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इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

Devanagarihipublished250 पृष्ठ

प्रारंभिक पृष्ठ व विषय-सूची

इच्छानुसार सन्तान

वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

इच्छानुसार सन्तान

अपन (पुत्री) किता पर मधुमती अदिनाम
आपके पास है

योग
योगेन्द्र गुप्त

संपादन योगेन्द्र गुप्त
प्रकाशन योगेन्द्र गुप्त
पुस्तक की 300 पृष्ठों तक 2/10/1942
सम्बन्धित 1/10
सिक्क 1/10

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॥ओ३म्॥

सर्वांगीणु सारवांगीणु

सर्वांगीणु

सर्वांगीणु निधिः ३ भाग ३-३

इच्छानुसार सन्तान

प्रजनन (बर्थ) क्रिया पर सम्पूर्ण अधिकार
आपके हाथ में

लेखक

वीरेन्द्र गुप्तः

राष्ट्रीय सम्बत् ६१

सृष्ट्याब्द १,९७,३८,१३,१०९

मानव सृष्टि एवं वेदकाल १,९६,०८,५३,१०९

दयानन्दाब्द १८५

विक्रम सम्बत् २०६५

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सर्वाधिकार सुरक्षित

प्रकाशक

वीरेन्द्र नाथ अश्विनी कुमार्

प्रकाशन मन्दिर

मण्डी चौक,

मुरादाबाद - २४४००१

प्राप्ति स्थान

इन्दिरा गुप्ता

वेद कुटि १३

राम बिहार कालोनी

जिला सहकारी बैंक के पीछे

मुरादाबाद

कई विशेष सन्दर्भों के साथ परिवर्धित

पंचम संस्करण २०००

२००८ ई.

मूल्य १३०/-

चलित वार्ता ९८९७५२८६५०

मुद्रक

भूषण कम्प्यूटर मन्दिर

६४, राजगली, मुरादाबाद - २४४००१

दूरभाष ९४१२२४७१९७

Email : [email protected]

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विषय सूची

विचारों को लिपिबद्ध करने के
प्रेरक श्रद्धेय वैद्य बुद्धासिंह जी
की पुण्य स्मृति
को

सादर समर्पित

पृ. 358

CC-0, Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

शास्त्रस्य पारङ्गत्वा तु भूयोभूयस्तदभ्यसेत्।
तच्छास्त्रं सबलं कुर्यान् चाधीत्य त्यजत्युनः॥

अर्थात् शास्त्र में पारंगत होकर भी बार-बार अभ्यास करता रहे। उस शास्त्र को समुन्नत करे न कि पढ़ कर फिर छोड़ दे।

एकोऽपि गुणवान् पुत्रो निर्गुणैश्च शतर्वरः।
एकश्चन्द्रस्तमो हन्ति न च ताराः सहस्रशः॥

अर्थात् सैकड़ो गुण रहित पुत्रों की अपेक्षा एक ही गुणी पुत्र श्रेष्ठ है। एक ही चन्द्रमा अन्धकार को नष्ट कर देता है, सहस्रों तारे नहीं।

प्रयत्न करना प्रत्येक मानव का कर्तव्य है,
परन्तु फल देना परमेश्वर का।
तभी तो यदा कदा प्रयत्न करने के पश्चात्,
फल के स्थान पर अपवाद ही सामने आता है।

‘चेतावनी’ प्रकरण को सर्वप्रथम पढ़िये...

पृष्ठ १२१ पर

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विषय सूची

विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
भूमिका७जनक और जननी८१
दो शब्द१३ऋतुवर्णन२४
लेखक परिचय१६ऋतुकाल वर्णित कर्म९५
वंदना१९रति समय वर्णित काल९९
मनुष्य२०अति आवश्यक सावधानियाँ१०१
स्वास्थ्य३२रहस्य तथ्य१०२
ऋतु३३शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष का
ऋतु आहार विहार३४धर्म निवारण१०५
प्रातः काल३६अति सूक्ष्म विचारों का
उषः पान३९प्रभाव१०६
मलमूत्र त्याग४०शुक्राणुओं का उलझा हुआ
दन्त धावन४२प्रश्न१०७
नेत्र४३चन्द्रमा, वीर्य और तिथि१११
अभ्यंग४४नक्षत्र और ऋतु११२
व्यायाम४४कन्या और पुत्र भेद रात्रियाँ११७
स्नान४५भ्रान्ति निवारण१२०
संध्या वन्दन४६चेतावनी१२१
प्राणायाम५३पुरुष और नारी का अन्तर१२४
आहार५७सोलाह कला१२६
संध्या समय६२गर्भाधान१२९
निद्रा६४गर्भ स्थित न होने के
वीर्य६७कारण और उसका उपचार१३३
ब्रह्मचर्य साधन७४गर्भ स्थित न होने पर१३५
स्वप्न दोष नाशकगर्भ धारण के तात्कालिक
चमत्कारी बूटों७६लक्षण१३९
विवाह७६गर्भ रक्षा१३९
मनोवाञ्छित संतान८४गर्भावस्था में मैथुन१४६

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विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
गर्भावस्था को भावना१४८कुछ अनुभव२१०
गर्भ के लक्षण और वृद्धि१५६गायत्री मन्त्र२३२
गर्भ में जीव पहुँचने का समय१५९
गर्भ में पुत्र पुत्री परीक्षा१५९
सन्तान का गौर वर्ण
बनाना१६०
संस्कार१६१
प्रसव१६२
जन्म समय१६४
प्रसूतिका का पेट, बद्ध
जाने पर१६७
शिशु पालन१६७
स्तन पान के समय कुछ
ध्यान देने योग्य बातें१६८
रति समय बच्चे को स्तन
पान कराने से हानियाँ१७०
माता का दूध कम होने पर१७१
माता के दूध के विकार
और शोधन१७२
दूध सुखाना१७३
दौल१७४
नेत्र१७४
भोजन१७६
रक्षा१७६
शिक्षा१७९
व्यवहार और कर्तव्य१८५
सन्तति निरोध२०३

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