सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संग्रह पर लौटें

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

साहिब बन्दगी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (उद्गम)

DevanagariHindipublished112 पृष्ठ

आपको सबकी ख़बर रहती है

98
साहिब बन्दगी

अपमान भी कर देता था, क्योंकि तगड़ा था। एक दिन चक्की चल रही थी तो उसका बाजू उसमें आकर कट गया। उस जमाने में गाड़ियाँ भी कम चलती थीं। सुबह 4-5 बजे एक आदमी आपके पास आया, कहा कि ऐसे-2 उस लड़के की बाजू कट गयी है, कोई गाड़ी नहीं है, उसे अस्पताल ले जाना है। उस समय आपके पास ही थी गाड़ी। आपने ड्राइवर को कहा कि उसे अस्पताल ले जाओ। डॉ० ने कहा कि यदि 10-12 मिनट लेट हो जाते तो यह मर जाता, क्योंकि खून इतना बह रहा था।

उसके बाद वो कहीं भी मिलता तो आपको कटी हुई बाजू ऊपर करके प्रणाम करता। पर ‘अब पछताए क्या होत, जब चिड़ियाँ चुग गयीं खेत॥’

यह पक्की बात है कि आपके बंदे को कोई कुछ करेगा तो उसकी खिचड़ी निकल जायेगी।

कहँ कबीर ऐसे उजाड़ूँ, जस मूली को खेत॥

सुँगल पिंड की तरफ सरपंच था; वो आपकी निंदा करता था; वो हमले में भी शामिल था। एक दिन जब वो जा रहा था, एक और आदमी ने आश्रम की तरफ देखकर निंदा के शब्द कहे। सरपंच ने कहा कि मेरे सामने निंदा मत करो। उसने कहा कि आप भी नामी हो गये हैं क्या? सरपंच ने कहा कि मैं नामी नहीं हूँ, पर मैं भी तुम्हारी तरह साहिब की निंदा करता था, मुझे नींद आनी बंद हो गयी, मैं पागल हो गया। तब मुझे समझ आया कि यह क्यों हुआ। इसलिए तुझे भी समझा रहा हूँ कि ऐसा मत कर।


आपको सबकी ख़बर रहती है

नाना पंथों से लोग जुड़े हैं, जो दीक्षा लेने के बाद भी वे छल-कपट नहीं छोड़ रहे, पाप नहीं छोड़ रहे। यह भक्ति है क्या? नहीं। समुद्र के किनारे जहाँ तक लहरें पहुँचती हैं, वहाँ केवल रेत होती है। वहाँ कोई

निराले सद्गुरु
99

पेड़ नहीं होता है। नमक का पानी ज़मीन को ऊसर बना देता है। जब तूफान चले तो दो फर्लांग दूर तक लहरें पहुँचती हैं। वहाँ तक कोई घास तक नहीं होती है।

नमकीन पानी ने ज़मीन को ऊसर बना दिया। नमक खाने में स्वादिष्ट है, पर उसमें बड़े दोष हैं। राँज़ड़ी में दो अमरूद के पेड़ थे। उनपर इतने अमरूद आते थे कि इतने पत्ते भी नहीं होते थे। कुछ समय बाद दोनों पेड़ कुम्हला गये, रंग मटमैला हो गया, फल खारा हो गया। आपने लोगों से पूछा कि कैसे हुआ, पर किसी को जानकारी नहीं थी। बात यह थी कि कुल्फियाँ जमाते हैं तो उसमें बर्फ और नमक दोनों डालते हैं। बेचने के बाद लड़कों ने वो बचा हुआ पानी पेड़ों में फेंक दिया। दोनों दूषित हो गये। वो पेड़ आज भी हैं। बाद में आपने वो वाली मिट्टी निकलवाकर दूसरी नयी मिट्टी डलवायी। .... इस तरह भक्ति को दोष दूषित कर देते हैं। यदि दूषित हो जायेगी भक्ति तो फिर कोई फल नहीं देगी।

70 यात्री एक बार समुद्र में प्यासे मर गये। अचरज वाली बात है। पहले कुछ दिन पिया, पर उससे लीवर ख़राब हुआ। फिर बाद में पानी नहीं पी रहे थे, प्यासे रहे। समुद्र में एक जहाज़ में 70 आदमी प्यासे मरे।

वर्तमान में हम देख रहे हैं, लोग भक्ति करना चाह रहे हैं, पर पाबन्द नहीं रहना चाहते हैं, चारसौबीसी, छल-कपट, पाप सब करना चाहते हैं। जहाँ अधर्म है, वहाँ भक्ति नहीं पनपेगी। गुरु लोग भी पाप, छल-कपट छोड़ने को नहीं कह रहे हैं। वो जानते हैं कि ऐसे में कोई नहीं आयेगा। इसलिए बाकी पंथों में लोग दौड़कर पहुँचते हैं, पर आपके पास आसानी से नहीं आते हैं। पहले हज़ार बार सोचते हैं। सिद्धांत सुनने के बाद आदमी की चुटिया खड़ी हो जाती है। हालांकि वो अंदर से जानते हैं कि इनकी भक्ति अच्छी है।