यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
छत्तीसवां अध्याय
छत्तीसवां अध्याय
ऋचं वाचं प्र पद्ये मनो यजुः प्र पद्ये साम प्राणं प्र पद्ये चक्षुः श्रोत्रं प्र पद्ये.
वागोजः सहौजो मयि प्राणापानौ.. (१)
ऋग्वेद वाणी स्वरूप है. हम उसे प्राप्त करते हैं. यजुर्वेद मन स्वरूप है. हम उसे
प्राप्त करते हैं. सामवेद प्राण स्वरूप है. हम उसे प्राप्त करते हैं. हम नेत्रों की सामर्थ्य
को प्राप्त करते हैं. हम कानों की सामर्थ्य को प्राप्त करते हैं. वाणी, प्राण व अपान
अपनी ऊर्जा सहित हम से स्थापित होने की कृपा करें. ( १ )
यन्मे छिद्रं चक्षुषो हृदयस्य मनसो वातितृण्णं बृहस्पतिर्मे तद्दधातु.
शं नो भवतु भुवनस्य यस्पतिः.. (२)
हे बृहस्पति देव! आप हमारे चक्षुओं के दोष दूर करने की कृपा कीजिए. आप
हमारे हृदय व मन के दोष दूर करने की कृपा कीजिए. आप हमारे लिए सुखों का विस्तार
करने की कृपा कीजिए. आप भुवन के स्वामी हैं. आप हमारे लिए कल्याणदायी होने
की कृपा कीजिए. ( २ )
भूर्भुवः स्वः. तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि. धियो यो नः प्रचोदयात्.. (३)
परमात्मा स्वयंभू, प्राणदायी व स्वयं प्रकाशवान हैं. वे सविता देव वरेण्य और
सौभाग्यदायी हैं. हम उन का ध्यान करते हैं. वे हमारी बुद्धियों को प्रेरित करने की
कृपा करें. ( ३ )
कया नश्चित्र ऽ आ भुवदूती सदावृधः सखा. कया शचिष्ठया वृता.. (४)
परमात्मा उत्तम व शक्तिमान हैं. वे सदा हमारी बढ़ोतरी करने व हमारे सखा
होने की कृपा करें. वे हमें सुखों से आवृत करने की कृपा करें. ( ४ )
कस्त्वा सत्यो मदानां म ᳪ हिष्ठो मत्सदन्धसः. दृढा चिदरुजे वसु.. (५)
हे इंद्र देव! सचमुच कौन आप को मदयुक्त बनाता है. सचमुच आप क्या
पीकर हर्षित होते हैं. आप यजमान को दृढ़ बनाइए. आप हमें शाश्वत धन प्रदान
करने की कृपा कीजिए. ( ५ )
यजुर्वेद - ३९१