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स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary

आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished458 पृष्ठ

३० श्रीमद्‌राजचन्द्रजैनशास्त्रमालायां
पृष्ठ पृष्ठ
मीमांसक १०३, १२०, २६२ वाचकमूख्य १२, १५, २०५, २१२, २४४
मुक्त ( मुक्तस्य पुनर्भवे आगमनं ) २५६ वाचस्पति १३७
मुक्तामणि २६३ वाच्यवाचकयोः एकानेकत्वं ११९, १२६
मुक्तावलि १५१, १८६ वात ( रोगविशेषः ) १९६
मुक्ति ५२, ६१, ६६ वाद ( विवाद ) ७७
—मोक्ष १३५, १८२, २३७ वादमहार्णव १३७
मृगेन्द्र १९५ वार्तिककार २६०
मोक्षाकरगुप्त १५१ वासना ( संतान-क्षणसंतति ) १६३, १८६
मैथुन १३२, २०७ —भेदाभेदानुभयपक्षेषु दोषाः १८७
य विकलादेश ( नयवाक्य ) २०५, २१३
विकल्पविज्ञान १८९
यक्ष १३५, १४२ विज्ञानाकार १६१
यथार्थवाद १०, २६५ वितण्डा ७७
याज्ञिक ८९, ९५ विधि १३३
युधिष्ठिर २०९ विधिनिषेध २०९
योग १४१ विन्ध्यवासिन् १३८
योगिन् १५३, १५६ विपर्यय ( पंचधा ) १४२
योगिप्रत्यक्ष १६१ विभंगज्ञान ९८
योग्यता ( आवरणक्षयोपशमलक्षणा ) १५४ —विभंगज्ञानिन् २५७
योनि १३२, २०८ विभु २६५
—कर्मयोनि ( पंच ) १४३ —आत्मनो विभुत्वं ६७, ७४
योग ७७, १०३, १०७, १२६, १३१, १४८ विमलनाथस्तव २५१
र विरोधवैयधिकरण्यानवस्थासंकरव्यतिकरसंशया-
रज्जु ( चतुर्दशरज्ज्वात्मको लोकः ) ७५ प्रतिपत्तिविषयव्यवस्थाहानिरित्येते दोषाःस्या-
रघुवंश १११ द्वादिनां मते २२३, २२६
राक्षस १३५, १४२ विवर्त १११
ल विवाह ९२
विवेकख्याति १४२
लक्षण ( अंतरंग-बाह्य ) ६ विशेष १३, ५०
लब्धि ६५, १०६ —विशेषैकान्तवादी बौद्धः १२२, १२३, १२४
लाक्षणिक ५८ विस्रसा १८, ६७
लाघवोपष्टंभगौरव १३६ वीर १
लोक ७५ वीर्यान्तराय ६५, १७४
लोकायतिक १९१ वृक्ष ( वृक्षे सात्मकत्वं ) १७४
लंघन १०१ वृत्ति ( समवाय ) ४३
व वृन्दावन ६३
वर्धमान २, ६, ९, २०६ वेद ८८, २०६
वर्ण ( वर्णात्मकं शास्त्रं ) ३८ —वेदविहिता हिंसा ८८, ९४, १०२
वाक्यार्थ ( विधि ) १३३ वेदनीयकर्म ६५

्तश्च ४४ (Wait, look at 'अमूर्त्तश्च': अमूर्त्तश्च with two तs)
Line 19: —मुख्यगौणसमवायः ४५
Line 20: समनन्तरज्ञान १५५
Line 21: समयसागर २५९
Line 22: सम्यग्दर्शनज्ञानसम्पन्नाः वेदान्तवादिनः ९४
Line 23: सम्यग्ज्ञान ( भावप्राण ) २४०
Line 24: सम्यक्श्रुत २०६
Line 25: समाधि ९०
Line 26: समानतंत्र ७७
Line 27: समानजातीयज्ञान १५५
Line 28: समुद्घात ( केवलि ) ७५
Line 29: समुद्र ( सप्त ) २५६
Line 30: सर्वज्ञ ( आप्त ) ३०, ३८, १७६
Line 31: —सर्वज्ञसिद्धि १७६
Line 32: सर्पि १३२
Line 33: सर्वशून्य ( परतत्त्वं ) १७१
Line 34: सविकल्प ( प्रत्यक्ष ) ११४
Line 35: सहभावी २००
Line 36: सहोपलंभानियम १६२ (सहोपलंभानियम or सहोपलम्भानियम? It has anusvara: सहोपलंभानियम)
Line 37: सामान्य १२,१४,४८,१२२,१२३,२३

३२ श्रीमद्राजचन्द्रजैनशास्त्रमालायां
पृष्ठ पृष्ठ
साम्यावस्था १३६ स्मार्त २०७
सारस्वतमंत्र १ स्मृति ८९
सावयवत्वं (आत्मनः) ७१ स्मृतिप्रमाण १५४
सिद्ध २४०, २६५ स्मृतिभंगदोष १८२
—सिद्धेषु जीवव्यपदेशः २४० स्यात् २०९
सिद्धि (सिद्धयस्तिस्रः) १४३ स्याद्वाद २००, २०९, २२६, २४०
सिद्धिक्षेत्र ६२ स्याद्वादमंजरी २७०
सिद्धसेन २, ३२, २६३ स्याद्वादरत्नाकर २५२
सुगत १६४ स्वर्ग ९०, ९२, २०९
सुन्दोपसुन्द २३५ स्वयंभू ७
सृष्टि (रजोगुणात्मक) ४० स्वभावहेतु १५०
सौगत २७, १२०, १३१, १४८, १७९, १८६, २६२ स्वसंवेदन १०६
सौधर्म ९ स्वार्थानुमान १९२, २५२
संकेत १३२ स्वायंभुव २१
संतान २५, ६०, १८३ स्वाध्याय ९७
संयम १०० ह
संवर १४३ हरिभद्रसूरि (भगवान्) ३६, ७७
संविदद्वैत १६४ हस्तलाघव २६७
संहरण (तमोगुणात्मक) ४० हितोपदेशप्रवृत्ति १२
संहनन १३२ हिंसा ८७, १०२
सांख्य १२०, १३५, २४८ —वेदविहिता हिंसा धर्महेतुः ८७
सांख्यतत्त्वकौमुदी १४३ —जिनायतनादिविधाने पृथिव्यादिजन्तुघातनम् ९०
सांवृत (सत्य) १०१ —सांख्यवेदान्तवादिभिः वैदिकहिंसाविरोधः ९१, ९४
स्तुतिकार १६४, २००, २३२, २५१, २६७ हेमचन्द्र-हेमसूरि-हेमाचार्य १, २, २६९
स्थावर ३७, १३५ हेय ६३
स्थिति (सात्विक) ४१ होम ८८

