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बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

( २६७ )
त्रिलोचन योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी नरमुण्ड का
चिह्न दिखाई दे तो त्रिलोचन योग माना जाता है ।
फल : जिसके हाथ में त्रिलोचन योग होता है वह
व्यक्ति दीर्घायु तथा समाज में पूर्ण सम्मानित व्यक्ति होता
है । ऐसा व्यक्ति शत्रुओं का प्रबल संहारक होता है । राज-
नीति में यह व्यक्ति चतुर होता है तथा अपनी योग्यता एवं
चतुराई के बल पर मन्त्री स्तर तक पहुँचने में सक्षम होता है ।
त्रिलोचन योग

चन्द्र योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी चन्द्रमा का
चिह्न दिखाई दे तो वह चन्द्र योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में चन्द्र योग होता है वह व्यक्ति
नेता या नेता के समान होता है । जीवन में वह पूर्ण सुखों का
भोग करता है । आर्थिक दृष्टि से कोई न्यूनता नहीं रहती ।
वह व्यक्ति साहसी, चतुर तथा प्रत्येक कार्य में दक्ष होता है ।
चन्द्र योग

चक्र योग :
परिभाषा : यदि शनि पर्वत पर चक्र का चिह्न
दिखाई दे तो वहां चक्र योग समझना चाहिए ।
फल : जिस व्यक्ति के हाथ में चक्र योग होता है वह
उच्च अधिकारी, धन सम्पत्ति का मालिक एवं निष्पक्ष न्याय
करने वाला सम्माननीय व्यक्ति होता है ।
चक्र योग

( २६८ )
चतुर्मुख योग :
परिभाषा : यदि मणिबन्ध के ऊपर मछली की सी
आकृति हो तो वह चतुर्मुख योग होता है।
फल : जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है वह
ऊंची शिक्षा प्राप्त, चतुर, एवं दूरदर्शी व्यक्ति होता है। वह
कई कलाओं को भली प्रकार से जानता है तथा वह उदार,
गुणवान, उच्च पदाधिकारी और मधुर भाषी होता है।
(चित्र विवरण: चतुर्मुख योग)
अंशावतार योग :
यदि हथेली में कहीं पर भी ग्राम का
चिह्न दिखाई दे तो अंशावतार योग होता है ।
अंशावतार योग रखने वाला व्यक्ति राजा के
समान होता है। तथा अपने कार्यों से समाज में सम्मानित
होता है। ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में कई स्त्रियों के संपर्क में
रहता है तथा उनका भोग करता है। कला पूर्ण वस्तुओं का
शौकीन यह व्यक्ति कलाकारों का सम्मान करता है तथा
अपने आप में धनवान होता है ।
(चित्र विवरण: अंशावतार योग)
सार्वभौम योग :
यदि हाथ में कहीं पर भी बाण का चिह्न
दिखाई दे तो वह सार्वभौम योग होता है।
जिसके हाथ में कहीं यह योग होता है वह
बचपन में यद्यपि गरीब होता है परन्तु यौवनावस्था मे पूर्णतः
सुखी एवं सम्पन्न होता है तथा उसके जीवन की सभी भौतिक
इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं ।
(चित्र विवरण: सार्वभौम योग)

( २६६ )
व्याघ्रहन्ता योग :
यदि हाथ में कहीं पर भी पुरुष के चेहरे
का सा चिन्ह होता है वहां यह योग होता है ।
जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
गुणवान, चतुर, तथा परिस्थितियों के अनुसार अपने आपको
ढालने वाला व्यक्ति होता है । सभा-चतुर, भाषण देने की
कला में प्रवीण ऐसा व्यक्ति समाज में उचित सम्मान प्राप्त
करता है । ऐसा व्यक्ति क्षमावान तथा गुणवान होता है और
शत्रुओं का नाश करने में पूर्ण समर्थ होता है ।
व्याघ्रहन्ता योग
दृढ योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी नेत्र का चिह्न
दिखाई दे तो वहां दृढ़ योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
दृढ़ निश्चय वाला साहसी, बलवान, तथा शत्रुओं का मान मर्दन
करने वाला होता है ।
दृढ योग
भाग्यवान योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी छतरी का
सा चिह्न दिखाई दे तो वहा भाग्यवान योग होता है ।
फल : जिसके हाथ मे यह योग होता है वह व्यक्ति
प्रसिद्धि प्राप्त चतुर, तथा बन्धु-बान्धवों का सहायक होता है ।
ऐसा व्यक्ति पूर्णतः भाग्यशाली कहा जाता है ।
भाग्यवान योग

