आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
माड़ोका युद्ध । ६१ ४३
अथ कथाप्रसंग ॥
गा हरकारा फिरि माड़ो को बारहदरी पहुँचा जाय ॥
बेटा जम्बै को सूरजमल तहँपर रहा रामको ध्याय १
खबरि सुनाई हरकाराने अनूपी मरण गयो सबगाय ॥
सुनिकै बातें हरकारा की मनजरिमरयो बघेलाराय २
तुरत नगड़ची को बुलवायो डंका तुरत दीन बजवाय ॥
हाथी घोड़ा औ तोपन को बबुरीबन का दीन हँकाय ३
हरियल घोड़ाकी पीठी पर आपो फांदिभयो असवार ॥
माथ नायके श्रीगणेश को औ मन सुमिरयो नन्दकुमार ४
सुमिरि भवानी जगदम्बाको औ शिव रामचन्द्रको ध्याय ॥
सूरज चलिभा बबुरीबनको औ रणखेत पहुँचा आय ५
आगे लश्कर के सूरजमल गरुई हांक दीन ललकार ॥
काकी माता नाहर जायो काके जमे करेजे बार ६
को कटवावत है बबुरीबन औ को मोहबेका सरदार ॥
कौन कहावत उदयसिंह है किसने डरा अनूपी मार ७
घोड़ा बेंदुला पर टहलत रहै यहु रणबाघु लंहुरवा भाय ॥
सुनिकै बातें सूरजमल की तुरतै बोला बनाफरराय ८
हमरी माता नाहर जायो हमरे जमे करेजे बार ॥
हम कटवावत हैं बबुरीबन हमहीं डरा अनूपी मार ६
कही सुना भा जब दूनों माँ दूनों कुँवर गये अलगाय ॥
सूँड़ि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतनभाय १०
बम्ब के गोला छूटन लागे धुँवना रहा सरग में छाय ॥
गोली ओलासम बरसत भइँ भन भन भन्न भन्न भन्नाय ११
छाय अँधरिया गै दिनही में औ तिलडरा भुईं ना जाय ॥
४४ आल्हखण्ड । ६२
कौंधालपकनिविजुलीचमकनि रणमाँचमकिचमकिरहिजाय१२
ऐसि सिरोही मलखाने कै ठाकुर समरधनी मलखान ॥
काटि गिरायो राजपूतन को हाथिनमारि कीन खरिहान १३
जैसे भेड़िन भेड़हा पैठे जैसे अहिर विडारै गाय ॥
जैसे भाई आसमान में चन्दै राहु गरासै जाय १४
जैसे अर्ज्जुन के देखत में कौरव फौज जाय थराय ॥
जैसे पूजे शिवशंकर के दारिद तुरतै जाय नशाय १५
तैसे मलखे ज्यहिदिशि जावैं सो गलियार परै दिखलाय ॥
मलखे केरे भइ मुर्चा में कउ राजपूत न रोकै पायँ १६
सूरजमल औ ऊदन बाँकुड़ा दोऊ करें बराबर मार ॥
बैस बराबर है दोऊ कै दोऊ समरधनी सरदार १७
गदा बनेठी दोऊ खेलें कसरत करें नटन के साथ ॥
भाला बलछी दोनों बाँधे लीन्हे कड़ाबीन दोउहाथ १८
करें पैतड़ा रण खेतन में दोऊ रहे दुहुँन ललकार ॥
हनि हनि मारैं एक एक को दोऊ लेयँ ढालपर वार १६
बड़ी लड़ाई दोऊ कीन्ह्यो मानो छुटे जँगल के बाघ ॥
हारि न मानैं कोउ कोऊ ते दोऊ बड़े लड़ैया घाघ २०
खेंचि सिरोही सूरज लीन्ह्यो करिकै रामचन्द्रको ध्यान ॥
ऐंचि कै मारा बघऊदन के दोऊ हाथ सँभरिकै ज्वान २१
टूटि सिरोही गै सूरज कै खाली मूठि हाथ रहिजाय ॥
सूरज सोच्यो अपने मनमाँ हमरी मृत्यु गई नगच्याय २२
ऊदन बोल्यो तब सूरज सों मानो कही बघेलोराय ॥
कोदो देकें बाढ़ी धरायो तुम्हरे मरे चढ़ै ना घाय २३
सँभरिके बैठो अब घोड़ापर क्षत्री खबरदार है जाय ॥
माड़ोका युद्ध । ६३ ४५
वार हमारी ते बचिजाये घरमाँ छठी धराये जाय २४
यह कहि मारा तलवारी को शिरपर परी सूर्य के जाय ॥
फटिकै खुपरी दुइ . टूका भै सूरज गिरा भरहराखाय २५
सूरज गिरतै परलय हैगै लशकर तितिरबितिरहैजाय ॥
भागि सिपाही गढ़ माड़ो को जम्बै शरण पहुँचे आय २६
सुनी सिपाहिन की बातें जब राजा जम्बै उठा रिसाय ॥
हुक्म लगायो फिरि करियाको बबुरीबनै पहुँचे जाय २७
करिया बोल्यो त्यहि समया में हमरे सुनो शूर सरदार ॥
तुरत नगड़ची को बुलवावो सबियाँ फौज होय तय्यार २८
बजो नगाड़ा तब माड़ो में भादों मेघ सरिस हहराय ॥
हथी महावत हाथी लैकै तुरतै भूमि दीन बैठाय २९
चुम्बक पत्थर के हौदा धरि जिनमाँ सेल बरौंचा खाय ॥
