सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
तीसरा अध्याय
तीसरा अध्याय
पहला खंड
अभि त्वा शूर नोनुमो ऽ दुग्धा इव धेनवः.
ईशानमस्य जगतः स्वर्द्दशमीशानमिन्द्र तस्थुषः.. (१)
हे इंद्र! आप इस जग के व जड़चेतन के स्वामी हैं. आप सब कुछ देख सकते हैं. जैसे
थनों में दूध लिए गाएं बछड़ों के पास जाने के लिए उतावली रहती हैं, वैसे ही हम उतावले हो
कर आप को प्रणाम करते हैं. (१)
त्वामिद्धि हवामहे सातौ वाजस्य कारवः.
त्वां वृत्रेष्विन्द्र सत्पतिं नरस्त्वां काष्ठास्वर्वतः.. (२)
हे इंद्र! स्तुति करने वाले यजमान हवि दान के लिए आप को आमंत्रित करते हैं. आप
सत्य (या सज्जनों) के पालनहार हैं. हम तथा दूसरे सभी शत्रु या घोड़ों से संबंधित युद्धों में
मदद के लिए आप को ही पुकारते हैं. (२)
अभि प्र वः सुराधसमिन्द्रमर्च यथा विदे.
यो जरितृभ्यो मघवा पुरूवसुः सहस्रेणेव शिक्षति.. (३)
हे यजमानो! इंद्र पशु आदि बहुत प्रकार के धन वाले हैं. वे अपनी स्तुति करने वाले को
बहुविध धन देते हैं. आप श्रेष्ठ धन देने वाले इंद्र की हर प्रकार से पूजाअर्चना करें. (३)
तं वो दस्ममृतीषहं वसोर्मन्दानमन्धसः.
अभि वत्सं न स्वसरेषु धेनव इन्द्रं गीर्भिर्नवामहे.. (४)
हे यजमानो! जैसे गाएं बछड़ों को देख कर खुशी से रंभाती हैं, वैसे ही आप भी सोमरस
पीने से प्रसन्न इंद्र के लिए स्तुति गाइए. वे शत्रुओं (दुःखों) का नाश करने वाले हैं. (४)
तरोभिर्वो विदद्वसुमिन्द्र २३ सबाध ऊतये.
बृहद्गायन्तः सुतसोमे अध्वरे हुवे भरं न कारिणम्.. (५)
हे यजमानो! इंद्र के बहुत तेज गति वाले घोड़े हैं. वे इंद्र बहुत धनदाता हैं. वे बाधाओं से
हमारी रक्षा करते हैं. हम बृहतसाम गाते हुए उन को उसी प्रकार रक्षा के लिए बुलाते हैं, जैसे
बच्चे अपनी रक्षा के लिए अपने मातापिता को बुलाते हैं. (५)
तरणिरित्सिषासति वाजं पुरन्ध्या युजा.
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आ व इन्द्रं पुरुहूतं नमे गिरा नेमिं तष्टेव सुद्रुवम्.. (६)
इंद्र तारनहार हैं. हम बुद्धि से अन्न प्राप्त करना चाहते हैं. जैसे बढ़ई अपनी कारीगरी से
लकड़ी को नम्र कर के पहिए को गाड़ी के अनुकूल कर लेता है, वैसे ही हम इंद्र देव को
अपनी स्तुतियों से अपने अनुकूल करना चाहते हैं. (६)
पिबा सुतस्य रसिनो मत्स्वा न इन्द्र गोमतः.
आपिनों बोधि सधमाद्ये वृधे ३ ऽ स्मां अवन्तु ते धियः.. (७)
हे इंद्र! आप गाय का दूध मिला कर तैयार किए हुए रसीले सोमरस को पीजिए. उसे पी
कर आप प्रसन्न होइए. आप हमें धन देने वाले बंधु बनिए. आप हमें प्रगति की राह दिखाइए.
आप की बुद्धि हम यजमानों की रक्षा करे. (७)
त्व २४ ह्येहि चेरवे विदा भगं वसुत्तये.
उद्वावृषस्व मघवन् गविष्टय उदिन्द्राश्वमिष्टये.. (८)
हे इंद्र! आप मुझे धन देने के लिए आइए. अच्छे आचारविचार वाले हम लोगों को राह
दिखाइए व धन दीजिए. हम गायों के इच्छुक हैं. हमें गोधन दीजिए. हम घोड़ों के इच्छुक हैं.
