आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
१० | आल्हाखण्ड | ५२६
को गति बरणै तहँ बेड़ियन कै उनतो भली मचाई रार ६५
इनहुन दुर्गति तिनकी कीन्ही कायर छोड़ि भागि मैदान ॥
कटि कटि कल्ला गिरैं बलेड़ा घैहा होयँ अनेकन ज्वान ६६
पाँचसै बेड़िया घायल हैगे सब दल रहिगा एकहजार ॥
तीनसै क्षत्रिय मोहबेवाले जूझे समर तहाँ त्यहिवार ६७
रानी सुनवाँ सुमिया बेड़िनि जादुन करैं तहाँपर रार ॥
कोऊ काहूते कमती ना दोऊ जादुन में हुशियार ६८
बीरमहम्मद की पुरिया को सुमिया छाँड़ि दीन त्यहिवार ॥
नारसिंह की जादू लैके सुनवाँ तजा तुरतललकार ९९
चिल्हिया हैकै सुनवाँ सुमिया दूनन खूब कीन मैदान ॥
लड़ते लड़ते दूनों चिल्हिया पहुँचींजायतुरतअसमान १००
लड़ते लड़ते द्वउ ऊपर ते नीचे गिरीं तड़ाका आय ॥
बड़ी लड़ाई भै पंजन ते अद्भुत समर कहानाजाय १०१
जहाँ लड़ाई द्वउ चिल्हियनकी इन्दल तहाँ पहुँचा आय ॥
सुनवाँ बोली तहँ इन्दल ते बेटा मूड़ देउ बगदाय १०२
इन्दल बोले तब सुनवाँ ते कैसे देवैं मूड़ गिराय ॥
जो हम मारैं यहि तिरिया को तौ रजपूती धर्मनशाय १०३
हाथ मेहरियन पर छाँड़ैं ना कबहूँ बीर समर में माय ॥
कैसे मारैं हम तिरिया को माता सोचो और उपाय १०४
इतना सुनिकै सुनवाँ बोली बेटा जूरा लेउ उड़ाय ॥
वातैं सुनिकै ये सुनवाँ की जूरा काटि लीन त्यहिठायाँ १०५
जीवन दान दीन सुमियाको सोऊ भागि तड़ाकाधाय ॥
जादू झूठी भई सुमिया की तबसोलागितहाँपछिताय १०६
ऊदन देबाकी मारुन मा बेड़िया भागे खेत बराय ॥
उदयसिंहकाहरण । ५२७ ११
जो कोउ भागतहै सम्मुख ते त्यहिना हनैं बनाफरराय १०७
मारे मारे तलवारिन ते बिड़िया चिरियाकरें निदान ॥
खेत छूटिगा सब बिड़ियन ते जीता उदयसिंह मैदान १०८
बाजे डंका अहंतंका के हैगा घोर शोर घमसान ॥
जितने क्षत्री मोहबेवाले डेरन आयगये ते ज्वान १०६
चील्ह रूप है सुनवाँ रानी महलन आयगयी तत्काल ॥
कूच करायो फिरि लश्कर को बेटा देशराज के लाल ११०
आल्हा ठाकुर पचशब्दा पर इन्द्ल पपिहापर असवार ॥
घोड़ बेंदुला पर ऊदन हैं कम्मरपरी नाँगि तलवार १११
यहु अलबेला भीषमवाला देवा मैनपुरी चौहान ॥
घोड़ मनोहर पर सोहतहै रणमा बड़ालड़ैयाज्वान ११२
कैयो दिनकी मैजलि करिकै झुन्नागढ़ै पहुँचे आय ॥
गड़िगा तम्बू तहँ आल्हा का भारी ध्वजारहा फहराय ११३
ढोल नगारा तुरही बाजीं हाहाकार शब्दगा छाय ॥
गा हरिकारा तब झुन्नागढ़ राजै खबरिजिनावा जाय ११४
आल्हा ऊदन मोहबे वाले धूरे परे हमारे आय ॥
आवैं फौजें झारखण्ड ते अबतो नगर मोहोबे जायँ ११५
सुनिकै बातें हरिकारा की पलकी तुरत लीन मँगवाय ॥
इशरत मुहरें इक हीरा लै पलकी चढ़ा तड़ाकाधाय ११६
जहाँ बनाफर आल्हा ठाकुर राजा तहाँ पहुँचा आय ॥
आदर करिकै आल्हा ठाकुर अपने पास लीन बैठाय ११७
द्वरि अशर्फी दी सम्मुखमा हीरा हाथ दीन पकराय ॥
सखियाँ गाया तब ऊदन की आल्हा यथातथ्यगे गाय ११८
बड़े प्रेम सों दोऊ ठाकुर बोलैं प्रीति रीति के भाय ॥
१२ आल्हखण्ड । ५२८
बिदा मांगिकै फिरि आल्हासों राजा चढ़ा पालकी जाय ११६
गा महराजा मुन्नागढ़ मा तम्बुन स्वये बनाफरराय ॥
राति बसेरा करि मुन्नागढ़ भुरहीं कूच दीन करवाय १२०
कैयो दिनकी मैजलि करिकै मोहबे गये बनाफरराय ॥
सौसौ तोपैं दर्गी सलामी जबघरगयेउदयसिंहराय १२१