धरी अँबारी तिन हाथिन पर हौदन कलशदीन धरवाय ३०
घंटा बांधे गलहाथिन के भारी देत चलत झनकार ॥
यक यक हाथी के हौदापर दुइ दुइ बीर भये असवार ३१
तुरत दरोगा घोड़न वाला ताजी तुरकी कीन तयार ॥
नकुला सब्जा पँचकल्यानी सुर्खा सुरँगा रङ्ग अपार ३२
गंगा यमुनी डरी रकाबैं मुहँमाँ दीन लगाम लगाय ॥
डरी हयकल्लैं तिन घोड़नके रेशम तंग दीन कसबाय ३३
पुट्ठन बुट्टा रचि मेहँदी के सुम्मन नालैं दीन बँधाय ॥
पूंजी पट्ठा कसि घोड़न के तिनपर काठी दीन धराय ३४
नवल बछेड़ा घोड़शारे में ते सब बेगि भये तय्यार ॥
यक यक भाला दुइ दुइ बलछी कम्मर कसी तीन तलवार ३५
अगल बगल में दुइ पिस्तौलैं दहिने हाथे लीन कटार ॥
[Page Header]
४६ आल्हाखण्ड । ६४
बड़े सजीला जे क्षत्री थे घोड़न उपर भये असवार ३६
धरे नगाड़ा गे ऊंटन पर तोपैं होन लगीं तय्यार ॥
गर्भ गिराविनि कुँवासुखाविनि लछिमिन तोप बड़ी हहकार ३७
ते सब तोपैं रणखेतन को करिया तुरत दीन हँकवाय ॥
बजे नगाड़ा फिरि ऊंटन पर हाहाकारी शब्द सुनाय ३८
औरि बयरिया डोलन लागीं औरै होन लगे व्यवहार ॥
ढाढ़ी करखा बोलन लागे बिप्रन कीन वेद उच्चार ३६
घोड़ पपीहा पचशब्दागज कोतल कीन गये तय्यार ॥
बैठिंग हाथी करिया वाला तापर होन लाग असवार ४०
छींक तड़ाका भै सनमुखमाँ पंडित बोला शकुन विचार ॥
तुम ना जावो रणखेतन को करिया माड़ो के सरदार ४१
राहु वारहें अठयें बेप्फै तुम्हरे दृष्टि शनीचर भाय ॥
घात चन्द्रमा दशयें आयो तुम ना धरो अगाड़ी पाँयँ ४२
सुनिकै बातें ये पण्डित की तुरतै बोला करिंगाराय ॥
शकुन विचारै रयत रेजा जो धरि मौर बियाहन जाय ४३
शकुन विचारैं कछु क्षत्री ना जो रण चढ़िकै लोह चबायँ ॥
कूचके डंका बाजन लागे मारू शब्द रहे हहराय ४४
रंगा बंगा शहाबाद के दोऊ घोड़न चढ़े पठान ॥
रण की मौहरि बाजन लागी घूमनलागे लाल निशान ४५
करिया चलिभो समरभूमि को मनमें श्रीगणेश को ध्याय ॥
सुमिरि भवानी शिवशङ्कर को औ सूर्यन को माथ नवाय ४६
किह्यो कीर्त्तन कृष्णचन्द्र को जिन अर्जुनकी करी सहाय ॥
दोउ पद बन्द्यो रामचन्द्र के लङ्का फते करी जिन जाय ४७
पूत अंजनी को हनुमत जो ताको बार बार शिरनाय ॥
[Header] माड़ोका युद्ध ६५ । ४७
सुमिरिकै अंगद बाली वालो करिया चला समरको जाय ४८
आगे हलका है हाथिन का बलका जिनके नाहिं ठिकान ॥
पहिया दुरकैं उन तोपन के तड़कतिअवैं सिंडरियाबान ४६
पछे रिसाला घोड़न वाला आला चला समरको जाय ॥
खर खर खर खर कै रथ दौरैं चह चह रहीं धुरी चिल्लाय ५०
छाय अँधेरिया गै मारग में बंजर खेत मुहा है जायँ ॥
लक्ष पताका यकमिल हैगे नभ माँ गई लालरी छाय ५१
ऐसी फौजैं मलखाने की वैसी माड़ो का सरदार ॥
सूँड़ि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतन क्यार ५२
हौदा हौदा यकमिल हैगे ऊंटन भिड़िगे ऊंट कतार ॥
भाला छूटे असवारन के पैदर चलन लागि तलवार ५३
सूँड़ि लपेटे जंजीरन को हाथी रणमाँ रहे घुमाय ॥
मस्तक गजके गज हनिमारैं अद्भुत समर कहा नाजाय ५४
क्षत्री गर्जे गज हौदन ते जो सुनि गर्भपात है जायँ ॥
कँधालपकनि बिजुलीचमकनि कहूँ कहूँ परै खड्गके घाय ५५
मर मर मर मर ढालैं बोलैं गोली सन्न सन्न सन्नायँ ॥
खट खट खट खट तेगा बोलैं लपलपलपकि लपकि रहि जायँ ५६
झम् झम् झम् झम् झीलम बोलैं नीलम रंग परै दिखराय ॥
धम् धम् धम् धम् बजैं नगारा मारा मारा परै सुनाय ५७
झल् झल् झल् झल् छुरी झलकैं चम्चम्चमकि चमकि रहि जायँ ॥
बल् बल् बल् बल् क्षत्री बलकैं हब् हब् हबकि हबकिकै खायँ ५८
धर् धर् धर् धर् क्षत्री दौरैं सर् सर् तीर चलावत जायँ ॥
