बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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के रोग से पीड़ित रहता है । यदि यह रेखा अन्त में दो भागों में बंट जाती है तो वह
व्यक्ति नपुंसक होता है। यदि इस रेखा का एक सिरा शुक्र पर्वत पर पहुंचता हो तो वह
व्यक्ति जरूरत से ज्यादा कामी तथा भोगी होता है ।
१५. मणिबन्ध रेखाएं :
कलाई पर तीन आड़ी रेखाएं मणिबन्ध रेखाएं
कहलाती हैं । कुछ लोगों के हाथों में दो मणिबन्ध रेखाएं
होती हैं तो कुछ के हाथों में चार मणिबन्ध रेखाएं भी देखी
गई हैं ये रेखाएं स्वास्थ्य धन, प्रतिष्ठा एवं सम्मान की सूचक
होती हैं ।
मणिबन्ध से यदि कोई रेखा निकलकर ऊपर की ओर
जाती हो तो उसकी मनोकामनाएं उसके जीवन में ही पूरी हो
जाती हैं । यदि मणिबन्ध से कोई रेखा निकलकर चन्द्र पर्वत की
ओर जा रही हो तो वह जीवन में कई बार विदेश यात्राएं
करता है ।
मणिबन्ध रेखाएं
सामुद्रिक-शास्त्र के अनुसार यदि कलाई पर चार मणिबन्ध रेखाएं हों तो
उसकी पूर्ण आयु १०० वर्ष होती है । जिसके हाथ में तीन मणिबन्ध रेखाएं होती हैं
उसकी आयु ७५ वर्ष, दो रेखाएं होने पर ५० वर्ष तथा एक मणिबन्ध रेखा होने पर
उसकी आयु २५ वर्ष होती है ।
यदि मणिबन्ध रेखाएं टूटी हुई या छिन्न-भिन्न हों तो उस व्यक्ति के जीवन में
बराबर बाधाएं आती रहती हैं। इसके विपरीत यदि ये रेखाएं निर्दोष तथा स्पष्ट हों
तो उसका प्रबल भाग्योदय होता है ।
यदि मणिबन्ध रेखा जंजीरदार हो तो उसके जीवन में बराबर बाधाएं
आती रहती हैं। इस पर यव का चिह्न सौभाग्य सूचक है। यदि बिन्दु हो तो उसे
जीवन में पेट से संबंधित रोग भोगने पड़ते हैं । यदि मणिबन्ध रेखा पर द्वीप का चिह्न
हो तो उसे जीवन में दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है । जंजीर के समान
मणिबन्ध रेखा दुर्भाग्य की सूचक कहलाती है ।
यदि दो मणिबन्ध रेखाएं आपस में मिल जाती हों तो दुर्घटना से उसका अंग-
भंग होता है । यदि ये रेखाएं नीली हों तो वह जीवन-भर बीमार बना रहता है ।
पीली मणिबन्ध रेखाएं इस बात की सूचक होती हैं कि विश्वासघात की वजह से उसे
जीवन में जरूरत से ज्यादा कष्ट उठाना पड़ेगा । वास्तव में मणिबन्ध रेखाएं जितनी
अधिक स्पष्ट गहरी तथा निर्दोष होती हैं उतनी ही ज्यादा श्रेष्ठ कही जाती हैं ।
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१६. शुक्र रेखाएं :
शुक्र पर्वत पर जो खड़ी तथा आड़ी रेखाएं होती हैं उन्हें
शुक्र रेखाएं कहा जाता है। परन्तु इनके बारे में यह ध्यान
रखना चाहिए कि जो रेखाएं अंगूठे से आयु रेखा की ओर जा
रही हों मात्र वे ही शुक्र रेखाएं कहला सकती हैं।
यदि ये रेखाएं गहरी स्पष्ट तथा निर्दोष हों तो ऐसी
रेखाएं शुभ फल देने में सहायक होंगी। इसके विपरीत यदि ये
रेखाएं टूटी हुई, कमजोर तथा छिन्न-भिन्न हों तो ऐसे व्यक्ति
को जीवन में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उसका
भाग्योदय बिलम्ब से होता है, तथा समाज से बदनामी का
सामना करना पड़ता है।
शुक्र रेखाएं
१७. बुध वलय :
यदि कोई रेखा अनामिका और कनिष्ठिका के बीच
में से निकल कर बुध पर्वत को घेरती हुई हथेली के पार पहुंचे
तो इस प्रकार से जो वलय बनता है वह बुध वलय कह
लाता है।
ऐसा बुध वलय बुध के गुणों को कमजोर करता है।
बाल्यावस्था में उसे शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ज्यादा परेशानियों
का सामना करना पड़ता है। यौवन में भौतिक सुख नहीं भोग
पाता तथा आगे का पूरा जीवन दुखमय ही बना रहता है।
बुधवलय
१८. रहस्य कॉस :
यह हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा के बीच में बनने
वाला क्रॉस होता है। जिसको रहस्य क्रॉस कहते हैं। जिस
व्यक्ति की हथेली में यह क्रॉस होता है वह वैज्ञानिक दृष्टि
सम्पन्न व्यक्ति होता है।
यदि यह क्रॉस गुरु पर्वत के नीचे हो तो व्यक्ति अपने
लक्ष्य को प्राप्त करके ही रहता है। यदि यह शनि पर्वत के
नीचे हो तो वह व्यक्ति साहित्य के क्षेत्र में उच्चस्तरीय
प्रसिद्धि प्राप्त करता है। यदि यह क्रॉस चन्द्र पर्वत के समीप
हो तो वह व्यक्ति कवि होता है। इस क्रॉस से जो भी पर्वत
प्रभावित होता है उस पर्वत के गुणों में विशेष वृद्धि
होती है।
रहस्य क्रॉस
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१६. दुर्घटना रेखाएं :
शनि पर्वत से जो रेखाएं निकल कर मस्तिष्क
रेखा को काटती हैं वे दुर्घटना रेखाएं कहलाती हैं ।
क्रॉस का चिह्न दुर्घटना की ओर संकेत करता है ।
यदि गुरु पर्वत पर क्रॉस का चिह्न हो तो वह शुभ फल देने
वाला तथा भाग्यवर्द्धक होता है। शनि पर्वत पर क्रॉस का
चिह्न दुर्घटना में मृत्यु का संकेत करता है। यदि मंगल पर्वत
पर क्रॉस हो तो वह व्यक्ति युद्ध में मारा जाता है। यदि सूर्य
पर्वत पर क्रॉस का चिह्न हो तो उसकी मृत्यु विश्वासघात से