स्याद्वादमंजरीके संस्कृत, तथा हिन्दी-अनुवादकी टिप्पणियोंके
ग्रन्थ और ग्रन्थकार ( ७ )
अ
अध्यात्मोपनिषद् यशोविजय ( ३२६ ) २६५
अनुयोगद्वारसूत्र २४३
अभिधर्मकोश वसुबन्धु १८४
अभिधानचिन्तामणि हेमचन्द्र ३,७,१३६,२६७
अमरकोष अमर ६५,१७६
अष्टसहस्री विद्यानन्द ( ३२६ ) १३३
आ
आदिपुराण जिनसेन १४२
आवश्यकटिप्पण हरिभद्र २४३
उ
उत्तराध्ययन १९१
क
कर्मग्रन्थ देवेन्द्रसूरि ६
ग
गीता ८७,९५
गोम्मटसार (कर्म.) नेमिचन्द्र ३१
गोम्मटसार (जीव.) ,, २६०
———— गोशाल २६५
गौतमसूत्र अक्षपाद २९
छ
छान्दोग्य उपनिषद् ९५
त
तर्कभाषा केशवमिश्र १०७
तत्त्वसंग्रह शांतिरक्षित १८०,१८६
तत्त्वार्थभाष्य उमास्वाति १८,२०२,२५१,२६१
तत्त्वार्थभाष्यवृत्ति सिद्धसेनगणि २५४
तत्त्वार्थराजवार्तिक अकलंक ७५,१७३,२०१,२३१,
२६१
तत्त्वार्थश्लोकवार्तिक विद्यानन्द २५३,२५४
तत्त्वार्थसूत्र उमास्वाति ६५,९८
त्रिलोकसार नेमिचन्द्र ७५
त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित हेमचन्द्र २०७
द
दशवैकालिक १३
द्रव्यसंग्रह नेमिचन्द्र २०१
द्रव्यसंग्रहवृत्ति ब्रह्मदेव २०१,२०२
द्रव्यानुयोगतर्कणा भोजदेव २५४
ध
धर्म हरिभद्र ३१
धर्मसंग्रहणीटीका मलयगिरि २०४
न
नयचक्रसंग्रह देवसेन ( ३२६ ) २५४
नयप्रदीप यशोविजय २६४
नयोपदेश यशोविजय २५५
न्यायप्रदीप पं. दरवारोलाल ८५,८६
न्यायप्रवेश दिङ्नाग १४४
न्याकप्रवेशवृत्ति हरिभद्र १४५
न्यायप्रवेशवृत्तिपंजिका पार्श्वदेव १४५
न्यायबिन्दु धर्मकीर्ति १५६
न्यायबिन्दुटीका धर्मोत्तर १५६
न्यायावतार टीका सिद्धर्षि २५४
प
पुरातत्त्व १७१
प्रज्ञापनासूत्र २४०,२५९
———— प्रभाचन्द्र २५५
प्रमाणनयतत्त्वालोकालंकार वादिदेव (३२६) १९२
प्रवचनसार कुन्दकुन्द ४
प्रवचनसारोद्धार नेमिचन्द्रसूरि ३
ब
बृहदारण्यक उपनिषद् ९५
———— पं. बेचरदास १७१
बोधिचर्यावतार शांतिदेव १८०
बोधिचर्यावतारपंजिका प्रज्ञाकरमति १७८,१८३
ब्रह्मसूत्रभाष्य शंकर २०७,२५८
भ
भगवती ( व्याख्याप्रज्ञप्ति ) २५३,२६१
म
मनुस्मृति मनु ८८,२५८
महाभारत व्यास ९५,२५८
महीदास २६१

३४ श्रीमद्‌राजचन्द्रजैनशास्त्रमालायां
——— माणिक्यनन्दि २५५ प
माध्यमिककारिका नागार्जुन २५५ षड्दर्शनसमुच्चयटीका गुणरत्नसूरि १९१,२५८
मुण्डक उपनिषद् ९५, २६४ स
य सत्यार्थप्रकाश स्वामी दयानन्द २६०
योगसूत्र पतंजलि १४२ सन्मतितर्क सिद्धसेन ( ३२६ ) २६१
र सन्मतिटीका अभयदेवसूरि २५३
रघुवंश कालिदास २५४ सप्तभंगीतरंगिणी विमलदास २२६
ल समवायांगटीका अभयदेवसूरि २५३
लोकप्रकाश विनयविजय (३२६) ९३,१०६ सर्वार्थसिद्धि पूज्यपाद १२८,२५४
लंकावतार शाक्यमुनि १७१,१८९ सूत्रकृतांग ६५
व स्थानांगटीका अभयदेवसूरि १३७,२५३
——— वाचस्पतिमिश्र १४२ Response in Living and Non-living
विशेषावश्यकभाष्य जिनभद्रगणि ( ३२६) २५३, —J. C. Bose २६१
२५४,२६३,२६४ A History of Pre-Buddhist
श Indian Philosophy
शब्दकल्पद्रुम राधाकान्तदेव १९७ —B. M. Barua २६१

अयोगव्यवच्छेदिकाके श्लोकोंकी सूची ( ८ )
श्लोक श्लोक नं० श्लोक श्लोक नं०
अ प्रागेव देवांतरसंश्रितानि १८
अगम्यमध्यात्मविदामवाच्यं १ प्रादेशिकेभ्यः परशासनेभ्यः ८
अनाद्यविद्योपनिषन्निषण्णैः २३ म
अनाप्तजाड्यादिवितिर्मितित्व १५ मदेन मानेनं मनोभवेन २५
अपक्षपातेन परीक्षमाणा २२ य
इ यत्र तत्र समये यथा तथा ३१
इदं श्रद्धामात्रं ३२ यथास्थितं वस्तु दिशन्नधीश ५
इमां समक्षं प्रतिपक्षसाक्षिणां २८ यदार्जवादुक्तमयुक्तमन्यैः १६
क यदीयसम्यक्त्वबलात् प्रतीमो २१
क्व सिद्धसेनस्तुतयो महार्था ३ व
क्षिप्येत वाग्भिः सदृशोक्रियेत १२ वपुश्च पर्यंकशयं श्लथं च २०
ज
जगत्यनुष्ठानबलेन शाश्वत् ६ विमुक्तवैरव्यसनानुबंधाः २४
जगन्ति भिन्दन्तु सृजन्तु वा पुनः १६ श
जिनेन्द्र यानेव विवावसे स्म ४ शरण्य पुण्ये तव शासनस्य ९
त स
तद्दुःषमाकालखलायितं वा १३ सुनिश्चितं मत्सरिणो जनस्य २७
तमःस्पृशामप्रतिभासभाजं ३० स्तुतावशक्तस्तव योगिनां न किं २
द
देहाद्ययोगेन सदाशिवत्वं १७ स्वकण्ठपीठे कठिनं कुठारं २६
स्वयं कुमार्गं लपतां नु नाम ७
न ह
न श्रद्धयैव त्वयि पक्षपातो २९ हितोपदेशात्सकलज्ञक्लृप्तेः ११
प
परःसहस्राः शरदस्तपांसि १४ हिंसाद्यसत्कर्मपथोपदेशात् १०