फर् फर् फर् फर् घोड़ा दौड़ैं हिन् हिन् हिन् हिन् हिन्नायँ ५९
टिट् टिट् टिट् टिट् टिटुई हांकैं टिल् टिल् टिल्ल टिल्ल चलि जायँ ॥
४८ आल्हखण्ड । ६६
चम् चम् चम् चम् खड्गचमकै खद् पद् खद् पद् रहीं मचाय ६०
रन् रन् रन् रन् फिरैं योगिनी बम् बम् बम्ब बम्बको गाय ॥
सन् सन् सन् सन् बायू सनकै मन् मन् मन्त्र मन्त्र मन्नायँ ६१
मारु मारु करि तुरही ब्वालै ब्वालै हाव हाव करनाल ॥
सुनि सुनि बँचकैं बहु क्षत्रीगण बहुतक जूभिगये नरपाल ६२
बहुतक करहैं रण सरिता में नदिया बही रक्तके धार ॥
मुंडन केरे मुड़चौरा में औ रुंडन के लगे पहार ६३
परीं लहाशैं जो हाथिन की तिनका नदी किनारा मान ॥
परे बछेड़ा ऊँटनी तिनपर तिनसों नदीकगारा जान ६४
जैसे नदिया डोंगिया सोहैं तैसे स्वहैं नरनकी देह ॥
जैसे नदिया सावन बाढ़ै बसैं बहुत गरजिकै मेह ६५
तैसे डोंगिया नरदेही में नेही जौन सनेही जीय ॥
काक कंक तिन ऊपर बैठे फारैं जियत नरनके हीय ६६
झूरी जानो तुम मछलिनको कछुवा मनो ढाल दिखरायँ ॥
नचीं योगनी त्यहि सरिता में तारी भूतन दीन बजाय ६७
बड़ी लड़ाई भै बबुरीवन हमरे बूत कही ना जाय ॥
जो हम बाँधैं ह्याँ रूपक सब गाये उमर पार ह्वैजाय ६८
करिया ऊदन के मुर्चा माँ औ परिहा रामते काम ॥
बड़ा लड़ैया माड़ो वाला ठाकुर जबर्दस्त सरनाम ६६
करिया बोला वहि समया में गरुई हांक करत ललकार ॥
तुम टरिजावो म्वरे सम्मुखते ठाकुर उदयसिंह सरदार ७०
बाप तुम्हारे को हमहीं ने कोल्हू डारा रहै पिराय ॥
तैसे मारौं तलवारी सों मानो कही बनाफरराय ७१
सुनिकै बातें ये करिया की करिया भये उदयसिंहराय ॥
माड़ोका युद्ध । ६७ ४६
डाटिकै बोल्यो फिरि करियासों ठाकुर खबरदार है जाय ७२
सोवत मारे देशराज को औ फिरि बच्छराजको जाय ॥
जागत मारों जो करिया ना तौ ना कहे उदयसिंहराय ७३
सुनिकै बातें ये ऊदन की करिया खैंचि लीन तलवार ॥
ऐंचिकै मारा उदयसिंह को रोंका तुरत ढाल पर वार ७४
बचा दुलरुआ ग्यावलिवाला आला उदयसिंह सरदार ॥
करिया बोला फिरि ऊदन ते ठाकुर बेंदुल के असवार ७५
अबती आवै जो हौदा पर तौ यमपुरी देउँ दिखराय ॥
सुनिकै बातें ये करिया की करिया जौन उदयसिंहराय ७६
ऐँड़ा मसका रसबेंदुल का हौदा उपर पहुंचा जाय ॥
खैंचि सिरोही को कम्मर ते मारा तुरत बनाफरराय ७७
धरी सिरोही गज शुण्डा में खण्डा तुरत भई त्यहिंघाय ॥
खण्डा शुण्डा हाथी दीख्यो करिया गयो सनाकाखाय ७८
कोतल हाथी पचशब्दा था तापर तुरत भयो असवार ॥
औ यह बोल्यो फिरि हाथी ते हाथी साथी अहिउ हमार ७६
निमक हमारो बहु खायो है बांधे रहे हमारे द्वार ॥
हम जो बांधें बघऊदन को हमरे निमक होउ उद्धार ८०
कहिकै बातें ये हाथी सों गरुई हाँक कीन ललकार ॥
बार तीसरी जो तू आवै ठाकुर बेंदुल के असवार ८१
कुशल न जावै तू हौदा ते खुपड़ी टँगै बरगदे डार ॥
सुनिकै बातें ये करिया की ठाकुर मोहबे का सरदार ८२
डाटिकै बोला फिरि करिया सों का तू बकै बकै जस बाल ॥
कोल्हू पिरावों मैं जम्बा को माड़ो खोदि करावों ताल ८३
मूड़ काटिकै करिया तेरो मल्हना महल देउँ पहुंचाय ॥
५० आल्हखण्ड । ६८
तौ तौ लरिका देशराजका साँचो नाम उदयसिंहराय ८४
सवैया ॥
या कहिकै ऊदन त्यहि बार सो बेंदुल को लय ऊपर धाये ।
शुण्डसों दाबि लियो पचशबदा बापके बाहन बंधन आये ॥
कर बांधिलियो तबहीं करिया तहँ लै हौदा पै कूच कराये ।
ललिते मलखान तहां बलखान गुमानभरे रणखेतन आये ८५
जैसे भेड़िन भेड़हा पैठे जैसे सिंह बिडारै गाय ॥
तैसे मारै औ ललकारै यहु रणबाघु बनाफरराय ८६
मलखे ठाकुरके मोर्चा पर कउ रजपूत न रोकै पायँ ॥
