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बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

( २८० )
दुर्योग :
परिभाषा : यदि स्वास्थ्य रेखा पर त्रिकोण का चिह्न
हो तो दुर्योग होता है ।
फल : जिस जातक की हथेली में दुर्योग होता है
वह व्यक्ति कमजोर शरीर वाला अपने स्वास्थ्य के प्रति लापर-
वाह दरिद्री जीवन व्यतीत करने वाला, स्वार्थी तथा अपने
जन्म स्थान से दूर रहने वाला होता है ।
दुर्योग
गोल योग :
परिभाषा : यदि शुक्र पर्वत हथेली के बाहर की ओर
निकला हुआ सा हो तो गोल योग होता है ।
फल : ऐसा व्यक्ति परिश्रमी, भाग्यहीन, तथा बराबर
धन की चिन्ता करने वाला तथा तुच्छ बुद्धि का होता है ।
गोल योग
युग योग :
परिभाषा : यदि स्वास्थ्य रेखा हथेली के पार जाती
हो तथा जीवन रेखा से उसका सम्बन्ध बना हो तो युग योग
होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति चंचल
स्वभाव वाला पाखण्डी एवं व्यभिचारी होता है । ऐसे व्यक्ति
को समाज में किसी प्रकार का कोई सम्मान नहीं मिलता ।
युग योग

( २८१ )
शूल योग :
परिभाषा : यदि मंगल रेखा चन्द्र पर्वत से होकर सूर्य
पर्वत तक जाती हो तो शूल योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में शूल योग होता है वह व्यक्ति
क्रोधी, क्रोध के आवेश में बना बनाया काम बिगाड़ने वाला,
लड़ाकू स्वभाव वाला, दरिद्री तथा घमण्डी होता है ।
[चित्र: शूल योग]
केदार योग :
परिभाषा : यदि सूर्य रेखा शनि पर्वत की ओर झुकी
हुई तथा स्वास्थ्य रेखा से संबन्ध स्थापित करती है तो हाथ में
केदार योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
आलसी, बन्धु-बान्धवों की सहायता करने वाला, कामी और
कृषि कार्य मे निपुण होता है ।
टिप्पणी : इस योग में व्यक्ति में अच्छे और बुरे गुणों
का मिश्रण होता है ।
[चित्र: केदार योग]
पाश योग :
परिभाषा : यदि गुरु पर्वत पर तिल का चिह्न हो तो
पास योग होता है ।
फल : जिसके हाथ मे यह योग होता है वह व्यक्ति
मित्रों में लोकप्रिय, नौकरी द्वारा सुख भोगने वाला, तथा धन-
वान होता है ।
[चित्र: पाश]

( २८२ )
दामिनी योग :
परिभाषा : यदि मध्यमा और अनामिका उंगली के
बीच तिल का चिह्न हो दामिनी योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
उच्च चरित्रवान, दूसरों का सहायक तथा बुद्धिमान व्यक्ति
होता था ।
दामिनी
मुकुट योग :
परिभाषा : यदि दाहिने हाथ में मंगल पर्वत विकसित
हो तथा वहां से एक रेखा सूर्य पर्वत की ओर जाती हो और
उस पर स्वस्तिक का चिह्न हो तो मुकुट योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में मुकुट योग होता है वह व्यक्ति
अपने जीवन में श्रेष्ठ खिलाड़ी होता है । जीवन में खिलाड़ी के
रूप में ही उसे मान्यता मिलती है तथा वह समाज में प्रसिद्ध
होता है । ऐसे व्यक्ति में वैर की भावना अत्यन्त प्रबल होती
है । ऐसा जातक शिकारी और अपने लक्ष्य को सही रूप में
पहिचानने वाला होता है ।
मुकुट
ऋण योग :
परिभाषा : यदि हथेली में शनि रेखा के दाहिनी ओर
काले रंग का तिल हो तो ऋण योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह थोड़े
बहुत रूप में जीवन भर ऋणी बना रहता है तथा उसके जीवन
में आय की अपेक्षा व्यय हमेशा बढ़ा-चढ़ा रहता है ।
ऋण योग