को गति वरणै त्यहि समयाकै हमरे बून कही ना जाय ॥
ऊदनहरण पूर अब ह्रैगा ध्यावैं तुम्हें शारदा माय १२२
कण्ठ में बैठो तुम महरानी भूले अक्षर देउ बताय ॥
आशिर्वाद देउँ मुंशीसुत जीवो प्रागनरायण भाय १२३
रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥
मालिक ललिते के तबलौं तुम यशसों रहौ सदा भरपूर १२४
माथ नवावों पितु माता को जिनबल पूर कीन यह गाथ ॥
नहीं भरोसा निज भुजबल का स्वामी रामचन्द्र रघुनाथ १२५
पूर तरंग यहाँ सों ह्रैगा सुमिरों तुम्हें भवानीकन्त ॥
राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छा यही मोरि भगवन्त १२६
इति श्रीलखनऊनवासि (सी,आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजबावूप्रागना-
रायणजीकीआज्ञानुसारउनामप्रदेशान्तर्गतपँड़रीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भव
बुधकृपाशङ्करसूनु पं० ललिताप्रसादकृतऊदनहरण
वर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥
उदयसिंहकाहरणसमाप्त ॥
इति ॥
अथ आल्हखण्ड ॥
बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्धवर्णन ॥
सवैया ॥
ब्याकुल गंध्रब नागसबै नरदेव अदेव लहे दुखभारा।
गोतनु धारि गयी पिरथी अरथी सँग देवन लै त्यहिबारा ॥
वाणि भई तबहीं नभते ललिते अवधेशके होब कुमारा ।
ध्यावत ब्रह्म सुरासुर जाहि स्वई प्रभु राम लियो अवतारा १
सुमिरन ॥
दोउ पद बन्दौं रामचन्द्र के जिनबल चलाजाउँ भवपार ॥
राम न होते जो दुनियामा बेड़ा कौन लगावत पार १
कौन समुन्दर को मथिडारत चौदारतन लेत निकराय ॥
कोथों मारत दशकन्धर को धारत कौन धर्मपथ आय २
कोथों तारत इनपापिन को जिनकीदशाकही ना जाय ॥
मारा मारा कहि तरिगे जो पापी बालमीकि असभाय ३
गीधअजामिलगतिगणिकाकी सबकोविदितभलीविधिआय ॥
१४
५. पञ्चम भाग: आल्हा का संन्यास, अमरत्व वरदान व महाकाव्य उपसंहार
२ आल्हाखण्ड । ५३०
ये सब पापी हैं प्रथमै के तरिगे रामचरण को ध्याय ४
स्वई भरोसा धरि जियरेमा नितप्रति धरों चरणपरमाथ ॥
पारलगायो भवसागर ते स्वामी रामचन्द्र रघुनाथ ५
छोड़ि सुमिरनी अब रघुबर कै बेला गौन कहौं सब गाय ॥
ब्रह्मा ठाकुर दिल्ली जैहैं पैहैं विजय पिथौराराय ६
अथ कथाप्रसंग ॥
एक समैया इक औसर मा बैठे सभा रजा परिमाल ॥
आल्हा ऊदन इन्द्दल देवा लाखनि साथ और नरपाल १
को गति बरणै त्यहि समयाकै भारी लाग राजदरवार ॥
त्यही समैया त्यहि औसरमा आवा उरई का सरदार २
आवो आवो बैठो बैठो राजै कीन बहुत सतकार ॥
बैठिग ठाकुर उरई वाला आला चुगुलन मा सरदार ३
बिना बुलाये ते बोला फिरि तुम सुनिलेउ रजापरिमाल ॥
औसर ऐसो फिरि पैहौ ना ब्रह्मा गौनलेउ यहिकाल ४
बैठि कनौजी लाखनिराना बैठे देशराज के 'लाल ॥
लैकै वीरा यहि औसर मा तुम धरिदेउ रजापरिमाल ५
कौन बहादुर यहि समया मा बेला गौन चबावै पान ॥
स्यावासि स्यावासि माहिलठाकुर तुम्हरे बचन ठीक परमान ६
इतना कहिकै परिमालिक जी तुरतै धरा तहाँपर पान ॥
है कोउ क्षत्री तेहेवाला लेवै पान आन सो ज्वान ७
सुनिकै बातें परिमालिक की सब कोउ गये सनाकाखाय ॥
बोलि न आवा क्यहु ठाकुरते आनन गये तुरत मुरझाय ८
चारि घरीदिन यहिविधि बीता कोउ न पान पास समुहान ॥
तवै बहादुर द्यावलि वाला पहुँचा उदयसिंह तहँ ज्वान ६
बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५३१ ३
माहिल बोले तब ब्रह्मा ते ठाकुर काह धरावो नाम ॥
पान चबावो तुम दिल्ली का नाहीं उदयसिंह का काम १०
जाति कुलीने नहिं ऊदन हैं नहिं विश्वासयोग यहिकाल ॥
इन्हें निकारयो परिमालिक है खोटे देशराज के लाल ११
मतलब इन ते जो रहिहैं ना पिरथी करी बहुत सनमान ॥
अगुवाकारी होयँ बनाफर तौ सब लड़ैं बीर चौहान १२
पान चबावों तुम जल्दी सों देबे बिदा तुरत करवाय ॥
इतना सुनिकै ब्रह्मा चलिभे पहुँचे पाननिकट फिरिआय १३
लै कै बीरा तहँ ऊदनते ब्रह्मा गये तड़ाकाखाय ॥
आल्हा-मनमा कायल द्वैगे ऊदन बहुत गये शरमाय १४
दूनों भाई चले तड़ाका दशहरि पुरै पहुँचे आय ॥
आल्हा बोले तहँ ऊदन ते यह गति भई लछुरवा भाय १५
बड़ बड़ राजन के सम्मुख मा ब्रह्मा लीन्ह्यो पान छिनाय ॥
घटिहा राजा मोहबे वाला कैसी हँसी दीन करवाय १६
तुम नहिं मोहवे ऊदन जावो हट्का रहे लछुरवाभाय ॥
कहा हमारा तुम माना ना ताका पायगयो फलआय १७
इतना कहिकै आल्हा ठाकुर सोये बिकट नींद को पाय ॥
कछू दिनौना के बीते मा गौना समय पहुँचा आय १८
मल्हना निश्चय तब ठहरायो जैहैं नहीं बनाफरराय ॥
बिना बनाफर उदयसिंह के लैहै कौन बिदा करवाय १६
यहै सोचिकै मल्हना रानी लाखनिराना लीन बुलाय ॥
आल्हा ऊदन दुउ रूठे हैं जान्ने आप कन्नौजीराय २०
हूँ दिन बाकी नहिं गौना के याकी कौन करी तदबीर ॥
जब सुधि आवै इन बातन की तबहीं होय करेजे पीर २१
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४ आल्हाखण्ड । ५३२
आश हमारी अब तुमहीं लग साँची सुनो कनौजीराय ।.
तुम जो जावो ब्रह्मा सँग मा तौ सबकाम सिद्धिहैजाय २२
सुनिकै बातें ये मल्हना की बोले फेरि कनौजीराय ॥
हम चलिजैबे ब्रह्मा सँग मा लैबे विदा मातु करवाय २३
इतना कहिकै लाखनि चलिभे अपनी फौज पहुँचे आय ॥
बाजा डङ्का इत ब्रह्मा का हाहाकार शब्द गा छाय २४
उतै कनौजी लाखनिराना अपनी फौज लीन सजवाय ॥
यह सुधि पाई उदयसिंह जब आये तबै तड़ाकाधाय २५
औ यह बोले लखराना ते मानो कही कनौजीराय ॥
साथी हमरे की ब्रह्मा के जोतुमफौजलीनसजवाय २६
पहिले लड़िकै हमरे सँगमा पाछे धरयो अगारी पाँय ॥
इतना सुनिकै सय्यद् बोले तुम सुनिलेउ कनौजीराय २७
संग न जावो तुम ब्रह्मा के सम्मन यहै ठीक ठहराय ॥
करो लड़ाई तुम ऊदन ते तौ सब जैहैं काज नशाय २८
हितू तुम्हारे नहिं ब्रह्मा हैं जैसे हितू बनाफरराय ॥
कहा मानिकै यह सय्यद् का लाखनि फेंटदीनखुलवाय २६
भई अठारह उरई वाले मोहबे अये तड़ाकाधाय ॥
बड़ बड़ शूरन को सँग लैके ब्रह्मा कूच दीन करवाय ३०
सात दिनौना के अरसा माँ दिल्ली गये बँदेलेराय ॥
दिल्ली केरे फिरि ढाँड़े गा लश्कर ब्रह्मा दीन डराय ३१
गड़िगा तम्बू तहँ ब्रह्मा का भारी ध्वजा रहा फहराय ॥
माहिल पहुँचे फिरि दिल्ली मा जहँ पर बैठ पिथौरा राय ३२
बड़ी खातिरी पिरथी कीन्ही अपने पास लीन बैठाय ॥
काहे आये उरई वाले आपन हाल देउ बतलाय ३३
[Header] बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ४३१
इतना सुनिकै माहिल बोले मानो साँच पिथौराराय ॥
ब्रह्मा आये हैं गौने को फौजैं परीं डाँड़ पर आय ३४
पहिले बीरा ऊदन लीन्ह्यो सो ब्रह्मा ने लीन छिनाय ॥