होगी । बुध पर्वत पर क्रॉस का चिह्न इस बात का सूचक है कि
उसकी मृत्यु किसी तेज गति वाले वाहन से दुर्घटना के फल-
स्वरूप होगी ।
दुर्घटना रेखाएं
चन्द्र पर्वत पर क्रॉस का चिह्न जल में डूबने से मृत्यु का संकेत करता है ।
यदि मस्तिष्क रेखा पर क्रॉस हो तो वह व्यक्ति पागल होता है । हृदय रेखा पर
क्रॉस विधुर जीवन का संकेत करता है ।
२०. त्रिकोण :
हथेली में मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा, और बुध रेखा
से मिलकर जो त्रिकोण बनता है वह त्रिकोण अतुलनीय धन-
प्राप्ति का संकेत है । ऐसे व्यक्ति को जीवन में आकस्मिक रूप
से श्रेष्ठ धन लाभ होता है ।
त्रिकोण
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२१. आयत :
यदि हथेली में मस्तिष्क रेखा तथा हृदय
रेखा मिलकर एक आयत की रचना करते हों तो
ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान और सहृदय होता है । साथ ही उसे
समाज से विशेष यश तथा सम्मान मिलता है । ऊपर मैंने छोटी-
छोटी रेखाओं का संक्षेप में परिचय दिया है । वस्तुतः हथेली
में पाई जाने वाली प्रत्येक छोटी रेखा का अपने आप में महत्त्व
होता है । अतः हस्तरेखा विशेषज्ञ को चाहिए कि वह किसी भी
रेखा को बेकार न समझे अपितु उसका सूक्ष्मतापूर्वक अध्ययन
करे । ऐसा करने पर वह अपने उद्देश्यों में पूर्णतः सफलता
प्राप्त कर सकेगा ।
[चित्र-संकेत: आयत]
हस्त-चिह्न
पिछले अध्यायों में हमने हाथ की रेखाओं के बारे में विवेचन किया है। परन्तु
इन रेखाओं के अलावा भी कई ऐसे चिह्न होते हैं जिनका अध्ययन भी मानव के लिये
अत्यन्त आवश्यक होता है। हथेली में पाये जाने वाले ऐसे चिह्न प्रमुख रूप से आठ
होते हैं ।
१. त्रिभुज
२. क्रॉस
३. बिन्दु
४. वृत्त
५. द्वीप
६. वर्ग
७. जाल
८. नक्षत्र
अब मैं इनमें से प्रत्येक का संक्षेप में विवेचन कर रहा हूं।
१. त्रिभुज :
हथेली में अगर कहीं पर भी तीन तरफ से आकर रेखाएं
परस्पर मिलती हों तो त्रिभुज का आकार बनता है। यह
त्रिभुज छोटा या बड़ा हो सकता है। हथेली में ये त्रिभुज
अलग-अलग स्थानों पर देखे जा सकते हैं।
१. जो त्रिभुज स्पष्ट, निर्दोष तथा गहरी रेखाओं से
बनता है वह शुभ फलदायी कहा जाता है।
२. हथेली में जितना बड़ा त्रिभुज होगा उतना ही
ज्यादा लाभदायक एवं सौभाग्यशाली कहा जायगा।
३. हथेली के मध्य में जो त्रिभुज पाया जाता है उससे
यह ज्ञात होता है कि वह व्यक्ति भाग्यवान, ईश्वर में विश्वास
[चित्र: त्रिभुज] रखने वाला तथा उन्नतिशील है। उसकी शारीरिक एवं
मानसिक वृत्तियां शुद्ध होती हैं। ऐसा व्यक्ति शान्त एवं मधुर स्वभाव का होता है।
समाज में उसका सम्मान होता है।
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४. बड़ा त्रिभुज व्यक्ति के विशाल हृदय का परिचायक है ।
५. संकीर्ण अस्पष्ट त्रिभुज व्यक्ति की संकीर्ण मनोवृत्ति को स्पष्ट करता है ।
६. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में बड़े त्रिभुज में एक और छोटा त्रिभुज
बन जाय तो वह व्यक्ति निश्चय ही उच्च पद प्राप्त करने में सफलता प्राप्त करता है ।
७. यदि शुक्र पर्वत पर त्रिभुज हो तो वह व्यक्ति सरल, और मधुर स्वभाव
वाला रसिक मिजाज, शान-शौकत से रहने वाला तथा ऊंचे स्तर का व्यक्ति होता है ।
८. यदि हथेली में टूटा हुआ लहरदार या दूषित त्रिभुज हो तो वह व्यक्ति
कामी एवं पर-स्त्री-गामी होता है । यदि स्त्री के हाथ में ऐसा त्रिभुज हो तो वह निश्चय
ही कुलटा होती है।
६. यदि मंगल पर्वत पर त्रिभुज हो तो व्यक्ति रणकुशल तथा युद्ध में धैर्य
दिखाने वाला होता है। वीरता में वह राष्ट्रीय पुरस्कारों से सुशोभित होता
है। परन्तु यदि इस पर्वत पर दूषित त्रिकोण हो तो वह व्यक्ति निर्दयी तथा कायर
होता है ।
१०. यदि राहू क्षेत्र पर बिना दोष के त्रिभुज हो तो ऐसा व्यक्ति अपने
यौवनकाल में अत्यन्त ऊंचे पद पर पहुंचता है। साथ ही वह व्यक्ति राजनीति के
क्षेत्र में विशेष सफलता प्राप्त करता है। यदि राहू क्षेत्र पर दो संयुक्त त्रिभुज हों
तो वह व्यक्ति अभाग्य-शाली माना जाता है ।
११. प्लूटो पर्वत पर यदि श्रेष्ठ त्रिभुज हो तो उसका बुढ़ापा आनन्द से
व्यतीत होता है। परन्तु दो संयुक्त त्रिभुज होने पर उसकी बुढ़ापे में बदनामी होती है ।
१२. यदि गुरु पर्वत पर निर्दोष त्रिभुज हो तो ऐसे व्यक्ति धूर्त कूटनीतिज्ञ
तथा हमेशा अपनी उन्नति की इच्छा रखने वाले होते हैं। इसके विपरीत दोषयुक्त
त्रिभुज होने पर वह घमण्डी तथा स्वार्थी होता है ।
१३. शनि पर्वत पर निर्दोष त्रिभुज हो तो वह व्यक्ति तंत्र मंत्र के क्षेत्र में
अधिकारी माना जाता है। सदोष त्रिभुज होने पर वह ऊंचे स्तर का ठग तथा धोखा
देने वाला होता है ।
१४. सूर्य पर्वत पर यदि निर्दोष त्रिभुज हो तो वह व्यक्ति धार्मिक परोपकारी,
तथा दूसरों का हितचिन्तन करने वाला होता है। जबकि सदोष त्रिभुज होने पर समाज
