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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 103

५० आल्हखण्ड । ६८
तौ तौ लरिका देशराजका साँचो नाम उदयसिंहराय ८४
सवैया ॥
या कहिकै ऊदन त्यहि बार सो बेंदुल को लय ऊपर धाये ।
शुण्डसों दाबि लियो पचशबदा बापके बाहन बंधन आये ॥
कर बांधिलियो तबहीं करिया तहँ लै हौदा पै कूच कराये ।
ललिते मलखान तहां बलखान गुमानभरे रणखेतन आये ८५
जैसे भेड़िन भेड़हा पैठे जैसे सिंह बिडारै गाय ॥
तैसे मारै औ ललकारै यहु रणबाघु बनाफरराय ८६
मलखे ठाकुरके मोर्चा पर कउ रजपूत न रोकै पायँ ॥
मारति मारति मलखाने जी पहुंचे जहां करिंगाराय ८७
देखिकै करिया राहुट हैगा औ मलखे से लगा बतान ॥
जो गति कीन्ह्यों बच्छराजकी सोई जानु अपनि मलखान ८८
त्यहिते तुमका समुझाइत है सम्मुख अवो न हमरे ज्वान ॥
सुनिकै बातें ये करिया की रिसहाभयो वीर मलखान ८६
ऐँड़ा मसके जब घोड़ी कें हौदा उपर पहुंची जाय ॥
पैर पकरिकै तब करियों के औ हौदा ते दीन गिराय ६०
उतरिकै घोड़ा ते देवा तब औ हाथी पर भयो सवार ॥
छोरी मुशकें बघऊदन की यहु भीषमको राजकुमार ६१
रुपना वारी बेंदुल लीन्हे तापर बैठ´ लहुरवा भाय ॥
घोड़ा पपीहा की पीठी माँ तुरतै बैठ करिंगाराय ६२
मलखे ठाकुर ने ललकारा करिया खबरदार ह्वै जाय ॥
जियत न जैहौ तुम माड़ो को तुम्हरो कालरहा नगच्याय ६३
सुनिकै बातें मलखाने की तब जरिमरा करिंगाराय ॥