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निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

साहिब बन्दगी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (उद्गम)

DevanagariHindipublished112 पृष्ठ

केवल श्रद्धा देखते हैं आप

62 साहिब बन्दगी

आपकी अपने हरेक नामी पर नज़र रहती है। आपको पता रहता है कि कौन कितनी देर नहीं आया। एक लड़का था। उसका सेक्शन ऑफिसर का टेस्ट था। वो बोला कि दो बार फेल हो चुका हूँ, यह तीसरा आखिरी चाँस है। वो कुदरतन फेल हो गया। सोचा कि छोड़ो, नहीं जाना है। 5-6 महीने नहीं आया। फिर बाद में आया तो आप सत्संग कर रहे थे कि साहिब का द्वार नहीं छोड़ना है। वो उठा-बोला कि छोड़ना क्या है, छोड़ ही नहीं पाते हैं। फिर बाद में नियम ही बदल गया कि तीन बार के बाद भी दे सकते हैं। फिर दुबारा टेस्ट दिया तो पास हो गया।

केवल श्रद्धा देखते हैं आप

एक माई आपके पास आई, कहा कि बच्चे का नाम रखना है। आपने पूछा कि लड़का है या लड़की। वो बोली कि लड़का है। आपने कहा कि इसका नाम 'अनाम' रखो। वो चली गयी। लेकिन फिर पाँच मिनट बाद वापिस आई, कहा कि नाम बदल दो। आपने कहा कि फिर 'अजय' है इसका नाम। माई 5 मिटन बाद फिर आई, कहा कि यह लड़की है। आपने कहा कि पहले बताना था न। पर आप उससे नाराज़ नहीं हुए, बल्कि मुस्कराते हुए नाम बदल कर रख दिया। यानी वो समझ नहीं पा रही थी। जब वो बाहर जा रही थी तो कोई पूछ रहा था कि क्या नाम रखा है? वो जब बता रही थी तो वो कह रहा होगा कि यह तो लड़कों वाला नाम है। तब वो फिर वापिस आ रही थी। पर आप ऐसे लोगों की केवल श्रद्धा ही देखते हैं, भाषा नहीं समझ पा रही थी कि क्या हुआ!

आपकी तान निराली है

बाहर बहुत से संगीत बज रहे हैं, बड़े सुरों से गीत गाए जा रहे हैं। अंदर में भी बड़े बाजे बज रहे हैं, बड़ी निराली धुनें हो रही हैं, जिनकी तुलना में बाहर की धुनें कुछ भी नहीं हैं। वो बड़ी ही प्यारी धुनें हैं। हर

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तरह के वाद्य यंत्र बज रहे हैं। इन बाहर और भीतर दोनों से परे आप जो प्रेम की तान छेड़ते हैं, उसकी तुलना में दोनों तान फीकी पड़ जाती हैं। जो एक बार आपकी तान सुन ले, वो आपका प्रेमी होगा-ही-होगा। वो प्रेम की तान है। वो आत्मा तक जाती है। उसे आत्मा ग्रहण करती है।

कान के रास्ते से वो तान अंदर में आती है। यह भी कई तरह की है। एक तो आते ही विरह उत्पन्न कर देती है जबकि एक प्रेम की तान है, जो प्रेम भाव को उत्पन्न करती है। इनके अलावा कुछ तान सिग्नल देती हैं। मान लो कि आप सत्संग में किसी को बुलाना चाहते हैं तो एक गुप्त तरीके के साथ-२ वो खास तरह की तान सुनाकर भी बुलाते हैं।

जब प्रेम की ये तान आप सुनाते हैं तो शरीर की सुध भूल जाती है। जब तक वो तान रहती है, अपने में ही समाए रखती है। कभी वो तान पल-भर के लिए आती है तो कभी कुछ लंबे समय के लिए भी रह जाती है।

संगीत का प्रेमी उस तान को सुनकर निश्चय ही संगीत की हर तान भूल जायेगा। अनहद शब्द का प्रेमी उसे सुनकर अनहद शब्द को सुनना नहीं चाहेगा। वो तान ऐसी है कि उसका वर्णन नहीं किया जा सकता है। बस, यों समझ लेना चाहिए कि जैसे प्रेम बताने में नहीं आता, ऐसे वो प्रेम की तान बताई नहीं जा सकती है।

फिर एक जो आप सुरति को पकड़कर अपना शब्द सुनाते हैं, उसकी तो बात ही नहीं की जा सकती है। वो सुनने वाला तो खो ही जायेगा। फिर उसे कहीं भी चैन नहीं आ सकता है। उसी का दीवाना वो हो जायेगा। वो इतना मीठा है कि उसके लिए कुछ भी कहा नहीं जा सकता है। इसलिए यह तो परम सत्य है कि आपकी हर बात निराली है। आप इस संसार के हो ही नहीं। आप स्वयं ही सब कुछ हैं, पर यह बात बोलने से दुनिया मानेगी नहीं, विश्वास नहीं करेगी, शायद इसलिए आप भी 'साहिब-साहिब' बोल रहे हैं।