स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary
आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्रीमद् राजचन्द्र आश्रम, अगास द्वारा संचालित
परमश्रुतप्रभावक-मण्डल (श्रीमद् राजचन्द्र जैन शास्त्रमाला) के
प्रकाशित ग्रन्थोंकी सूची
(१) गोम्मटसार-जीवकाण्ड-श्रीनेमिचन्द्रसिद्धान्तचक्रवर्तिकृत मूल गाथायें, श्रीब्रह्मचारी
पं० खूबचन्द्रजी सिद्धान्तशास्त्रीकृत नयी हिन्दीटीका-युक्त। अबकी वार पंडितजीने धवल, जयधवल, महाधवल
और बड़ी संस्कृतटीकाके आधारसे विस्तृतटीका लिखी है। तृतीयावृत्ति । मूल्य-छह रुपये ।
(२) स्वामिकार्त्तिकेयानुप्रेक्षा-स्वामिकार्त्तिकेयकृत मूल गाथायें, श्रीशुभचन्द्रकृत बड़ी संस्कृत-
टीका, स्याद्वाद महाविद्यालय वाराणसीके प्रधानाध्यापक, पं० कैलाशचन्द्रजी शास्त्रीकृत हिन्दीटीका । अंग्रेजी
प्रस्तावनायुक्त। सम्पादक-डा० आ० ने० उपाध्ये, कोल्हापुर । मूल्य-चौदह रुपये ।
(३) परमात्मप्रकाश और योगसार-श्रीयोगीन्दुदेवकृत मूल अपभ्रंश-दोहे, श्रीब्रह्मदेवकृत
संस्कृत-टीका व पं० दौलतरामजीकृत हिन्दी-टीका । विस्तृत अंग्रेजी प्रस्तावना और उसके हिन्दोसार सहित ।
महान अध्यात्म-ग्रन्थ । डा० आ० ने० उपाध्येका अमूल्य सम्पादन । नवीन संस्करण । मूल्य-नौ रुपये ।
(४) ज्ञानार्णव-श्रीशुभचन्द्राचार्यकृत महान योगशास्त्र । सुजानगढ़निवासी पं० पन्नालालजी
बाकलीवालकृत हिन्दी अनुवाद सहित । तृतीय सुन्दर आवृत्ति । मूल्य-आठ रुपये ।
(५) प्रवचनसार-श्रीमत्कुन्दकुन्दाचार्यविरचित ग्रन्थरत्नपर श्रीमदमृतचन्द्राचार्यकृत तत्त्वप्रदीपिका
एवं श्रीमज्जयसेनाचार्यकृत तात्पर्यवृत्ति नामक संस्कृत टीकायें तथा पांडे हेमराजजी रचित बालावबोधिनी
भाषाटीका । डा० आ० ने० उपाध्येकृत अध्ययनपूर्ण अंग्रेजी अनुवाद और विशद प्रस्तावना आदि सहित
आकर्षक सम्पादन । तृतीयावृत्ति । मूल्य-पन्द्रह रुपये ।
(६) बृहद्द्रव्यसंग्रह-आचार्य नेमिचन्द्रसिद्धांतदेवविरचित मूल गाथा, श्रीब्रह्मदेवविनिर्मित
संस्कृतवृत्ति और पं० जवाहरलालशास्त्रिप्रणीत हिन्दी-भाषानुवाद सहित । षड्द्रव्यसप्ततत्त्वस्वरूपवर्णनात्मक
उत्तम ग्रन्थ । तृतीयावृत्ति । मूल्य-पांच रुपये, पचास पैसे ।
(७) पुरुषार्थसिद्ध्युपाय-श्रीअमृतचन्द्रसूरिकृत मूल श्लोक । पं० टोडरमल्लजी तथा पं०
दौलतरामजीकी टीकाके आधारपर स्व० पं० नाथूरामजी प्रेमी द्वारा लिखित नवीन हिन्दीटीका सहित ।
श्रावक-मुनिधर्मका चित्तस्पर्शी अद्भुत वर्णन । पंचमावृत्ति । मूल्य-तीन रुपये, पच्चीस पैसे ।
(८) अध्यात्म राजचन्द्र-श्रीमद् राजचन्द्रके अद्भुत जीवन तथा साहित्यका शोध एवं अनुभव-
पूर्ण विवेचन डॉ० भगवानदास मनसुखभाई महेताने गुर्जरभाषामें किया है। मूल्य-सात रुपये
(९) पंचास्तिकाय-श्रीमद्भगवत्कुन्दकुन्दाचार्यविरचित अनुपम ग्रन्थराज । आ० अमृतचन्द्रसूरिकृत
'समयव्याख्या' एवं आचार्य जयसेनकृत 'तात्पर्यवृत्ति'-नामक संस्कृत टीकाओंसे अलंकृत और पांडे
हेमराजजी-रचित बालावबोधिनी भाषा-टीकाके आधारपर पं० मनोहरलालजी शास्त्रीकृत प्रचलित हिन्दी-
अनुवादसहित । तृतीयावृत्ति । मूल्य-सात रुपये ।
(१०) अष्टप्राभृत-श्रीमत्कुन्दकुन्दाचार्य विरचित मूल गाथाओंपर श्रीरावजीभाई देसाई द्वारा
गुजराती गद्य-पद्यात्मक भाषान्तर । मोक्षमार्गकी अनुपम भेंट । मूल्य-दो रुपये मात्र ।
(११) भावनाबोध-मोक्षमाला-श्रीमद्राजचन्द्रकृत । वैराग्यभावना सहित जैनधर्मका यथार्थ-
स्वरूप दिखाने वाले १०८ सुन्दर पाठ हैं । मू०-एक रुपया, पचास पैसे ।