हमें अश्वधन दीजिए. (८)
न हि वश्चरमं च न वसिष्ठः परिम २४ सते.
अस्माकमद्य मरुतः सुते सचा विश्वे पिबन्तु कामिनः.. (९)
हे मरुद्गणो! वसिष्ठ ऋषि आप में से छोटों को भी छोड़ कर स्तुति नहीं करते हैं अर्थात्
छोटों की भी स्तुति करते हैं. आज हमारे इस सोम यज्ञ में आप सभी इकट्ठे हो कर सोमरस
पीजिए. (९)
मा चिदन्यद्वि श २४ सत सखायो मा रिषण्यत.
इन्द्रमित्स्तोता वृषण सचा सुते मुहुरुक्था च श २४ सत.. (१०)
हे यजमानो! आप इंद्र के अलावा किसी अन्य देव की स्तुति मत करो. बेकार मेहनत
मत करो. एक साथ सोम यज्ञ में बलवान इंद्र की ही स्तुति करो. उन्हीं के बारे में प्रार्थनाओं
को बारबार उचारो. (१०)
दूसरा खंड
नकिष्टं कर्मणा नशद्यश्चकार सदावृधम्.
इन्द्रं न यज्ञैर्विश्वगूर्तमृभ्वसमधृष्टं धृष्णुमोजसा.. (१)
हे यजमानो! इंद्र सदा उन्नतिशील व समृद्ध हैं. वे सब से पूजित और महान बलशाली हैं.
किसी से नहीं दबने वाले व शत्रुनाशक हैं. जो यज्ञ से इंद्र को अपने अनुकूल बना लेता है, उसे
कोई भी नहीं दबा सकता है. (१)
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य ऋते चिदभिश्रिषः पुरा जत्रुभ्य आतृदः.
सन्धाता सन्धिं मघवा पुरूवसुर्निष्कर्ता विहुत पुनः.. (२)
हे इंद्र! आप गले की नाड़ियों को खून निकलने पर भी बिना जोड़ने की सामग्री के ही
जोड़ सकते हैं. इंद्र बहुत वैभव वाले हैं. वे कटे हुए भागों को फिर से जोड़ सकते हैं. (२)
आ त्वा सहस्रमा शतं युक्ता रथे हिरण्यये.
ब्रह्मयुजो हरय इन्द्र केशिनो वहन्तु सोमपीतये.. (३)
हे इंद्र! आप के घोड़े मंत्र के प्रभाव से रथ में जुत जाते हैं. आप के घोड़ों की गरदन पर
लंबे-लंबे बाल हैं. वे सैकड़ों घोड़े आप के सुनहरे रथ में जुत जाएं और सोमपान के लिए आप
को यज्ञ में ले आएं, यह अनुरोध है. (३)
आ मन्द्रैरिन्द्र हरिभिर्याहि मयूररोमभिः.
मा त्वा के चिन्नि येमुरिन्न पाशिनो ऽ ति धन्वेव तां इहि.. (४)
हे इंद्र! जैसे राहगीर शीघ्र ही रेगिस्तान को पार कर लेता है, वैसे ही आप भी मोर जैसे
रोम वाले घोड़ों से यहां आइए. जाल फैलाने वाले शिकारी आप की राह में रोड़ा न अटका
सकें. (४)
त्वमङ्ग प्र श ंश सिषो देवः शविष्ठ मर्त्यम्.
न त्वदन्यो मघवन्नस्ति मर्दितेंद्र ब्रवीमि ते वचः.. (५)
हे इंद्र! आप बलवान व प्रकाश वाले हैं. आप अपने पूजकों की प्रशंसा करते हैं. आप
धनवान हैं. आप के अलावा कोई सुख देने वाला नहीं है. इसी कारण मैं आप की स्तुति करता
हूं. (५)
त्वमिन्द्र यशा अस्यृजीषी शवसस्पतिः.