( ३०० )
कुल वर्द्धन योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी चक्र का चिह्न
हो तो वहां कुलवर्द्धन योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
दीर्घायु, ऐश्वर्यशाली तथा अपने परिवार को ऊंचा उठाने वाला
होता है ।
कुलवर्द्धन योग
विहग योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में उड़ते हुए पक्षी का सा
चिह्न हो तो वहां विहग योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में विहग योग होता है वह व्यक्ति
झगड़ालू, गोपनीय कार्यों को करने वाला यथा सी० आई० डी०
होता है ।
विहग योग
शृंगाटक योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कही पर भी शंख का
चिह्न दिखाई दे तो वहां शृंगाटक योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
अपनी साधारण स्थिति से ऊपर उठने वाला परिश्रम पूर्वक धन
संचय करने वाला दीर्घायु तथा समस्त प्रकार के भोगों को
भोगने वाला होता है ।
शृंगाटक योग

( ३०१ )
हल योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में हल का सा चिह्न दिखाई
देता है तो वहां हल योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह भूमि का
स्वामी होता है तथा भूमि सम्बन्धी कार्यों में वह विशेष लाभ
उठाता है । पशु पालन कृषि, मकान बनाना, या उसका विक्रय
करना आदि कार्यों से वह श्रेष्ठ धन लाभ करता है तथा धन-
पति होता है ।
हल योग
कमल योग :
परिभाषा : यदि हाथ की दस उंगलियों में से सभी
उगलियों पर चक्र के निशान हों तो कमल योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में ऐसा योग होता है वह जातक
विख्यात, समाज में सम्मान प्राप्त करने वाला, सुशिक्षित, बात
चीत करने में चतुर, दीर्घायु, स्वस्थ एवं योग्य होता है ।
कमल योग
वापी योग :
परिभाषा : यदि दस उंगलियों में से नव उंगलियों
पर चक्र के निशान हों तो वापी योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में ऐसा योग होता है वह साधारण
श्रेणी से ऊपर उठने वाला नम्र, गुणवान, चतुर, तथा सुखी
होता है ।
वापी योग

( ३०२ )
मरुत्वेग योग :
परिभाषा : यदि मात्र दाहिने हाथ में चारों उंगलियो
पर शंख के चिह्न हों तो मरुत्वेग योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह जीवन
में कई विदेश यात्राएं करता है तथा समाज में पूर्ण सम्मानित
जीवन व्यतीत करता है ।
(चित्र: मरुत्वेग योग)
वायु योग :
परिभाषा : यदि दाहिने हाथ की चारों उंगलियों पर
चक्र का चिह्न हो तो ऐसा योग कहलाता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
शुभ कार्यों को करने से एवं धार्मिक कार्यों में रुचि लेने से
समाज मे सम्मान प्राप्त करता है तथा निरन्तर उन्नति करता
रहता है ।
(चित्र: वायु योग)
प्रभन्जन योग :
परिभाषा : जिसके दाहिने हाथ में तीन उंगलियों पर
चक्र के चिह्न हों तो प्रभन्जन योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वे व्यक्ति
जीवन में उन्नति करते हैं तथा व्यापार के कार्यों से विदेश यात्रा
करते हैं ।
(चित्र: प्रभंजन योग)

( ३०३ )
पारिजात योग :
परिभाषा : जिसके दाहिने हाथ में तीन उंगलियों
पर शंख के चिह्न दिखाई दें तो पारिजात योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वे व्यक्ति
अपने जीवन के मध्य काल में और वृद्धावस्था में विशेष सुख
प्राप्त करते हैं । अपने अधिकारियों से लाभ उठाते हैं, तथा
उच्च पद प्राप्त करते हैं । ऐसे व्यक्ति सामाजिक रीति रिवाजों
तथा रूढ़ियों का कट्टरता के साथ पालन करते हैं ।
पारिजात योग
गज योग :
परिभाषा : जिसके दोनों हाथों में पांच शंख तथा
तीन चक्र के चिह्न हों तो गज योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
पशु पालक होता है । पशुओं के लेन देन अथवा कृषि कार्यों से
वह सम्पन्न होता है तथा आनन्द पूर्वक जीवन व्यतीत करता
है ।
गज योग
नवेश योग :
परिभाषा : जिसके दोनों हाथों में मिलाकर पांच
चक्र तथा तीन शंख के चिह्न हों तो नवेश योग होता है ।
फल : इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति दीर्घायु
धन-वान, गुण-वान, चतुर, एवं प्रबल भाग्योदय वाला होता
है । इसे जीवन में कई बार आकस्मिक धन प्राप्ति होती
रहती है ।
टिप्पणी : शंख और चक्र के चिह्न हाथों की उंग-
लियों के अन्तिम सिरों पर ही देखने चाहिए ।
नवेश योग