( २८३ )
कारक योग :
परिभाषा : यदि गुरु रेखा के वाम भाग में लाल या
काला तिल हो तो उसके हाथ में कारक योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह जातक
अपने जीवन को सुख पूर्वक व्यतीत करता है । ऐसा जातक अपने
व्यापार में उच्च स्तर प्राप्त करने में सफल रहता है । आर्थिक
दृष्टि से तथा भौतिक दृष्टि से इसके जीवन में किसी प्रकार
की कोई बाधा या परेशानी नहीं होती ।
कारक योग

वल्लकी योग :
परिभाषा : यदि दाहिने हाथ में मंगल रेखा के नीचे
या उसके दाहिनी ओर लाल तिल का चिन्ह हो तो वल्लकी
योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह शात,
गम्भीर, जीवन में कई मित्रों का सहयोग प्राप्त करने वाला,
प्रसन्नचित एवं अपने हुनर में ख्याति प्राप्त व्यक्ति होता है ।
वल्लकी योग

शारदा योग :
परिभाषा : यदि बुध पर्वत के नीचे या उसके बाईं
ओर काला तिल हो तो शारदा योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में शारदा योग होता है वह व्यक्ति
स्त्री, पुरुष, बन्धु आदि से सम्पन्न उन्नतिशील होता है । देवताओ
का यह आदर करता है तथा विद्वान चतुर, एवं धार्मिक
पुरुष होता है ।
शारदा

( २८४ )
समुद्र योग :
परिभाषा : यदि सूर्य रेखा के नीचे या उसके दाहिनी
ओर काले तिल का चिह्न हो तो समुद्र योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
विख्यात्, धार्मिक कार्य में आगे रहने वाला, राजा के समान
सुख भोगने वाला तथा चिन्ता मुक्त होता है ।
अर्द्ध चन्द्र योग :
परिभाषा : यदि चन्द्र रेखा के नीचे या दाहिनी ओर
काले तिल का या लाल तिल का चिह्न हो तो अर्द्धचन्द्र योग
होता है ।
फल : जिसके हाथ मे यह योग होता है वह व्यक्ति
जीवन भर प्रसन्नचित् रहने वाला, आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न,
सहृदय, सुन्दर आकर्षक व्यक्तित्व वाला तथा निरंतर उन्नति
करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में किसी प्रकार
की कोई न्यूनता नहीं रहती ।
छत्र योग :
परिभाषा : यदि शुक्र रेखा के पास में या उसके नीचे
लाल तिल अथवा काले तिल का चिह्न हो तो छत्र योग होता
है।
फल : यदि हाथ में छत्र योग हो तो ऐसा व्यक्ति
साहसी, रसिक पूर्ण, गृहस्थ सुख को भोगने वाला तथा आनन्द
पूर्ण जीवन व्यतीत करने वाला होता है ।

( २८५ )
कूट योग :
परिभाषा : यदि हाथ के मध्य में दो से अधिक तिल
हो और मुट्ठी बन्द करने पर उसमें आते हैं तो कूट योग होता
है ।
फल : जिसके हाथ में कूट योग होता है वे व्यक्ति अत्यन्त
साहसी पराक्रमी तथा निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर होने
वाले होते हैं । विपरीत परिस्थितियों को देखकर व्यक्ति घब-
राते नहीं, अपितु उनसे संघर्ष कर उन विपरीत परिस्थितियों
को अपने अनुकूल बनाने की क्षमता रखते हैं ।
[चित्र: कूट]

इषु योग :
परिभाषा : यदि अंगूठे के ऊपरी पौर पर काले तिल
का चिह्न हो तो इषु योग होता है ।
फल : इस योग मे जन्म लेने वाला व्यक्ति राजपत्रित
अधिकारी होता है । ऐसे व्यक्ति सामान्यतः जेल अधिकारी या
पुलिस सुपरिटेंडेंट होते हैं । अपने जीवन में ये व्यक्ति अपने
उद्देश्यों में पूर्णतः सफलता प्राप्त करते हैं ।
[चित्र: इषु योग]

