स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary
आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्टोंके विशेष शब्दोंकी सूची ( ११ ) ३९
—दर्शनोंमें ईश्वर संबंधी मान्यता ३२६ —आत्मवादियोंके सिद्धांत ३१५
—ईश्वरके अस्तित्वमे तीन मुख्य प्रमाण ३२६ —पंचस्कंध रूप आत्मा ३१६
—इन प्रमाणोंकी समीक्षा (टि.) ३२७ —विज्ञानप्रवाह और आधुनिक मानसशास्त्र
—ईश्वरके संबंधमें शंका-समाधान ३२८ (टि.) ३१६
—आधुनिक पाश्चिमात्य विद्वानोंका मत ३२९ —भवसंतति ३१७
—न्यायवैशेषिक साहित्य ३३० —बौद्ध साहित्यमें आत्मा संबंधी चार
मान्यतायें ३१८-३२१
प्रदेश २८८-२८९
—प्रदेश और अवयव २८८ मीमांसादर्शन (पूर्वमीमांसा) ३३९-३४५
—आत्माके प्रदेश २८८ —मीमांसकोंके आचार विचार ३३९
—प्रदेशोंमें संकोच-विस्तार २८९ —मीमांसक सिद्धांत ३३९-३४३
—आत्माका मध्यमपरिणाम २८९ —वेदका अपौरुषेयत्व ३४०
—रामानुजके सिद्धांतके साथ तुलना २८९ वेद और नैयायिक आदि दर्शन (टि.) ३४०
—मीमांसक और जैन ३४३-४
प्राण २९९-३०० —कुमारिलभट्ट और अनेकांतवाद ३४४
—विविध अर्थ २९९ —मीमांसादर्शनके मुख्य प्ररूपक ३४५
—द्रव्यप्राण-भावप्राण २९९ वेदान्तदर्शन (उत्तरमीमांसा) ३४६-३४७
—सिद्धोंके प्राण ३००
बौद्धदर्शन ३०३-३२१ —वेदान्ती साधुओंका आचार विचार ३४६
—बौद्धोंके सिद्धांत और आचार विचार ३०३ —वेदान्त दर्शनकी व्यापकता ३४६
—मुख्य सम्प्रदाय ३०३ —वेदान्त दर्शनका साहित्य ३४६-७
सौत्रांतिक आदि सम्प्रदायोंका समय (टि.) ३०४ —वेदान्त दर्शनकी शाखायें ३४७
—सौत्रांतिकोंके सिद्धांत और उनके —शंकरका मायावाद तथा
आचार्य ३०४, ३०५ विज्ञानवाद और शून्यवाद ३४८
—वैभाषिक (सर्वास्तिवादी) ३०५ लोक २९०-२९२
—सौत्रांतिक और वैभाषिकोंके समान —तीनलोक २९०
सिद्धांत ३०६ —वैदिकलोक २९१
—शून्यवाद (मध्यमवाद-नैरात्म्यवाद) ३०८ —बौद्धलोक २९१
—शंका-समाधान पूर्वक प्ररूपण ३०८-३११ सांख्ययोगदर्शन ३३२-३३८
—शून्यवाद और स्याद्वाद (टि.) ३०८ —सांख्य, योग, जैन और बौद्ध ३३२
—शून्यवादके मुख्य प्ररूपक आचार्य ३११ —श्रमण और ब्राह्मण संस्कृति ३३२
—विज्ञानवाद (योगाचार) ३१२-३१४ —सांख्य और योगदर्शन ३३३
—शून्यवाद और विज्ञानवाद (टि.) ३१२ —सांख्योंके आचार विचार ३३३-३३५
—विज्ञानवादका शंका-समाधान —सांख्योंका वेदोंको न मानना ३३४
पूर्वक प्रतिपादन ३१३-३१५ —सांख्यदर्शनके मुख्य प्ररूपक ३३५
—नैरात्म्यवाद और आत्मवाद ३१३-३१५ —योगदर्शन और उसका साहित्य ३३७
—आत्मा और आलयविज्ञान (टि.) ३१४ —जैन और बौद्ध दर्शनमें योग ३३७-३३८
—विज्ञानवादके मुख्य आचार्य ३१४-३१५ हिंसा २९२
—अश्वघोषका तथतावाद ३१५ —जैन शास्त्रोंमें हिंसा २९२
—अनात्मवाद ३१५ —संकल्पी हिंसा २९२