बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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७. जिनको ललाट गोलाकार हो वे कंजूस होते हैं ।
८. जिनकी ललाट में अर्द्ध चन्द्र योग हो वे प्रसिद्ध उद्योगपति होते हैं ।
६. जिनकी ललाट में बज्र या धनुष का चिह्न हो वे अतुल सम्पत्ति के स्वामी
होते हैं ।
१०. जिनकी ललाट में त्रिशूल और शंख का चिह्न हो तो वह सौभाग्यशाली
माना जाता है ।
ललाट पर तिल व उनका फल :
प्रायः दो प्रकार के तिल देखने को मिलते हैं । १. काला तिल २. लाल
तिल ।
प्रायः लाल तिल को शुभ और काले तिल को अशुभ माना गया है । कहीं-
कहीं काला तिल भी अनुकूल माना जाता है ।
१. यदि ललाट में शनि रेखा के दाहिनी ओर लाल तिल हो तो वह व्यक्ति
परिश्रमी और धनी होता है । यदि काले रंग का तिल हो तो वह चतुर होता है ।
२. शनि रेखा के ऊपर भाग में लाल तिल हो तो वह स्त्रियों से विशेष प्रेम
करने वाला और अपने कार्य को पूर्णता देन वाला माना जाता है । यदि यहां पर
काले रंग का तिल हो तो स्त्री के प्रेम में फंसकर बदनाम होता है ।
३. यदि शनि रेखा के मध्य में या उसके नीचे तिल हो तो वह डरपोक होता
है । लाल तिल होने पर भी यही फल पाया जाता है ।
४. यदि काला तिल शनि रेखा के बाईं ओर हो तो वह व्यक्ति जीवन में
कई यात्राएं करता है । यदि लाल तिल हो तो इन यात्राओं से धन कमाता है ।
५. यदि गुरु रेखा के दाहिनी ओर तिल हो तो वह उन्नति करने वाले होते
हैं । यहां पर लाल तिल का भी यही फल है ।
६. यदि गुरु रेखा पर ललाट के मध्य में काला या लाल तिल हो तो वह
व्यक्ति बुद्धिमान और चतुर होता है ।
७. यदि गुरु रेखा के बायें काला या लाल तिल हो तो वह व्यक्ति जीवन में
सभी दृष्टियों से सुखी रहता है ।
८. यदि मंगल रेखा से दाहिने भाग में लाल या काला तिल हो तो वह व्यक्ति
यशस्वी, धनवान तथा सुखी होता है ।
६. यदि मंगल रेखा के मध्य में तिल हो तो वह सन्तानहीन होता है । यहां
पर दोनों तिलों का एक ही फल समझना चाहिए ।