दिग्बल योग :
परिभाषा : यदि शनि पर्वत को छोड़कर अन्य तीन
पर्वत अर्थात् सूर्य, बुध, और गृह पर्वत पर या इनसे संबंधित
रेखाओं के नीचे काले या लाल तिल का चिन्ह हो तो दिग्बल
योग होता है ।
फल : जिस व्यक्ति के हाथ में दिग्बल योग होता है वह
व्यक्ति अपने जीवन में अत्ययन्त ऊंचे स्तर पर पहुंचता है तथा
अपने कार्यों से समाज में सम्मानित होता है ।
[चित्र: दिग्बल योग]

( २८६ )
नीच भंग राज योग :
परिभाषा : यदि हाथ में शुक्र वलय हो और उस पर
क्रॉस का चिह्न हो तो नीच भंग राज योग होता है।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
अपने प्रयत्नों से उन्नति करता है तथा आर्थिक, सामाजिक
एवं राजनीतिक क्षेत्र में सुख प्राप्त करता है।
टिप्पणी : विद्वानों ने इसके अलावा निम्नलिखित योग
भी नीच भंग राजयोग से संबंधित बताए हैं ।
१. यदि हाथ के मध्य में स्वस्तिक का चिह्न हो।
२. यदि मध्यमा उंगली के तीनों ही पर्वतों पर काले नीचभंग राज योग
तिल का चिह्न हो।
३. यदि गुरु वलय हो तथा गुरु पर्वत पर क्रॉस का चिह्न भी हो।
४. यदि बुध वलय हो पर चन्द्रमा से कोई रेखा निकल कर बुध पर्वत तक
पहुंची हो।
५. यदि हाथ के सभी पर्वत सामान्यतः उन्नत तथा श्रेष्ठ हों।
६ यदि भाग्य रेखा सीढ़ीदार हो।
७. यदि जीवन रेखा पूर्ण हो तथा उस पर किसी प्रकार की बाधक रेखाएं
न हों।
८. यदि शुक्र पर्वत उभरा हुआ हो और उस पर बाधक रेखाएं न हों।
६. यदि चार मणिवन्ध हों तथा पहला मणिबन्ध जंजीरदार हो।
चण्डिका योग :
परिभाषा : यदि हथेली चौड़ाई की अपेक्षा कुछ
अधिक लम्बाई लिये हुए हो, हाथ की उंगलियां बिना गांठ की
हों तथा हाथ में जीवन रेखा के प्रारम्भ से एक रेखा निकल कर
सूर्य पर्वत अथवा बुध पर्वत तक जाती हो तो चण्डिका योग
होता है।
फल : जिस व्यक्ति के हाथ में चण्डिका योग होता है
वह व्यक्ति चरित्रवान, धनपति, दूसरों की भलाई करने वाला,
निरन्तर उन्नति की ओर अग्रसर होने वाला तथा मन्त्री के
चण्डिका योग समान जीवन व्यतीत करने वाला होता है।

( २८७ )
नाभस योग :
परिभाषा : यदि किसी भी उंगली के नीचे और
पर्वत के ऊपर छोटा स्वस्तिक का चिह्न हो तो नाभस योग
होता है।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
अत्यन्त श्रेष्ठ पूज्यनीय, ऐश्वर्यवान, परोपकारी तथा पूर्ण
भौतिक सुख भोगने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति निश्चय ही
अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करते हैं।
(चित्र: नाभस योग)
जय योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में मगल पर्वत पर दो या दो
से अधिक तिल के चिह्न हो तो जय योग होता है।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
प्रबल, भाग्यशाली, अपने हर कार्य में पूर्ण विजय प्राप्त करने
वाला, शत्रुओ का तीव्रता से नाश करने वाला, क्षमता रखने
वाला, गुणवान, धैर्ययुक्त एवं दीर्घायु होता है।
(चित्र: जय योग)
विद्युत योग :
परिभाषा : मणिबन्ध के ऊपर तिल का चिन्ह हो तो
विद्युत योग होता है।
फल : ऐसा योग रखने वाला व्यक्ति राजा के समान
जीवन व्यतीत करने वाला, धनवान तथा पूर्ण सुख को भोगने
वाला होता है।
(चित्र: विद्युत योग)

( २८८ )
शिव योग :
परिभाषा : यदि हाथ के मध्य में कोई छोटी सी लह-
राती हुई रेखा हो तो शिव योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
उच्च कोटि का व्यापारी होता है या सेना में उच्च पद को
प्राप्त करने में सफल होता है । ऐसा व्यक्ति पुलिस आफिसर
या सन्तुष्ट जीवन व्यतीत करने वाला देखा गया है ।
[शिव योग]