में निन्दा का पात्र बनता है। उसे जीवन में सफलता नहीं मिल पाती तथा उसकी
भाग्यवृद्धि में बराबर बाधाएं आती रहती हैं ।
१५ यदि बुध क्षेत्र पर त्रिभुज का चिह्न हो तो वह व्यक्ति अपने जीवन में
एक सफल वैज्ञानिक होता है साथ ही व्यापार की दृष्टि से भी जीवन में अत्यन्त उच्च
कोटि की सफलता प्राप्त करता है। ऐसे लोग विदेशों में अपना व्यापार फैलाकर
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लाभ उठाते हैं। यदि दोष युक्त त्रिभुज हो तो वह संचित पूंजी समाप्त करता है, तथा
व्यापार में दिवालिया होकर समाज में बदनामी उठाता है ।
१६. यदि आयु रेखा पर त्रिभुज का चिह्न दिखाई दे तो व्यक्ति दीर्घायु
होता है।
१७. मस्तिस्क रेखा पर त्रिभुज का चिह्न रखने वाला तेज बुद्धि तथा श्रेष्ठ
शिक्षा प्राप्त करने वाला होता है ।
१८. यदि हृदय रेखा पर त्रिभुज का चिह्न हो तो उस व्यक्ति का बुढ़ापे में
भाग्योदय होता है ।
१९. यदि त्रिभुज का चिह्न स्वास्थ्य रेखा पर हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य
अत्यन्त श्रेष्ठ होता है ।
२०. यदि सूर्य रेखा पर त्रिभुज का चिह्न दिखाई दे तो वह व्यक्ति किसी भी
एक क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय सफलता प्राप्त करता है ।
२१. जिस व्यक्ति के भाग्य रेखा पर त्रिभुज का चिह्न हो तो वह भाग्यहीन
होता है तथा जीवन में वह असफल ही होता देखा गया है ।
२२. अगर विवाह रेखा पर त्रिभुज का चिह्न हो तो उसके विवाह में कई
प्रकार की बाधाएं आती हैं तथा उसका गृहस्थ जीवन प्रायः असफल सा रहता है ।
२३. यदि चन्द्र रेखा पर त्रिभुज का चिह्न हो तो वह अपने जीवन में कई
बार विदेश यात्राएं करता है तथा सफलता प्राप्त करता है ।
२४. यदि जीवन तथा मस्तिष्क रेखा से त्रिकोण बनता है तो ऐसा त्रिकोण
शुभ होता है ।
२५. यदि स्वास्थ्य तथा मस्तिष्क रेखा से मिलकर त्रिभुज का चिह्न बनता
हो तो वह प्रखर बुद्धि का होता है ।
२६. यदि स्वास्थ्य तथा जीवन रेखा से मिलकर त्रिभुज का चिह्न बनता
हो तो वह व्यक्ति को बहुत अधिक ऊंचा उठाने में सहायक होता है ।
२७. यदि हथेली में उभरा हुआ त्रिकोण हो तो वह व्यक्ति लड़ाकू स्वभाव
का होता है ।
२८. यदि त्रिकोण की रेखाएं उभरी हुई पुष्ट तथा चौड़ी हों तो वह व्यक्ति
दूसरों की भलाई करने वाला होता है ।
२६. यदि त्रिकोण की रेखाएं बहुत चौड़ी हों तथा मंगल पर्वत पुष्ट हो तो
वह व्यक्ति बिना हिचकिचाहट के आगे बढ़ने वाला होता है ।
३०. यदि दोनों हाथों में चपटा त्रिभुज हो तो उस व्यक्ति का जीवन एक
प्रकार से महत्त्वहीन होता है ।
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३१. यदि रेखाएं गहरी और पतली हों तो वह व्यक्ति जीवन में पूर्ण
सफलता प्राप्त करता है ।
३२. यदि त्रिकोण की रेखाएं फीकी तथा कटी हुई हों तो वह व्यक्ति
जरूरत से ज्यादा भौतिक तथा स्वार्थी होता है ।
३३. यदि त्रिकोण से कुछ सहायक रेखाएं ऊपर की ओर बढ़ रही हों तो
उस व्यक्ति को काफी बाधाओं के बाद सफलता प्राप्त होती है ।
३४. यदि त्रिकोण के अन्दर का भाग चौड़ा हो तो वह व्यक्ति आलसी होता है।
३५. यदि स्वास्थ्य रेखा उन्नत हो तथा त्रिकोण भी बड़ा हो तो वह व्यक्ति
दीर्घायु होता है ।
३६. यदि त्रिकोण के ऊपर क्रॉस का चिह्न हो तो उस व्यक्ति के जीवन में
कई प्रकार की दुर्घटनाएं घटित होती हैं ।
३७. यदि त्रिकोण के नीचे के भाग में क्रॉस का चिह्न हो तो वह व्यक्ति
अपने जीवन में महत्त्वपूर्ण होता है ।
३८. यदि लम्बी उंगलियां हों तथा त्रिकोण के अन्दर क्रॉस हो तो व्यक्ति
दूसरों को दुखी करता है ।
३९. यदि त्रिकोण के मध्य में क्रॉस हो तथा स्वास्थ्य रेखा के पास तारा हो
तो वह व्यक्ति अन्धा होता है ।
४०. त्रिकोण के अन्दर तारे का चिह्न हो तो वह प्रेम में बदनाम होता है ।
४१. यदि त्रिकोण में वृत्त का चिह्न हो तो वह प्रेमिका से धोखा खाता है ।
४२. अच्छा पुष्ट और बड़ा त्रिकोण व्यक्ति को सभी दृष्टियों से ऊंचा
उठाने वाला माना गया है ।
२. क्रॉस :
गणित में धन का चिह्न या एक आड़ी रेखा पर दूसरी खड़ी
रेखा का जो चिह्न होता है, उसे क्रॉस का चिह्न कहते हैं । यह
चिह्न केवल वृहस्पति पर्वत पर ही शुभ फल देने वाला है ।
इसके अलावा हथेली में कहीं पर भी यह चिह्न अनुकूल फल
नहीं देता है ।
१. यदि गुरु क्षेत्र पर क्रॉस का चिह्न हो तो वह व्यक्ति
सुखमय जीवन व्यतीत करने वाला तथा सोच-समझ कर कार्य
करने वाला होता है । उसकी पत्नी शिक्षित होती है । ससुराल
से विशेष धन प्राप्त होता है । तथा उसका गृहस्थ जीवन पूर्णतः
सुखमय रहता है ।
२. यदि शनि पर्वत पर क्रॉस का चिह्न हो तो लड़ाई
झगड़े में कई बार शरीर पर चोट के निशान लगते हैं । ऐसे क्रॉस
व्यक्ति की अकाल मृत्यु होती है ।
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३. यदि सूर्य क्षेत्र पर क्रॉस का चिह्न हो तो समाज में उसे बहुत अधिक
