सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संग्रह पर लौटें

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

अड़तीसवां अध्याय

अड़तीसवां अध्याय
देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेश्विनोर्बाहुभ्यां पूष्णो हस्ताभ्याम्.
आ ददेदित्यै रास्नासि.. ( १ )
हे यज्ञ ऊर्जा! हम सविता देव की जीवनदायी प्रेरणा से आप को ग्रहण करते
हैं. हम अश्विनी देवताओं की भुजाओं से पूषा देव के हाथों से आप को ग्रहण
करते हैं. आप देवताओं की माता अदिति को आवृत्त करने वाली हैं. ( १ )
इड ऽ एह्य दित ऽ एहि सरस्वत्येहि. असावेह्यासावेह्यासावेहि.. ( २ )
हे इड़ा देवी! आप यहां पधारिए. हे अदिति देवी! आप यहां पधारिए. हे सरस्वती
देवी! आप यहां पधारने की कृपा कीजिए. ( २ )
अदित्यै रास्नासीन्द्राण्या ऽ उष्णीषः. पूषासि घर्माय दीष्व.. ( ३ )
हे यज्ञ ऊर्जा! आप अदिति देव की ( मेखला ) आवृत्त करने वाली हैं. आप
इंद्राणी के सिर का वस्त्र ( प्रतिष्ठा सूचक ) हैं. आप पोषक हैं. आप यज्ञ जैसे
हितकारी कार्यों में अपनी शक्ति को लगाने की कृपा कीजिए. ( ३ )
अश्विभ्यां पिन्वस्व सरस्वत्यै पिन्वस्वेन्द्राय पिन्वस्व.
स्वाहेन्द्रवत् स्वाहेन्द्रवत् स्वाहेन्द्रवत्.. ( ४ )
अश्विनी देव के लिए यह आहुति प्रवाहित हो रही है. आप इसे पीजिए.
सरस्वती देवी के पीने के लिए यह आहुति झर रही है. इंद्र देव के पान ( पीने ) के
लिए यह आहुति बह रही है. इंद्र देव के लिए स्वाहा. स्वाहा. स्वाहा. ( ४ )
यस्ते स्तनः शशयो यो मयोभूर्यो रत्नधा वसुविद्यः सुदत्रः.
येन विश्वा पुष्यसि वार्याणि सरस्वति तमिह धातवेकः.
उर्वन्तरिक्षमन्वेमि.. ( ५ )
हे सरस्वती देवी! आप का दिव्य ज्ञान सुखदायी, कल्याणदायी व समृद्धिदायी
है. आप का दिव्य ज्ञान वैसा ही सुखद और आनंददायी है, जैसे मां का स्तन बच्चे
के लिए सुखकारी नींद लाने वाला व आनंद देने वाला होता है. बच्चे में उत्तम बल
संचरित करता है और उन में उत्तम गुण पैदा करने वाला होता है. ( ५ )
४०८ - यजुर्वेद