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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

अड़तीसवां अध्याय

अड़तीसवां अध्याय
यज्ञ ऊर्जा को ग्रहण करना १ ४०८
इड़ा एवं सरस्वती देवी का आह्वान २ ४०८
पोषक यज्ञ ऊर्जा ३ ४०८
अश्विनी व इंद्र आदि देवों के लिए आहुति ४ ४०८
सरस्वती देवी का दिव्य ज्ञान ५ ४०८
इंद्र देव की गायत्री छंद से स्तुति ६ ४०९
वायु के लिए आहुति अर्पण ७ ४०९
इंद्र देव के लिए आहुति ८ ४०९
यम देव के लिए आहुति ९ ४०९
यज्ञ विस्तार के लिए रसमयी आहुतियां १० ४१०
सुखशांति के लिए आहुति अर्पण ११ ४१०
अश्विनीकुमारों से यज्ञ की रक्षा करने की प्रार्थना १२-१३ ४१०
परब्रह्म से प्रजा की रक्षा के लिए आग्रह १४ ४१०
विभिन्न देवों के लिए आहुति अर्पण १५ ४१०-४११
दिव्य गुण वाली परम शक्ति १६ ४११
अग्नि की स्तुति १७-१८ ४११
परम शक्ति की स्तुति १९-२० ४११-४१२
यज्ञ देव का आह्वान एवं उन की स्तुति २१-२८ ४१२-४१३
उनतालीसवां अध्याय
समृद्धि एवं कल्याण के लिए देवों को आहुतियां १-७ ४१४-४१५
विभिन्न शारीरिक अंगों से देवों की प्रसन्नता ८-९ ४१५-४१६
विभिन्न देवों के लिए आहुतियां १०-१३ ४१६
चालीसवां अध्याय
ईश्वर की आराधना १ ४१७
कर्म करते हुए सौ वर्षों तक जीने की इच्छा २ ४१७
अजन्मा ईश्वर एक है ३-४ ४१७
परम शक्ति की व्यापकता ५-८ ४१७-४१८
सृजन और विनाश ९-१२ ४१८

विद्या से अमृत तत्त्व की प्राप्ति १३-१४ ४१८-४१९
ओम् का स्मरण १५ ४१९
अग्नि से श्रेष्ठ मार्ग पर ले जाने का अनुरोध १६ ४१९
आकाश में ओम् रूप में ब्रह्म १७ ४१९