श्लोक
अगम्य १ द्वेष २९
...
Wait, look at in Option B: श्लोक appears above Col 1's numbers and श्लोक appears above Col 2's numbers!
Wait, where is the word header? There is NO word header! Just श्लोक above the number column.
In Col 1:
श्लोक
अगम्य १
In Col 2:
श्लोक
द्वेष २९
Wait! Notice that द्वेष is under Col 2, but where is its section letter?
In Col 1, the letter 'द' is near the bottom:
त
तत्त्वालोक ३२
तप :१४
तपस्विन् १९
द
दुःषमा १३
देशनाभूमि २४
And then 'द्वेष २९' is at the TOP of the next column!
Because 'द्वेष' begins with 'द' ('द्')!
Then after 'द्वेष २९' comes:
न
नय २८
This proves 100% beyond any shadow of a doubt that द्वेष २९ comes DIRECTLY AFTER देशनाभूमि २४ in the

अयोगव्यवच्छेदिकाके शब्दोंकी सूची—उपयुक्त ग्रंथ (९,१०) ३७
श्लोक श्लोक
व सम्यक्त्व २१
विप्लव १६ सिद्धसेन ३
वीतराग २६,२८ सुरेश १२
वीर २९ सुमागं ७
श संमद २५
शासन ५,९,१३,२१
ह
स हितोपदेश ११
सदाशिव १७
हिंसा १०
समाधि १८
अयोगव्यवच्छेदिकाकी टिप्पणीके ग्रन्थ (१०)
अभिधानचिन्तामणि हेमचन्द्र द्वा. द्वात्रिंशिका सिद्धसेन
अयोगव्यवच्छेदिका सं. चरणविजयजी भक्तामरस्तोत्र मानतुंग
आप्तमीमांसा समंतभद्र युक्त्यनुशासन समंतभद्र
योगशास्त्र हेमचन्द्र
कल्याणमन्दिरस्तोत्र सिद्धसेन लोकतत्त्वनिर्णय हरिभद्रसूरि
तत्त्वनिर्णयप्रासाद आत्मारामजी स्वयंभूस्तोत्र समंतभद्र

३८ श्रीमद्‌राजचन्द्रजैनशास्त्रमालायां
परिशिष्टोंके विशेष शब्दोंकी सूची (११)
अतिशय २८५-२८६
—मूल तीन अतिशय २८५
—चौंतीस अतिशय ,,
—श्वेताश्वतर उपनिषद् और पातंजल २८६
योगसूत्रोंमें अतिशय २८६
—मज्झिमनिकाय आदि
बौद्ध शास्त्रोंमें अतिशय २८६
आजीविक (तेरासिय) ३५१-३५२
—नंदवच्छ, किससंकिच्च
और मक्खलिगोशाल-
तीन मुख्य नायक ३५१
—गोशालके सिद्धांतोंका भगवती
आदि जैन ग्रंथोंमें उल्लेख ३५१
आधाकर्म (अधःकर्म) २९२-२९३
अपुनर्बंध २८७
उत्पादव्ययध्रौव्य २८६-२८७
—स्वप्रत्यय और परप्रत्यय उत्पादव्यय २८७
—षट्स्थानपतितहानिवृद्धि २८७

परिशिष्टोंके विशेष शब्दोंकी सूची ( ११ ) ३९
—दर्शनोंमें ईश्वर संबंधी मान्यता ३२६ —आत्मवादियोंके सिद्धांत ३१५
—ईश्वरके अस्तित्वमे तीन मुख्य प्रमाण ३२६ —पंचस्कंध रूप आत्मा ३१६
—इन प्रमाणोंकी समीक्षा (टि.) ३२७ —विज्ञानप्रवाह और आधुनिक मानसशास्त्र
—ईश्वरके संबंधमें शंका-समाधान ३२८ (टि.) ३१६
—आधुनिक पाश्चिमात्य विद्वानोंका मत ३२९ —भवसंतति ३१७
—न्यायवैशेषिक साहित्य ३३० —बौद्ध साहित्यमें आत्मा संबंधी चार
मान्यतायें ३१८-३२१
प्रदेश २८८-२८९
—प्रदेश और अवयव २८८ मीमांसादर्शन (पूर्वमीमांसा) ३३९-३४५
—आत्माके प्रदेश २८८ —मीमांसकोंके आचार विचार ३३९
—प्रदेशोंमें संकोच-विस्तार २८९ —मीमांसक सिद्धांत ३३९-३४३
—आत्माका मध्यमपरिणाम २८९ —वेदका अपौरुषेयत्व ३४०
—रामानुजके सिद्धांतके साथ तुलना २८९ वेद और नैयायिक आदि दर्शन (टि.) ३४०
—मीमांसक और जैन ३४३-४
प्राण २९९-३०० —कुमारिलभट्ट और अनेकांतवाद ३४४
—विविध अर्थ २९९ —मीमांसादर्शनके मुख्य प्ररूपक ३४५
—द्रव्यप्राण-भावप्राण २९९ वेदान्तदर्शन (उत्तरमीमांसा) ३४६-३४७
—सिद्धोंके प्राण ३००
बौद्धदर्शन ३०३-३२१ —वेदान्ती साधुओंका आचार विचार ३४६
—बौद्धोंके सिद्धांत और आचार विचार ३०३ —वेदान्त दर्शनकी व्यापकता ३४६
—मुख्य सम्प्रदाय ३०३ —वेदान्त दर्शनका साहित्य ३४६-७
सौत्रांतिक आदि सम्प्रदायोंका समय (टि.) ३०४ —वेदान्त दर्शनकी शाखायें ३४७
—सौत्रांतिकोंके सिद्धांत और उनके —शंकरका मायावाद तथा
आचार्य ३०४, ३०५ विज्ञानवाद और शून्यवाद ३४८
—वैभाषिक (सर्वास्तिवादी) ३०५ लोक २९०-२९२
—सौत्रांतिक और वैभाषिकोंके समान —तीनलोक २९०
सिद्धांत ३०६ —वैदिकलोक २९१
—शून्यवाद (मध्यमवाद-नैरात्म्यवाद) ३०८ —बौद्धलोक २९१
—शंका-समाधान पूर्वक प्ररूपण ३०८-३११ सांख्ययोगदर्शन ३३२-३३८
—शून्यवाद और स्याद्वाद (टि.) ३०८ —सांख्य, योग, जैन और बौद्ध ३३२
—शून्यवादके मुख्य प्ररूपक आचार्य ३११ —श्रमण और ब्राह्मण संस्कृति ३३२
—विज्ञानवाद (योगाचार) ३१२-३१४ —सांख्य और योगदर्शन ३३३
—शून्यवाद और विज्ञानवाद (टि.) ३१२ —सांख्योंके आचार विचार ३३३-३३५
—विज्ञानवादका शंका-समाधान —सांख्योंका वेदोंको न मानना ३३४
पूर्वक प्रतिपादन ३१३-३१५ —सांख्यदर्शनके मुख्य प्ररूपक ३३५
—नैरात्म्यवाद और आत्मवाद ३१३-३१५ —योगदर्शन और उसका साहित्य ३३७
—आत्मा और आलयविज्ञान (टि.) ३१४ —जैन और बौद्ध दर्शनमें योग ३३७-३३८
—विज्ञानवादके मुख्य आचार्य ३१४-३१५ हिंसा २९२
—अश्वघोषका तथतावाद ३१५ —जैन शास्त्रोंमें हिंसा २९२
—अनात्मवाद ३१५ —संकल्पी हिंसा २९२