विष्णु योग :
परिभाषा : यदि हथेली में कहीं पर कमल का सा
चिह्न हो तो विष्णु योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में विष्णु योग हो यह व्यक्ति
समस्त ऐश्वर्य का स्वामी, आर्थिक दृष्टि से पूर्णतः सम्पन्न प्रबल
भाग्यशाली, सुखमय जीवन व्यतीत करने वाला, भाषण कला में
दूसरों पर प्रभाव डालने वाला तथा सभी प्रकार से सुखमय
जीवन व्यतीत करने वाला होता है ।
[सैनिक]

ब्रह्म योग :
परिभाषा : यदि हथेली में कहीं पर भी ध्वजा का
चिह्न हो तो उसके हाथ में ब्रह्म योग होता है । ऐसा विद्वान
कहते हैं ।
फल : ब्रह्म योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति समृद्ध
जीवन व्यतीत करने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति देवताओं,
ब्राह्मणों तथा साधुओं पर पूर्ण श्रद्धा रखता है तथा चरित्रवान
होने के साथ-साथ वह निरन्तर समाज से संबंधित शुभ कार्यों
में रत रहता है ।
[ब्रह्म योग]

( २८१ )
हरि योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में अश्व का चिह्न हो वह
हरि योग सम्पन्न होता है ।
फल : हरि योग रखने वाला व्यक्ति जीवन में सुखी
ऐश्वर्य में जीवन व्यतीत करने वाला, विद्यावान चतुर, बात
चीत में होशियार तथा अपने व्यक्तित्व से दूसरों पर प्रभाव
डालने वाला होता है । इसके जीवन में आर्थिक दृष्टि से कोई
न्यूनता नहीं रहती ।
हरि योग
हर योग :
हर योग
परिभाषा : यदि जीवन रेखा के पास त्रिशूल का चिह्न
हो पर उससे जीवन रेखा कटती नहीं हो तो हर योग होता
है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह निरंतर
अपनी उन्नति करने वाला, धार्मिक कार्यों में पूर्ण रुचि लेने
वाला, परोपकारी, दयालु, सत्यवक्ता और निरंतर दूसरों का
सहायक होता है ।
ब्रह्मा योग .
परिभाषा : जिसके हाथ में मणिबन्ध के पास शुक्र पर्वत
पर हाथी का चिन्ह हो तो उसके हाथ में ब्रह्मा योग होता है ।
फल : हथेली में ब्रह्मा योग रखने वाला व्यक्ति तेजस्वी
और प्रखर बुद्धि का धनी होता है । ऐसा व्यक्ति धीर, गम्भीर
समाज सुधारक और अपने आप पर पूरा भरोसा रखने बाल
होता है । उसमें आत्म विश्वास जरूरत से ज्यादा होता है ।
ब्रह्मा योग

( २६० )
रवि योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में सूर्य का चिह्न दिखाई दे
योग होता है ।
फल : जिसके हाथ मे यह योग होता है वह विज्ञान
अनुसंधान आदि कार्यों में रुचि लेने वाला तथा तीव्र मस्तिष्क
का स्वामी होता है । ऐसा व्यक्ति सादा जीवन उच्च विचार
के सिद्धांत को मानता है । इसका व्यक्तित्व भले ही साधारण
होता है; परन्तु इसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक होती है और
अपने जीवन में पूर्ण यश तथा सम्मान प्राप्त करता है ।
रवि योग
पति त्याग योग :
परिभाषा : जिस स्त्री के हाथ में गुरु पर्वत पर चक्र
का निशान हो तो पति त्याग होता है ।
फल : जिस स्त्री के हाथ मे ऐसा योग होता है उस
स्त्री को उसका पति या तो छोड़ देता है या तलाक दे देता
है ।
टिप्पणी : यदि पुरुष के हाथ में ऐसा चिन्ह हो तो
पत्नी उसे छोड़ देती है और पत्नी आगे बढ़ कर उससे तलाक
ले लेती है ।
पतित्याग योग
गर्भपात योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में शुक्र पर्वत पर रेखाओं से
पर्वत का चिह्न बना हो तो गर्भपात योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह स्त्री कुछ
विशेष कारणो से गर्भपात करा देती है ।
टिप्पणी : इसके अलावा इससे सम्बन्धित निम्न योग
भी है :
१. यदि संतान रेखा पर सफेद बिन्दु हो ।
२. यदि सन्तान रेखा पर एक आड़ी रेखा हो ।
गर्भपात योग

