यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पूर्वार्ध सोलहवां अध्याय
पूर्वार्ध सोलहवां अध्याय
यह सर्वप्रथम तांबे जैसे रंग का होता है. फिर अरुण ( लाल ) रंग का और उस
के बाद भूरे रंग का हो जाता है. ये जो रुद्र देव हैं इन की शक्तियां विभिन्न दिशाओं
में फैली हुई हैं. सूर्य की हजारों किरणों की तरह इन की हजारों शक्तियां हैं. हम इन
रुद्र देव को नमस्कार करते हैं और अपने प्रति उन की प्रशंसा चाहते हैं. ( ६ )
असौ यो ऽ वसर्पति नीलग्रीवो विलोहितः.
उतैनं गोपा ऽ अदृश्रन्नदृश्रन्नुदहार्यः स दृष्टो मृडयाति नः.. ( ७ )
रुद्र देव निरंतर गतिशील रहते हैं वे नीली गरदन वाले हैं और खास प्रकार के
लाल रंग वाले हैं. सुबह ही सुबह ग्वाले और पनिहारिनें इन के दर्शन करती हैं. उन
के दर्शन हमारे लिए भी सुखकारी हों. ( ७ )
नमो ऽ स्तु नीलग्रीवाय सहस्राक्षाय मीढुषे.
अथो ये अस्य सत्वानो ऽ हं तेभ्यो ऽ करं नमः.. ( ८ )
नीली गरदन वाले रुद्र देव के लिए नमन. हजारों आंखों वाले रुद्र देव के लिए
नमन. वर्षा करने वाले रुद्र देव के लिए नमन. सत्यवान रुद्र देव के लिए नमन. ( ८ )
प्रमुञ्च धन्वनस्त्वमुभयोरात्र्योर्ज्याम्.
याश्च ते हस्त ऽ इषवः परा ता भगवो वप.. ( ९ )
रुद्र देव धनुष की प्रत्यंचा को उतार लें. वे धारण किया हुआ अपना धनुष उतारने
की कृपा करें. हाथ में जो बाण हैं वे अपनी तीक्ष्णता छोड़ने की कृपा करें. ( ९ )
विज्यं धनुः कपर्दिनो विशल्यो बाणवाँ २ उत.
अनेशन्नस्य या ऽ इषव ऽ आभुरस्य निषङ्गाधिः.. ( १० )
रुद्र देव का धनुष विजयी हो. उन का धनुष प्रत्यंचा हीन हो जाए. उन का धनुष
बाण और तरकसहीन हो जाए. इन का तलवार रखने का स्थान रिक्त हो जाए. कहीं
भी उन के बाण न दिखाई पड़ें. ( १० )
या ते हेतिर्मीढुष्टम हस्ते बभूव ते धनुः.
तयास्मान्विश्वतस्त्वमयक्ष्मया परि भुज.. ( ११ )
हे रुद्र देव! आप के हाथ में धनुष है. आप हमें रोग व हिंसा से बचाइए. आप
सुखदाता हैं. ( ११ )
परि ते धन्वनो हेतिरस्मान्वृणक्तु विश्वतः.
अथो य ऽ इषुधिस्तवारे अस्मान्निधेहि तम्.. ( १२ )
हे रुद्र देव! आप अपने धनुष से सब ओर से, सब प्रकार से हमारी रक्षा
कीजिए. अपने बाण हमारे लिए मत धारिए. ( १२ )
१९६ - यजुर्वेद
पूर्वार्ध सोलहवां अध्याय
अवतत्य धनुष्ट्व ँ सहस्राक्ष शतेषुधे.
निशीर्य शल्यानां मुखा शिवो नः सुमना भव.. (१३)
हे रुद्र देव! आप हजारों आंखों वाले व सैकड़ों तरकस वाले हैं. आप बाणों
के मुंह निकाल दीजिए. बाणों के मुंह हमारे लिए कल्याणकारी हों. हम अच्छे मन
वाले हों. ( १३ )
नमस्त ऽ आयुधायानातताय धृष्णवे.
उभाभ्यामुत ते नमो बाहुभ्यां तव धन्वने.. (१४)
आततायियों के लिए आयुध धारण करने वाले रुद्र देव के लिए नमन. आप की
दोनों बाहुओं व आप के धनुष और तरकस दोनों के लिए नमन. ( १४ )
मा नो महान्तमुत मा नो अर्भकं मा न ऽ उक्षन्तमुत मा न ऽ उक्षितम्.
मा नो वधीः पितरं मोत मातरं मा नः प्रियास्तन्वो रुद्र रीरिषः.. (१५)
हे रुद्र देव! जो हमारे प्रिय हैं व जो हमारे इष्ट हैं, आप उन की रक्षा करने की
कृपा कीजिए. आप हमारे महान् लोगों का वध मत कीजिए. आप हमारे छोटे बच्चों
का वध मत कीजिए. आप हमारे मातापिता आदि का वध मत कीजिए. ( १५ )
मा नस्तोके तनये मा न ऽ आयुषि मा नो गोषु मा नो अश्वेषु रीरिषः.
मा नो वीरान् रुद्र भामिनो वधीर्हविष्मन्तः सदमित् त्वा हवामहे.. (१६)
हे रुद्र देव! आप हमारे पुत्रों को नष्ट न करें. आप हमारे पौत्रों को नष्ट न करें.
आप हमारी आयु को नष्ट न करें. आप हमारी गायों को नष्ट न करें. आप हमारे
घोड़ों को नष्ट न करें. आप हमारे वीरों को नष्ट न करें. आप हमारी स्त्रियों को नष्ट
न करें. हम सब हविमान हो कर आप का आह्वान कर रहे हैं. ( १६ )
नमो हिरण्यबाहवे सेनान्ये दिशां च पतये नमो नमो वृक्षेभ्यो हरिकेशेभ्यः पशूनां पतये
नमो नमः शष्पिञ्जराय त्विषीमते पथीनां पतये नमो नमो हरिकेशायोपवीतिने पुष्टानां
पतये नमः.. (१७)
सोने से सज्जित बाहु वाले को नमन. दिशापति को नमन. सेनानी को नमन.
वृक्षों को नमन. हरे बालों वाले को नमन. पशुपति को नमन. कोंपल जैसे रंग वाले
को नमन. पथपति को नमन. हरे केश वाले को नमन. यज्ञोपवीतधारी को नमन.
पुष्टता के स्वामी को नमन. ( १७ )
नमो बभ्लुशाय व्याधिने ऽ न्नानां पतये नमो नमो भवस्य हेत्यै जगतां पतये नमो नमो
रुद्रायातातयिने क्षेत्राणां पतये नमो नमः सूतायाहन्त्यै वनानां पतये नमः.. (१८)
भूरे रंग वाले को नमन. रोगपति को नमन. अन्नपति को नमन. जगहित हेतु
आयुधधारी को नमन. संसारपति को नमन. आततायियों से बचाने वाले को नमन.
यजुर्वेद - १९७