अब मन तुम्हरे जैसी आवै तैसी कहो पिथौराराय ३५
इतना सुनिकै पिरथी बोले माहिल साँच देयँ बतलाय ॥
बिना लड़ाई के गौना कहु कैसे देयँ पिथौरा राय ३६
करें लड़ाई अब सैंभराभरि पाछे बिदा लेयँ करवाय ॥
यह कहि दीजो तुम ब्रह्मा ते माहिल बार बार समुझाय ३७
इतना सुनिकै ब्रह्मानँद ते माहिल खबरि जनाई आय ॥
बिना लड़ाई के मनिहैं ना यहु महराज पिथौराराय ३८
इतना सुनिकै ब्रह्मा ठाकुर कागज कलमदान मँगवाय ॥
लिखिकै चिट्ठी दी धावन को धावन चला तड़ाका धाय ३६
जहाँ कचहरी पृथीराज की धावन अटा तड़ाका आय ॥
हाथ जोरिकै धावन तुरतै चिट्ठी तहाँ दीन पकराय ४०
बाँचत चिट्ठी ब्रह्मानँद की पिरथी क्रोध कीन अधिकाय ॥
शूर चौंड़िया को बुलवायो औ सबहालकह्योसमुझाय ४१
तुरतै डंका को बजवावो सबियाँ फौज लेउ सजवाय ॥
बाँधि जँजीरन तुम ब्रह्मा का हमका बेगि दिखावो आय ४२
हुकुम पिथौरा का पावनखन डंका तुरत दीन बजवाय ॥
बाजे डंका अहतंका के हाहाकार शब्द गा छाय ४३
सजिसजितोपें खेतन चलिभईं हाथिन होन लागि असवार ॥
झीलमबखतरपहिरी सिपाहिन हाथ म लई ढाल तलवार ४४
दुइ दुइ भाला इक इक बरछी कोउ कोउ बाँधी तीनकटार ॥
वीर तमंचा कड़ाबीन औ गदकागुर्ज लीन त्याहिवार ४५
६ आल्हखण्ड । ५३४
कच्छी मच्छी नकुला सब्जा हरियल मुश्की घोड़ अपार ॥
ताजी तुर्की पँचकल्यानी इनपर होन लागि असवार ४६
अंगद पंगद मकुना भौंरा सजिगे श्वेतवरण गजराज ॥
सोहैं अँवारी तिन हाथिन पर बहुतन हौदा रहे विराज ४७
को गति बरणै त्यहि समया कै मानो कोप कीन सुरराज ॥
बाजैं डंका अह्तंका के मानों गिरैं उपर ते गाज ४८
पहिल नगाड़ा में जिनबन्दी दुसरे फाँदि भये असवार ॥
तिसर नगाड़ा के बाजत खन चलिभे सबै शूर सरदार ४९
खर ,खर खर खर कै रथदौरे रवन्ना चले पवन की चाल ॥
हाथी चिंघेरै घोड़ा हींसे कीन्हेनिशब्दबहुतनरपाल ५०
गुस्ती धावन तहँ ब्रह्मा का. तम्बुन अटा तड़ाका आय ।
खबरि सुनाई यह ब्रह्मा को की दल अवै चँदेलेराय ५१
इतना सुनिकै ब्रह्मा ठाकुर फौजैं तुरत लीन सजवाय ॥
बाजे डंका अह्तंका के बंकन शंक दीन बिसराय ५२
ई निरशंका मोहबे वाले , बाँधेनि तुरत ढाल तलवार ॥
साजा ठाढ़ा हरनागर था ब्रह्मा फाँदि भये असवार ५३
पहिली लड़ाई भै तोपन कै पाछे चलन लागि तलवार ॥
कहुँ कहुँ भाला कहुँ कहुँ बरछी मारन लागि शूर सरदार ५४
तीर तमंचन की मारुइ भई कोताखानी चलीं कटार ॥
तेगा चमकै बर्दवान का ऊना चलै बिलाइति क्यार ५५
को गति बरणै त्यहि समयामा बाजै छपक छपक तलवारे ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्त की धार ५६
ना मुहँ फेरैं दिल्ली वाले ना ई मोहबे के सरदार ॥
मुण्डन केरे मुड़ चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ५७
[Header] बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५३५
को गति बरनै जगनायक कै मारे घूमि घूमि तलवार ॥
ब्रह्मा ठाकुर के मुर्चा मा कोउ न ठाढ़ होय सरदार ५८
लरिका मरिगे पृथीराज के क्षत्रिन छाँड़ि दीन मैदान ॥
धाँधू चौंड़ा त्यहि समया मा भारी कीन घोर घमसान ५६
भा खलभल्ला औ हल्लाअति लल्ला डारि भागि हथियार ॥
ना मुहँ फेरैं दिल्ली वाले ना ई मोहबे के सरदार ६०
कीरति प्यारी के भूखे हैं दोऊ दिशिमा परम जुझार ॥
