Skip to content
SarvaKosh
Back to the archive

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

गर्भ में जीव पहुँचने का समय

Page 163Permalink

दें। यह औषधि गर्भ स्थित होने पर ४ मास तक दे सकते हैं। द्वितीय मास- स्तन बड़े और स्थूल होने लगते हैं और उनमें कठोरता भी आ जाती है। स्तन वृत्त भी बड़े हो जाते हैं, उनके आसपास काले रंग के बिन्दु जैसे धब्बे उभरे से दिखाई देते हैं। उनमें वेदना होती है। प्रातः शय्या से उठने पर अक्सर वमन हो जाती है। स्वभाव बदल जाता है। नीली रंग प्रकट हो जाती है और नाभि प्रदेश भीतर को हो जाता है। इस मास के अन्त तक स्तनों में दूध भी आ जाता है।

तृतीय मास- गर्भवती के मूत्र को एक शीशे के पात्र में रख दिया जाये, तो उसके ऊपर सफेद रंग की मलाई जैसा हल्का द्रव तैरने लगता है।

चतुर्थ मास- गर्भवती का उदर सामने की ओर अधिक बढ़ने लगता है। स्तन वृत्त फूलने लगते हैं। नाभि ऊपर की ओर उठ आती है। गर्भाशय में भ्रूण का हिलना-डुलना स्पष्ट जान पड़ता है, जैसे-जैसे बालक का विकास होता है, वैसे-वैसे हिलना-डुलना भी अधिक अनुभव होता है।

पंचम मास- गर्भस्थ बालक के हृदय का शब्द गर्भवती के उदर पर कान रखकर या यन्त्र द्वारा सुना जा सकता है ज्यों-ज्यों प्रसव का समय निकट आता जाता है त्यों-त्यों वह शब्द अधिक स्पष्टता से सुनाई पड़ने लगता है।

छठा मास- इस मास में गर्भवती के अस्वस्थ लक्षण (जी मिचलाना, वमन, मन्दगिनी आदि) दूर हो जाते हैं। वह अब स्वस्थ प्रतीत होती है। सातवें, आठवें और नवें मास में उदर विशेष रूप से अधिक बड़ा हो जाता है और गर्भवती बड़ी सुगमता से बच्चे के हृदय गति के शब्द का अनुभव करती है।

तीसरे मास में गर्भित भ्रूण के हाथ पाँव और मस्तक ये पाँच अंग प्रकट हो जाते हैं तथा सूक्ष्म अंग प्रत्यंग और मस्तक आदि के साथ ही सुख-दुःख के अनुभव करने वाले ज्ञान तन्तु

इच्छानुसार सन्तान

१५७

वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri