६-११७
विभिन्न देवों के लिए आहुति समर्पण ५ ११७-११८
कुशों की पवित्रता ६ ११८
जल की स्थापना ७-८ ११८
यज्ञ स्थल की रक्षा के लिए प्रार्थना ९-१५ ११८-१२०
मित्र और वरुण की स्तुति १६ १२०
यजमान का अभिषेक १७ १२०
शक्ति प्राप्ति के लिए प्रार्थना १८ १२०
जलधाराओं का वर्णन १९ १२०-१२१
प्रजापति से प्रार्थना २० १२१
इंद्र देव से ज्ञान प्राप्ति के लिए प्रार्थना २१-२२ १२१
आहुति समर्पण २३ १२१
परमात्मा की स्तुति २४-२५ १२२
सुखदायी आसन २६ १२२
व्रतधारी यजमान २७-२८ १२२
अग्नि की महिमा का वर्णन २९ १२२-१२३