परिशिष्टोंमें उपयुक्त ग्रन्थोंकी सूची ( १२ )
अ तत्त्वार्थभाष्य उमास्वाति २९०,२९९
अनगारधर्मामृत पं. आशाधर २९३ तत्त्वार्थभाष्यवृत्ति सिद्धसेनगणि २८७,२८८
अनुयोगद्वारसूत्र ३०० तत्त्वार्थराजवार्तिक अकलंक २८८
अभिधर्मकोश वसुबन्धु २८३,२८६ तत्त्वार्थश्लोकवार्तिक विद्यानन्द २८८,२९६
३१६,३२०,३२१ तन्त्रवार्तिक कुमारिल ३३९
अभिधम्मत्थसंगहो ( पालो ) अनुरुद्ध २९२ त्रिलोकसार नेमिचन्द्र २८२
अभिधानचिन्तामणि हेमचन्द्र ३२३ त्रिंशिका वसुबन्धु ३१२
अभिधानराजेन्द्रकोष राजेन्द्रसूरि २९३ त्रिंशिकाभाष्य स्थिरमति ३१२,३१३
अवयविनिराकरण पं. अशोक ३०७ द
आ दर्शन और अनेकांतवाद पं. हंसराज शर्मा ३४४
आस्तिकवाद (हिन्दो) पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय ३३० दीघनिकाय ( मराठी ) अनु. प्रो. राजवाड़े ३०३,
उ ३२०,३५२
उत्तराध्ययन २९३ द्रव्यसंग्रहवृत्ति ब्रह्मदेव २८९,२९६,३००
क द्रव्यानुयोगतर्कणा भोजदेव २८७,२९६
कर्मग्रन्थ चौथा देवेन्द्रसूरि २८९ द्वात्रिंशद् द्वात्रिंशिका सिद्धसेन दिवाकर २९२,३०९
कालचक्र ( हिन्दी ) डा. सिद्धेश्वर शास्त्री २९३ द्वात्रिंशद् द्वात्रिंशिका उ. यशोविजय २८६,२८८,
कूर्मपुराण २८२ २९०,२९२,३१६
कौषीतको उपनिषद् २८८
ग ध
गरुड़पुराण २८२ धम्मपद ३२०
गुणस्थानक्रमारोहण राजशेखरसूरि २८९ न
गोम्मटसार नेमिचन्द्र २८७ नन्दिसूत्र ३००
गोम्मटसारटीका केशववर्णी २८४,३०१ नियमसार कुन्दकुन्द २८५
छ नृसिंहपुराण २९१
छान्दोग्य उपनिषद् ३१२ न्यायकोष भीमाचार्य ३२२,३३३,३३५,३४९
ज न्यायकंदली श्रीधरभट्ट ३२३,३२९
जैनजगत् ३३२ न्यायकुसुमांजलि उदयन ३२८-९
जैनदर्शन (गुज.) अनु. पं. बेचरदास दोषी ३५० न्यायखंडखाद्य उ. यशोविजय २८९
जैनतर्कपरिभाषा उपाध्याय यशोविजय ३०० न्यायतात्पर्यपरिशुद्धि उदयन ३२२
जैनसिद्धांतदर्पण (हिन्दो) पं. गोपालदास बरैया २८७ न्यायभाष्य वात्स्यायन ३२२,३२६,३३३
जैनागम साहित्यमें भारतीय समाज न्यायमंजरी जयन्त ३०७,३२२,३२९
जगदीशचन्द्र जैन ३५२ न्यायवार्तिक उद्योतकर ३२२
तत्त्वसंग्रह शांतरक्षित २९४,३०५,३१८, न्यायवार्तिकतात्पर्यटीका वाचस्पतिमिश्र ३०७
३३६,३४४ न्यायसूत्रवृत्तितत्पर्यविवृत्ति पं बालकृष्ण २९०
तत्त्वसंग्रहपंजिका कमलशील ३०४,३०५, न्यायावतार ( गुजराती ) पं. सुखलालजी ३००
३१६,३२० प
तत्त्वयाथार्थ्यदीपन क्षेमेन्द्र ३३४ पद्मपुराण २९१

, wait, let's look closely: it's 'बुद्धघोष' with a faint stroke, or is it 'बुद्धघोष'? In Hindi it's Buddhaghosa -> बुद्धघोष).

