आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमाड़ोका युद्ध । ६६ ५१
खैंचि सिरोही ली कम्मर से औ मलखे पर दई चलाय ९४
वार बचायो मलखाने ने करिया निकट पहूँच्यो जाय ॥
ढालकि औझरि मलखे मारा तब गिरपरा करिङ्गाराय ९५
घोड़ा पपीहा मलखे लीन्ह्यो औ क्षत्रिनते कह्यो सुनाय ॥
मारो मारो ओ रजपूतो तौ मिलिजाय बापका दायँ ९६
सुनिकै बातें मलखाने की ज्वानन खूब कीन घमसान ॥
रङ्गा बङ्गा शहाबाद के साथ म आये जौन पठान ६७
ते दउ मारैं दिशि करिया के रणमाँ बड़े लड़ैया ज्वान ॥
तिनके मुर्च्चा पर देवा रहे ठाकुर मैनपुरी चौहान ९८
सो- ललकारै तहँ रंगा को औ बंगाको दियो हटाय ॥
को गति बरणै तहँ देवा कै हमरे बूत कही ना जाय ६६
बड़ा लड़ैया रंगा रंगी जंगी खैंचि लीन तलवार ॥
ऐंचिकै मारा सो देवा को देवा लीन ढालपर वार १००
औ ललकारा फिरि रंगा को रंगा खबरदार ह्वैजाय ॥
खैंचि सिरोही देवा मारा रंगा गिरा भरहराखाय १०१
रंगा मरिगा जब मुर्च्चा पर बंगा चला तड़ाका धाय ॥
नंगी लीन्हें तलवारी को देवा पास पहूँचा आय १०२
सँभरिकै बैठो अब घोड़ापर तुम्हरो काल गयो नियराय ॥
यह कहि मारा तलवारी को बखतर काटि पार ह्वै जाय १०३
बचा दुलरूवा भीषमवाला ज्यहिका राखिलीन भगवान ॥
खैंचि सिरोही ली कम्मर ते औ हनिदियो बंगपरज्वान १०४
बंगा जूझा रणखेतन में तब जरिमरा करिङ्गाराय ॥
औ ललकारा रजपूतन को हमरे सुनो सिपाहिउ भाय १०५
जाय न पावैं मुहुबे वाले इनकी कटा लेउ करवाय ॥