बदनामी का सामना करना पड़ता है । व्यापार में बाधाएं उठाता है तथा इसका भाग्य
जीवन-भर इसका सहायक नहीं होता ।
४. बुध पर्वत पर यदि क्रॉस का चिह्न दिखाई दे तो वह व्यक्ति धोखे बाज
धूर्त तथा ठग होता है । ऐसा व्यक्ति कभी भी विश्वास पात्र नहीं माना जा सकता ।
५. यदि चन्द्र क्षेत्र पर क्रॉस का चिह्न हो तो जल में डूबने से उसकी मृत्यु
होती है, या जीवन-भर मस्तिष्क सम्बन्धी रोग बने रहते हैं ।
६. यदि प्रजापति क्षेत्र पर क्रॉस का चिह्न हो तो वह व्यक्ति आलसी, कायर
तथा डरपोक होता है । शत्रुओं से वह हरदम भयभीत रहता है ।
७. केतु पर्वत पर क्रास का चिन्ह इस बात का सूचक है कि वह व्यक्ति दुख-
मय बड़ा हुआ है तथा उसकी शिक्षा भली प्रकार से नहीं हो सकी है ।
८. यदि शुक्र क्षेत्र पर क्रास का चिन्ह हो तो वह प्रेम के मामले में असफल
होता है तथा उसकी बदनामी होती रहती है । ऐसे व्यक्ति जीवन-भर निन्दनीय कार्यों
में संलग्न रहते हैं ।
६. यदि मंगल पर्वत पर क्रॉस का चिह्न हो तो निश्चय ही उस व्यक्ति को
जेल की यात्रा सहन करनी पड़ती है । ऐसा व्यक्ति लड़ाई झगड़े में विश्वास करता
है तथा उसकी मृत्यु आत्महत्या से ही होती है ।
१०. यदि राहू पर्वत पर क्रॉस का चिह्न दिखाई दे तो उसका यौवनकाल
दुःखमय व्यतीत होता है तथा चेचक के रोग से वह व्यक्ति पीड़ित रहता है ।
११. यदि गुरु पर्वत के अलावा और कहीं पर भी क्रॉस का चिह्न हो तो उस
पर्वत का विपरीत फल मिलने लग जाता है ।
१२. यात्रा रेखा पर यदि क्रॉस का चिह्न हो तो यात्रा में उसकी आकस्मिक
मृत्यु होती है ।
१३. यदि विवाह रेखा पर क्रॉस का चिह्न दिखाई दे तो उस व्यक्ति का
विवाह जीवन में नहीं होता, और यदि होता भी है तो उसका गृहस्थ जीवन अत्यन्त
दुख में होता है ।
१४. सन्तान रेखा पर क्रॉस का चिह्न सन्तान के अभाव का सूचक होता है ।
१५. स्वास्थ्य रेखा पर क्रॉस का चिह्न व्यक्ति के स्वास्थ्य के पतन का उत्तर-
दायी है ।
१६. यदि भाग्य रेखा पर क्रॉस हो तो जीवन में वह अत्यन्त साधारण जीवन
व्यतीत करने को बाध्य होता है ।
१७. यदि सूर्य रेखा पर क्रॉस हो तो उसकी उन्नति में बराबर बाधाएं बनी
रहती हैं ।
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१८. यदि हृदय रेखा पर क्रॉस हो तो वह हार्ट अटैक का मरीज होता है
तथा बराबर कमजोर बना रहता है ।
१६. यदि मस्तिष्क रेखा पर क्रॉस का चिह्न हो तो वह जीवन-भर दिमाग
सम्बन्धी बीमारियों से परेशान रहता है, तथा अन्त में पागल हो जाता है ।
२०. यदि जीवन रेखा पर क्रॉस का चिह्न हो तो आयु के उस भाग में वह
मरण-तुल्य कष्ट उठाता है ।
२१. हाथ में छोटा या बड़ा, चौड़ा या पतला, किसी भी प्रकार का क्रास
हानिकर ही माना गया है ।
३. बिन्दु :
हथेली में बिन्दुओं का प्रभाव भी महत्त्वपूर्ण देखा गया है । सफेद
बिन्दु हमेशा उन्नतिकारक माने जाते हैं । हथेली में लाल रंग
के बिन्दु व्यक्ति की बीमारियों के सूचक होते हैं । पीले रंग के
बिन्दु शरीर में रक्त न्यूनता को बताते हैं । यदि हथेली में काले
रंग के बिन्दु हों तो लक्ष्मीदायक माने गये हैं ।
यहां काले रंग के बिन्दुओं से तात्पर्य हथेली में पाये
जाने वाले तिलों या तिल से है । आगे की पंक्तियों में इन काले
बिन्दुओं या तिलों के बारे में विचार स्पष्ट कर रहा हूँ :
१. यदि तिल हथेली में हो तथा मुट्ठी बन्द करने पर
वह मुट्ठी में रहता हो तो ऐसे व्यक्ति के पास धन की कमी
[चित्र: बिन्दु] नहीं रहती ।
२. यदि मुट्ठी में तिल न आता हो मुट्ठी के बाहर ही रहता हो तो ऐसे
व्यक्ति के पास धन आता तो अवश्य है परन्तु वह टिक नहीं पाता ऐसा समझना
चाहिए ।
३. यदि काला तिल गुरु पर्वत पर हो तो उसके विवाह में बराबर बाधाएं
आती हैं । समाज में प्रेम के क्षेत्र में उसे बदनामी उठानी पड़ती है । ऐसा व्यक्ति
जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर पाता ।
४. यदि शनि क्षेत्र पर काला तिल हो तो प्रेम के क्षेत्र में वह बराबर बदनाम
रहता है । गृहस्थ जीवन दुःखमय होता है तथा पति या पत्नी में से कोई एक आग में
जलकर समाप्त होता है ।
५. यदि सूर्य पर्वत पर काला तिल हो तो उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा में बहुत
बड़ा धक्का लगता है तथा वह समाज में निन्दनीय कार्य करने को बाध्य होता है ।
( १७१ )
६. यदि बुध क्षेत्र पर काला तिल हो तो वह व्यक्ति कुटिल तथा धोखेबाज
होता है । ऐसे व्यक्ति को व्यापार में हानि उठानी पड़ती है ।
७. यदि चन्द्र क्षेत्र पर काला तिल हो तो व्यक्ति का विवाह विलम्ब से होता
है । जीवन में उसे एक से अधिक बार जलघात से भी पीड़ित होना पड़ता है ।
८. यदि प्रजापति क्षेत्र पर तिल की उपस्थिति हो तो उसके शरीर का एक
अंग शस्त्र से कट जाता है ।
६. केतु क्षेत्र पर काला तिल व्यक्ति के बचपन को दुखमय बनाता है ।
