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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

छब्बीसवां अध्याय

छब्बीसवां अध्याय
अग्निश्च पृथिवी च सन्नते ते मे सं नमतामदो वायुश्चान्तरिक्षं च सन्नते ते मे सं
नमतामद ऽ आदित्यश्च द्यौश्च सन्नते ते मे सं नमतामद ऽ आपश्च वरुणश्च सन्नते ते
मे सं नमतामदः.
सप्त सꣳसदो अष्टमी भूतसाधनी. सकामाँ २ अध्वनस्कुरु संज्ञानमस्तु मेमुना.. (१)
अग्नि और पृथिवी देव हमारे अनुकूल होने की कृपा करें. हमें आनंद प्रदान करने
की कृपा करें. वायु और अंतरिक्ष देव हमारे अनुकूल होने की कृपा करें. हमें आनंद
प्रदान करने की कृपा करें. आदित्य और स्वर्गलोक हमारे अनुकूल होने की कृपा करें.
हमें आनंद प्रदान करने की कृपा करें. जल और वरुण देव हमारे अनुकूल होने की
कृपा करें. हमें आनंद प्रदान करने की कृपा करें. सात संसद ( अग्नि, वायु, अंतरिक्ष,
सूर्य, आकाश, जल और वरुण ) और आठवीं पृथिवी को हमारे अनुकूल बनाने की
कृपा करें. आप की कृपा से हमारे यज्ञ सकाम ( कामना को फलीभूत करने वाले )
हों. आप की कृपा से हमें संज्ञान ( श्रेष्ठ पूर्ण ज्ञान ) हो. ( १ )
यथेमां वाचं कल्याणी मावदानि जनेभ्यः.
ब्रह्मराजन्याभ्या ꣳ शूद्राय चार्याय च स्वाय चारणाय च.
प्रियो देवानां दक्षिणायै दातुरिह भूयासमयं मे कामः समृध्यतामुप मादो नमतु.. (२)
जैसे यह वाणी लोगों के लिए कल्याणकारी होती है, वैसे ही हमारे लिए
कल्याणकारी हो. ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र के लिए आप की वाणी कल्याणकारी
हो. दक्षिणा देने वाले देवताओं के प्रिय हों. हमारी इच्छाएं फलीभूत हों. हमें आनंद प्राप्त
हो. ( २ )
बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु.
यद्दीदयच्छवस ऽ ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्.
उपयामगृहीतोसि बृहस्पतये त्वैष ते योनिर्बृहस्पतये त्वा.. (३)
हे बृहस्पति देव! आप यज्ञ में लोगों द्वारा पूजनीय हैं. आप स्वर्गलोक में
सुशोभित होते हैं. आप सब के स्वामी होने योग्य हैं. आप ऋत और इच्छा शक्ति से
सारी प्रजा की रक्षा करते हैं. आप हमें श्रेष्ठ धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. आप
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