अनुरागसागर वाणी
Anuragsagar Vani
स्वामी मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
चार खानि के तत्व भेद
चार खानि के तत्व भेद
धर्मदास ने पूछा
धर्मदास नायो पद शीशा। यह समुझाय कहो जगदीशा॥
सकल योनि जिव एक समाना। किमि कारण नहिं इक सम
ज्ञाना॥
सो चरित्र मुहि कहौ बुझाई। जाते चित संशय मिट जाई॥
धर्मदास ने पूछा-हे सदगुरु! सभी योनियों में यदि एक ही जीव है तो क्या कारण है कि सबमें एक समान ज्ञान नहीं है?
साहिब ने कहा
चार खानि जिव एकै आहीं। तत्व वशेष अहैं सुन ताहीं॥
सो अब तुमसों कहो बखानी। तत्व एक अस्थावर जानी॥
ऊष्मज दौय तत्व परमाना। अंडज तीन तत्वगुणजाना॥
पिंडज चार तत्व गुण कहिये। पाँच तत्व मानुष तन लहिये॥
तासों होय ज्ञान अधिकारी। नर की देह भक्ति अनुसारी॥
साहिब ने कहा कि यद्यपि चारों खानि में एक ही जीव है, पर तत्वों के कारण सबमें कम-ज्यादा ज्ञान है, चेतना है। अस्थावर खानि के जीवों की रचना एक तत्व से हुई है, उकमज में दो तत्व हैं, अंडज में तीन तत्व हैं, पिंडज में चार तत्व हैं और मनुष्य में पाँचों तत्व हैं। इसी कारण मनुष्य में ज्ञान अधिक है, यह भक्ति-ध्यान के अनुकूल है।
धर्मदास ने पूछा
हे साहिब मुहि कहु समुझाई। कौन कौन तत्व इन सब पाई॥
अंडज अरु पिंडज के संग। ऊष्मज और अस्थावर अंगा॥
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साहिब बन्दगी
सो साहिब मोहि वरणि सुनाओ । करो दया जनि मोहि दुराओ ॥
धर्मदास ने कहा कि कौन-2 सी खानि में कौन-2 से तत्व हैं, कृपा करके मुझे समझाकर कहिए, छिपाइए मत।
साहिब ने कहा
खानि अंडज तीन तत्व हैं, अप वायु अरु तेज हो।
अचल खानि एक तत्वहि, तत्व जल का थेग हो ॥
साहिब ने कहा कि अंडज खानि में तीन तत्व हैं-पानी, हवा और अग्नि। दूसरी ओर अस्थार में एक ही तत्व है-जल।
ऊष्मज तत हैं दोय, वायु तेज सम जानिये।
पिंडज चारहिं सोय, पृथ्वी तेज अप वायु सम ॥
उकमज में दो तत्व हैं-वायु और अग्नि। पिंडज में चार तत्व हैं-पृथ्वी, अग्नि, जल और वायु।
पिंडज नर की देह सँवारा । तामें पाँच तत्व विस्तारा ॥
ताते ज्ञान होय अधिकाई । गहे नाम सत लोकहिं जाई ॥
पिंडज की मनुष्य खानि में पाँच तत्व हैं, इसलिए उसमें अधिक ज्ञान है और वो नाम के सहारे अमर लोक जा सकता है।
दुर्लभ मानुष जन्म है, मिले न बारम्बार।
तरुवर ज्यों पत्ती झड़े बहुरि न लागे डार ॥