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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 286, कुल 350 में से

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पृष्ठ 286

( २८५ )
कूट योग :
परिभाषा : यदि हाथ के मध्य में दो से अधिक तिल
हो और मुट्ठी बन्द करने पर उसमें आते हैं तो कूट योग होता
है ।
फल : जिसके हाथ में कूट योग होता है वे व्यक्ति अत्यन्त
साहसी पराक्रमी तथा निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर होने
वाले होते हैं । विपरीत परिस्थितियों को देखकर व्यक्ति घब-
राते नहीं, अपितु उनसे संघर्ष कर उन विपरीत परिस्थितियों
को अपने अनुकूल बनाने की क्षमता रखते हैं ।
[चित्र: कूट]

इषु योग :
परिभाषा : यदि अंगूठे के ऊपरी पौर पर काले तिल
का चिह्न हो तो इषु योग होता है ।
फल : इस योग मे जन्म लेने वाला व्यक्ति राजपत्रित
अधिकारी होता है । ऐसे व्यक्ति सामान्यतः जेल अधिकारी या
पुलिस सुपरिटेंडेंट होते हैं । अपने जीवन में ये व्यक्ति अपने
उद्देश्यों में पूर्णतः सफलता प्राप्त करते हैं ।
[चित्र: इषु योग]

दिग्बल योग :
परिभाषा : यदि शनि पर्वत को छोड़कर अन्य तीन
पर्वत अर्थात् सूर्य, बुध, और गृह पर्वत पर या इनसे संबंधित
रेखाओं के नीचे काले या लाल तिल का चिन्ह हो तो दिग्बल
योग होता है ।
फल : जिस व्यक्ति के हाथ में दिग्बल योग होता है वह
व्यक्ति अपने जीवन में अत्ययन्त ऊंचे स्तर पर पहुंचता है तथा
अपने कार्यों से समाज में सम्मानित होता है ।
[चित्र: दिग्बल योग]