१०. यदि शुक्र क्षेत्र पर काला तिल हो तो वह व्यक्ति कामी होता है तथा
जीवन भर उसके गुप्तांगों में रोग रहता है ।
११. राहू क्षेत्र पर यदि काला तिल हो तो यौवनावस्था में उसे आर्थिक हानि
उठानी पड़ती है ।
१२. जीवन रेखा पर यदि काला तिल हो तो व्यक्ति को लम्बे समय तक
टी०बी० का मरीज रहना पड़ता है ।
१३. यदि मस्तिष्क रेखा पर काला तिल हो तो उसे सिर पर गम्भीर चोट
लगती है तथा मस्तिष्क से सम्बन्धित रोग बराबर बने रहते हैं ।
१४. यदि हृदय रेखा पर काला तिल हो तो वह व्यक्ति दुर्बल हृदय वाला
होता है ।
१५. सूर्य रेखा पर काला तिल व्यक्ति की उन्नति में बराबर बाधाएं
डालता है ।
१६. यदि हथेली में भाग्य रेखा पर काला तिल हो तो उसका जीवन दुर्भाग्य-
पूर्ण ही रहता है ।
१७. स्वास्थ्य रेखा पर काला तिल जीवन-भर उसके स्वास्थ्य को कमजोर
बनाये रखता है ।
१८. विवाह रेखा पर काले तिल की उपस्थिति विवाह में बाधाएं पैदा
करती है ।
१९. यदि मंगल रेखा पर तिल हो तो ऐसा व्यक्ति कायर तथा कमजोर हृदय
वाला होता है ।
२०. चन्द्र रेखा पर तिल मानव की उन्नति में बाधाएं देता है ।
२१. यदि यात्रा रेखा पर तिल हो तो यात्रा में ही उस व्यक्ति की मृत्यु
होती है ।
२२. अनामिका उंगली पर तिल का चिह्न व्यापार में असफलता देता है ।
२३. यदि कनिष्ठिका उंगली पर काला तिल हो तो वह व्यक्ति व्यापार में
हानि उठाता है तथा व्यापार का विस्तार नहीं कर पाता ।
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२४. मध्यमा उंगली पर यदि तिल हो तो उसके भाग्य में बराबर बाधाएं
बनी रहती हैं तथा भाग्य उन्नति के लिए उसे बराबर भटकना पड़ता है ।
२५. यदि तर्जनी उंगली पर तिल का चिह्न हो तो नौकरी में पद त्याग करना
पड़ता है । एवं बदनामी का सामना करना पड़ता है ।
४. वृत्त :
हथेली में जो छोटे-छोटे गोल घेरे पाये जातेहैं उसे
वृत्त या सूर्य या कन्दुक कहते हैं ।
१. यदि हथेली में गुरु पर्वत पर वृत्त का चिह्न हो
तो ऐसा व्यक्ति प्रभावशाली होता है तथा निश्चय ही अपने
प्रयत्नों से उच्च पद प्राप्त करने में सफल रहता है । ऐसे
व्यक्ति को ससुराल से भी विशेष धन प्राप्ति होती है ।
२. यदि शनि पर्वत पर वृत्त का चिह्न हो तो उस
व्यक्ति को अनायास धन लाभ होता है तथा लॉटरी, जुए या
सट्टे से विशेष धन प्राप्त करता है ।
३. यदि सूर्य पर्वत पर वृत्त हो तो वह व्यक्ति उच्च [वृत्त]
एवं सात्विक विचारों वाला होता है तथा विश्व में वह प्रसिद्ध होता है ।
४. बुध पर्वत पर वृत्त का चिह्न व्यक्ति को व्यापार में भारी सफलता
देता है । ऐसे व्यक्ति का जीवन विलासितापूर्ण होता है ।
५. प्रजापति क्षेत्र पर वृत्त का चिन्ह मानव को कमजोर तथा आलसी बना
देता है ।
६. यदि चन्द्र पर्वत पर वृत्त का चिन्ह हो तो उसका स्वास्थ्य कमजोर रहता
है तथा जल में डूबने से उसकी मृत्यु होती है ।
७. यदि शुक्र पर्वत पर वृत्त का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति भोगी तथा कामी
होता है । कई बार ऐसे व्यक्ति नपुंसक भी होते देखे गये हैं ।
८. मंगल क्षेत्र पर वृत्त की उपस्थिति व्यक्ति को कायर दिल वाला बना
देती है ।
६. यदि जीवन रेखा पर वृत्त का चिन्ह हो तो उसकी आंखें कमजोर
होती हैं ।
१०. मस्तिष्क रेखा पर वृत्त मस्तिष्क सम्बन्धी रोगों को जन्म देता है ।
११. हृदय रेखा पर वृत्त का चिन्ह होने से व्यक्ति हृदय रोग से पीड़ित
रहता है ।
( १७३ )
१२. सूर्य रेखा पर यदि वृत्त का चिन्ह हो तो वह अपने जीवन में असाधारण
सफलता प्राप्त करता है तथा भौतिक दृष्टि से वह पूर्ण सुखी एवं सम्पन्न होता है ।
१३. भाग्यरेखा पर वृत्त का चिन्ह व्यक्ति को भाग्यहीन बनाता है तथा
जीवन-भर उसे परेशानियां भोगनी पड़ती हैं ।
१४. यदि यात्रा रेखा पर वृत्त का चिन्ह हो तो यात्रा में वह मरण-तुल्य
कष्ट उठाता है ।
५. द्वीप :
हथेली में यह चिन्ह कहीं पर भी दिखाई दे सकता
है । जिस स्थान पर भी यह चिन्ह होता है उस स्थान के प्रभाव
को यह कमजोर करने में ही सहायक होता है ।
१. गुरु पर्वत पर यदि द्वीप का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति
के आत्म-विश्वास में कमी आती है तथा उसे अपने आप पर ही
भरोसा नहीं रहता ।
२. शनि पर्वत पर द्वीप का चिन्ह व्यक्ति को पग-पग
पर परेशानियां देने में सहायक होता है ।
३. यदि रवि पर्वत पर द्वीप का चिन्ह हो तो वह
व्यक्ति हमेशा निराशावादी भावना लिये हुए जीवित रहता है
तथा उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है ।
४. बुध पर्वत पर द्वीप का चिन्ह व्यापार या विज्ञान से सम्बन्धित कार्यों में
हानि पहुंचाता है । ऐसे व्यक्ति को समाज में निन्दा का पात्र बनना पड़ता है ।
५. यदि हथेली में चन्द्र पर्वत पर द्वीप हो तो उसका स्वभाव क्रूर तथा
निर्दयी होता है ।
६. शुक्र पर्वत पर द्वीप का चिन्ह पारिवारिक जीवन में घातक माना गया