( ३०४ )
कालनिधि योग :
परिभाषा : जिसके दोनों हाथो की उंगलियों में
मिलाकर चार शंख तथा चार चक्र के चिह्न हों तो वह व्यक्ति
कालनिधि योग सम्पन्न होता है।
फल : जिसके हाथ में ऐसा योग होता है उसका
रहन-सहन ऊंचा होता है। वह उत्तम स्वभाव वाला तथा
उच्च पदाधिकारी होने के साथ-साथ भाग्यशाली पुरुष कहा
जाता है।
(चित्र विवरण: कालनिधि योग)
अष्ट लक्ष्मी योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में जीवन रेखा, स्वास्थ्य
रेखा, भाग्य रेखा तथा सूर्य रेखा स्पष्ट व दृढ़ हों तो अष्ट
लक्ष्मी योग होता है।
फल : जिसके हाथ मे यह योग होता है वह व्यक्ति
अतुलनीय सम्पत्ति का स्वामी होता है। भौतिक दृष्टि से
उसके जीवन की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं तथा समाज में
विशेष सम्मान होता है। ऐसा व्यक्ति विदेश यात्राएं करने
वाला, देश विदेश में सम्मान पाने वाला तथा पूर्ण भाग्यशाली
कहा जाता है।
(चित्र विवरण: अष्टलक्ष्मी योग)

ललाट रेखाएं

हाथ की रेखाओं के अध्ययन के साथ-साथ एक कुशल हस्तरेखा शास्त्री के
लिये यह भी आवश्यक है कि वह उस व्यक्ति के शरीर के अन्य अंगों का भी एक
दृष्टि में अवलोकन कर ले और उनसे सम्बन्धित फल कथन भी अपने मन में निश्चय
कर ले । ऐसा होने पर एक पूरा अध्ययन उसके मानस में हो सकता है और इस
प्रकार उसका जो भविष्य कथन होगा वह अपने आप में पूर्ण प्रामाणिक तथा श्रेष्ठ
होगा ।

ललाट रेखा

प्राचीन मुनियों ने ललाट पर सात रेखाएं बताई हैं। उनके अनुसार इन
रेखाओं तथा उनसे सम्बन्धित ग्रहों के नाम इस प्रकार हैं :
१ ललाट में केशों के निचले भाग में जो पहली रेखा है, उस रेखा के स्वामी
शनि हैं।
२. इस रेखा के नीचे जो दूसरी रेखा है उसके स्वामी गुरु हैं ।
३. तीसरी रेखा के स्वामी मंगल हैं।
४. चौथी रेखा के स्वामी सूर्य हैं।
५. पांचवी रेखा के स्वामी शुक्र हैं।
६. छठी रेखा के स्वामी बुध हैं। तथा—
७. सातवीं रेखा जो कि सबसे नीचे है इसके स्वामी चन्द्रमा हैं।

( ३०६ )
ललाट पर राशियों के चिन्ह तथा स्थान :
१. मेष इसका स्वरूप अंकुश के समान होता है तथा बायें कान के ऊपर
के भाग में इसका स्थान रहता है ।
२. वृष इसका चिह्न हिन्दी के चार के अंक के समान होता है तथा भाल
के मध्य में इसका स्थान है ।
३. मिथुन इसका चिह्न सीधी दो खड़ी रेखाएं ( || ) हैं । इसका स्थान
बायें कान के ऊपर के भाग में मेष के पास में स्थित है ।
४. कर्क इसका चिह्न सात के जोड़ा का चिह्न है पर इसमें एक सात का
अंक सीधा तथा दूसरे सात का अंक उल्टा होता है । इसका
स्थान ललाट के ऊपर के भाग में होता है ।
५. सिंह उकार की मात्रा के समान इसका वृत्ताकार चिह्न होता है । यह
दाहिनी भौं पर पाया जाता है ।
६. कन्या अंग्रेजी के जुड़े हुए एन पी के समान इसका चिह्न होता है । यह
दाहिने भाल पर होता है ।
७. तुला नीचे सीधी रेखा और ऊपर धनुष के समान चिह्न तुला राशि
का होता है । यह दाहिने कान के उर्ध्व भाग पर पाया जाता है ।
८. वृश्चिक इसकी आकृति एम के समान होती है । यह मुंह के ऊपर के
हिस्से में दिखाई देता है ।
९ धनु इसका चिह्न खजूर की शाखा के समान होता है । यह दाहिने
नेत्र के ऊपरी भाग में दिखाई देता है ।