Heading:
श
शास्त्रदीपिका पार्थसारथिमिश्र ३४२
शास्त्रवार्तासमुच्चयटीका उ. यशोविजय २८७,२९०
श्वेताश्वतर उपनिषद् २८५

Heading:
ष
षड्दर्शनसमुच्चय राजशेखर ३०३
षड्दर्शनसमुच्चयटीका गुणरत्न १०३,३०४,
३०६,३२२,३२४
३४५,३४६,३४९

Heading:
स
सन्मतितर्कटीका अभयदेव २८७,२९३
समवायांगसूत्र २८५
सर्वदर्शनसंग्रह माधवाचार्य ३२०,३३७,३४०
सवार्थसिद्धि पूज्यपाद २८७,२९२
सागारधर्मामृत पं० आशाधर २९२
सामान्यदूषणदिक्प्रसारित पं० अशोक ३०८
संयुक्तनिकाय ( पाली ) ३२०
सांख्यकारिकाभाष्य माठर ३३४
सांख्यप्रवचनभाष्य विज्ञानभिक्षु ३४९
स्कंदपुराण ३२२

Heading:
ह
हिंदतत्वज्ञाननो इतिहास (गुजराती) नर्मदाशंकर मेहता
३४८

Wait, look at "सवार्थसिद्धि":
Is

४२ श्रीमद्राजचन्द्रजैनशास्त्रमालायां
A History of Indian Philosophy Vol. I ( S. N. Das Gupta. ) ३१२,३२४
A History of Indian Philosophy Vol. II ( " ) ३४७
A History of Pre-Buddhist Indian Philosophy ( B. M. Barua. ) २९३,२९२
Buddhism in Translation ( Warren ) ३१८
Buddhist Psychology ( Mrs. Rhys Davids. ) ३१८
Constructive Survey of the upanisadic Philosophy ( Ranade. ) ३२६
Encyclopedia of Ethies and Religion ३५२
Hinduism and Buddhism ( Charles Eliot. ) ३३३
History of Indian Phiosophy Vol. II ( Ranade & Belvelkar. ) ३२५
Indian Philosophy Vol. II ( S. Radhakrishnan. ) ३२६
Jain Sutras Part II ( Jacobi. ) ३२३
Milinda Questions ( Mrs. Rhys Davids. ) ३१९
Mannual of Indian Bhuddhism ( Kern. ) २८३,२८४
Pancastikaya Sara ( A. Chakravarti. ) २९४
Syadvada Minjari ( A. B. Dhruva. ) २८९,३०८,३२३,३३०,३४८
Systems of Buddhistic Thought ( Yamakami Sogen. ) ३०६,३१४,३१९
Some problems in Indian Literature ( M. Winternitz. ) ३३३
Samkhya System ( A. B. Keith. ) ३३३
Shramanism ( R. P. Chanda. ) ३३२
The Principle of Psychology Vol. I ( W. James. ) ३१७
The Central Conception of Buddhism ( Stcherbatsky. ) ३०५
The Conception of Buddhist Nirvana ( " ) ३११,३१४,
Yogavacara Mannual ( Mr. Rhys Davids. ) ३३८

सम्पादनमें उपयुक्त ग्रंथोंकी सूची ( १३ ) ४३
सम्पादनमें उपयुक्त ग्रन्थोंकी सूची ( १३ )
अध्यात्मोपनिषद् ( जैनधर्मप्रसारक सभा भावनगर )
अनगारधर्मामृत ( माणिकचन्द्र ग्रंथमाला बम्बई )
अनुयोगद्वारसूत्र ( आगमोदयसमिति सूरत )
अभिधर्मकोश ( सं. राहुलसांकृत्यायन काशी विद्यापीठ )
अभिधम्मत्थसंगहो ( पाली ) ( सं. धर्मानन्द कोसंबो गुजरात पुरातत्त्वमंदिर )
अभिधानचिन्तामणि ( यशोविजय ग्रंथमाला काशी )
अभिधान राजेन्द्रकोप ( रतलाम )
अमरकोष ( निर्णयसागर प्रेस बम्बई )
अयोगव्यवच्छेद द्वात्रिंशिका ( भावनगर, भीमसिंह माणेक मुंबई )
अवयविनिराकरण (सं. हरप्रसादशास्त्री सिक्सबुद्धिस्ट न्यायटैक्स्ट विब्लि-
आयेका इंडिका )
अष्टसहस्री ( गांधी नाथारंग जैन ग्रंथमाला बम्बई )
आप्तमीमांसा ( सनातन जैन ग्रंथमाला काशी )
आदिपुराण ( जैनेन्द्रप्रेस कोल्हापुर )
आस्तिकवाद ( अलाहवाद )
आवश्यक हरिभद्रीय ( आगमोदयसमिति सूरत )
उत्तराध्ययनसूत्र ( देवचंद लालाभाई सूरत )
कर्मग्रन्थ द्वितीय ( आत्मानंद जैन प्रकाशक मण्डल आगरा )
कर्मग्रन्थ चौथा ( ,, )
कल्याणमन्दिरस्तोत्र ( काव्यमाला सप्तमगुच्छक निर्णयसागर बम्बई )
कालचक्र ( शारदामंदिर देहली )
कौषीतकी उपनिषद् ( निर्णयसागर बम्बई )
गुणस्थानक्रमारोहण ( जैनधर्मप्रसारक सभा भावनगर )
गोम्मटसार जीवकांड ( रायचन्द्र शास्त्रमाला बम्बई )
गोम्मटसार जीवकांड केशववर्णीटीका ( जैनसिद्धांतप्रकाशिनी संस्था कलकत्ता )
गोम्मटसार कर्मकाण्ड ( रायचन्द्र शास्त्रमाला बम्बई )
गौतमसूत्र ( न्यायदर्शन ) ( हरिकृष्णदास गुप्त काशी )
छान्दोग्य उपनिषद् ( निर्णयसागर वंबई )
जैनतर्कपरिभाषा ( जैनधर्मप्रसारक सभा भावनगर )
जैनसिद्धांतदर्पण ( अनन्तकीर्ति जैन ग्रंथमाला )
जैनदर्शन ( गुजराती ) ( पं. बेचरदास )
जैनागम साहित्यमें भारतीय समाज ( चौखंभा संस्कृत सीरीज )
तत्त्वसंग्रहपंजिका ( गायकवाड़ ग्रंथमाला वड़ोदा )
तत्त्वयाथार्थ्यदीपन ( चौखंभा काशी )
तत्त्वार्थभाष्य ( आर्हतमत प्रभाकर पूना )
तत्त्वार्थभाष्यवृत्ति ( देवचंद लालाभाई-सूरत )
तत्त्वार्थराजवार्त्तिक ( सनातन जैन ग्रंथमाला काशी )

