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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 111

५८ आल्हखण्ड । १०६
चली बिजैसिनि झारखण्डते पहुँची रङ्गमहल में आय ३२
जितने जादू बिजमाँ डारे सो लश्कर ते लये उतार ॥
उतरी जादू जब लश्कर ते चेते सबै शूर सरदार ३३
आल्हा बोले तब मलखेते नहिं लखिपरे लहुरवा भाय ॥
सुनिकै बातैं मलखे बोले देवा शकुनदेव बतलाय ३४
लैके पोथी ज्योतिष वाली देवा हाल गयो सब गाय ॥
गुरुझिलमिलाकी मढ़ियामाँ बांधा तहां लहुरवा भाय ३५
सुनिकै बातैं ये देवा की आल्हा बहुत गयो घबड़ाय ॥
देवा बोला फिरि मलखेते मानो कही बनाफरराय ३६
बाना छोरो रजपूती का अँगमाँ लेवो भस्म लगाय ॥
योगी बनिकै हम तुम जावैं तौ सबकाम सिद्ध है जायँ ३७
बातैं सुनिकै ये देवा की योगी बने बीर मलखान ॥
तुरतै चलिभे झारखण्ड को पहुँचे तहाँ दूनहू ज्वान ३८
गुरुझिलमिलाकी मढ़ियाढिग गावैं तान वीर मलखान ॥
बाजै डमरू भल देवाकै सो परिगई भनक त्याहिकान ३६
गुरु झिलमिला बाहर आयो योगी लखा तहाँ दुइ ज्वान ॥
हाथ पकरिकै लै मढ़िया में बाबा बड़ा कीन सनमान ४०
बोले योगी हम दोउभाई ऐसा कह्यो वीर मलखान ॥
अब हम जावैं हरद्वार को चाहैं कछू नहीं सनमान ४१
रमता योगी बहता पानी ये नहिं करैं कतौ बिश्राम ॥
नहिं अभिलाषा क्यहू बातकी केवल जपें रामको नाम ४२
सुनिकै बातें ये योगी की बोला तुरत झिलमिला ज्वान ॥
जो कछु मांगो सो कछु पावो हमरे वचन करो परमान ४३
सुनिकै बातें ये बाबा की बोले तुरत बनाफरराय ॥