( ३०७ )
१० मकर अंग्रेजी के वी पी के समान इसका चिह्न होता है । यह ठोडी के
पास मिलता है ।
११. कुम्भ टेढ़ी दो रेखाओं वाला चिह्न कुम्भ का माना गया है । इसका
स्थान बाईं भौं होता है ।
१२. मीन ३६ के अंक के समान इसका चिह्न होता है । शरीर के बायें भाल
पर यह चिह्न मिलता है ।
ललाट पर ग्रहों के चिन्ह तथा स्थान :
१ सूर्य इसका चिह्न मध्य बिन्दु युक्त वृत्त का चिह्न होता है । इसका
स्थान दाहिने नेत्र में रहता है ।
२. चन्द्र धनुष के आकार का इसका चिह्न होता है । बायें नेत्र में इसका
निवास होता है ।
३. मंगल तीन शाखाओं वाला मंगल का चिह्न सिर के ऊपरी भाग पर
दिखाई देता है ।
४ बुध एक खड़ी रेखा पर तिरछी रेखा जैसा चिह्न बुध का होता है ।
यह मुंह पर वास करता है ।
५ गुरु दो के समान चिह्न गुरु का होता है। इसका निवास दाहिने
कान पर होता है ।
६. शुक्र धन के चिह्न के चारों ओर गोलाकार हो ऐसा चिह्न शुक्र का
होता है । इसका निवास नासिका पर होता है ।
७. शनि ईकार के समान इसका चिह्न होता है । इसका निवास बायें
कान पर रहता है ।

( ३०८ )
ललाट रेखा फल :
ऊपर ललाट पर सात रेखाओं का वर्णन पीछे की पंक्तियों में किया जा चुका
है। इसके अलावा और अधिक सूक्ष्मता से विचार करने पर ज्ञात होता है कि दाहिने
नेत्र के ऊपरी भाग में जो छोटी-सी रेखा होती है वह सूर्य की रेखा कहलाती है।
इसी प्रकार बायें नेत्र के उपरी भाग में चन्द्र की रेखा मानी जाती है। भौंहों के बीच
में शुक्र की रेखा तथा नासिका के अग्र भाग में विद्वान् लोग बुध रेखा मानते हैं।
इनके फल इस प्रकार कहे गए हैं :—
१. ललाट के मध्य में गुरु रेखा टेढ़ी तथा वृत्ताकार हो तो वह व्यक्ति दुखों
से पीड़ित रहता है।
२. यदि गुरु की रेखा बीच में टेढ़ी तथा किनारों पर सीधी हो तो वह व्यक्ति
यशस्वी होता है।
३. यदि शनि की रेखा टेढ़ी हो तो वह व्यसनी होता है।
४. जिसके ललाट में तीन रेखाएं सीधी सरल और स्पष्ट हों वह व्यक्ति
सौभाग्यशाली होता है।
५. यदि गुरु रेखा छोटी हो तथा शनि रेखा छिन्न-भिन्न हो तो चिन्ता करने
वाला, गुणवान तथा सम्मानीय व्यक्ति होता है।
६. यदि गुरु की रेखा सर्पाकार हो तो वह व्यक्ति लोभी होता है।
७. जिसके ललाट में बहुत अधिक रेखाएं टूटी-फूटी हों तो वह व्यक्ति
दुर्भाग्यशाली एवं रोगी होता है।
८. यदि मंगल की रेखा छोटी हो तो वह दरिद्री होता है।
९. यदि गुरु और मंगल की रेखाएं बीच में टूटी हुई हों तो उसके पास निर-
न्तर धन का अभाव रहता है।
१०. यदि शनि और गुरु की रेखाएं धनुष के आकार की हों तो वह व्यक्ति
दुष्ट स्वभाव वाला होता है।
११. यदि शनि रेखा बहुत अधिक लम्बी और गहरी हो तो पर-स्त्री से सम्पर्क
होता है।
१२ यदि मंगल रेखा सर्पाकार हो तो वह हत्यारा होता है।
१३. जिसके ललाट में एक ही रेखा होती है तो वह नीच स्वभाव वाला तथा
निरन्तर भटकने वाला होता है।
१४. यदि गुरु रेखा में शाखायें निकलती हों तो वह व्यक्ति असत्य भाषी तथा
दुष्ट होता है।
१५. यदि ललाट में चार रेखाएं हों तो वह सच्चरित्र तथा बुद्धिमान होता है।