४४ श्रीमद्‌राजचन्द्रजैनशास्त्रमालायां
तत्त्वार्थश्लोकवार्तिक ( गांधी नाथारंग जैन ग्रंथमाला )
तन्त्रवार्तिक ( काशी )
त्रिलोकसार ( माणिकचन्द ग्रंथमाला बम्बई )
त्रिंशिका ( सं. सिल्वन् लेवी पेरिस )
त्रिंशिकाभाष्य ( " )
त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित ( जैनधर्मप्रसारक सभा भावनगर )
दर्शन और अनेकांतवाद ( आत्मानन्द जैन प्रकाशक मण्डल आगरा )
दशवैकालिकसूत्र-नियु'क्ति ( देवचंद लालाभाई सूरत )
दीघनिकाय ( मराठी ) ( सं. राजवाड़े बड़ौदा )
द्रव्यसंग्रह-वृत्ति ( जैन पब्लिशिंग हाउस आरा )
द्रव्यानुयोगतर्कणा ( रायचन्द्र जैन शास्त्रमाला बम्बई )
द्वात्रिंशद् द्वात्रिंशिका-सिद्धसेन ( जैनधर्म प्रसारक सभा भावनगर )
द्वात्रिंशद् द्वात्रिंशिका-यशोविजय ( " )
धर्मसंग्रहणीवृत्ति ( देवचंद लालाभाई सूरत )
धम्मपद ( पाली ) ( गुजरात पुरातत्त्वमंदिर )
नन्दिसूत्रटीका ( देवचंद लालाभाई सूरत )
नयचक्रसंग्रह ( माणिकचंद जैन ग्रंथमाला बम्बई )
नयप्रदीप ( जैनधर्म प्रसारक सभा भावनगर )
नयोपदेश ( जैनधर्म प्रसारक सभा भावनगर )
नियमसार ( जैनग्रंथरत्नाकर कार्यालय बम्बई )
न्यायकुसुमांजलि ( कलकत्ता )
न्यायकोश ( संस्कृत सीरीज बम्बई १८९३ )
न्यायकंदली ( विजयनगर ग्रंथमाला )
न्यायतात्पर्यपरिशुद्धि ( चौखंभा काशी )
न्यायप्रदीप ( हिन्दीग्रंथरत्नाकर कार्यालय बम्बई )
न्यायप्रवेश-वृत्ति-पंजिका ( गायकवाड़ ग्रंथमाला वड़ौदा )
न्यायबिन्दु-टीका ( चौखंभा काशी )
न्यायभाष्य ( विद्याविलास प्रेस काशी )
न्यायमंजरी ( विजयनगर संस्कृत सीरीज )
न्यायवार्तिक ( विद्याविलास प्रेस, काशी )
न्यायवार्तिकतात्पर्यटीका ( विजयनगर संस्कृत सीरीज )
न्यायसूत्रवृत्तितारपर्यविवृत्ति ( हरिकृष्णदास गुप्त काशी )
न्यायावतार ( हेमचन्द्राचार्य ग्रन्थावलि, जैनसाहित्य संशोधक कार्या-
लय अहमदाबाद )
पातंजलयोगसूत्र-भाष्य ( संस्कृत और प्राकृत सीरीज बम्बई )
पुराण ( श्री वेंकटेश्वर प्रेस बम्बई )
पंचाध्यायी ( नाथारंगजी गांधी शोलापुर )
पंचास्तिकाय-टीका ( रायचन्द्र जैनशास्त्रमाला बम्बई )
प्रकरणपंचिका ( चौखंभा काशी )
प्रज्ञापनासूत्र मलयगिरिवृत्ति ( देवचंद लालाभाई सूरत )

सम्पादनमें उपयुक्त ग्रंथोंकी सूची ( १३ ) ४५
प्रमेयकमलमार्तण्ड ( निर्णयसागर बम्बई )
प्रमेयरत्नकोष ( जैनधर्मप्रसारक सभा भावनगर )
प्रवचनसार टीका ( रायचन्द्र शास्त्रमाला बम्बई )
प्रवचनसारोद्धार ( देवचंद लालाभाई सूरत )
प्रश्न उपनिषद् ( निर्णयसागर बम्बई )
प्राकृत साहित्यका इतिहास ( चौखंबा संस्कृत सीरीज )
बुद्धचर्या ( ज्ञानमण्डल बनारस )
बुद्धचरित ( Ed. Cowell Aryan series )
वृहदारण्यक उपनिषद् ( आनंदाश्रम संस्कृत सीरीज़ पूना )
बोधिचर्यावतार-पंजिका ( बिब्लिओथेका इंडिका )
ब्रह्मसूत्रशांकर भाष्य ( निर्णयसागर वम्बई )
भक्तामरस्तोत्र ( काव्यमाला सप्तमगुच्छक निर्णयसागर )
भगवतीसूत्र टीका ( आगमोदय समिति सूरत )
भारतीय तत्त्व चिन्तन ( राजकमल प्रकाशन )
मज्झिमनिकाय ( अनु. राहुलसांकृत्यायन महाबोधिसभा बनारस )
मध्यमकावतार ( सं. पूसिन् )
मनुस्मृति ( निर्णयसागर वम्बई )
महाभारत ( ,, )
महायान सूत्रालंकार ( सं. सिल्वन् लेवी पेरिस )
माध्यमिककारिका-वृत्ति ( पीटर्सवर्ग )
मिलिन्दपण्ह ( पाली ) ( V. Trenckner London 1880 )
मीमांसाश्लोकवार्तिक टीका ( चौखंभा काशी )
मुण्डक उपनिषद् ( निर्णयसागर वम्बई )
युक्तिप्रबोध ( रतलाम )
युक्त्यनुशासन ( माणिकचंद जैन ग्रंथमाला बम्बई )
योगविन्दु ( सं० सुआली भावनगर )
योगशास्त्र ( जैनधर्म प्रसारक सभा भावनगर )
रघुवंश ( निर्णयसागर बम्बई )
लोकप्रकाश ( हीरालाल हंसराज जामनगर )
लोकतत्त्वनिर्णय ( आत्मानंद जैन सभा भावनगर )
लंकावतारसूत्र ( नंजिओ क्योटो १९२३ )
विशेषावश्यकभाष्य ( यशोविजय ग्रंथमाला काशी )
विसुद्धिमग्ग ( पाली ) ( पालीटैक्स्ट सोसायटी लंदन )
शब्दकल्पद्रुम ( हरिचरणवसु कलकत्ता )
शास्त्रदीपिका ( निर्णयसागर वम्बई )
शास्त्रवार्तासमुच्चयटीका ( देवचंद लालाभाई सूरत )
श्वेताश्वतर उपनिषद् ( निर्णयसागर बम्बई )
षड्दर्शनसमुच्चय-राजशेखर ( यशोविजय ग्रंथमाला काशी )
षड्दर्शनसमुच्चय-मणिरत्नटीका ( चौखंभा काशी )