मारति मारति मलखाने जी पहुंचे जहां करिंगाराय ८७
देखिकै करिया राहुट हैगा औ मलखे से लगा बतान ॥
जो गति कीन्ह्यों बच्छराजकी सोई जानु अपनि मलखान ८८
त्यहिते तुमका समुझाइत है सम्मुख अवो न हमरे ज्वान ॥
सुनिकै बातें ये करिया की रिसहाभयो वीर मलखान ८६
ऐँड़ा मसके जब घोड़ी कें हौदा उपर पहुंची जाय ॥
पैर पकरिकै तब करियों के औ हौदा ते दीन गिराय ६०
उतरिकै घोड़ा ते देवा तब औ हाथी पर भयो सवार ॥
छोरी मुशकें बघऊदन की यहु भीषमको राजकुमार ६१
रुपना वारी बेंदुल लीन्हे तापर बैठ´ लहुरवा भाय ॥
घोड़ा पपीहा की पीठी माँ तुरतै बैठ करिंगाराय ६२
मलखे ठाकुर ने ललकारा करिया खबरदार ह्वै जाय ॥
जियत न जैहौ तुम माड़ो को तुम्हरो कालरहा नगच्याय ६३
सुनिकै बातें मलखाने की तब जरिमरा करिंगाराय ॥
माड़ोका युद्ध । ६६ ५१
खैंचि सिरोही ली कम्मर से औ मलखे पर दई चलाय ९४
वार बचायो मलखाने ने करिया निकट पहूँच्यो जाय ॥
ढालकि औझरि मलखे मारा तब गिरपरा करिङ्गाराय ९५
घोड़ा पपीहा मलखे लीन्ह्यो औ क्षत्रिनते कह्यो सुनाय ॥
मारो मारो ओ रजपूतो तौ मिलिजाय बापका दायँ ९६
सुनिकै बातें मलखाने की ज्वानन खूब कीन घमसान ॥
रङ्गा बङ्गा शहाबाद के साथ म आये जौन पठान ६७
ते दउ मारैं दिशि करिया के रणमाँ बड़े लड़ैया ज्वान ॥
तिनके मुर्च्चा पर देवा रहे ठाकुर मैनपुरी चौहान ९८
सो- ललकारै तहँ रंगा को औ बंगाको दियो हटाय ॥
को गति बरणै तहँ देवा कै हमरे बूत कही ना जाय ६६
बड़ा लड़ैया रंगा रंगी जंगी खैंचि लीन तलवार ॥
ऐंचिकै मारा सो देवा को देवा लीन ढालपर वार १००
औ ललकारा फिरि रंगा को रंगा खबरदार ह्वैजाय ॥
खैंचि सिरोही देवा मारा रंगा गिरा भरहराखाय १०१
रंगा मरिगा जब मुर्च्चा पर बंगा चला तड़ाका धाय ॥
नंगी लीन्हें तलवारी को देवा पास पहूँचा आय १०२
सँभरिकै बैठो अब घोड़ापर तुम्हरो काल गयो नियराय ॥
यह कहि मारा तलवारी को बखतर काटि पार ह्वै जाय १०३
बचा दुलरूवा भीषमवाला ज्यहिका राखिलीन भगवान ॥
खैंचि सिरोही ली कम्मर ते औ हनिदियो बंगपरज्वान १०४
बंगा जूझा रणखेतन में तब जरिमरा करिङ्गाराय ॥
औ ललकारा रजपूतन को हमरे सुनो सिपाहिउ भाय १०५
जाय न पावैं मुहुबे वाले इनकी कटा लेउ करवाय ॥
५२ आल्हाखण्ड । १००
पिंशन देवे सब शूरन को दुहरी तलब देव करवाय १०६
सुनिकै बातें ये करिया की ठाकुर मोहबे का सरदार ॥
रिसहा ह्वैकै मलखाने तब गरुई हांक दीन ललकार १०७
जान न पावैं माड़ो वाले ओ रजपूतो बात बनाउ ॥
देव जगीरैं हम मुहबे माँ बैठे तीनि शाखिलौं खाउ १०८
सुनि सुनि बातें सरदारन की खूब लरिमेरे सिपाही जवान ॥
लालच लाग्यो अति रुपियाका सम्मुख लोहा लगे चवान १०६
सवैया ॥
सूमन को धन प्यार भलीविधि शूरन को धन नेक न भावै ।
शूर शिरोमणि भक्तनको धन प्रान द्वऊन को मोह न आवै ॥
सांच विभीषण की कहिये रहिये नहिं मौन यही मन भावै ।
प्रान धनौपर आनपरी ललिते तजि शान स्वई ढिग आवै ११०
कौन गुमान करी अपने मन मान अमान लिये दुख पावै ।
मान वही रघुनाथ मिलैं नतु है अपमान यही कहि आवै ॥
⊛ चार के साथ बचै नहिं एक विवेक से नेक यही मन भावै ।
गावै अमान न मानचहै ललिते रघुनाथ स्वई जन पावै १११
शूर सिपाही ईजतिवाले बोले द्वऊ दिशाके ज्वान ॥
काह बखानंत महराजा हौ यहनहिंसुनाचहैं हमकान ११२
देही नेही नरगेही के पाल्यो सदा द्रव्यसों प्रान ॥
मब भय आई नृपदेही में नेही नहीं हमारे प्रान ११३
⊛ काम १ क्रोध २ लोभ ३ मोह ४ इन चारोंकी प्रबलता में एक देह
नहीं बचसक्ती ॥
माड़ोका युद्ध । १०१ ५३
नालति त्यंहिकी रजपूती का पैदा होबे का धिकार ॥
