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निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

आपका ज्ञान देख वैज्ञानिक भी दंग रह गये

Page 57Permalink

निराले सद्गुरु 57

जब गोष्ठी हुई तो आपने पाया कि किसी को भी अमर लोक का ज्ञान नहीं था। आप जाते ही पहले कहते कि मैंने जो पाना था, पा चुका हूँ; मुझे केवल यह बता दो कि आप अंदर की दुनिया में कहाँ तक गये हो? तो आपने पाया कि किसी को भी आंतरिक दुनिया का ज्ञान नहीं था; अमर लोक बहुत दूर की बात है। कुछ केवल पढ़-सुन कर बोल रहे थे। आप समझ गये कि ये झूठ बोल रहे हैं।

आपका ज्ञान देख वैज्ञानिक भी दंग रह गये

सोलन में आपका प्रोग्राम था। यूनिवर्सिटी के सभी छात्र और प्रोफेसर भी थे। उन्होंने सोचा कि यह बाबा जी हैं, ऐसे ही होंगे। उन्होंने आपसे बड़े सवाल पूछे। लोगों ने धर्मशास्त्र तो पढ़े हैं, पर अधूरे। आप एकाग्र होकर सबकुछ करते हैं। इसलिए धर्मशास्त्रों का आपको ज्ञान भी सबसे अच्छा है। बाद में आपने एक वैज्ञानिक से पूछा कि पेड़ की ज़मीन में नमी क्यों है? वो वनस्पतिशास्त्र का वैज्ञानिक था। वो बोला कि छाया से। आपने कहा कि ऐसा करना कि मकान के नीचे से भी ज़मीन खोदना। वहाँ की ज़मीन खुश्क होगी। पर पेड़ के नीचे की ज़मीन में नमी मिलेगी।

पहले वो कह रहे थे कि अध्यात्म कुछ नहीं है, विज्ञान ही सब कुछ है। पर जब आप विज्ञान से अध्यात्म की ओर चले तो सब दंग रह गये।

तो आपने उसे समझाया कि पेड़ अपने नजदीक 10 मीटर तक सूर्य की किरणों को नहीं आने देता। उसकी पत्तियों में यह गुण हैं। क्योंकि वो जानता है कि यदि ऐसा नहीं किया तो वो नष्ट हो जायेगा। इसलिए आत्म-रक्षा के लिए वो किरणों को दूर फेंकता है। यह काम मकान नहीं कर सकता है। इसलिए हमारे पूर्वज लोग पेड़ की छाया में आराम करते थे, क्योंकि वे ठंडक महसूस करते थे।