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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

३६ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ पहला अधिकरण

३६ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ पहला अधिकरण

(१) अकृत्यान् कृत्यपक्षीयैर्दर्शितान् कार्यहेतुभिः ।
परापसर्पज्ञानार्थं मुख्यानन्तेषु वासयेत् ॥

इति कौटलीयार्थशास्त्रे विनयाधिकारिके प्रथमाधिकरणे गूढपुरुषोत्पत्तौ सञ्चारोत्पत्तिः, गूढपुरुषप्रणिधिर्नाम एकादशोऽध्यायः ॥

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( ४ ) शत्रु के किसी प्रलोभन या बहकावे में न फँसने वाले अपने विश्वस्त पुरुषों को, शत्रु के गुप्तपुरुषों का पता लगाने के लिए, राज्य की सीमा पर नियुक्त किया जाना चाहिए और उन्हें शत्रुपक्ष के लोगों को स्ववश करने के उपाय भी बता देने चाहिए ।

विनयाधिकारिक प्रथम अधिकरण में ग्यारहवां अध्याय समाप्त ।

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