सनमुख बैरी जो मारै ना रणमाँ लागैं प्राणपियार ११४
सुनिकै बातें रजपूतनकी दोऊ लड़न लाग सरदार ॥
मलखे करिया का मुर्चा है दोऊ विषधर बड़े जुझार ११५
करिया ठाकुर माड़ोवाला गरुई हांक देय ललकार ॥
सँभरिकै बैठो अब घोड़े पर ठाकुर मोहबे के सरदार ११६
इतना कहिकै करिया ठाकुर तुरतै ऐंचिलीन तलवार ॥
खैंचि कै मारा मलखाने को मलखे लीन ढालपर वार ११७
ढाल छूटिगै मलखाने कै दूनों हाथ गही तलवार ॥
ताकिकै मारा फिरि करिया को काटिकैगलानिकलिगैपार ११८
जूझिग करिया माड़ोवाला फौजैं रोईं छाँड़ि डिंडकार ॥
घोड़ बेंदुला की पीठी सों फाँदा उदयसिंह सरदार ११९
मूड पकरिकै सो करिया को धड़ते डारा तुरत उखार ॥
आल्हा ऊदन मलखे देवा सय्यद बनरस का सरदार १२०
पांचो मिलिकै गे तम्बू में जहँपर रहै दिवलदे माय ॥
हाल बतायो सब द्यावलि को करियाशीशदीनदिखलाय १२१
शीश देखिकै त्यहि करिया को भइ मन खुशी देवलदे माय ॥
बड़ी बड़ाई की सय्यद की तुम्हरीदया जीति भै आय १२२
बड़ी सहाई की लरिकन की धर्मसों देवर लगो हमार ॥
सखा तुम्हारे की नारीहन सय्यद बनरस के सरदार १२३
कियो सहाई जस हमरी है तैसे भला करी कर्त्तार ॥
सय्यद बोले तब द्यावलिते सांची मानो कही हमार १२४
खुदा सहाई सब दुनियाँ का बिसमिल भलाकरैं सब क्यार ॥
बार न बांका इनका जाई अच्छा धर्म निबाहन हार १२५
५४ आल्हखण्ड । १०२
सुनिकै बातैं ये सय्यद की बोला उदयसिंह सरदार ॥ ।
आठमहीना कहि आये त्यन त्यहिते ह्वैगै बहुत अवार १२६
यहु शिर पठवो तुम मोहबे को दादा मानो कही हमार ॥
हार लयआयो यहु मल्हना को जामें मिलै जाय इउ हार १२७
सुनिकै बातैं ये ऊदन की रूपन बारी लीन बुलाय ॥
करिया ठाकुर को शिर लै कै आल्हा मोहवे दीन पठाय १२८
पूरि तरंग यहाँ सों ह्वैगै शारद तुही लगावै पार ॥
डगमग नैया भवसागर में माता तुही निवाहनहार १२६
पार को पावै यहु आल्हाकहि थाल्हा जौन शूरमनक्यार ॥
शारदमाता ज्यहि जिह्वा में ताको खेय लगावै पार १३०
बन्दनकरिकै तिन शारद को ह्याँते करौं तरंग को अन्त ॥
सुनै सुनावै हरिगुण गावै ललिते स्वई जगतमें सन्त १३१
इति श्रीलखनऊनवासि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरआत्मजबाबू प्रयागनारा-
यणजीकीआज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गतपँड़रीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भवबुध
कृपाशंकरसूनुपं० ललिताप्रसादकृतकरियाबधोनामचतुर्थस्तरंगः ॥ ४ ॥
सवैया ॥
कूप तड़ाग औ मंदिर सुन्दर वृक्ष चिलौलहुके बहु राजैं।
मंदिर में शिव मूरति थापित देखतही दुख दारिद भाजैं ॥
जानतहौं नहिं कौनैहिंथाप्यो भूरिदिनोंसे तहां सो बिराजैं।
ग्रामक नाम बड़ी पड़री तहँ मंदिर में सगरेश्वर गाजैं १
सुमिरन ॥
वेनु बाँसुरी अब बाजै ना नाकहुँ फिरैं गलिनमें श्याम ॥
रहिगै ठकुरी ना दशरथ की ना रहिगयो धनुर्धर राम १
माड़ोका युद्ध । १०३ ५५
पैदा होई सो मरजाई आई कछू नहीं फिर काम ॥
भलो बुरो जो जग में करिहै सोई बना रही नितनाम २
परमसनेही रघुनन्दन बिन नेही और जगत में कौन ॥
तिनहित देही नरगेही तज जावै राम भौनको तौन ३
आलस देही नरगेही तज सो यमपुरी पहुँचे जाय ॥
पार न जावै बैतरणी के धरि धरि चील्हगीधसबखायँ ४
छूटि सुमिरनी गै देवनकै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥
कल्हू पिरायी नृप जम्बै को ठाकुर उदयसिंह सरदार ५
अथ कथाप्रसंग ॥
माहिल चलिभे ह्याँ उरई ते लिल्ली घोड़ीपर असवार ॥
तिक तिक हाँकै त्यहि घोड़ीका एँड़ी करें भड़ाभड़ मार १
थोड़ी देरी के अरसा माँ माहिल अटे मोहोबे आय ॥