फिरि फिरि मारैं औ ललकारै यहु मल्हना को राजकुमार ६१
घोड़ा मारै भल टापन ते ऊपर आप करै तलवार ॥
ब्रह्माठाकुर के मुर्चा मा क्षत्री डारि भागि हथियार ६२
देखि तमाशा चौंड़ा धाँधू रहिगे चुप्प साधि त्यहि बार ॥
यहु निरशंकी परिमालिक का बहुतन पठै दीन यमद्वार ६३
रण अभिलाषा नहिं काहू के सब कउ गये मनैमन हार ॥
ठाकुर बेढब जगनायक है मैने जौनु चँदेले क्यार ६४
धाँधू ठाकुर के मुर्चा मा दूनों हाथ करै तलवार ॥
चौंड़ा ब्राह्मण इकवन्ता से बीरन रहा तहाँ ललकार ६५
रोज केतकी कहुँ फूलै ना चंपा रोज न लागै डार ॥
गई जवानी फिरि मिलिहै ना ना फिरि रोजचलै तलवार ६६
कीरति जैहै सब दुनिया मा जो कउ लड़ै शूर सरदार ॥
आखिर देही यह रहि है ना जोरी जोरन जोर हजार ६७
सदा न फूलै यह बन त्वरई यारो सदा न सावन होय ॥
सदा न पैहौ यह नर देही यारो सदा न जीवै कोय ६८
ऐसा बोल चौंड़ा कहि कहि क्षत्रिन दीन्हे खूब जुझाय ॥
ब्रह्मा ठाकुर त्यहि समया मा भारी हाँक कहा गुहराय ६६
८ आल्हाखण्ड । ५३६
पावैं पिछाड़ी का डाखो ना यारो राख्यो धर्म हमार ॥
मारो मारो ओ रजपूतो देहैं विजय अवश्य करतार ७०
इतना कहिकै ब्रह्मा ठाकुर लाग्यो करन आप तलवार ॥
ब्रह्माठाकुर के मुर्चा मा कोउ न ठाढ़ होय सरदार ७१
जैसे भेड़िन भेड़हा पैठै जैसे अहिर बिडारै गाय ॥
तैसे मारे ब्रह्मा ठाकुर रणमा कोउ न रोकै पायँ ७२
ब्रह्माठाकुर के मारुन मा कोऊ शूर नहीं समुहाय ॥
लश्कर भाग्यो पृथीराज का पायो विजय चंदेलेराय ७३
त्यही समैया त्यहि औसर मा माहिल उरई का सरदार ॥
लिल्ली घोड़ी पर चढ़ि बैठ्यो तिकतिककरनलागत्यहिवार७४
जहाँ कचहरी पृथीराज की भारी लाग राज दरबार ॥
उतरिकै घोड़ीते भुइँ आवा पहुँचा उरई का सरदार ७५
आवत दीख्यो जब माहिल को राजा कीन बड़ा सत्कार ॥
आवो आवो उरई वाले माहिल राजा हितू हमार ७६
इतना कहिकै महराजा ने अपने पास लीन बैठाय ॥
'माहिल बोले त्यहि समया मा मानो कही पिथौराराय ७७
लड़िकै जिनिहौ ना ब्रह्माते चहुवल देयँ तुम्हें करतार ॥
धाँधू चौंड़ा सब कोउ हारे जीता पूतु चंदेले क्यार ७८
बड़े लड़ैया मोहबेवाले उनके बांट परी तलवार ॥
उड़न बछेड़ा जिनके घर मा तिनते लड़ै कौन सरदार ७९
पिस्थी बोले तब माहिल ते ठाकुर उरई के सरदार ॥
कौन उपाय करैं यहि औसर ज्यहिमा विजयदेयँकरतार ८०
इतना सुनिकै माहिल बोले ओ महराज पिथौराराय ॥
रूप जनाना करि ताहर का डोला आपु देउ पठवाय ८१
बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध। ५३७ ६
गाफिल देखें जब ब्रह्मा का तबहीं कैदलेयँ करवाय ॥
इतना सुनि कै ताहर बोले सम्मत नीक नहीं यह भाय ८२
रूप जनाना हम करिबे ना चहु तन धजीधजी उड़िजाय ॥
कीरति जैहै सब दुनिया ते औ रजपूती धर्म नशाय ८३
इतना सुनिकै चौंड़ा बोला हम बनिजाब जनानाभाय ॥
बिना बयारी जूना टूटै औ बिन औषध बहै वलाय ८४
साम दाम औ दण्ड भेद सों नितप्रति चतुरकरतहैं काम ॥
मोहिं पियारी यह कीरति है जीतैं शत्रु होय जगनाम ८५
सुनिकै बातें ये चौंड़ा की बोला पृथीराज चौहान ॥
स्याबासिस्याबासि चौंड़ा बकशी तुम्हरे बचन मोहिं परमान ८६
सुनी पिथौरा की बातें ये चौंड़ा चला तड़ाका धाय ॥
जायकै पहुँच्यो रंगमहल में सबियाँ जेवर लीन मँग़ाय ८७