( २६१ )
यूप योग :
परिभाषा : यदि हथेली में कहीं पर वृक्ष का चिन्ह
दिखाई दे तो यूप योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
आत्म केन्द्रित, निस्वार्थ भाव रखने वाला, थोड़े में ही संतोष
रखने वाला तथा कमजोर चरित्र वाला व्यक्ति होता है ।
नव योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कही पर भी स्तम्भ का
चिन्ह हो तो नव योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
जीवन में सुखी, सफल एवं गृहस्थ जीवन में पूरी तरह से संतुष्ट
रहने वाला व्यक्ति होता है ।
दण्ड योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कही पर भी तलवार का
चिन्ह हों तो उसके हाथ में दण्ड योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उसके जीवन
में पत्नी से बराबर मतभेद बना रहता है । पूर्ण संतान सुख उसे
प्राप्त नहीं होता तथा एक प्रकार से उसके गृहस्थ सुख में
न्यूनता रहती हैं ।

( २६२ )
शक्ति योग :
शक्ति योग
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी धनुष का चिह्न
दिखाई दे उसके हाथ में शक्ति योग होता है ।
फल : जिस जातक के हाथ में शक्ति योग होता है
वह व्यक्ति स्वार्थी लोभी, आलसी, तथा अन्य लोगों द्वारा अप-
मानित होता है। ऐसे व्यक्ति के पास अगर द्रव्य होता भी है
तो वह मूर्खतापूर्ण कार्यों में उड़ा देता है । समाज में ऐसे व्यक्ति
का कोई सम्मान नहीं होता ।

श्रीमहालक्ष्मी योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी तराजू का
चिह्न दिखाई दे तो वहां श्री महालक्ष्मी योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह लाखों
में खेलने वाला तथा धर्मात्मा होता है तथा उसकी प्रसिद्धि
दूर-दूर तक फैली हुई होती है। जीवन में वह सभी दृष्टियों
से सुखी सम्पन्न एवं सन्तुष्ट रहता है ।
श्रीमहालक्ष्मी योग

धनवृद्धि योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी कलश का
चिह्न दिखाई दे तो धनवृद्धि योग समझना चाहिए ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उस व्यक्ति
को निरंतर धन की प्राप्ति होती रहती है तथा उनका बैंक
बैलेंस बढ़ता ही रहता है ।
धनवृद्धि योग

( २६३ )
अकस्मात् धन प्राप्ति योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी कच्छप यानी
कछुए का सा चिह्न हो तो अकस्मात् धन प्राप्ति योग बनता
है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उसे जीवन
में कई बार अचानक धन लाभ होता रहता है ।
अकस्मात धन प्राप्ति योग
ऋषि योग :
परिभाषा : यदि हाथ में कहीं पर भी कुण्डल का
चिह्न दिखाई दे तो ऋषि योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
परोपकारी, ईश्वर पर आस्था रखने वाला, सत्य वचन बोलने
वाला एवं धार्मिक होता है ।
ऋषि योग
दुर्धर्ष योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी अष्टकोण का
चिह्न हो तो उपरोक्त योग होता है ।
फल : यह योग रखने वाला व्यक्ति अत्यन्त क्रोधी,
खूंखार, दुष्ट तथा कुख्याति प्राप्त करने वाला व्यक्ति होता है ।
ऐसा योग डाकुओं के हाथ में देखा जा सकता है ।
दुर्धर्ष योग

