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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 101

४८ आल्हखण्ड । ६६
चम् चम् चम् चम् खड्गचमकै खद् पद् खद् पद् रहीं मचाय ६०
रन् रन् रन् रन् फिरैं योगिनी बम् बम् बम्ब बम्बको गाय ॥
सन् सन् सन् सन् बायू सनकै मन् मन् मन्त्र मन्त्र मन्नायँ ६१
मारु मारु करि तुरही ब्वालै ब्वालै हाव हाव करनाल ॥
सुनि सुनि बँचकैं बहु क्षत्रीगण बहुतक जूभिगये नरपाल ६२
बहुतक करहैं रण सरिता में नदिया बही रक्तके धार ॥
मुंडन केरे मुड़चौरा में औ रुंडन के लगे पहार ६३
परीं लहाशैं जो हाथिन की तिनका नदी किनारा मान ॥
परे बछेड़ा ऊँटनी तिनपर तिनसों नदीकगारा जान ६४
जैसे नदिया डोंगिया सोहैं तैसे स्वहैं नरनकी देह ॥
जैसे नदिया सावन बाढ़ै बसैं बहुत गरजिकै मेह ६५
तैसे डोंगिया नरदेही में नेही जौन सनेही जीय ॥
काक कंक तिन ऊपर बैठे फारैं जियत नरनके हीय ६६
झूरी जानो तुम मछलिनको कछुवा मनो ढाल दिखरायँ ॥
नचीं योगनी त्यहि सरिता में तारी भूतन दीन बजाय ६७
बड़ी लड़ाई भै बबुरीवन हमरे बूत कही ना जाय ॥
जो हम बाँधैं ह्याँ रूपक सब गाये उमर पार ह्वैजाय ६८
करिया ऊदन के मुर्चा माँ औ परिहा रामते काम ॥
बड़ा लड़ैया माड़ो वाला ठाकुर जबर्दस्त सरनाम ६६
करिया बोला वहि समया में गरुई हांक करत ललकार ॥
तुम टरिजावो म्वरे सम्मुखते ठाकुर उदयसिंह सरदार ७०
बाप तुम्हारे को हमहीं ने कोल्हू डारा रहै पिराय ॥
तैसे मारौं तलवारी सों मानो कही बनाफरराय ७१
सुनिकै बातें ये करिया की करिया भये उदयसिंहराय ॥