बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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शूल योग :
परिभाषा : यदि मंगल रेखा चन्द्र पर्वत से होकर सूर्य
पर्वत तक जाती हो तो शूल योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में शूल योग होता है वह व्यक्ति
क्रोधी, क्रोध के आवेश में बना बनाया काम बिगाड़ने वाला,
लड़ाकू स्वभाव वाला, दरिद्री तथा घमण्डी होता है ।
[चित्र: शूल योग]
केदार योग :
परिभाषा : यदि सूर्य रेखा शनि पर्वत की ओर झुकी
हुई तथा स्वास्थ्य रेखा से संबन्ध स्थापित करती है तो हाथ में
केदार योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
आलसी, बन्धु-बान्धवों की सहायता करने वाला, कामी और
कृषि कार्य मे निपुण होता है ।
टिप्पणी : इस योग में व्यक्ति में अच्छे और बुरे गुणों
का मिश्रण होता है ।
[चित्र: केदार योग]
पाश योग :
परिभाषा : यदि गुरु पर्वत पर तिल का चिह्न हो तो
पास योग होता है ।
फल : जिसके हाथ मे यह योग होता है वह व्यक्ति
मित्रों में लोकप्रिय, नौकरी द्वारा सुख भोगने वाला, तथा धन-
वान होता है ।
[चित्र: पाश]