( ३०६ )
१६. यदि गुरु शनि और मंगल की रेखाएं टूटी हुई हों तो वह सौभाग्यहीन
कहलाता है।
१७. यदि ललाट में बालों के नीचे कई छोटी-छोटी रेखाएं हों तो वह जल में
डूब कर मृत्यु को प्राप्त होता है।
१८. यदि शनि व मंगल की रेखाएं टूटी हुई हों तथा गुरु की रेखा नीचे की
तरफ झुकी हुई हो तो वह सौभाग्यशाली एवं धनवान होता है।
१९. यदि गुरु और शनि की रेखाएं परस्पर मिल गई हों तो उसकी मृत्यु
फांसी से होती है।
२०. यदि शनि की रेखा बहुत अधिक गहरी और झुकी हुई हो तो वह हत्यारा
होता है।
२१. यदि ललाट में सर्प के आकृति की एक ही रेखा हो तो वह बलवान
होता है।
२२. यदि मंगल और शनि की रेखाएं सर्प के फल की तरह हों तो उस व्यक्ति
की फांसी से मृत्यु होती है।
२३. यदि शनि रेखा लचीली हो गुरु रेखा झुकी हुई हो तथा सूर्य रेखा लम्बी
हो तो वह व्यक्ति दीर्घायु, गुणवान तथा सौभाग्यशाली होता है।
२४. यदि सूर्य रेखा छोटी और शुक्र रेखा लम्बी हो तो वह व्यक्ति सच्चरित्र
चतुर और सौभाग्यशाली होता है।
२५. यदि शनि रेखा छोटी हो, गुरु रेखा टूटी हुई हो तथा मंगल रेखा शाखा
दार हो तो वह व्यक्ति हत्यारा होता है।
२६. यदि सूर्य रेखा बीच में कटी हुई हा तों वह क्रोधी, कामी तथा झगड़ालू
होता.है।
२७. यदि सूर्य रेखा वक्राकार हो तो वह कठोर स्वभाव वाला होता है।
२८. यदि सूर्य की रेखा धनुष के आकार की और शुक्र की रेखा बीच में से
कटी हुई हो तो वह नम्र रसज्ञ और धनी होता है।
२९. यदि मंगल और सूर्य रेखा सर्पाकार हो तो वह धनहीन होता है।
३०. यदि शनि रेखा लम्बी हो तथा मंगल की रेखा सर्पाकार हो तो वह
धर्मात्मा दयालु और उच्च समाज मे रहने वाला होता है।
३१. यदि शनि और गुरु की रेखाएं ऊपरी भाग में अर्द्ध चन्द्राकार हों तो वह
व्यक्ति बहुत अधिक सौभाग्यशाली होता है।

( ३१० )
३२. यदि दोनों भौंहों के बीच में त्रिशूल का चिह्न होता है तो जीवन में उसका
निश्चय ही अंग-भंग होता है ।
३३. यदि शनि और गुरु की रेखा सर्पाकार हो तो वह धूर्त स्वभाव वाला
होता है ।
३४. यदि सर्पाकार गुरु की रेखा शनि रेखा के पास पहुंचती हो तो वह कलह-
प्रिय होता है ।
३५. यदि शनि रेखा पतली और गुरु रेखा मोटी तथा लम्बी हो तो वह नर
घातक होता है ।
३६. यदि मंगल की रेखा झुकी हुई हो तथा शुक्र रेखा दाहिनी ओर कटी हुई
हो तो वह अभिमानी क्रोधी तथा पर-स्त्री-सेवी होता है ।
३७. यदि शनि रेखा गहरी हो तथा दोनों भौंहों के बीच में अधिक रोम हों तो
वह एक से अधिक विवाह करता है तथा सम्पत्तिशाली होता है ।
३८. यदि गुरु की रेखा लम्बी और लचीली हो तो वह सुन्दर और सौभाग्य-
शाली माना जाता है ।
३६. यदि शनि तथा गुरु की रेखाएं धनुष के आकार की हों तो वह व्यक्ति
पराक्रमी होता है ।
शनि रेखा :
यदि शनि रेखा सीधी हो तो व्यक्ति बुद्धिमान होता है । यदि यह टेढ़ी-मेढ़ी
हो तो वह चिड़चिड़े स्वभाव का होता है ।