पहिले मिलिकै परिमालिकको मल्हना भवन पहुँचे जाय २
दीख्यो मल्हना जब माहिलको उठिकै बड़ा कीन सत्कार ॥
पूँछन लागी फिरि भैयासों राजा उरई के सरदार ३
आल्हा ऊदन मलखे सुलखे बोरेसे स्यये चारिहू भाय ॥
आठ महीना का कहिकै गे आयो एक साल नगच्याय ४
खबरि जो पाई कहुँ भाई हो हमको बेगि देउ बतलाय ॥
सुनिकै बातें ये मल्हना की माहिल बोले बचन बनाय ५
मरे बनाफरगे माड़ो में खुपरी टँगी बरगदे डार ॥
सुनिकै बातें ये माहिल की मल्हना रोई छाँड़ि डिंडकार ६
स्वने कै लंका म्वारि जरिबरिगै अबधों कौन लगाई पार ॥
माहिल बोला फिरि बहिनीसों कीन्हे चुगुलिन का ब्यौपार ७
अब बुलवावो तुम पंडित को सूतक साइति करै बिचार ॥
५६ आल्हखण्ड । १०४
करो तिलाञ्जलि तिनपुत्रनको तुम्हरे हाथ होयँ उद्धार ८
इतना कहते भइ माहिल के रूपना अटा बराबरि आय ॥
मूड देखिकै त्यहि करिया का राजा गिरा पछाराखाय ६
हाथ जोरिकै रूपना बोला ओ महरजा रजापरिमाल ॥
मूड लयआये हम करिया को माड़ो कुशल तुम्हारे बाल १०
जैसे पियासा जलको पावै सूखत परै धान में वारि ॥
रूपना बारी की बातें सुनि तैसे खुशीभये नर नारि ११
हल्ला सुनिकै नर नारिन सों मल्हना रूपना लीन बुलाय ॥
विदा मांगिकै माहिल चलिभे उरई तुरत पहुँचे जाय १२
मल्हना पूंछे तब रूपना ते बेटन हाल देउ बतलाय ॥
बदी सुनायो सब लड़िकनकै माहिल जौन हमारो भाय १३
सुनिकै बातें ये मल्हना की रूपना बोला शीशनवाय ॥
बेटा अनूपी टोंडर सूरज करिया सहित चारिहू भाय १४
चारो लड़का नृपजम्बा के बबुरीबन माँ गये नशाय ॥
खबरि तुम्हारी म्वहिं लेबे को पठयो वेगि उदयसिंहराय १५
हम चलि जावैं अब बबुरीबन हमको हुकुमदेव फर्माय ॥
कुशल तुम्हारी बिनपायेते ब्याकुल रहें चारिहू भाय १६
सुनिकै बातें ये रूपना की मल्हना हुकुम दीन फर्माय ॥
करो बियारी तुम महलन में माड़ो फेरि पहुँचो जाय १७
सुनिकै बातें ये मल्हना की रूपना जेयँ लीन ज्यँवनार ॥
सजा बछेड़ा तहँ ठाढ़ो थो रूपना फाँदि भयो असवार १८
सत्रहदिनकै मैजलि करिकै माड़ो फेरि पहुँचा जाय ॥
कही खबरिया सबमोहबेकी जहँ पर बैठ बनाफ़रराय १६
पाँचो मिलिकै सम्मत कीन्ह्यो यह फिरि ठीकलीन ठहराय ॥
माड़ोका युद्ध । १०५ ५७
किला घरेरैं अब लोहागढ़ लश्कर कूच देयँ करवाय २०
पांचो मिलिकै सम्मत करिकै डंका तुरत दीन बजवाय ॥
घोड़ बेंदुला ऊदन बैठे मलखे चढ़े कबुतरी जाय २१
घोड़ मनोहर पर देवा है सय्यद सिरगा पर असवार ॥
आल्हा बैठे पत्रशब्दा पर सुमिरिकैदेव मोहोबे क्यार २२
कूच करायो बबुरीवनते लोहा गढ़ै पहुंचे जाय ॥
तोप लगायो तहँ फाटक पर बत्ती तुरत दीन करवाय २३
फाटक गाँसा जम्बै दीख्यो रानी महल पहुंचा जाय ॥
चारो पुत्रन कै सुधि करिकै रोवनलाग तहां पर आय २४
बंश बूड़िगा म्वर पापी का मेरो काल रहा नगञ्याय ॥
बड़ो लड़ैया सब शूरन में आल्हाकेर लहुरवाभाय २५
म्वहिं भय आई त्यहि ऊदनते ताते प्राण मोर घबड़ायँ ॥
सुनिकै बातें ये राजाकी बिजमाबोली बचन सुनाय २६
करिकै जादू मैं ऊदनको राखौं झारखण्ड में जाय ॥
इतनाकहिकै चली बिजैसिनि लश्कर तुरत पहुंची आय २७
डाखो गुटका मुखभीतर माँ जासों नजरबन्द हैजाय ॥
गायब ह्वैकै तहँ पर पहुँची जहँ पर रहै लहुरवाभाय २८
नारसिंह औ भैरों वाली तीसर जौन महमदा वीर ॥
पुरिया डारी तहँ जादू की ह्वैगे सबै बीर आधीर २९
डारि मशान दयो लश्कर में नाहीं मसा तलक भन्नाय ॥
जादू मारी बंगाले की ऊदन मेढ़ा लयो बनाय ३०
लैके मेढ़ा बिजमाँ चलिभै पहुँची झारखण्ड में आय ॥
गुरू झिलमिलाकी मढ़ियामाँ मेढ़ा बँधा बिजैसिनिजाय ३१
