शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharangadhara Samhita with Dipika Hindi Commentary
शार्ङ्गधराचार्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
पञ्चमोऽध्यायः] कल्ककल्पना 115
पञ्चमोऽध्यायः] कल्ककल्पना 115
शुण्ठी कल्क | शार्ङ्गधरसंहितायां मध्यमखण्डे कल्ककल्पना नाम
पीतो मसूरयूषेण कल्कः शुण्ठीशलाटुनः ॥ २८॥ | पञ्चमोऽध्यायः ॥ ५॥
जयेत् सङ्ग्रहणीं तद्वत् तक्रेण बृहतीभवः । | सोंठ तथा बेल की गुदी का कल्क, मसूरी के यूष (दाल
इति श्रीदामोदरसूनुना शार्ङ्गधरेण विरचितायां | के पानी) के साथ अथवा बनभण्टा की जड़ का कल्क मट्ठा के साथ पीने से 'ग्रहणी' रोग को जीत लेता है।
इस प्रकार वैद्यरत्न पण्डित तारादत्त त्रिपाठी के पुत्र डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी विरचित दीपिका व्याख्या,
विशेष वक्तव्य आदि से संवलित शार्ङ्गधरसंहिता मध्यमखण्ड का पांचवा अध्याय समाप्त ॥ ५॥
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