( ३११ )
गुरु रेखा :
यदि यह सीधी हो तो वह व्यक्ति ईमानदार होता है और टेढ़ी-मेढ़ी या टूटी
हुई हो तो वह अनैतिक कार्य करने वाला होता है ।
मंगल रेखा :
यदि यह रेखा सीधी हो तो वह व्यक्ति प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त करने ·
वाला होता है। और यदि यह टेढ़ी-मेढ़ी हो तो वह प्रत्येक कार्य में असफल व्यक्ति
माना जाता है ।
सूर्य रेखा :
यदि यह रेखा सीधी हो तो व्यक्ति बुद्धिमान तथा जीवन में सफलता प्राप्त
करने वाला होता है । और यदि-टेढ़ी मेढ़ी हो तो लोभी लालची और कंजूस
होता है ।
चन्द्र रेखा :
यदि यह रेखा सीधी हो तो वह बुद्धिमान, चतुर तथा सूक्ष्मदर्शी होता है
परन्तु यदि यह टेढ़ी-मेढ़ी हो तो कमजोर दिमाग वाला माना जाता है ।
शुक्र रेखा :
यदि यह रेखा सीधी हो तो पुरुष सत्य पथ पर चलने वाला तथा समस्त प्रकार
के सुखों को भोगने वाला होता है । तथा इसके विपरीत यह रेखा टेढ़ी-मेढ़ी हो तो
वह व्यक्ति प्रेम के क्षेत्र में बदनाम होता है ।
बुध रेखा :
यदि यह रेखा सीधी हो तो वह सफल भाषण देने वाला तथा सामने वाले
लोगों को प्रभावित करने वाला होता है । इसके विपरीत यदि यह रेखा टेढ़ी-मेढ़ी हो
तो वह व्यक्ति असत्यवादी तथा धोखा देने वाला होता है ।
१. यदि ललाट में त्रिशूल का चिह्न हो तो वह दीर्घायु होता है ।
२. जिसके ललाट में सीप का चिह्न होता है वह अध्यापक तथा आदर्श व्यक्ति
होता है ।
३. जिसके ललाट में नीली नसें दिखाई देती हों वे पापी होते हैं ।
४. यदि ललाट में स्वस्तिक का चिह्न दिखाई दे तो वह करोड़पति होता है ।
५. जिसकी ललाट छोटी होती है वे मन्द बुद्धि तथा धनहीन होते हैं ।
६. जिसकी ललाट ऊंची होती है वे राजा के समान जीवन व्यतीत करते हैं ।

( ३१२ )
७. जिनको ललाट गोलाकार हो वे कंजूस होते हैं ।
८. जिनकी ललाट में अर्द्ध चन्द्र योग हो वे प्रसिद्ध उद्योगपति होते हैं ।
६. जिनकी ललाट में बज्र या धनुष का चिह्न हो वे अतुल सम्पत्ति के स्वामी
होते हैं ।
१०. जिनकी ललाट में त्रिशूल और शंख का चिह्न हो तो वह सौभाग्यशाली
माना जाता है ।
ललाट पर तिल व उनका फल :
प्रायः दो प्रकार के तिल देखने को मिलते हैं । १. काला तिल २. लाल
तिल ।
प्रायः लाल तिल को शुभ और काले तिल को अशुभ माना गया है । कहीं-
कहीं काला तिल भी अनुकूल माना जाता है ।
१. यदि ललाट में शनि रेखा के दाहिनी ओर लाल तिल हो तो वह व्यक्ति
परिश्रमी और धनी होता है । यदि काले रंग का तिल हो तो वह चतुर होता है ।
२. शनि रेखा के ऊपर भाग में लाल तिल हो तो वह स्त्रियों से विशेष प्रेम
करने वाला और अपने कार्य को पूर्णता देन वाला माना जाता है । यदि यहां पर
काले रंग का तिल हो तो स्त्री के प्रेम में फंसकर बदनाम होता है ।
३. यदि शनि रेखा के मध्य में या उसके नीचे तिल हो तो वह डरपोक होता
है । लाल तिल होने पर भी यही फल पाया जाता है ।
४. यदि काला तिल शनि रेखा के बाईं ओर हो तो वह व्यक्ति जीवन में
कई यात्राएं करता है । यदि लाल तिल हो तो इन यात्राओं से धन कमाता है ।
५. यदि गुरु रेखा के दाहिनी ओर तिल हो तो वह उन्नति करने वाले होते
हैं । यहां पर लाल तिल का भी यही फल है ।
६. यदि गुरु रेखा पर ललाट के मध्य में काला या लाल तिल हो तो वह
व्यक्ति बुद्धिमान और चतुर होता है ।
७. यदि गुरु रेखा के बायें काला या लाल तिल हो तो वह व्यक्ति जीवन में
सभी दृष्टियों से सुखी रहता है ।
८. यदि मंगल रेखा से दाहिने भाग में लाल या काला तिल हो तो वह व्यक्ति
यशस्वी, धनवान तथा सुखी होता है ।
६. यदि मंगल रेखा के मध्य में तिल हो तो वह सन्तानहीन होता है । यहां
पर दोनों तिलों का एक ही फल समझना चाहिए ।