( २६४ )
गरुड़ योग :
परिभाषा : यदि हाथ में कहीं पर भी वेदी का चिह्न
हो तो गरुड़ योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह सुन्दर,
सुशील, शिक्षित एवं आकर्षित व्यक्तित्व वाला जातक होता है
परन्तु उसकी मृत्यु जहर खाने से होती है ।
रज्जु योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी सर्प का
चिह्न हो या रस्सी का सा चिह्न हो तो रज्जु योग होता है ।
फल : जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है वह
जीवन में कई बार विदेश यात्राएं करता है । ऐसे व्यक्ति का
एक लक्ष्य होता है और उस लक्ष्य की ओर वह निरन्तर गति-
शील रहता है । ऐसा व्यक्ति निरन्तर कार्य करने वाला तथा
ईर्ष्यालु प्रकृति का होता है ।
मूसल योग :
परिभाषा : जिसके हाथ मे धान कूटने के मूसल के
समान कोई चिह्न हो तो वहां मूसल योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में मूसल योग होता है वह जीवन
में उच्च अधिकारियों के द्वारा सम्मान प्राप्त करता है तथा स्वयं
भी श्रेष्ठ अधिकारी होता है । ऐसे व्यक्ति के जीवन में आर्थिक
दृष्टि से किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती ।

( २६५ )
नल योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में रथ का चिह्न हो तो
वहां नल योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
दूरदर्शी तथा दृढ़ निश्चयी होता है । ऐसा व्यक्ति अपने लक्ष्य
की ओर बराबर ध्यान रखने वाला परन्तु स्वभाव से हठी होता
है । इसके जीवन में धन की कमी नहीं रहती परन्तु जीवन के
३४ वें वर्ष में अंग-भंग होता है ।
नल योग
गौ योग :
परिभाषा : यदि हाथ में कही पर भी अंकुश का चिह्न
दिखाई दे तो वहां गौ योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में गौ योग होता है वह व्यक्ति
श्रेष्ठ एवं सम्पन्न परिवार में जन्म लेता है तथा जीवन भर
राजा के समान ऐश्वर्य का भोग करता है। ऐसा व्यक्ति शारी-
रिक दृष्टि से स्वस्थ, मधुर तथा नम्रता पूर्ण व्यवहार करने
वाला होता है । अतुलनीय धन सम्पत्ति का स्वामी होने के साथ
साथ वह व्यक्ति नम्र परोपकारी और धार्मिक स्वभाव रखने
वाला व्यक्ति होता है ।
गौ योग
गाल योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी बिच्छू का
चिह्न दिखाई दे तो वहां गाल योग होता है ।
फल : गाल योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति सहन-
शील, नम्र व्यवहार करने वाला, विरोधियों को भी क्षमा देने
वाला, होनहार, सम्पत्तिवान तथा ऊंचे आदर्श का धनी होता
है । समाज में ऐसे व्यक्ति का सम्मान होता है तथा जीवन में
भौतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से पूर्णतः सफल कहा जाता है ।
गाल योग

( २६६ )
सन्यास योग :
परिभाषा : यदि जीवन रेखा के उद्गम के आसपास
चिड़िया का सा चिह्न दिखाई दे तो सन्यास योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में 'सन्यास योग' होता है वह व्यक्ति
यौवनावस्था में ही घरबार छोड़कर सन्यासी बन जाता है
और सन्यास के क्षेत्र में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है ।
सन्यास योग
पद्म योग :
परिभाषा : जिस हाथ में कहीं पर भी पद्म का
चिह्न दिखाई दे तो उस जातक के जीवन मे पद्म योग होता
है ।
फल : पद्म योग से सम्पन्न व्यक्ति सुखी, धनवान,
सफल एवं सम्मान प्राप्त व्यक्ति होता है ।
पद्म योग
नागेन्द्र योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी कंकण का
चिह्न दिखाई दे तो वहां नागेन्द्र योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में नागेन्द्र योग होता है वह व्यक्ति
स्वस्थ, सबल एवं आकर्षक व्यक्तित्व वाला होता है तथा जीवन
में आर्थिक दृष्टि से पूर्णतः सुखी एवं सफल होता है ।
नागेन्द्र योग

( २६७ )
त्रिलोचन योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी नरमुण्ड का
चिह्न दिखाई दे तो त्रिलोचन योग माना जाता है ।
फल : जिसके हाथ में त्रिलोचन योग होता है वह
व्यक्ति दीर्घायु तथा समाज में पूर्ण सम्मानित व्यक्ति होता
है । ऐसा व्यक्ति शत्रुओं का प्रबल संहारक होता है । राज-
नीति में यह व्यक्ति चतुर होता है तथा अपनी योग्यता एवं
चतुराई के बल पर मन्त्री स्तर तक पहुँचने में सक्षम होता है ।
त्रिलोचन योग

