बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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कालनिधि योग :
परिभाषा : जिसके दोनों हाथो की उंगलियों में
मिलाकर चार शंख तथा चार चक्र के चिह्न हों तो वह व्यक्ति
कालनिधि योग सम्पन्न होता है।
फल : जिसके हाथ में ऐसा योग होता है उसका
रहन-सहन ऊंचा होता है। वह उत्तम स्वभाव वाला तथा
उच्च पदाधिकारी होने के साथ-साथ भाग्यशाली पुरुष कहा
जाता है।
(चित्र विवरण: कालनिधि योग)
अष्ट लक्ष्मी योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में जीवन रेखा, स्वास्थ्य
रेखा, भाग्य रेखा तथा सूर्य रेखा स्पष्ट व दृढ़ हों तो अष्ट
लक्ष्मी योग होता है।
फल : जिसके हाथ मे यह योग होता है वह व्यक्ति
अतुलनीय सम्पत्ति का स्वामी होता है। भौतिक दृष्टि से
उसके जीवन की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं तथा समाज में
विशेष सम्मान होता है। ऐसा व्यक्ति विदेश यात्राएं करने
वाला, देश विदेश में सम्मान पाने वाला तथा पूर्ण भाग्यशाली
कहा जाता है।
(चित्र विवरण: अष्टलक्ष्मी योग)