( ३१३ )
१०. यदि मंगल रेखा के बाई ओर तिल हो तो ऐसा व्यक्ति लड़ाई झगड़ा
करने वाला तथा बहादुर होता है । लाल और काले तिल का एक ही फल समझना
चाहिए ।
११. यदि सूर्य रेखा के दाहिनी ओर तिल हो तो वह व्यक्ति जमीन, जायदाद
आदि से लाभ उठाता है ।
१२. यदि सूर्य रेखा के मध्य मे तिल हो तो वह व्यक्ति वैभव सम्पन्न सुखी
तथा यशस्वी होता है।
१३. यदि सूर्य रेखा के बाईं ओर तिल हो तो उसका गृहस्थ जीवन बराबर
समस्या-प्रधान बना रहेगा ।
१४. यदि शुक्र रेखा के दाहिनी ओर काला या लाल तिल हो तो उनका
दाम्पत्य जीवन अत्यन्त सुखी माना जाता है।
१५. यदि ललाट में शुक्र रेखा के ऊपर लाल या काला तिल हो तो वह
व्यक्ति भौतिक दृष्टि से पूर्ण सुखी व सम्पन्न होता है ।
१६. यदि शुक्र रेखा के बाईं ओर काला तिल या लाल तिल हो तो ऐसा
व्यक्ति कामी या पर-स्त्री-गामी होता है ।
१७. यदि बुध रेखा के दाहिनी ओर काला या लाल तिल हो तो वह व्यक्ति
सफल व्यापारी होता है ।
१८. यदि बुध रेखा के मध्य में तिल हो तो ऐसे व्यक्ति दूरदर्शी तथा सम्पन्न
होते हैं।
१९. यदि बुध रेखा के बांईं ओर काला या लाल तिल हो तो ऐसा व्यक्ति
डरपोक कायर तथा अपना काम स्वयं बिगाड़ने वाला माना जाता है।
२०. यदि चन्द्र रेखा के दाहिनी ओर तिल हो तो ऐसा व्यक्ति समाज में
यशस्वी और आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न होता है ।
२१. यदि चन्द्र रेखा पर लाल या काला तिल का चिह्न हो तो ऐसा व्यक्ति
अल्पायु होता है और उसे गुप्त रोग रहते हैं ।
२२. यदि चन्द्र रेखा के बाईं ओर लाल या काले तिल का चिह्न हो तो ऐसा
व्यक्ति दूसरो को तकलीफ देने वाला होता है ।
२३. यदि बायें कान के ऊपर कनपटी पर तिल हो तो उनका पूरा जीवन
दुखमय व्यतीत होता है ।
२४. यदि बायें नेत्र की भौंहों के पास में तिल हो तो ऐसा व्यक्ति एकान्त-
बासी तथा सामान्य जीवन निर्वाह करने वाला होता है ।

( ३१४ )
२५. यदि बरोनी के पास में तिल हो तो वे असफल व्यक्ति माने जाते हैं ।
२६. यदि ललाट की दाहिनी कनपटी पर तिल हो तो ऐसा व्यक्ति प्रेमी
समृद्ध तथा सुखपूर्ण जीवन व्यतीत करने वाला होता है ।
२७. यदि दाहिने कान के पास तिल हो तो ये व्यक्ति साहसी होते हैं ।
२८. यदि दाहिने भाग के भौंह के पास में तिल हो तो इनकी आंखें कमजोर
होती हैं ।
२९. यदि दाहिनी नासिका की ओर तिल हो तो वह व्यक्ति धनवान, सुखी
और सफल होता है ।
३०. यदि दाहिनी आंख के नीचे तिल का चिह्न हो तो वे समृद्ध तथा सुखी
होते हैं ।
३१. यदि नासिका के मध्य भाग में तिल हो तो वह व्यक्ति यात्रा करने
वाला तथा दुष्ट स्वभाव वाला होता है ।
३२. यदि नासिका के बायें भाग पर तिल हो तो बहुत अधिक प्रयत्न करने
के बाद सफलता प्राप्त करता है ।
३३. यदि ऊपर के होठ पर तिल का चिह्न हो तो ऐसा व्यक्ति अत्यधिक
विलासी और स्त्रियों का शौकीन होता है ।
३४. यदि नीचे के होठ पर तिल का चिह्न हो तो ऐसा व्यक्ति निर्धन होता
है तथा जीवन भर गरीबी में दिन व्यतीत करता है ।
३५. यदि ठोडी पर तिल हो तो वह व्यक्ति अपने काम में ही लगा रहने
वाला होता है तथा लगभग स्वार्थी होता है ।
३६. यदि गर्दन पर तिल हो तो वे व्यक्ति बुद्धिमान होते हैं तथा अपने
प्रयत्नों से धन संचय करते हैं ।
३७. यदि बायें गाल पर तिल का चिह्न हो तो उसके जीवन में धन का
अभाव रहता है । परन्तु उसका गृहस्थ जीवन सामान्यतः सुखमय रहता है ।
३८. यदि दाहिने गाल पर तिल का चिह्न हो तो ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान तथा
उन्नति करने वाला होता है ।
३६. यदि बायें कान के ऊपरी सिरे पर तिल का चिह्न हो तो वे व्यक्ति
दीर्घायु पर कमजोर शरीर के होते हैं ।
४०. यदि दाहिने कान के ऊपरी सिरे पर तिल का चिह्न हो तो वे व्यक्ति
सरल स्वभाव के तथा युवावस्था में पूर्ण उन्नति करने वाले होते हैं ।
४१. यदि सिर पर तिल का चिह्न हो तो व्यक्ति धनवान होता है ।

