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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

बीसवां अध्याय

बीसवां अध्याय
वेदिका स्वरूप निरूपण १-४ २५५
बल व पुरुषार्थ की कामना ५-१० २५५-२५६
रक्षा के लिए देवों से प्रार्थना ११ २५६-२५७
परस्पर संयोजन की कामना १२-१३ २५७
पापों से मुक्ति की कामना १४-१७ २५७-२५८
जल संचरण १८-२२ २५८
बढ़ोतरी के लिए अग्नि से याचना २३-२४ २५९
ज्ञानमय लोक पाने की इच्छा २५-२६ २५९
ओषधियों का रस २७-२८ २५९
इंद्र की स्तुति २९ २५९-२६०
मरुद्गण की स्तुति ३० २६०
अध्वर्यु की स्तुति ३१ २६०
प्राणियों के अधिपति की उपासना ३२ २६०
ओषधि रूप रस ३३-३५ २६०
वृत्रहंता इंद्र ३६-४० २६०-२६१
उषा की वंदना ४१ २६१
इंद्र की स्थापना ४२ २६१-२६२
विघ्न दूर करने के लिए तीन देवियों से प्रार्थना ४३ २६२
त्वष्टा देव की स्तुति ४४ २६२
रक्षा के लिए इंद्र का आह्वान ४५-५४ २६२-२६४
समिधा से अग्नि प्रज्वलन ५५ २६४
तन रक्षक अश्विनीकुमार ५६ २६४
ओषधि से युक्त सोमरस ५७ २६४
सरस्वती के माध्यम से इंद्र का आह्वान ५८ २६४
सरस्वती द्वारा सोम का हरण ५९ २६४
सरस्वती द्वारा स्वर्ग और पृथ्वीलोकों का दोहन ६० २६४
इंद्र के लिए विशेष बल का समय ६१ २६५
रक्षा के लिए त्रिदेव से प्रार्थना ६२ २६५
ओषधि से युक्त सोम ६३ २६५
मधुर रस का दोहन ६४-६५ २६५
सरस्वती द्वारा नमुचि से हवि प्राप्त करना ६६-६८ २५५-२६६
सरस्वती तथा अश्विनीकुमारों द्वारा इंद्र को हवि अर्पण ६९ २६६
इंद्र द्वारा हविपति की रक्षा ७० २६६

इंद्र द्वारा नमुचि से रक्षा ७१ २६६
वरुण देव का आह्वान ७२ २६६
अश्विनीकुमारों द्वारा यजमान के पराक्रम की वृद्धि ७३ २६६
देवों से यज्ञ में पधारने का अनुरोध ७४ २६६-२६७
अश्विनीकुमारों की स्तुति ७५-७७ २६७
अग्नि द्वारा सोम को ग्रहण करना ७८-७९ २६७
अश्विनीकुमारों से प्रार्थना ८०-८३ २६८
सरस्वती देवी की उपासना ८४-८६ २६८
यज्ञ में इंद्र देव का आह्वान ८७-९० २६८-२६९
उत्तरार्ध
इक्कीसवां अध्याय
वरुण देव की उपासना १-२ २७०
अग्नि देव की स्तुति ३-४ २७०
अदिति देवी की स्तुति तथा आह्वान ५-६ २७०-२७१
मित्र और वरुण देव की आराधना ७-११ २७१-२७२
रक्षा के लिए अग्नि से प्रार्थना १२-१५ २७२
बल एवं आयु वृद्धि की याचना १६-२८ २७२-२७४
सर्व कल्याण के लिए यज्ञ की कामना २९-५६ २७४-२८२
देवगणों द्वारा पराक्रम धारण ५७-५८ २८२
देवगणों को सोम की भेंट ५९-६० २८२
देवगणों का आह्वान ६१ २८३
बाईसवां अध्याय
तेजोमय देव की उपासना १ २८४
यज्ञ से ज्ञान की वृद्धि २ २८४
अग्नि से देवताओं तक पहुंचने की प्रार्थना ३-४ २८४
प्रजापति की संतुष्टि के लिए अभिषेक ५ २८४-२८५
विभिन्न देवों के लिए आहुति अर्पण ६-८ २८५-२८६
सविता देव की स्तुति ९-१४ २८६
अग्नि की महिमा एवं वंदना १५-१९ २८६-२८७
विभिन्न देवों के लिए आहुति अर्पण २० २८७-२८८
संसार के नायक २१ २८८