अनवट बिछिया पाँयन पहिरे पहिरे कड़ा छड़ा त्यहिबार ॥
धरि परुपान दऊ पैरन मा त्यहिपर पायजेब झनकार ८८
किंकिणि पहिरी करिहाँयें मा कण्ठम पहिरि मोतियनहार ॥
बाजू जोसन बाँधि बजुल्ला दोऊ भुजन कीन श्रृंगार ८६
बनी पछेला पहुँची ककना दूनों हाथन करें बहार ॥
आठ अँगुरियन छल्ला पहिरे अँगुठा लीन आरसीधार ६०
चुरियाँ पहिरी दउ हाथन मा तिनबिच लीन पनेरियाडार ॥
नथुनी लटकन बेसरि पहिरी कानन करनफूल शृङ्गार ६१
बेंदा धारयो फिरि माथे मा बँदियाँ शिरपर करें बहार ॥
मिस्सी रगरी सब दाँतन मा चौंड़ा बना जनाना यार ६२
सिया ओधि धरि छाती मा चोलीबन्द लीन कसवाय ॥
चीरी सारी काशमीर की शोभा कही बूत ना जाय ६३
१० आल्हाखण्ड । ५३८
दुलाहिनि बनिकै चौंड़ा बकशी तुरतै चढ़ा पालकी जाय ॥
जहरबुझाई लीन कटारी सो सारी में धरी चुराय ६४
ताहर बैठे दल गंजन पर धाँधू हाथी पर असवार ॥
झीलमबखतर पहिरिसिपाहिन हाथ म लई ढाल तलवार ६५
चली पालकी फिरि चौंड़ा की लश्कर कूच दीन करवाय ॥
इक हरकारा ताहर पठयो औ सवहाल दीनबतलाय ६६
खबरि जनावो तुम ब्रह्मा को बेला बिदा लेयँ करवाय ॥
आवत डोला है वेलाका इकले अत्रो चँदेलेराय ६७
इतना सुनिकै धावन चलिभा तम्बुन फेरि पहुंचा आय ॥
खवरि जनाई सब ब्रह्मा को जो कछु ताहर दीन बताय ६८
सुनिकै बातें हरकारा की हरनागर पर भयो सवार ॥
घरी अढ़ाई के अरसा मा पहुँचा मोहबे का सरदार ६६
आवत दीख्यो जब ब्रह्मा का ताहर बोले बचन उदार ॥
आवो आवो ब्रह्मा ठाकुर तुमते हारिगयी तलवार १००
डोला लाये हम बहिनी का ठाकुर बिदालेउ करवाय ॥
कौन डसरिहा हाँ तुम्हरो है जो अब रारि मचावैआय १०१
लड़ि भिड़ि तुमने हम हारे सब तब यह ठीक लीन ठहराय ॥
रंडा बैठै जो बहिनी मम तौ सब जैहैं काम नशाय १०२
यहै सोचिकै गहराजा ने डोला यहाँ दीन पठवाय ॥
बड़ी खुशहाली भै राजा के संग न आये बनाफरराय १०३
जो कहुँ औते ऊदन ठाकुर तौ हाँ होत युद्ध अविकाय ॥
बड़ी खुशहाली भै राजा के जोतुमलीन्ह्योपानछिनाथ १०४
अब यह डोला है बहिनी का मोहबे आपु देउ पठवाय ॥
मुनि मुनि बातें ये ताहर की ब्रह्मा तुरत गये पतियाय १०५
बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५३६ ११
भलओअनभल जबजसहोवय तबतस बुद्धि जाय बौराय ॥
सुनान हन्ना क्यहु सुवरण का नाकयहु दीख नैनसों जाय १०६
रचा विधाता नहिं कबहुंथा मारन हेतु गये रघुराय ॥
यह अनहोनी हम दिखलाई सोचोसदास्वजनजनभाय १०७
होनहार बश ब्रह्मा हैके डोला निकटगये नगचाय ॥
तबहीं चौंड़ा उठि पलकी ते बाँये दीन कटारीघाय १०८
दहिने सांगहनी धाँधू ने ताहर मार्यो तीरचलाय ॥
तीनों घायपरे ब्रह्मा के तुरतै गिरे मूर्च्छाखाय १०९
यह गति दीखी जब ब्रह्मा की रोवनलागि मोहबियाज्वान ॥
तबललकार्यो जगनायकजी होवो खड़े समर चौहान ११०
दगाते मार्यो तुम ब्रह्माको हमरे साथ करो तलवार ॥
जियत न जाई कउ दिल्ली का सबका डरों जानसों मार १११
तौ तौ मैने चंदेले का नहिं ई डारौं मुच्छ मुड़ाय ॥
सुनिकै बातें जगनायक की ताहर कूच दीन करवाय ११२
ताहर नाहर के जातैखन जगना अटा तहाँ पर जाय ॥
मूर्च्छित दीख्यो ब्रह्मानँदको पलकी उपर दीन पौढ़ाय ११३
लै कै पलकी जगनायक जी तम्बुन फेरि पहुँचेआय ॥
जागी मूर्च्छा तहँ ब्रह्मा की बोले तुरत चंदेलेराय ११४