( ३१५* )
४२. यदि सिर के दाहिनी ओर तिल का चिह्न हो तो समाज में उसका
सम्मान बहुत अधिक होता है।
४३. यदि सिर के बायें भाग की ओर तिल का चिह्न हो तो वह जीवन भर
परेशानियां उठाता है।
४४. यदि दोनों भौंहों के बीच में तिल का चिह्न हो तो वे दीर्घायु धार्मिक
तथा उदार हृदय के होते हैं।
४५. यदि आंख के ऊपर या नीचे तिल हो तो वह व्यक्ति धनवान, बुद्धिमान
एवं चतुर होता है।
४६. यदि गाल पर लाल तिल का चिह्न हो तो वे धनवान होते हैं, परन्तु
अपनी मूर्खता से धन बरबाद कर देते हैं।
४७. यदि दाहिनी हथेली पर लाल तिल का चिह्न होता है तो वह धनवान
होता है।
४८. यदि बाँयें हाथ में तिल होता है तो वह बुद्धिमानी से व्यय करने वाला
होता है।
वस्तुतः हाथ की रेखाओं के साथ ही साथ चेहरे पर या अन्य स्थानों पर
दिखाई देने वाले तिलों का भी अध्ययन करना चाहिए जिससे उस व्यक्ति के बारे में
पूरी-पूरी जानकारी प्राप्त की जा सके।

शरीर लक्षण
हाथ की रेखाओं के अध्ययन के साथ ही साथ व्यक्ति के शरीर का सामान्य
ज्ञान भी होना आवश्यक है । शरीर की आकृति को देखते ही उसके बारे में आधा
भविष्य कथन तो स्वतः ही हो जाता है ।
नीचे मैं पाठकों की जानकारी के लिये शरीर के सामान्य लक्षणों को संक्षिप्त
रूप में स्पष्ट कर रहा हूं :
कान :
१. यदि कान उभरे हुए हों तथा कान की नोंक सुडौल तथा बड़ी हो तो वह
सौभाग्यशाली होता है ।
२. यदि कान जन्म से ही लम्बे हों तो वह सुखी व्यक्ति होता है ।
३. जिसके कान मोटे हों वह कोमल स्वभाव का होता है ।
४. जिसके कान छोटे-छोटे हों वह बुद्धिमान होता है ।
५. शंख के समान कान वाला व्यक्ति मिलिट्री में ऊंचे पद पर पहुंचता है ।
६. चपटे कानों वाला व्यक्ति भोगी होता है ।
७. बड़े-बड़े रोम युक्त कान दीर्घायु को स्पष्ट करते हैं ।
८. बहुत मोटे कान नेतृत्व करने वाले का सूचक होता है ।
९. अत्यन्त छोटे कान वाला व्यक्ति कंजूस होता है ।
१०. सूखे हुए कान दरिद्रता की निशानी है ।
११. लम्बे और फैले हुए कान क्रूर व्यक्ति का परिचय देते हैं ।
१२. बड़े कान वाला व्यक्ति पूजनीय होता है ।
१३. चिकनाई रहित कान कमजोरी का सूचक है ।
१४. स्त्रियों के कानों पर केस होना विधवापन का सूचक है ।
१५. स्त्री के कान लम्बे हों तो अच्छे होते हैं ।