स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary
आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा
( १२) स्याद्वाद मंजरी—श्रीमल्लिषेणसूरिकृत मूल और श्रीजगदीशचन्द्रजी शास्त्री एम० ए०,
पी-एच० डी० कृत हिन्दी अनुवाद सहित । न्यायका अपूर्व ग्रन्थ है । बड़ी खोजसे लिखे गये १३ परिशिष्ट
हैं । मूल्य-दस रुपये
( १३) गोम्मटसार--कर्मकाण्ड--श्रीमन्नेमिचन्द्रसिद्धान्तचक्रवतिकृत मूल गाथायें, स्व० पं०
मनोहरलालजी शास्त्रीकृत संस्कृतछाया और हिन्दीटीका । जैनसिद्धान्त-ग्रन्थ है। (पुनः छप रहा है )
( १४) समयसार-आचार्य श्रीकुन्दकुन्दस्वामी-विरचित महान् अध्यात्मग्रन्थ, तीन टीकाओं
सहित । ( अप्राप्य )
( १५ ) लब्धिसार ( क्षपणासारगर्भित ) --श्रीमन्नेमिचन्द्रसिद्धान्तचक्रवर्ती-रचित करणानुयोग
ग्रंथ। पं० मनोहरलालजी शास्त्रीकृत संस्कृतछाया और हिन्दीभाषानुवाद सहित । अप्राप्य ।
( १६) द्रव्यानुयोगतर्कणा--श्रीभोजसागरकृत, अप्राप्य है ।
( १७) न्यायावतार - महान् तार्किक श्री सिद्धसेनदिवाकरकृत मूल श्लोक, व श्रीसिद्धर्षिगणीकी
संस्कृतटीकाका हिन्दी-भाषानुवाद जैनदर्शनाचार्य पं० विजयमूर्ति एम० ए० ने किया है । न्यायका सुप्रसिद्ध
ग्रन्थ है । मूल्य-पांच रुपये ।
( १८) प्रशमरतिप्रकरण--आचार्य श्रीमदुमास्वातिविरचित मूल श्लोक, श्रीहरिभद्रसूरिकृत
संस्कृतटीका और पं० राजकुमारजी साहित्याचार्य द्वारा सम्पादित सरल अर्थ सहित । वैराग्यका बहुत सुन्दर
ग्रन्थ है । मूल्य-छह रुपये ।
( १९) सभाष्यतत्त्वार्थाधिगमसूत्र ( मोक्षशास्त्र ) -- श्रीमत् उमास्वातिकृत मूल सूत्र और
स्वोपज्ञभाष्य तथा पं० खूबचन्दजी सिद्धान्तशास्त्रीकृत विस्तृत भाषाटीका । तत्त्वोंका हृदयग्राह्य गम्भीर
विश्लेषण । मूल्य-छह रुपये ।
( २० ) सप्तभंगीतरंगिणी- श्रीविमलदासकृत मूल और स्व० पंडित ठाकुरप्रसादजी शर्मा व्या-
करणाचार्यकृत भाषाटीका । नव्यन्यायका महत्वपूर्ण ग्रन्थ । अप्राप्य ।
( २१ ) इष्टोपदेश-श्रीपूज्यपाद-देवनन्द्याचार्यकृत मूल श्लोक, पंडितप्रवर आशाधरकृत संस्कृत-
टीका, पं० धन्यकुमारजी जैनदर्शनाचार्य एम० ए० कृत हिन्दीटीका, स्व० बैरिस्टर चम्पतरायजी कृत अंग्रेजी-
टीका तथा विभिन्न विद्वानों द्वारा रचित हिन्दी, मराठी, गुजराती एवं अंग्रेजी पद्यानुवादों सहित भाववाही
आध्यात्मिक रचना । मूल्य-एक रुपया, पचास पैसे ।
( २२) इष्टोपदेश- मात्र अंग्रेजी टीका व पद्यानुवाद । मू०-पचहत्तर पैसे ।
( २३) परमात्मप्रकाश-मात्र अंग्रेजी प्रस्तावना व मूल गाथायें । मू०-दो रुपये ।
( २४) योगसार-मूल गाथायें और हिन्दीसार । मू०-पचहत्तर पैसे ।
( २५) कार्तिकेयानुप्रेक्षा-मात्रमूल, पाठान्तर और अंग्रेजी प्रस्तावना ।
मू०-दो रुपये, पचास पैसे ।
( २६ ) उपदेशछाया आत्मसिद्धि-श्रीमद् राजचन्द्रप्रणीत । अप्राप्य ।
( २७) श्रीमद्राजचन्द्र—श्रीमद्के पत्रों व रचनाओंका अपूर्व संग्रह । तत्त्वज्ञानपूर्ण महान् ग्रन्थ
है। म० गाँधीजीकी महत्त्वपूर्ण प्रस्तावना । ( नवीन परिवर्द्धित संस्करण पुनः छपेगा )
अधिक मूल्यके ग्रन्थ मंगाने वालोंको कमीशन दिया जायेगा। इसके लिये वे हमसे पत्रव्यवहार करें ।
श्रीमद् राजचन्द्र आश्रमकी ओरसे
प्रकाशित गुजराती ग्रन्थ
( १ ) श्रीमद् राजचन्द्र ( २ ) अध्यात्म राजचन्द्र ( ३ ) श्रीसमयसार ( संक्षिप्त ) ( ४ ) समाधि
सोपान ( रत्नकरण्ड श्रावकाचारके विशिष्ट स्थलोंका अनुवाद ) ( ५ ) भावनाबोध, मोक्षमाला ( ६ ) पर-
मात्मप्रकाश ( ७ ) तत्त्वज्ञान तरंगिणी ( ८ ) धर्मामृत ( ९ ) स्वाध्याय सुधा ( १० ) सहजसुखसाधन
( ११ ) तत्त्वज्ञान ( १२ ) श्रीसद्गुरुप्रसाद ( १३ ) श्रीमद् राजचन्द्र जीवनकला ( १४ ) सुबोध संग्रह
( १५ ) नित्यनियमादि पाठ ( १६ ) पूजा संचय ( १७ ) आठदृष्टिनो सज्झाय ( १८ ) आलोचनादिपद
संग्रह ( १९ ) पत्रशतक ( २० ) चैत्यवंदन चौवीशी ( २१ ) नित्यक्रम ( २२ ) श्रीमद् राजचन्द्र-जन्म-
शताब्दीमहोत्सव-स्मरणांजलि ( २३ ) श्रीमद् लघुराज स्वामी ( प्रभुश्री ) उपदेशामृत ( २४ ) आत्मसिद्धि
( २५ ) श्रीमद् राजचन्द्र वचनामृत-सारसंग्रह आदि ।
आश्रमके गुजराती-प्रकाशनोंका पृथक सूचीपत्र मँगाइये । सभी ग्रन्थोंपर डाकखर्च अलग रहेगा ।
प्राप्तिस्थान :
( १ ) श्रीमद् राजचन्द्र आश्रम, स्टेशन-अगास
पो० बोरिया : वाया-आणंद ( गुजरात )
( २ ) परमश्रुतप्रभावक-मण्डल ( श्रीमद् राजचन्द्र जैन शास्त्रमाला )
चौकसी चेम्बर, खाराकुँवा, जोहरी बाजार, बम्बई-२
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