निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
साहिब बन्दगी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (उद्गम)
वाणी पर पूरा कण्ट्रोल रहता है आपका
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सब आपकी बातें सुनकर हैरान रह गये। वो तो पी.एच.डी थे, पर आपका तो विषय भी नहीं था वनस्पति शास्त्र। आपने उसी से संबंधित ही सवाल पूछे। वो नहीं बता पाए। आपने उन्हें समझाया। फिर वे सहमत हुए, कहा कि आप ठीक कह रहे हैं।
वाणी पर पूरा कण्ट्रोल रहता है आपका
आपका अपनी वाणी पर पूरा कण्ट्रोल रहता है। फिजूल नहीं बोलते हैं आप। आपने कभी किसी को आशीर्वाद नहीं दिया। किसी भी बेकार बात को नहीं बोलते हैं। कई लोग डोगरी में बड़ी बातें बोलते हैं, जो अन्य भाषा में गाली हो जाती है। इस तरह अन्य भाषाओं के कुछ शब्द यहाँ गाली बन जाते हैं। इसलिए शब्द सोच-विचार कर बोलना चाहिए। आपकी वाणी में कभी गाली नहीं निकलती है। आपकी हर बात सत्य होती है। आप सत्लोक में रहते हैं और सत्य की बात ही करते हैं।
आप दीन दुखियों के हैं
अगर देखा जाए तो दो तरह के लोग आपके पास आते हैं। 90 प्रतिशत तो बीमार, असहाय, परेशान लोग होते हैं, पर 10 प्रतिशत लोग होते हैं, जो शौकिया आते हैं।
10 साल पहले की बात है, एक महाजन ने आपको रामगढ़ में ज़मीन दी। जब आप बाद में वहाँ आश्रम बनवाने पहुँचे तो एक नामी लड़का आपके पास आया, कहा कि क्या कर रहे हैं गुरुजी? आपने कहा कि ज़मीन ख़रीदी है, आश्रम बनवा रहा हूँ। उसने कहा-गुरु जी, सब आपका ही है, कोई बात नहीं, पर जहाँ आप आश्रम बनवा रहे हैं, वो तो मेरी ज़मीन है; आपने किससे ज़मीन ख़रीदी है? आपने कहा कि फलाने महाजन ने ज़मीन दी थी। उसने कहा कि उसकी तो वहाँ छपड़ी में है। आपने महाजन से मिलकर कहा कि आपने बताई यह थी, पर है आपकी
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जगह वहाँ छपड़ी में। महाजन ने कहा-महाराज! मैं कोई खेती-बाड़ी तो करता नहीं हूँ; लोगों ने मिट्टी निकाल-2 कर इसे खाली कर दिया है। आपने कहा कि यह ठीक नहीं है; वापिस लो। तो उसने कहा कि लिखा-पढ़ी करके दे दो। आपने सोचा कि पहले भी लिखा-पढ़ी करके ली थी, अब वापिस भी लिखा-पढ़ी करके देंगे तो पैसे लगेंगे, इसलिए आपने कहा रहने दो लिखा-पढ़ी को छपड़ी वाली को ही ठीक कर लेंगे। आपने अपने लोगों को कहा कि इसे भरते हैं; एक ट्रेक्टर आश्रम का देता हूँ, एक आप किसी सौखे नामी का ले लो और इसे भर दो। तो एक ने कहा कि यहाँ कोई सौखा नामी नहीं है। सब ऐसे ही हैं। उसने कहा कि जो सौखे-सौखे थे, उन्हें एक दूसरे पंथ वाले ले गये। किसी को कहा कि चल वहाँ, जत्थेदार बना देंगे, किसी को कहा कि फलाना बना देंगे। फिर गुरु जी, जो खाने-पीने वाले थे, वो एक दूसरे पंथ वाले ले गये, कहा कि जो मरजी खाओ-पीओ, मौज-मस्ती करो और भक्ति भी करो। फिर आपके लिए बचे ही लूले, लँगड़े, बीमार। अब आपका प्रचार भी यही कर रहे हैं; कोई पागल दिखता है तो कहते हैं कि चल राँजड़ी; फिर कोई भूत-प्रेत वाला दिखता है तो कहते हैं कि चल राँजड़ी। आपने कहा कि वो भी ठीक हैं।
बाकी देखते हैं कि अच्छे कपड़े पहने हुए हैं तो छाँटते जाते हैं; पैसे, रुतबे आदि को देखकर छाँटते हैं। आप सीधा आँखों में देखते हैं; आप श्रद्धा, प्रेम और रूहानियत को देखते हैं। वो अंदर की आस्था नहीं देख रहे हैं, बाहरी भेष-भूषा देख रहे हैं। वो यह देख रहे हैं कि हमें क्या दे सकता है! आप देखते हैं कि मुझसे क्या ले सकता है!
एक नामी अपने ससुराल गया तो वहाँ अपनी सास को समझाकर लाया। वो 60 साल से दूसरे पंथ में मशहूर थी; बड़ी ज्ञानी थी; कई लोगों को भी नाम दिलवाया था। जब वो आपसे नाम ले लिया तो नामी के एक दोस्त ने उनसे कहा कि आपने यह क्या किया, इतनी इज्जत थी आपकी