इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
चेतावनी
इसी प्रकार यदि स्त्री ने पुत्र को जन्म दिया तो पुत्र का जन्म होने के पश्चात् जो प्रथम मासिक धर्म होगा वह मास रजः प्रधान मास होगा। इसके पश्चात् जब अगला मासिक धर्म होगा तो वह रजः न्यून मास होगा। इसी प्रकार आगे गणना करें।
पुत्र का जन्म होने के पश्चात्-
| रजः प्रधान मास | रजः न्यून मास
---|---|---
प्रथम ' मासिक धर्म | (१) दिनांक..... | (२) दिनांक.....
| (३) दिनांक..... | (४) दिनांक.....
| (५) दिनांक..... | (६) दिनांक.....
जिन पुरुषों में सामान्य स्थिति में स्त्री के रजः से वीर्य की मात्रा न्यून है तो उन्हें चाहिए कि वह रजः न्यून मास में युगम ६, ८, १०, १२, १४, १६ रात्रियों में ही गर्भाधान करें तो निश्चय ही उनको पुत्र लाभ होगा।
जिस बच्चे का जन्म हुआ हो उसी के अनुरूप एक चार्ट उपरोक्त प्रकार का बना लेना चाहिए। आपको इस चार्ट की सहायता से रजः न्युनाधिक मास का पता बड़ी ही सुगमता से चलता रहेगा। आपको अपनी रुचि के मास को निकालने में किसी भी कठिनाई का अनुभव नहीं होगा।
शमीभरवत्थ आरूढस्तत्र पुंसुवन् कृतम्।
तद् वै पुत्रस्य वेदनं तत् स्त्रीष्वा भरामसि॥
अथर्ववेद ६/११/१
अर्थ- शमी (जन्ड) नामक वृक्ष के ऊपर उगा हुआ पीपल के (पचांग का चूर्ण) पुमान् पुत्र उत्पन्न करने को औषधि है। इसी से पुत्र लाभ होता है और इसी औषधि को सेवन से उत्पन्न वीर्य को आधान करना चाहिये।
इसके सेवन से पुरुष का वीर्य पुष्ट होकर गर्भाधान क्रिया समय अधिक मात्रा में स्वलिप्त होकर पुत्र को ही जन्म देगा तथा पीपल के ऊपर उगा हुआ शमी पुत्री उत्पन्न करने की औषधि है।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
मासिक धर्म से चौथे दिन एक प्लास (ढाक) का हरा पत्ता जीवित बछड़े वाली गाय के दूध के साथ घोटकर स्त्री को देने से, उस मास में गर्भ रहने पर पुत्र उत्पन्न होगा।
गर्भिणी स्त्री को दूसरे मास के प्रारम्भ से ही प्रतिदिन प्लास (ढाक) के छाया में सुखाये हुए पत्तों का चूर्ण समान भाग मिश्री मिलाकर ३ माशा जीवित बछड़े वाली गाय के दूध के साथ निरन्तर सेवन कराने से पुत्र लाभ हो सकता है।
जिनके कन्या ही कन्या होती हैं और वह उपरोक्त उपायों को या तो समझ न सके हैं या क्रियात्मक रूप में न ला सके हैं, तो वह इस बात का ध्यान रखें कि गर्भस्थित हो जाने के ८१ से ८५ दिन के अन्दर यदि स्त्री को 'सूर्य गुणी' औषधि का प्रयोग कराया जाय तो पुत्र उत्पन्न हो सकता है, क्योंकि स्त्रियों में चन्द्र गुण की अधिकता होती है और पुरुषों में सूर्य गुण की। 'सूर्य गुणी' औषधि वेद-कृति १३, राम विहार कालोनी, जिला सहकारी बैंक के पीछे, मुरादाबाद से प्राप्त हो सकती है।
श्रांति निवारण
अधिकतर व्यक्ति युगम अयुगम रात्रियों के निकालने में भ्रम में पड़ जाते हैं कोई तो श्रुतु स्नान के पश्चात् से तिथि की गिनती करने लगते हैं। इसका सही रूप इस प्रकार है कि मासिक धर्म जिस समय आरम्भ होता है उसी समय के पश्चात् जो पहली रात्रि आयेगी वही पहली रात्रि है और २४ घण्टे बाद दूसरा दिन या दूसरी रात्रि मानी जायगी जैसे मासिक धर्म रात्रि को आठ बजे आरम्भ हुआ तो वही रात्रि पहली है और उसी से २४ घण्टे पश्चात् अगले दिन रात्रि को पाँनेआठ बजे तो पहली रात्रि है और सवाआठ बजे दूसरी रात्रि मानी जायगी। जिस दिन से मासिक धर्म आरम्भ होता है वही पहला दिन कहलाता है। उसी दिन से १६ रात्रि तक गर्भाधान होता है उसके पश्चात् नहीं।
इच्छानुसार सन्तान
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वारन्द्ध गुप्तः
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एक और भ्रान्ति है, कोई इन तिथियों को पत्रे से जोड़ते हैं, कोई कलेंडर से यह दोनों ही गलत हैं। वास्तव में जिस दिन स्त्री को मासिक धर्म होता है, वही दिन उसका पहला दिन होता है अर्थात् पहली तारीख होती है।
चेतावनी
१- ४,७,११,१३ रात्रियों दोष युक्त कलंक को प्रदान करने वाली सन्तान को जन्म देती हैं। इन रात्रियों में कभी भूल कर भी गर्भ स्थापित न करें।
२- परदेश में अथवा दूसरे के गृह पर कभी भी गर्भाधान न करें।
३- ५,६,८,९,१०,१२,१४ रात्रियाँ दोष रहित हैं, इनमें गर्भ स्थापित करना उचित है।
४- मेरा जन्म सम्बत् १९८४ अर्थात् १९२७ ई० का है। १९५६ में इच्छानुसार सन्तान पुस्तक लिखने लगा। उसी बीच व्यास ग्रन्थ देखने को मिला, उसका आदि अन्त कुछ नहीं था। बीच के हो पुच्छ थें उसी में सोलह कला की चर्चा को देखा, जो पुस्तक में आंकित है। तब से अब तक मैं बराबर इसी विचार में लगा रहा कि सन्तानों में इस प्रकार का दोष युक्त अन्तर क्यों कर होता है। आज सम्बत् २०६४ प्रथम ज्येष्ठ की अमावस्या के दिन यज्ञ समय पर गायत्री जाप के पश्चात् अनायास नेत्रों के सामने तेज प्रकाश की चमक, चमकी और उसी क्षण परमात्म कृपा से ५१ वर्ष पूर्व इस उलझे हुये प्रश्न का समाधान मिला। वह समाधान था 'यह सब आतंक के कारण ही होता है' अर्थात् स्त्री के मासिक धर्म का 'रेजः'।
अब आपके सामने हर दिन की रात्रि के स्त्री के आतंक की
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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