यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
चौथा अध्याय
तीन अवस्थाएं ६२ ५५
शिव से कल्याण कामना ६३ ५५
चौथा अध्याय
जल की महिमा का वर्णन १-३ ५६
सविता देव से पवित्र करने का अनुरोध ४ ५६-५७
इच्छापूर्ति के लिए देवताओं का आह्वान ५ ५७
यज्ञ के संकल्प की प्रेरणा ६-७ ५७
सविता देव की प्रार्थना ८-९ ५७-५८
यज्ञमेखला से ऊर्जा प्रदान करने का निवेदन १० ५८
अग्नि से याचना ११ ५८
अमृत स्वरूप जल १२ ५८
बुरे कामों से रक्षा के लिए अग्नि की उपासना १३-१५ ५९
यज्ञ में आराधनीय देव अग्नि की स्तुति १६-१८ ५९-६०
मंत्र वाणी का स्वरूप १९ ६०
वाग् देवी की स्तुति २०-२३ ६०-६१
सोम के लिए निवेदन २४ ६१
सविता देव की उपासना २५ ६१
सोम का स्वरूप २६-२७ ६१-६२
अग्नि की स्तुति २८-३० ६२
वरुण देव की स्तुति ३१-३२ ६२
सोम, मित्र व वरुण आदि से यज्ञ में आने का निवेदन ३३-३७ ६३
पांचवां अध्याय
अग्नि की स्तुति १ ६४
शकल की स्तुति २ ६४
अग्नि की स्तुति ३-६ ६४-६५
सोम की स्तुति ७ ६५
अग्नि का स्वरूप ८ ६५-६६
पृथ्वी की स्तुति ९ ६६
उत्तरवेदिका का स्वरूप १०-१३ ६६-६७
यजमान और यज्ञ १४ ६७
विष्णु के तीन पैर १५ ६७
पृथ्वी का स्वरूप १६ ६७
देवगण और यज्ञ १७ ६७-६८
विष्णु की स्तुति १८-२१ ६८
सविता से सहायता के लिए प्रार्थना २२ ६८-६९
अनिष्टकारी प्रयोगों को उखाड़ फेंकना २३ ६९
विशाल गर्त एवं विष्णु की प्रतिष्ठा २४-२५ ६९
सविता देव की स्तुति २६ ६९-७०
गूलर की लकड़ी से सृष्टि विस्तार की कामना २७-२८ ७०
इंद्र की स्तुति २९-३० ७०
अग्नि की स्तुति ३१-३२ ७०-७१
ब्रह्मासन का स्वरूप ३३ ७१
अग्नि की स्तुति ३४-३८ ७१-७२
सविता की प्रशंसा ३९ ७२
अग्नि की स्तुति एवं उन का स्वरूप ४०-४१ ७२-७३
यूपवृक्ष की स्तुति एवं स्वरूप ४२-४३ ७३
छठा अध्याय
यज्ञ साधनों की महत्ता १-२ ७४
विष्णु धाम का निरूपण ३-५ ७४-७५
यज्ञ की सर्वव्यापकता ६ ७५
सर्वगुण संपन्न त्वष्टा ७ ७५
पशुओं की मुक्ति ८ ७५
संतुष्टि के लिए यज्ञ ९ ७५-७६
यज्ञ एवं पशुओं की स्तुति १०-१२ ७६
आचरण शुद्धि का आग्रह १३-१५ ७६-७७
त्यागे हुए तृण की निंदा १६ ७७
याजक और यजमान १७-१९ ७७-७८
अंगअंग में इंद्र की व्यापकता २० ७८
हवि के विस्तार की कामना २१ ७८-७९
वरुण की कृपा की इच्छा २२ ७९
हवि की श्रेष्ठता २३ ७९
अग्नि की महत्ता २४ ७९
यज्ञ की सफलता के लिए प्रार्थना २५ ७९
जल, अग्नि तथा सोम की स्तुतियां २६-३६ ७९-८१
इंद्र की स्तुति ३७ ८२