हाथ जोरिकै गुरुबाबा के औ सब हाल दीन्ह समुझाय॥
५८ आल्हखण्ड । १०६
चली बिजैसिनि झारखण्डते पहुँची रङ्गमहल में आय ३२
जितने जादू बिजमाँ डारे सो लश्कर ते लये उतार ॥
उतरी जादू जब लश्कर ते चेते सबै शूर सरदार ३३
आल्हा बोले तब मलखेते नहिं लखिपरे लहुरवा भाय ॥
सुनिकै बातैं मलखे बोले देवा शकुनदेव बतलाय ३४
लैके पोथी ज्योतिष वाली देवा हाल गयो सब गाय ॥
गुरुझिलमिलाकी मढ़ियामाँ बांधा तहां लहुरवा भाय ३५
सुनिकै बातैं ये देवा की आल्हा बहुत गयो घबड़ाय ॥
देवा बोला फिरि मलखेते मानो कही बनाफरराय ३६
बाना छोरो रजपूती का अँगमाँ लेवो भस्म लगाय ॥
योगी बनिकै हम तुम जावैं तौ सबकाम सिद्ध है जायँ ३७
बातैं सुनिकै ये देवा की योगी बने बीर मलखान ॥
तुरतै चलिभे झारखण्ड को पहुँचे तहाँ दूनहू ज्वान ३८
गुरुझिलमिलाकी मढ़ियाढिग गावैं तान वीर मलखान ॥
बाजै डमरू भल देवाकै सो परिगई भनक त्याहिकान ३६
गुरु झिलमिला बाहर आयो योगी लखा तहाँ दुइ ज्वान ॥
हाथ पकरिकै लै मढ़िया में बाबा बड़ा कीन सनमान ४०
बोले योगी हम दोउभाई ऐसा कह्यो वीर मलखान ॥
अब हम जावैं हरद्वार को चाहैं कछू नहीं सनमान ४१
रमता योगी बहता पानी ये नहिं करैं कतौ बिश्राम ॥
नहिं अभिलाषा क्यहू बातकी केवल जपें रामको नाम ४२
सुनिकै बातें ये योगी की बोला तुरत झिलमिला ज्वान ॥
जो कछु मांगो सो कछु पावो हमरे वचन करो परमान ४३
सुनिकै बातें ये बाबा की बोले तुरत बनाफरराय ॥
माड़ोका युद्ध । १०७ ५६
मेढ़ा पावैं यहु बाबा जो तौ हम हरद्वार को जायँ ४४
यहुतो कैदी है बिजमाका मांगो और बस्तु कछु भाय ॥
जो हम पावैं यहु मेढ़ा ना तुम्हरो योग अकारथ जाय ४५
सुनिकै बातें ये योगिन की झिलमिल मेढ़ा दीन गहाय ॥
योगी बोले तब झिलमिल ते याको मानुष देव बनाय ४६
तबजलछिनक्योझिलमिलतापर मानुष भयो लहुरवा भाय ॥
चलिकै बाहर भे मढ़ियाते बोल्यो तुरत उदयसिंहराय ४७
मारो दादा यहि योगी को तौ सब काम सिद्ध ह्वैजायँ ॥
सुनिकै बातें ये ऊदन की लौटा तुरत बनाफरराय ४८
मूड़ काटिकै फिरि बाबाको औ मढ़ियामाँ दीन चलाय ॥
तीनों चलिभे फिरि तहँनाते औ लश्करमें पहुंचे आय ४६
खबरि सुनाई सब आल्हा को डंका तुरत दीन बजवाय ॥
बाजे डंका अह्रतंका के मारू शब्द रहे हहराय ५०
लैके फौजैं राजाजम्बा पहुँचा समरभूमिमाँ आय ॥
बम्बके गोला छूटन लागे धुँवना रहा सरग में छाय ५१
जौने हाथी के गोला लागै मानो गिरा धौरहर आय ॥
जौने बछेड़ा के गोला लागै मानो गिरह कबूतर खाय ५२
जौने क्षत्री के गोला लागै यमपुर तुरत देय दिखलाय ॥
गोला लागै ज्यहि सँड़िया के सो मुँहभरा तुरत गिरि जाय ५३
जौने तम्बू गोला लागै त्यहिकोलिये सरग मड़राय ॥
गोली ओली सम बर्षत भईं मानो मघा दीन झरि लाय ५४
भाला बलछी खट खट बोलैं डोलैं तीनों तहाँ बयारि ॥
कउँधालपकनिबिजुलीचमकनि कहूँकहूँ देखिपरे तलवारि ५५
तेगा चटकैं बर्दवान के कोता खानी चलैं कटार ॥
६० आल्हखण्ड । १०८
चहला उठिरहि तहँ चरबिनकी औ वहिचली रक्तकी धार ५६
शूर सिपाही माड़ोवाले नंगी हाथ लिये तलवार ॥
चलै सिरोही तहँ सँभरा भरि ऊना चलै विलाइतिक्यार ५७
दूनों फौजैं यकामिल हैगइँ वीरन रहे वीर ललकार ॥
दुइ दुइ तुरैन के बँधवैया ई सब डारि भागि तलवार ५८
जितने कायर रहें फौजन में तर लोथिन के रहे लुकाय ॥
हेला आवै जब हाथिन का तब बिनमरे मौत है जाय ५६
देवा बोलै तब ऊदनते हमरे सुनो बनाफरराय ॥
भागे क्षत्रिन को मार्यो ना नहिं सब क्षत्री धर्मनशाय ६०
फूल केतकी का सूंघ्यो ना जबलग फुलवामिलै गुलाब ॥
दाया राख्यो द्विज देवन में ऊदन यही धर्म की आव ६१