चन्द्र योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी चन्द्रमा का
चिह्न दिखाई दे तो वह चन्द्र योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में चन्द्र योग होता है वह व्यक्ति
नेता या नेता के समान होता है । जीवन में वह पूर्ण सुखों का
भोग करता है । आर्थिक दृष्टि से कोई न्यूनता नहीं रहती ।
वह व्यक्ति साहसी, चतुर तथा प्रत्येक कार्य में दक्ष होता है ।
चन्द्र योग

चक्र योग :
परिभाषा : यदि शनि पर्वत पर चक्र का चिह्न
दिखाई दे तो वहां चक्र योग समझना चाहिए ।
फल : जिस व्यक्ति के हाथ में चक्र योग होता है वह
उच्च अधिकारी, धन सम्पत्ति का मालिक एवं निष्पक्ष न्याय
करने वाला सम्माननीय व्यक्ति होता है ।
चक्र योग

( २६८ )
चतुर्मुख योग :
परिभाषा : यदि मणिबन्ध के ऊपर मछली की सी
आकृति हो तो वह चतुर्मुख योग होता है।
फल : जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है वह
ऊंची शिक्षा प्राप्त, चतुर, एवं दूरदर्शी व्यक्ति होता है। वह
कई कलाओं को भली प्रकार से जानता है तथा वह उदार,
गुणवान, उच्च पदाधिकारी और मधुर भाषी होता है।
(चित्र विवरण: चतुर्मुख योग)
अंशावतार योग :
यदि हथेली में कहीं पर भी ग्राम का
चिह्न दिखाई दे तो अंशावतार योग होता है ।
अंशावतार योग रखने वाला व्यक्ति राजा के
समान होता है। तथा अपने कार्यों से समाज में सम्मानित
होता है। ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में कई स्त्रियों के संपर्क में
रहता है तथा उनका भोग करता है। कला पूर्ण वस्तुओं का
शौकीन यह व्यक्ति कलाकारों का सम्मान करता है तथा
अपने आप में धनवान होता है ।
(चित्र विवरण: अंशावतार योग)
सार्वभौम योग :
यदि हाथ में कहीं पर भी बाण का चिह्न
दिखाई दे तो वह सार्वभौम योग होता है।
जिसके हाथ में कहीं यह योग होता है वह
बचपन में यद्यपि गरीब होता है परन्तु यौवनावस्था मे पूर्णतः
सुखी एवं सम्पन्न होता है तथा उसके जीवन की सभी भौतिक
इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं ।
(चित्र विवरण: सार्वभौम योग)

( २६६ )
व्याघ्रहन्ता योग :
यदि हाथ में कहीं पर भी पुरुष के चेहरे
का सा चिन्ह होता है वहां यह योग होता है ।
जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
गुणवान, चतुर, तथा परिस्थितियों के अनुसार अपने आपको
ढालने वाला व्यक्ति होता है । सभा-चतुर, भाषण देने की
कला में प्रवीण ऐसा व्यक्ति समाज में उचित सम्मान प्राप्त
करता है । ऐसा व्यक्ति क्षमावान तथा गुणवान होता है और
शत्रुओं का नाश करने में पूर्ण समर्थ होता है ।
व्याघ्रहन्ता योग
दृढ योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी नेत्र का चिह्न
दिखाई दे तो वहां दृढ़ योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
दृढ़ निश्चय वाला साहसी, बलवान, तथा शत्रुओं का मान मर्दन
करने वाला होता है ।
दृढ योग
भाग्यवान योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी छतरी का
सा चिह्न दिखाई दे तो वहा भाग्यवान योग होता है ।
फल : जिसके हाथ मे यह योग होता है वह व्यक्ति
प्रसिद्धि प्राप्त चतुर, तथा बन्धु-बान्धवों का सहायक होता है ।
ऐसा व्यक्ति पूर्णतः भाग्यशाली कहा जाता है ।
भाग्यवान योग