४६ श्रीमद्राजचन्द्रजैनशास्त्रमालायां
षड्दर्शनसमुच्चय-गुणरत्नटीका ( आत्मानंद सभा भावनगर )
सन्मतितर्क ( गुजराती ) ( पूंजाभाई जैन ग्रंथमाला अहमदाबाद )
सन्मतितर्कटीका ( गुजरात विद्यापीठ अहमदाबाद )
सत्यार्थप्रकाश ( अजमेर सं. १८९३ )
सप्तभंगोतरंगिणी ( रायचंद्र ग्रन्थमाला बम्बई )
समवायांगसूत्र-टीका ( आगमोदय समिति सूरत )
सर्वदर्शनसंग्रह ( प्राच्यविद्यासंशोधन मंदिर पूना )
सर्वार्थसिद्धि ( जैनेन्द्र मुद्रणालय कोल्हापुर )
सागरधर्मामृत ( माणिकचंद ग्रंथमाला बम्बई )
सामान्यदूषणदिक् प्रसारिता ( सं. हरप्रसाद सिक्स बुद्धिस्ट टैक्स्ट )
सूत्रकृतांगसूत्र-टीका ( आगमोदय समिति सूरत )
स्थानांगसूत्र-टीका ( ,, )
संयुक्तनिकाय ( पाली ) ( पालिटैक्स्ट सोसायटी १८९८ )
सांख्यकारिका माठरभाष्य ( चौखंभा काशी )
सांख्यप्रवचनभाष्य ( विद्याविलास प्रेस काशी )
स्याद्वादमंजरी-लिखित —रायचन्द्र जैन शास्त्रमाला
हिंदतत्वज्ञाननो इतिहास ( गुजराती ) ( गुजरात वर्नाक्यूलर सोसायटी अहमदाबाद )
A History of Indian Philosophy Vol. I ( Cambridge University 1922)
A History of Indian Philosophy Vol. II ( ,, ,, 1932 )
A History of Indian Literature Vol. II ( Calcutta University 1933 )
A History of Pre-Buddhist Indian Philosophy ( Calcutta 1921 )
Buddhism In Translation ( Harvard Oriental Series 1922 )
Buddhist Psychology London 1914 )
Construtctive Survery of the Upanisdic Philosophy ( Poona 1926 )
Encyclopedia of Ethics and Religion
Hinduism and Buddhism ( London 1921 )
History of Indian Philosophy Vol. II ( Poona 1927 )
Indian Philosophy Vol. II ( Library of Philosophy 1927 )
Jain Sutras Vol. II ( S. B. E. XLV )
Milinda Questions ( London 1930 )
Mannual of Indian Buddhism ( Strassburg 1896 )
Pancastikayasara ( Jain Publishing House Arrah 1920 )
Response in Living and Non-living ( London 1902 )
Shramanism ( Indian Science Congress 1934 )
Syadavada Manjari ( Bombay Sanskrit and Prakrit Series 1933 )
Systems of Buddhistic Thought ( Calcutta University 1912 )
Some problems of Inidan Literature ( Calcutta University 1925 )
Samkhya system ( Cal. 1918 )
The Principles of Psychology ( London 1890 )
The Central Conception of Buddhism ( London 1923 )
The Conception of Buddhist Nirvana ( Leningrad 1927 )

शुद्धाशुद्धि पत्र
पृ० पंक्ति अशुद्ध शुद्ध
१ ३ श्री रायचन्द्र जैनशास्त्रमालायां श्रीमद्राजचन्द्रजैनशास्त्रमालायां
३ ६ दापा: दोषाः
४ ५ वैशेषिकवचनम् वैनाशिकवचनम्
४ २२ वैशेषिकोंने वैनाशिकों ( बौद्धों ) ने
६ ९ सङ्घचयाया सङ्ख्यया
११ ६ हत्वाद् हंतृत्वाद्
२२ २१-२ अर्थात् परमाणु पृथिवी अर्थात् अर्थात् परमाणु पृथिवी और
अनित्य पृथिवी अर्थात्
४४ १ अन्य. यो. व्य. श्लोक ६ अन्य. यो. व्य. श्लोक ७
४५ १ ,, ,, ,, ,,
४६ १ ,, ,, ,, ,,
४७ १ ,, ,, ,, श्लोक ८
४८ १ ,, ,, ,, श्लोक ८
५६ १ तर्वादि तैर्वादि
६७ ६ यत्रव यत्रैव
८८ ५ श्रद्दादिविधानेन श्राद्धादिविधानेन
१६१ १४ विज्ञानकारो विज्ञानाकारो
१८० १० यथा तथा
१८० १० आजवीभावलक्षणः आर्जवीभावलक्षणः
१८७ १५ कवकुट कुक्कुट
१८९ ३६ चित्रैस्तरङ् चित्रैस्तरङ्ग
१९० ४ अवोत्तरर्द्धि व्याख्या अथोत्तरार्द्धव्याख्या
१९२ ६ प्रामाणेन प्रमाणेन
१९३ ३५ प्रमाण्य प्रामाण्य
२०१ ३१ स्थिताश्चेति स्थितांश्चेति
२०१ ३१ तत्त्वार्थराजवर्तिके तत्त्वार्थराजवार्तिके
२०९ २९ स इस
२११ ३१ कीजा सकती की जा सकती
२१४ २५ कमसे क्रमसे
२१४ २६ अयवा अथवा
२१५ ४० गुणों जब गुणोंका जब
२१६ १९ स्वानुरत्त स्वानुरक्त
२१६ ३६ उप्णता उष्णता
२१६ ३९ तादाम्य तादात्म्य
२२० २७ ऐस ऐसा
२२८ २३ स्वरूव स्वरूप
२३८ २९ ओर और
२४२ २९ इलिये इसलिये
२४४ १५ वाचमुख्यः वाचकमुख्यः

४८ श्रीमद्राजचन्द्रजैनशास्त्रमालायां
पृ० पंक्ति अशुद्ध शुद्ध
२४८ ९ इतरांशापलावी इतरांशापलापी
२५० ३८ परन्त् परन्तु
२५७ १६, पण्णां पण्णं
२५९ २ ,, ,,
२६१ २० याख्या प्रज्ञप्ति व्याख्या प्रज्ञप्ति
२७० २९ वन्दनीम वन्दनीय
२७१ २८ वन्धम् बन्धम्
२७२ १६ दिशन्नमसूय दिशस्तमसूय
२७२ २१ डम्बरेभ्यो डम्वरेभ्यो
२७३ अंतिम बत वत
२९३ १५ छहं छह
२९५ अंतिम मेघधविजयगणि मेघविजयगणि
२९७ १० विपाकसूव विपाकसूत्र
२९८ २६ प्रश्नव्यकरण प्रश्नव्याकरण
३०० २२ करकेएक करके एक
३०१ २२ मनको मनकी
३०३ १२ मान माना
३०६ १६ सिद्धान्तोंमें मे सिद्धान्तोंमें
३१० १७ माना । है माना है।
३१२ ३१ भुमयं मुभयं
३१४ ६ घे थे
३१४ २५ Consciosness Consciousness
३२० ३ षदार्य पदार्थ
३२४ १२ करसे करते
३२९ ११ नही नहीं
३३० २४ रचनाकी रचना की
३३१ ६ चर्चाकी चर्चा की
३३२ २२ सांस्कृतिके मस्तिष्ककी सांस्कृतिक मस्तिष्कका
३३३ १६ Problems Problems
३३३ १९ वेवर बेवर
३३४ ९ बस्त्र वस्त्र
३३४ १० स्बीकार स्वीकार
३३४ ३४ सर्बथा सर्वथा
३३५ १९ वाचस्पति मिश्र वाचस्पतिमिश्र
३३६ २१ तत्त्वसंग्रहपजिका तत्त्वसंग्रहपंजिका
३३६ २८ रचनाकी रचना की
३३६ ३१ रचनाकी रचना की
३३६ ३१ सिद्धातोमें सिद्धान्तोंमें
३३९ १३ अर्वाचीव अर्वाचीन
३४९ अंतिम पं० बेचनदास पं० बेचरदास
३५१ २६ कियाहै किया है