घोड़ी कबुतरी का चढ़वैया मलघे बड़ा लड़ैया ज्वान ॥
बहुतन मारै तलवारी सों बहुतन लेय ढालसों प्रान ६२
को गति बरणै तहँ सय्यद की नाहर सिरगापर असवार ॥
गुर्ज उठाये रणमाँ मटकै पटकै बड़े बड़े सरदार ६३
अली अली कहि सय्यद धावै रणमाँ गली गली है जाय ॥
भली भली कहि आल्हा बोले रणमाँ थली थली थर्राय ६४
चली चली तहँ धरती डोलै बोलैं हली हली सब गाय ॥
कली कली जस सारँग सम्पुट तैसे डली डली मिलिजायँ ६५
को गति बरणै समरभूमि कै हमरे बूत कही ना जाय ॥
राजा जम्बा के मोर्चा पर कोउ रजपूत न रोकै पायँ ६६
चीरिकै धोती मारि लँगोटो कोउ कोउ अंग बिभूतिरमाय ॥
लोहुभरी माटी फिरि लैके रामानन्दी तिलक लगाय ६७
हमैं न मारो ओ रजपूतो हमतो जगन्नाथ को जायँ ॥
माड़ोका युद्ध । १०६ ५१
कोउकोउ ढालनको बचुकाकरि पीठिम डारिलीन भयखाय ६८
हम सौदागर हैं जयपुरके आये राजमहल में भाय ॥
पहिले फाटक के ऊपरमाँ मुर्चा परा बरोबरि आय ६६
जिन्हें पियारी रहें घर तिरिया तिन रण डारिदीन तलवारि ॥
हमें न मारो हमें न मारो दादा बापूकैरें गुहारि ७०
त्यही समैया त्यहि अवसरमाँ बोला तहाँ बीरमलखान ॥
राजा जम्बाके मुर्चा पर ठहरे नहीं एकहू ज्वान ७१
सुनिकै बातें ये मलखे की आल्हा हाथी दीन बढ़ाय ॥
जम्बा केरे तहँ मुर्चामॉ पहुँचे तुरत बनाफरराय ७२
हाथी जानै भल आल्हा को यहु है देशराज को लाल ॥
देशराज औ बच्छराज दोउ मेरो भलो कीन प्रतिपाल ७३
ज्ञान जानवर में जैसो है मानुष नहीं दशो में पांच ॥
गर्भवती नारी के ऊपर फिरिनहिंचढ़ै जानवरसाँच ७४
( रागानुरागोपदेशोपकारक सवैया ॥ )
साँच रह्यो मन ज्ञान विरागमें याँच रह्यो कर्त्ता कर्त्तारे ॥
आनि बिपत्तिपरी शिरऊपर राख हरी भर्त्ता भर्त्तारे ॥
जीव गुहारपुकार करी जब आय हरी कर्त्ता कर्त्तारे ॥
साँच न याँच करै ललिते तब नाहिं हरी भर्त्ता भर्त्तारे ७५
तैसो हाथी तहँ आल्हा को साँचो जाति पाँतिमें साँच ॥
मूंड़ि लपेटे जंजीरन को मारै हेरि हेरि दश पाँच ७६
बिकट लड़ाई हाथी कीन्ह्यो करणी रही समर में नाच ॥
जम्बा बोला तब आल्हा ते मानो बचन हमारे साँच ७७
तुम फिरिजावो म्वरे मुहराते हमरे बचन करो परमान ॥
६२ आल्हखण्ड । १९०
अबै न आल्हा कछु बिगरा है नाकछु बहुतभयो नुकसान ७८
पुत्र हमारे मरि चारो गे हमरे बरै करेजे आग ॥
जो भगि जावो अब मोहबे को होवै बड़ी तुम्हारी भाग ७६
उठिकै हौदाते आल्हारण बोले दूनों भुजा उठाय ॥
रहे अधर्मी ना कौनों युग रावण कौरव के समुदाय ८०
काह हकीकति त्वरि जम्बा है कोल्हू डारे बाप पिराय ॥
लरिका बिगरे अब ऊदन हैं जियतै कोल्हू डैरैं पिसाय ८१
सँभरिकै बैठै अब हौदापर जम्बा खबरदार है जाय ॥
मारु सिरोही म्वरि छाती माँ कैसी लाये शान धराय ८२
हमरो बाना मरदाना है यह हम ठीक दीन बतलाय ॥
उठै सिरोही जो रण हमरी तौ फिरि कौन परै दिखराय ८३
इतना सुनिकै नृप जम्बा ने कम्मर खैंचि लीन तलवार ॥
ऐंचि तड़ाका फिरि मारा शिर आल्हा लीन ढालपर वार ८४
आल्हा बोल्यो फिरि जम्बा ते दूसरि वार करो सरदार ॥
खैंचि सिरोही ज़म्बा मारी आल्हा लीन ढालपर वार ८५
कबों सिरोही जब बांधी ना मुर्चा खायगई तब धार ॥
वार तीसरी अब तुम मारो राजा माड़ो के सरदार ८६
साँकरि दीन्ही पचशबदाको आल्हा बोले वचन सुनाय ॥
हौदा गिरावै तुम जम्बा का हमरे निमक अदा है जाय ८७
खैंचि सिरोही दोउ हाथन सों जम्बा कीन तीसरी वार ॥
ढाल फटिगै गेंडावाली बचिगा आल्हा परमझुझार ८८
साँकरि फेरी पचशब्दाने हौदा तुरतै दीन गिराय ॥
आल्हा कूदे फिरि हौदा ते पकरयो नृपै तुरतही आय ८६
मलखे देवा सय्यद ऊदन चारो गये तहांपर आय ॥