त्वं वृत्राणि ह ंश स्यप्रतीन्येक इत्पुर्व्वनुत्तश्चर्षणीधृतिः.. (६)
हे इंद्र! आप शक्तिशाली हैं. आप सोमरस पीने वाले और यशवान हैं. आप यजमानों के
हित के लिए बड़े से बड़े शत्रु को भी अकेले ही नष्ट कर सकते हैं. (६)
इन्द्रमिद्देवतातय इन्द्रं प्रत्यत्यध्वरे.
इन्द्र ंश समीके वनिनो हवामह इन्द्रं धनस्य सातये.. (७)
देवों के लिए किए जाने वाले यज्ञ में हम इंद्र को ही आमंत्रित करते हैं. यज्ञ के शुरू और
समापन दोनों ही समय हम इंद्र को आमंत्रित करते हैं. धन लाभ के लिए हम इंद्र को ही
आमंत्रित करते हैं. आप शीघ्र पधारिए. (७)
इमा उ त्वा पुरूवसो गिरो वर्धन्तु या मम.
पावकवर्णाः शुचयो विपश्चितो ऽ भिस्तोमैरनूषत.. (८)
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हे इंद्र! आप धनवान हैं. हमारी प्रार्थनाएं आप का यश बढ़ाएं. यजमान अग्नि के समान
पवित्र, तेजस्वी व विद्वान् हैं. वे प्रार्थनाओं से बारबार आप की स्तुति करते हैं. (८)
उदु त्ये मधुमत्तमा गिर स्तोमास ईरते.
सत्राजितो धनसा अक्षितोतयो वाजयन्तो रथा इव.. (९)
हे इंद्र! आप हमेशा शत्रुओं को जीतने वाले व धन देने वाले हैं. आप का दिया संरक्षण
कभी खत्म नहीं होता. बलशाली रथ के समान ये प्रार्थनाएं आप की ओर बढ़ रही हैं. ये
प्रार्थनाएं मधुर और श्रेष्ठ वचनों से भरी हुई हैं. (९)
यथा गौरो अपा कृतं तृष्यन्नेत्यवेरिणम्.
आपित्वे नः प्रपित्वे तूयमा गहि कण्वेषु सु सचा पिब.. (१०)
हे इंद्र! जैसे प्यासे गौर हिरण पानी से भरे हुए तालाब के पास जाते हैं, उसी प्रकार आप
हमारी प्रार्थनाओं से भरेपूरे यज्ञ में पधारिए. कण्व के यज्ञ में जल्दी से जल्दी आइए. सोमरस
पी कर प्रसन्न होइए. (१०)
तीसरा खंड
शग्ध्यू ३ षु शचीपत इन्द्र विश्वाभिरूतिभिः.
भगं न हि त्वा यशसं वसुविद्मनु शूर चरामसि.. (१)
हे इंद्र! आप शची के पति हैं. आप पराक्रमी हैं. आप हमें संरक्षण के साथसाथ चाहे गए
वरदान दीजिए तथा सौभाग्य जैसा यशस्वी धन दीजिए. हम आप की आराधना करते हैं. (१)
या इन्द्र भुज आभरः स्वर्वाँ असुरेभ्यः.
स्तोतारमिन्मघवन्नस्य वर्धय ये च त्वे वृक्तबर्हिषः.. (२)
हे इंद्र! आप आत्म शक्ति वाले हैं. आप ने बलवान राक्षसों से भोग के साधन जीते हैं.
इस धन से आप अपने पूजकों को संरक्षण दीजिए. जो आप को बारबार आमंत्रित या याद
करते हैं, आप उन्हें धनवान बनाइए. (२)
प्र मित्राय प्रार्यम्णे सचथ्यमृतावसो.
वरूथ्ये ३ वरुणे छन्द्यं वचः स्तोत्र २४ राजसु गायत.. (३)
हे यज्ञ करने वालो! आप का धन आप के यज्ञ हैं. आप मित्र, वरुण और अर्यमा देवता
के लिए छंदबद्ध प्रार्थनाएं उन के यज्ञशाला में विराजमान हो जाने पर गाइए. (३)
अभि त्वा पूर्वपीतय इन्द्र स्तोमेभिरायवः.
समीचीनास ऋभवः समस्वरन्नुदा गृणन्त पूर्व्यम्.. (४)
हे इंद्र! प्रार्थना करने वाले यजमान सब से पहले आप सभी देवताओं से स्तोत्र के
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