है । जीवन में चारों ओर से उसे निराशा का सामना करना पड़ता है ।
७. जीवन रेखा पर यदि द्वीप हो तो व्यक्ति सैक्स की दृष्टि से कमजोर
होता है ।
८. मस्तिष्क रेखा पर द्वीप दिमाग से सम्बन्धित रोगों से पीड़ित रखता है ।
९. हृदय रेखा पर यदि द्वीप का चिन्ह हो तो उसके जीवन में बराबर हृदय
रोग बना रहता है ।
१०. यदि सूर्य रेखा पर द्वीप हो तो उसे जीवन में कई बार बदनामियों का
सामना करना पड़ता है ।
( १७४ )
११. भाग्य रेखा पर द्वीप का चिन्ह भाग्यहीनता की ओर संकेत करता है
तथा उसे जीवन में जरूरत से ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ।
१२. यदि यात्रा रेखा पर द्वीप का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति की मृत्यु यात्रा
में ही होती है ।
१३. चन्द्र पर्वत पर द्वीप का चिन्ह व्यक्ति के दिमाग को कुन्द बना देता है ।
१४. विवाह रेखा पर द्वीप का चिन्ह हो तो शीघ्र ही प्रिय की मृत्यु का
आघात सहन करना पड़ता है ।
१५. स्वास्थ्य रेखा पर द्वीप का चिन्ह हो तो उसे जीवन में कई प्रकार की
बीमारियों का सामना करना पड़ता है ।
६. वर्ग :
चार भुजाओं से घिरे हुए स्थान या क्षेत्र को वर्ग कहते हैं । कुछ लोग
इसको समकोण के नाम से भी पुकारते हैं ।
१. यदि गुरु पर्वत पर वर्ग का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति
जीवन में सफल प्रशासक होता है । उसका सम्मान तथा कीर्ति
पूरे संसार में फैलती है। एक साधारण घराने में जन्म लेकर
के भी अत्यन्त उच्च पद पर पहुंचता है ।
२. यदि शनि पर्वत पर वर्ग का चिन्ह हो तो ऐसा
व्यक्ति बार-बार मृत्यु के मुंह से आश्चर्यजनक रूप से बच
जाता है ।
३. यदि सूर्य क्षेत्र पर वर्ग का चिन्ह हो तो वह धन,
मान, यश, पद, प्रतिष्ठा की दृष्टि से अत्यन्त उच्च स्तरीय जीवन
व्यतात करता है, और उसके कार्यों की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैलती है ।
४. यदि बुध पर्वत पर वर्ग हो तो वह जेल जाने से बच जाता है ।
५. चन्द्र पर्वत पर वर्ग का चिन्ह उसकी कल्पना शक्ति को बढ़ाने में सहायक
होता है । ऐसा व्यक्ति गम्भीर दयालु तथा विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य से कार्य
करने वाला होता है ।
६. यदि केतु पर्वत पर वर्ग हो तो ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय शीघ्र ही होता
है तथा उसका यौवनकाल अत्यन्त सुखमय व्यतीत होता है ।
७. यदि शुक्र पर्वत पर वर्ग हो तो वह प्रेम के क्षेत्र में सावधानी बरतता है
और जीवन में उसे बदनामी का सामना नहीं करना पड़ता ।
८. यदि मंगल पर्वत पर वर्ग का चिन्ह हो तो वह अपने क्रोध को सीमित
रखने में सफल होता है तथा उसे जीवन में बहुत ही कम क्रोध आता है ।
३. तृतीय खण्ड: ग्रह-पर्वत लक्षण (गुरु, शनि, सूर्य, बुध, शुक्र व मंगल पर्वत)
( १७५ )
९. यात्रा रेखा पर वर्ग की उपस्थिति इस बात की सूचक होती है कि वह
जीवन में कई बार यात्राएं करेगा तथा यात्राओं से विशेष धन लाभ लेगा ।
१०. चन्द्र रेखा पर वर्ग की उपस्थिति मानव की सभी प्रकार की उन्नति
में सहायक होती है ।
११. यदि विवाह रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसकी पत्नी पढ़ी-लिखी,
सुन्दर, सुशील तथा शिक्षित होती है । तथा उसे ससुराल से विशेष धन लाभ होता है ।
१२. यदि स्वास्थ्य रेखा पर वर्ग हो तो उसका व्यक्तित्व आकर्षक और
जीवन भर स्वास्थ्य अनुकूल बना रहता है ।
१३. यदि भाग्य रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय
छोटी अवस्था में ही हो जाता है ।
१४. सूर्य पर्वत पर अथवा सूर्य रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसके जीवन
में यश, मान, पद, प्रतिष्ठा आदि की कोई कमी नहीं रहती ।
१५. यदि हृदय रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसका गृहस्थ जीवन सुखमय
होता है तथा वह हृदय से परोपकारी एवं दयालु होता है ।
१६. मस्तिष्क रेखा पर वर्ग का चिन्ह इस बात का सूचक है कि ऐसे व्यक्ति
का दिमाग सन्तुलित तथा निरन्तर क्रियाशील है ।
१७. यदि जीवन रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति दीर्घायु होता है ।
१८. यदि राहू पर्वत पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसका काफी समय साधु के
रूप में जंगलों में व्यतीत होता है ।
वस्तुतः वर्ग का चिन्ह हथेली में कहीं पर भी हो वह पूर्णतः शुभ माना
जाता है ।
७. जाल :
खड़ी रेखाओं पर आड़ी रेखाएं होने से एक प्रकार का जाल-सा
बन जाता है। यह व्यक्ति की हथेलियों में सभी स्थानों पर
देखने को मिल जाता है। इन स्थानों पर पड़े इन जालों का
फलादेश निम्न प्रकार से है :
१. यदि गुरु क्षेत्र पर जाल चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति
क्रूर, निर्दयी, स्वार्थी, तथा घमण्डी होता है ।
२. यदि शनि पर्वत पर जाल का चिन्ह हो तो ऐसा
व्यक्ति आलसी होता है तथा समाज में कंजूस होने की वजह