कूच करायो नहिं लश्कर को मोहबे खबरि देउ पठवाय ॥
सुनिकै बातें ये ब्रह्मा की धावन तुरत लीन बुलवाय ११५
कही हकीकति सब धावन ते तुरतै चला शीशकोनाय ॥
जहाँ कचहरी परिमालिक की धावन तहाँ पहुँचा आय ११६
कही हकीकति महराजाते तुरतै गिरे पछाराखाय ॥
बीछी काट्यो या बर्रै ने मानो डसा भुजंगम आय ११७
९२ आल्हाखण्ड । ५४०
बिपदा आई फिरि मोहबेमा फैली बात महल में जाय ॥
सुनी हकीकति रानी मल्हना महलन गिरी मूर्च्छाखाय ११८
बारह रानी चंदेले की रोवैं तहाँ पछारखाय ॥
ख्याति रोवैं घर अपने मां सपनेसरिसजगतदिखलाय ११९
साँचो स्वपना जग हम देखैं कोउन पूत पतोहू भाय ॥
आज मरैं दिन दूसर काल्ही याही साँच परै दिखलाय १२०
इयहिते भैया यहि दुनिया मा कबहुँन करै उपरको शीश ॥
सम्मत हमरो यह साँचा है नितप्रतिभजैरामजगदीश १२१
सोउन बाचा यहि दुनिया मा बाहू गये जासु के बीश ॥
सहसन बाहुनका अर्जुन भा ताकाहनावशिजगदीश १२२
काह हकीकति नरपामर की जो करिलेय उपर को शीश ॥
रहिगा ठाकुर ना सिरसा का कलियुगवीरधीरअवनीश १२३
ताते चाही नर देही को झुकि २ झुकतर झुकि जाय ॥
त्यों त्यों त्यों त्यों ऊपर जावै ज्यों २ शीश झुकावत जाय १२४
जैसे तरुवर है रसालको बौरन भार रहा गरुवाय ॥
ज्यों ज्यों बाढ़ फल रसालके त्योंत्योंझुकत २झुकिजाय १२५
ज्यों ज्यों पकिपकि टपकतआवैं त्यों त्यों डार उपरको जाय ॥
ऐसो सम्मत यह साँचा है साँचासमयगयोनगन्याय १२६
नहीं तो आल्हा को थाल्हाकरि ललिने धर्म देत दिखलाय ॥
काह हकीकति नर पामर की जोअभिमानकरतरहिजाय १२७
सुनी पाठ है जिन दुर्गा की खिन हना वीर समुदाय ॥
धर्म यथारथकी बातें सब अबकोस्वजनदेयदिखलाय १२८
ताते गाथा यह सब छूटा लूटा दुःख मोहोबा आय ॥
खबरि पहुँचीगै दथहरिपुरमा आल्हानिकटतड़ाका जाय १२६
बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५४१ १३
आल्हा ऊदन इन्दल तीनों लागे बैठि तहाँ पछिताय ॥
धावलि सुनवाँ फुलवा तीनों सुनतै गिरीं पछाराखाय १३०
बड़ी दुर्दशा त्यहि समया कै हमरे बूत कही ना जाय ॥
रानी मल्हना के महलन मा सब दुखउतरा गायबजाय १३१
फिरि फिरि रानी रोदन ठानैं सखियाँ रहीं तहाँ समुझाय ॥
माहिल भूपति द्वउ मरिजावैं उरई गिरै गाज अरराय १३२
जिनकीचुगुलिनते महलनमा यहदुखपरा आजदिन आय ॥
मरै पिथौरा दिल्लीवाला जो यहु पूत डरा मरवायें १३३
होय निपूती रानी अगमा सोऊ महल बैठि पछिताय ॥
इतना कहिकै रानी मल्हना फिरिफिरिबारबारपछिताय १३४
ताहर नाहर गा दिल्ली मा राजै खबरि जनाई जाय ॥
बात फैलिगै सब दिल्ली मा औरनिवासपहूंची आय १३५
खबरि पायकै रानी अगमा महलन गिरी पछारा खाय ॥
कन्त जूझिगे रण खेतन मा बेला सुना तहाँपर आय १३६
यहु पछितानी मन अपने मा भूषण बसन दीन छिरकाय ॥
कहा न मानै तहँ काहू का बेला गिरै परै बिलखाय १३७
औ गरियावै बेला रानी चौंड़ा बंश नाशि हैजाय ॥
बने जनाना तू दिल्ली मा ओदहिजार भवानी खाय १३८
नाहक जन्मी धाँधू मैया दैया गती कही ना जाय ॥
नहिं रजपूती कछु ताहर मा धोखे हना तीरका घाय १३६
इतना कहिकै बेला रानी तुरतै उठी तड़ाका धाय ॥
महल छोड़ि कै महतारीका पहुँची और महलमें जाय १४०
प्रथम युद्ध मा जो गौने मा सो हम सबै गये अवगाय ॥
आशिर्वाद देउँ मुन्शी सुत जीवो प्रागनरायणभाय १४१.
