सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संग्रह पर लौटें

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

साहिब बन्दगी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (उद्गम)

DevanagariHindipublished112 पृष्ठ

अभियान चलाया

56 \hfill साहिब बन्दगी

करने वाला है। आपका नाम पाकर हरेक नामी के हृदय से बस यही शब्द निकलते होंगे। चाहे वो वाणी में प्रकट न कर पाए, पर अंदर-ही-अंदर वो ज़रूर गुणगुनाता है-

बड़ा ही अद्भुत नाम तुम्हारा,
साहिब सच सच कहते हैं।
मैं न कहता आप न कहते,
साहिब सब यह कहते हैं॥
जब से साहिब नाम मिला है,
इच्छा कोई रही न बाकी,
चिंता सारी भाग चुकी है,
नाम सुधा पीकर हम साहिब,
खोए खोए रहते हैं।
मैं न कहता आप न कहते,
साहिब सब यह कहते हैं॥
जो जन आते शरण आपकी,
काल से मुक्ति वे जन पाते,
वे फिर आपमें और आप उनमें,
सदा सदा फिर रहते हैं॥
मैं न कहता आप न कहते,
साहिब सब यह कहते हैं॥

अभियान चलाया

जब आप मात्र 20 साल के थे तो आपने सोचा कि देश-विदेश के महात्माओं के पास जाता हूँ, देखता हूँ कि कौन कहाँ तक पहुँचा हुआ है। आप बड़े-बड़े महात्माओं से मिले, जिनकी लाखों की संगत थी। पर