से बदनामी सहन करनी पड़ती है ।
३. यदि यह रेखा जाल सूर्य पर्वत पर हो तो समाज
में बार-बार निन्दा का पात्र बनना पड़ता है ।
जाल
( १७६ )
४. यदि बुध पर्वत पर जाल हो तो वह व्यक्ति अपने ही किये गये कार्यों पर
पछताता है तथा परेशानियां उठाता है ।
५. यदि प्रजापति क्षेत्र पर जाल का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति के हाथ से
अवश्य ही हत्या होती है तथा उसे कारावास का दण्ड भोगना होता है ।
६. यदि चन्द्र क्षेत्र पर जाल का चिन्ह हो तो वह अस्थिर स्वभाव वाला तथा
असन्तुष्ट व्यक्तित्व का स्वामी होता है ।
७. यदि केतु पर्वत पर जाल हो तो वह जीवन भर बीमारियों से परेशान
रहता है ।
८. यदि शुक्र पर्वत पर जाल हो तो वह व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भोगी तथा
लम्पट होता है । समाज में उसका किसी प्रकार का कोई स्थान नहीं होता ।
६. यदि मंगल क्षेत्र पर जाल हो तो वह जीवन भर मानसिक दृष्टि से अशान्त
बना रहता है ।
१०. यदि राहू पर्वत पर जाल का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति दुर्भाग्य पूर्ण
जीवन व्यतीत करने के लिये बाध्य होता है ।
११. यदि मणिबन्ध रेखा पर हो तो उसका जरूरत से ज्यादा पतन होता है ।
१२. हथेली में कहीं पर भी जाल का चिन्ह अनुकूल फल देने वाला नहीं माना
जाता ।
८. नक्षत्र या तारा :
हथेली में कई स्थानों पर सूक्ष्मतापूर्वक देखने से नक्षत्र या
तारे दिखाई देते हैं । अलग-अलग स्थानों में होने से इनके
फलादेश में भी अन्तर आ जाता है ।
१. यदि गुरु पर्वत पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो वह
व्यक्ति निश्चय ही अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है ।
समाज में धन, मान, पद, प्रतिष्ठा, आदि की दृष्टि से उसके
जीवन में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती । वह निरन्तर
उन्नति की ओर अग्रसर रहता है तथा सम्माननीय पद प्राप्त
कर समाज में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है ।
२. यदि शनि पर्वत पर नक्षत्र या तारे का चिन्ह हो तो
ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय शीघ्र ही होता है । वह अपने लक्ष्य
की ओर अग्रसर रहता है तथा जीवन में पूर्ण यश तथा सम्मान प्राप्त करने में सफल
होता है ।
( १७७ )
३. यदि सूर्य पर्वत पर नक्षत्र हो तो ऐसे व्यक्ति के जीवन में पूर्ण धन लाभ
होता है। भौतिक दृष्टि से उसके जीवन में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती ।
४. शारीरिक तथा मानसिक दृष्टि से पूर्ण स्वस्थ रहता है ।
५. यदि बुध पर्वत पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति एक सफल
व्यापारी तथा उच्च कोटि की योजना बनाने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति एक सफल
कवि तथा साहित्यकार भी हो सकता है ।
६. यदि केतु पर्वत पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति का बचपन अत्यन्त
सुखमय बीतता है तथा जीवन में भौतिक दृष्टि से किसी प्रकार की कोई कमी नहीं
रहती ।
७. यदि शुक्र पर्वत पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति भोगी होता है ।
पत्नी के अलावा अन्य स्त्रियों से भी सम्पर्क रहता है, तथा जीवन में उसकी पत्नी
अत्यन्त सुन्दर तथा स्वस्थ रहती है।
८. मंगल पर्वत पर यदि नक्षत्र का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति धीरजवान तथा
साहसी होता है। युद्ध में अतुलनीय साहस दिखाने से उसे देश व्यापी सम्मान
मिलता है ।
६. यदि राहू पर्वत पर चिन्ह हो तो हमेशा भाग्य साथ देता है तथा जीवन
में पूर्ण यश तथा सम्मान प्राप्त करता है ।
१०. यात्रा रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह इस बात का सूचक होता है कि उस
व्यक्ति की मृत्यु घर से दूर तीर्थ स्थान पर होती है ।
११. चन्द्र रेखा पर यदि तारे का चिन्ह हो तो वह पेट संबंधी रोगों से ग्रस्त
रहता है तथा थोडे बहुत रूप में वह बराबर बीमार बना रहता है ।
१२. यदि मंगल रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति की हत्या
होती है।
१३. यदि विवाह रेखा पर नक्षत्र या तारे का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति के
विवाह में कई प्रकार की बाधाएं आती हैं तथा उसका गृहस्थ जीवन सुखमय नहीं
कहा जा सकता ।
१४. यदि स्वास्थ्य रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य
जीवन भर कमजोर बना रहता है। तथा उसकी मृत्यु अत्यन्त दुखदायी परिस्थितियों
में होती है।
१५. यदि सूर्य रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति को व्यापार में
विशेष सफलता मिलती है तथा आकस्मिक धन प्राप्त के योग जीवन मे कई बार
होते हैं।
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१६. यदि हृदय रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो वह हृदय से संबंधित रोगों