६४ आल्हखण्ड । ५४२
रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥
मालिक ललितेके तबलों तुम यशसों रहौ सदामरपूर १४२
माथ नवावों पितु माता को जिन बल पूरिभई यह गाथ ॥
करों तरंग यहाँ सों पूरण तवपदसुमिरि भवानीनाथ १४३
जो अभिलाषा मन हमरे है सो तुम पूरिकरो भगवन्त ॥
राम रमामिलि दर्शन देवैं इच्छा यही भवानीकन्त १४४
इति श्रीलखनऊनिवासि(सी.आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजबाबू प्रयागनारायण
जीकीआज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गत पंडरीकलांनिवासि मिश्रवंशोद्भव
बुधकृपाशङ्करसूनु पण्डितललिताप्रसादकृतबेलागौन आनयमैठाकुर
ब्रह्मासिंहघायल वर्णनोजनामप्रथमयुद्धेप्रथमस्तरंगः १ ॥
बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्धसमाप्त ॥
इति ॥
॥ श्रीगणेशाय नमः ॥
अथ आल्हखण्ड ॥
बेलाकेगौने की दूसरीलड़ाई में रानालाखनिसिंह
तथा उदयसिंहजी की चढ़ाई का वर्णन ॥
सवैया ॥
हे बिधि दे वरदान यही पद पंकज ईश सदा हम ध्यावैं ।
होवैं जहाँ जलहू थल में रघुनन्दन को तहँ शीशनवावैं ॥
और न काम कछू हमको इक रामको नाम नितै हमगावैं।
याँच यही लहिते कर साँच मिलैं रघुनाथ तबै सुखपावैं १
सुमिरन ॥
तुम्हें विधाता हम ध्यावतहैं धाता कृपा करौ अब हाल ॥
परम पियारे रघुनन्दनजी जाते दरशदेयँ यहिकाल १
युक्तिबतावो स्वइ धाता तुम जाते मिटै सकल भ्रमजाल ॥
दशरथ नन्दन रघुनन्दन को बन्दन करों सदासबकाल २
चन्दन अक्षत औ पुष्पन सों पूजों शम्भु भवानी लाल ॥
कण्ठ हलाहल भल सोहत है सोहै बाल चन्द्रमा भाल ३
२ आल्हखण्ड । ५३४
जटा के ऊपर सुरसरि सोहै तापर बैठ भुजग विकराल ॥
श्वेत वरण तन भस्म रमाये धारे हृदय मुण्ड के माल ४
को गति बरणै शिवशङ्कर कै बस्तर नित्त करै विशराम ॥
भाँग धतूरन को भोजन करि ध्यावैं नित्त रामको नाम ५
छूटि सुमिरनी गै देवन कै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥
चढ़ी कनौजी अब दिल्लीपर चढ़ि हैं उदयसिंह सरदार ६
अथ कथाप्रसंग ॥
बेला बैठी निज महलन माँ मनमा धरे राम को ध्यान ॥
कन्त झूझिगे रणखेतन मा फिरियहकरनलागिअनुमान १
नैनन आँसू ढारन लागी पागी महादुःख भ्रमजाल ॥
मूर्च्छा जागी जब बेला की चिट्ठी लिखन लागित्यहिकाल २
लिखी हकीकति यह ऊदनका बेटा देशराज के लाल ॥
तुम्हें मुनासिब यह नाहीं थी जैसी कीन आप यहिकाल ३
वादा कीन्ह्यो तुम ब्याहे मा गौने विदा लेब करवाय ॥
कन्त जूझिगे रण खेतन माँ अन्तौमिलनकठिनदिखराय ४
भये जनाना तुम द्यावलि के ऊदन बार बार धिकार ॥
नालति तुम्हरी रजपूती का नाहक लेउ ढाल तलवार ५
होतिउ बिटिया तुम द्यावलिके करतिउ बैठि महल श्रृङ्गार ॥
शोच न होतै तब बेला के ठाकुर उदयसिंह सरदार ६
होत जो बेटा बच्छराज का ठाकुर शूर वीर मलखान ॥
तौ का करतीं दिल्ली वाले बिल्ली रूप सबै चौहान ७
गिल्ली ह्वैहै आल्हा ठाकुर दिल्ली देखि डरे यहिकाल ॥
ऐसी दिल्ली है मोहवे मा तौ का करें रजा परिमाल ८
दिल टिल दिल्ली खलभल्ली ई लल्ली देशराज के लाल ॥
बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५४५ ३
होत इकछी ज्यहि पल्ली मा बेटा बच्छराजे को बाल ९
करत दुपल्ला सो छाती के घाती समर शूर मलखान ॥
तुम्हें मुनासिब अब याही है आवो उदयसिंह चढ़िज्वान१०
प्रथम मिलावो मोहिं प्रीतमको बदला लेउ बन्धुको आन ॥
जो नहिं अहौ उदयसिंह तुम मरि हैं गदा बीर चौहान ११
शोक समानी अलसानी सो मानी प्रथम यौबना नारि ॥
पूरी पाती लय छाती में थाती यौबन के उनहारि १२
यौवन केरे मदमाती सो घाती समय दीख त्यहिबार ॥
फरकत यौवन भुज दक्षिण है करकत हृदय करेजाफार १३
धड़कनअनवटबिछियाअँगुरिन कड़कत चोलीबन्द निहार ॥
तड़कन तनियाँ चौतनियाँसब रनियाँ दुखितभई त्यहिबार १४
दुख मदमाती रस बिसराती आती यार घांवरा धार ॥
फिर सतरांती पछताती मन घाती समय दीखत्यहिबार १५
थर थहराती लहराती मन आती मन्द मन्द त्यहिबार ॥
लखि कर पाती दुखघातीको ढाहत नैनन नीर अपार १६
थाहत आई द्वारपाल ढिग पाती दुःख करेजा फार ॥
सो दै दीन्ही द्वारपाल को मुद्रा दीन्हे एक हजार १७
मुद्रा रुद्रा के तुल्या जो मुल्या बिका सबै संसार १८
राम न लीन्ह्यो इक मुद्रा को त्यागे लंक अवध सरदार १८=
अनुचित वानी हम ठानी है रामै कहा जौन सरदार ॥
तीन लोक के आनँद करता हरता दुःख जगत भरतार १६
तिनसरदारकहब जगअनुचित नहिं यह देव वाणि निरवार ॥
बेद शास्त्रन के भोगत खन आल्हा जीतिलीन संसार २०
परम पवित्र चरित्र हैं जिनके तिनके नाम लेय संसार ॥
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