श्रीमद् राजचन्द्र आश्रम, अगास द्वारा संचालित
परमश्रुतप्रभावक-मण्डल (श्रीमद् राजचन्द्र जैन शास्त्रमाला) के
प्रकाशित ग्रन्थोंकी सूची
(१) गोम्मटसार-जीवकाण्ड-श्रीनेमिचन्द्रसिद्धान्तचक्रवर्तिकृत मूल गाथायें, श्रीब्रह्मचारी
पं० खूबचन्द्रजी सिद्धान्तशास्त्रीकृत नयी हिन्दीटीका-युक्त। अबकी वार पंडितजीने धवल, जयधवल, महाधवल
और बड़ी संस्कृतटीकाके आधारसे विस्तृतटीका लिखी है। तृतीयावृत्ति । मूल्य-छह रुपये ।
(२) स्वामिकार्त्तिकेयानुप्रेक्षा-स्वामिकार्त्तिकेयकृत मूल गाथायें, श्रीशुभचन्द्रकृत बड़ी संस्कृत-
टीका, स्याद्वाद महाविद्यालय वाराणसीके प्रधानाध्यापक, पं० कैलाशचन्द्रजी शास्त्रीकृत हिन्दीटीका । अंग्रेजी
प्रस्तावनायुक्त। सम्पादक-डा० आ० ने० उपाध्ये, कोल्हापुर । मूल्य-चौदह रुपये ।
(३) परमात्मप्रकाश और योगसार-श्रीयोगीन्दुदेवकृत मूल अपभ्रंश-दोहे, श्रीब्रह्मदेवकृत
संस्कृत-टीका व पं० दौलतरामजीकृत हिन्दी-टीका । विस्तृत अंग्रेजी प्रस्तावना और उसके हिन्दोसार सहित ।
महान अध्यात्म-ग्रन्थ । डा० आ० ने० उपाध्येका अमूल्य सम्पादन । नवीन संस्करण । मूल्य-नौ रुपये ।
(४) ज्ञानार्णव-श्रीशुभचन्द्राचार्यकृत महान योगशास्त्र । सुजानगढ़निवासी पं० पन्नालालजी
बाकलीवालकृत हिन्दी अनुवाद सहित । तृतीय सुन्दर आवृत्ति । मूल्य-आठ रुपये ।
(५) प्रवचनसार-श्रीमत्कुन्दकुन्दाचार्यविरचित ग्रन्थरत्नपर श्रीमदमृतचन्द्राचार्यकृत तत्त्वप्रदीपिका
एवं श्रीमज्जयसेनाचार्यकृत तात्पर्यवृत्ति नामक संस्कृत टीकायें तथा पांडे हेमराजजी रचित बालावबोधिनी
भाषाटीका । डा० आ० ने० उपाध्येकृत अध्ययनपूर्ण अंग्रेजी अनुवाद और विशद प्रस्तावना आदि सहित
आकर्षक सम्पादन । तृतीयावृत्ति । मूल्य-पन्द्रह रुपये ।
(६) बृहद्द्रव्यसंग्रह-आचार्य नेमिचन्द्रसिद्धांतदेवविरचित मूल गाथा, श्रीब्रह्मदेवविनिर्मित
संस्कृतवृत्ति और पं० जवाहरलालशास्त्रिप्रणीत हिन्दी-भाषानुवाद सहित । षड्द्रव्यसप्ततत्त्वस्वरूपवर्णनात्मक
उत्तम ग्रन्थ । तृतीयावृत्ति । मूल्य-पांच रुपये, पचास पैसे ।
(७) पुरुषार्थसिद्ध्युपाय-श्रीअमृतचन्द्रसूरिकृत मूल श्लोक । पं० टोडरमल्लजी तथा पं०
दौलतरामजीकी टीकाके आधारपर स्व० पं० नाथूरामजी प्रेमी द्वारा लिखित नवीन हिन्दीटीका सहित ।
श्रावक-मुनिधर्मका चित्तस्पर्शी अद्भुत वर्णन । पंचमावृत्ति । मूल्य-तीन रुपये, पच्चीस पैसे ।
(८) अध्यात्म राजचन्द्र-श्रीमद् राजचन्द्रके अद्भुत जीवन तथा साहित्यका शोध एवं अनुभव-
पूर्ण विवेचन डॉ० भगवानदास मनसुखभाई महेताने गुर्जरभाषामें किया है। मूल्य-सात रुपये
(९) पंचास्तिकाय-श्रीमद्भगवत्कुन्दकुन्दाचार्यविरचित अनुपम ग्रन्थराज । आ० अमृतचन्द्रसूरिकृत
'समयव्याख्या' एवं आचार्य जयसेनकृत 'तात्पर्यवृत्ति'-नामक संस्कृत टीकाओंसे अलंकृत और पांडे
हेमराजजी-रचित बालावबोधिनी भाषा-टीकाके आधारपर पं० मनोहरलालजी शास्त्रीकृत प्रचलित हिन्दी-
अनुवादसहित । तृतीयावृत्ति । मूल्य-सात रुपये ।
(१०) अष्टप्राभृत-श्रीमत्कुन्दकुन्दाचार्य विरचित मूल गाथाओंपर श्रीरावजीभाई देसाई द्वारा
गुजराती गद्य-पद्यात्मक भाषान्तर । मोक्षमार्गकी अनुपम भेंट । मूल्य-दो रुपये मात्र ।
(११) भावनाबोध-मोक्षमाला-श्रीमद्राजचन्द्रकृत । वैराग्यभावना सहित जैनधर्मका यथार्थ-
स्वरूप दिखाने वाले १०८ सुन्दर पाठ हैं । मू०-एक रुपया, पचास पैसे ।