से पीड़ित रहता है ।
१७. यदि मस्तिष्क रेखा पर नक्षत्र या तारे का चिन्ह हो तो वह जीवन भर
स्नायु संबंधी रोगों से ग्रस्त रहता है ।
१८. यदि आयु रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति की यौवनकाल
में ही आकस्मिक मृत्यु हो जाती है ।
१९. यदि अंगूठे पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति परिश्रमी, सहनशील
तथा सफल व्यक्तित्व का धनी होता है ।
२०. तर्जनी उंगली पर नक्षत्र का चिन्ह सभी प्रकार से शुभ माना गया है ।
२१. मध्यमा तथा अन्य उंगलियों पर नक्षत्र के चिन्ह से उससे संबंधित ग्रहों
को विशेष बल मिलता है ।
वस्तुतः हाथ में नक्षत्र या तारे के चिन्ह का सावधानी पूर्वक अध्ययन करना
चाहिए । ये चिन्ह व्यक्तित्व के निर्माण में तथा भविष्यकथन में बहुत अधिक सहायक
होते हैं ।
काल-निर्धारण
पीछे के अध्यायों में मैंने हस्त रेखा से संबंधित तथ्य स्पष्ट किए हैं, साथ ही
साथ सहायक रेखाओं तथा हस्त चिन्हों के बारे में भी जानकारी प्रस्तुत की है।
परन्तु इसके साथ ही यह प्रश्न भी व्यक्ति के दिमाग में स्वाभाविक रूप से पैदा होता
है कि जीवन में अमुक घटनाएं घटित होंगी, यह तो हस्तरेखा ज्ञान से स्पष्ट हो जाता
है; परन्तु ये घटनाएं किस अवधि में घटित होंगी इसको समझना और जानना भी
बहुत जरूरी है।
व्यक्ति के जीवन में ये प्रश्न निरन्तर चक्कर लगाते रहते हैं कि भाग्योदय
कब होगा, किस प्रकार के कार्य से भाग्योदय होगा, भाग्योदय इसी देश में होगा या
बिदेश में होगा, विदेश यात्रा कब है नौकरी कब मिलेगी, व्यापारमें स्थिरता कब आ
सकेगी, व्यापार में कितना लाभ होगा और कब होगा, किस वस्तु या किस कार्य से व्यापार
में लाभ सम्भव है, आय वृद्धि कब होगी, नौकरी में प्रमोशन कब होगा, सन्तान सुख
कैसा मिलेगा, विवाह कब होगा - आदि ऐसी सैकड़ों बातें हैं जो मानव मस्तिष्क में
निरन्तर घुमड़ती रहती हैं इन सभी के लिये यह बहुत जरूरी है कि हम काल निर्धारण
प्रक्रिया को समझें और उसके माध्यम से भविष्य कथन को स्पष्ट कर सकें।
पीछे के पृष्ठों में मैंने हृदय रेखा, भाग्य रेखा, स्वास्थ्य रेखा, मस्तिष्क रेखा
तथा जीवन रेखा आदि के बारे में जानकारी दी है। इनमें जीवन रेखा का सर्वप्रथम
अध्ययन जरूरी है।
जैसा कि मैं पीछे बता चुका हूं कि अंगूठे और तर्जनी के बीच में से जीवन
रेखा प्रारंभ होकर शुक्र पर्वत को घेरती हुई मणिबन्ध तक पहुंचती है। यह जीवन
रेखा कहलाती है।
पहले अभ्यास के लिये किसी धागे के माध्यम से जहां से यह जीवन रेखा
प्रारंभ होती है वहां से लगाकर जीवन रेखा के अन्तिम स्थल अर्थात् मणिबन्ध की
पहली रेखा तक नापिये और इस पूरे धागे को १०० वर्ष का समझकर इसके बराबर
१० हिस्से कर लीजिये। इस प्रकार एक हिस्सा १० वर्षों का प्रतिनिधित्व करेगा।
इन १० वर्षों में भी जो दूरी है उसको यदि १० भागों में बांटें तो प्रत्येक भाग एक
वर्ष का प्रतिनिधित्व करेगा। यद्यपि ये चिन्ह नजदीक हो सकते हैं, परन्तु यह प्रत्येक
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चिन्ह एक वर्ष को सूचित करेगा । अभ्यास के बाद चिन्ह लगाने की आवश्यकता ही
नहीं रहेगी और हाथ देखकर ही यह अनुमान हो सकेगा कि यह जीवन रेखा कितने
वर्ष का प्रतिनिधित्व करती है। यदि जीवन रेखा बीच में ही समाप्त हो जाती है,
तो आयु के उस भाग में जीवन समाप्त समझना चाहिए । इससे यह भली भाँति ज्ञात
हो सकेगा कि व्यक्ति की आयु कितने वर्ष की है। इसी प्रकार जीवन रेखा पर जहाँ
भी क्रॉस का चिन्ह या जहां भी रेखा कमजोर पड़ी है आयु के उस भाग में बहुत बड़ी
बीमारी आयेगी या मरण तुल्य कष्ट भोगना पड़ेगा, ऐसा समझना चाहिए।
पूरे हाथ में घटनाओं को सूचित करने वाली जीवन रेखा ही है। अन्य जो
भी रेखाएं हैं, उन पर बिन्दु लगा कर उससे एक सीधी रेखा जीवन रेखा की ओर
खींचिये, जिस बिन्दु पर खींची हुई रेखा मिलेगी; आयु के उस भाग में ही वह घटना
घटित होगी। उदाहरण के लिये भाग्य रेखा के मध्य में कटा हुआ हिस्सा है तो
कटे हुए स्थान से यदि हम रेखा खींचें और वह रेखा जीवन रेखा के ४२वें वर्ष
के बिन्दु से मिलती हो तो इससे यह सिद्ध हो जाता है कि इस व्यक्ति की ४२वें वर्ष
में भाग्य-बाधा आयेगी और भाग्य से संबंधित कोई बहुत बड़ा कष्ट उठाना पड़ेगा।
इसी प्रकार आप अन्य रेखाओं पर पाये जाने वाले चिन्हों का फल ज्ञात कर
सकते हैं एवं उन घटनाओं को घटित होने का समय भी स्पष्ट कर सकते हैं।
धीरे-धीरे इस संबंध में अभ्यास करना चाहिए। अभ्यास के बाद तो मात्र
हथेली पर एक झलक पड़ने पर ही संबंधित घटना और उसका समय ज्ञात हो सकता
है।
वस्तुतः एक सफल भविष्यवक्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ तभी माना जाता है
जबकि वह घटनाओं का समय सही-सही रूप में स्पष्ट कर सके और इसके लिये मैंने
ऊपर बिन्दु स्पष्ट कर दिये हैं।