बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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लाभ उठाते हैं। यदि दोष युक्त त्रिभुज हो तो वह संचित पूंजी समाप्त करता है, तथा
व्यापार में दिवालिया होकर समाज में बदनामी उठाता है ।
१६. यदि आयु रेखा पर त्रिभुज का चिह्न दिखाई दे तो व्यक्ति दीर्घायु
होता है।
१७. मस्तिस्क रेखा पर त्रिभुज का चिह्न रखने वाला तेज बुद्धि तथा श्रेष्ठ
शिक्षा प्राप्त करने वाला होता है ।
१८. यदि हृदय रेखा पर त्रिभुज का चिह्न हो तो उस व्यक्ति का बुढ़ापे में
भाग्योदय होता है ।
१९. यदि त्रिभुज का चिह्न स्वास्थ्य रेखा पर हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य
अत्यन्त श्रेष्ठ होता है ।
२०. यदि सूर्य रेखा पर त्रिभुज का चिह्न दिखाई दे तो वह व्यक्ति किसी भी
एक क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय सफलता प्राप्त करता है ।
२१. जिस व्यक्ति के भाग्य रेखा पर त्रिभुज का चिह्न हो तो वह भाग्यहीन
होता है तथा जीवन में वह असफल ही होता देखा गया है ।
२२. अगर विवाह रेखा पर त्रिभुज का चिह्न हो तो उसके विवाह में कई
प्रकार की बाधाएं आती हैं तथा उसका गृहस्थ जीवन प्रायः असफल सा रहता है ।
२३. यदि चन्द्र रेखा पर त्रिभुज का चिह्न हो तो वह अपने जीवन में कई
बार विदेश यात्राएं करता है तथा सफलता प्राप्त करता है ।
२४. यदि जीवन तथा मस्तिष्क रेखा से त्रिकोण बनता है तो ऐसा त्रिकोण
शुभ होता है ।
२५. यदि स्वास्थ्य तथा मस्तिष्क रेखा से मिलकर त्रिभुज का चिह्न बनता
हो तो वह प्रखर बुद्धि का होता है ।
२६. यदि स्वास्थ्य तथा जीवन रेखा से मिलकर त्रिभुज का चिह्न बनता
हो तो वह व्यक्ति को बहुत अधिक ऊंचा उठाने में सहायक होता है ।
२७. यदि हथेली में उभरा हुआ त्रिकोण हो तो वह व्यक्ति लड़ाकू स्वभाव
का होता है ।
२८. यदि त्रिकोण की रेखाएं उभरी हुई पुष्ट तथा चौड़ी हों तो वह व्यक्ति
दूसरों की भलाई करने वाला होता है ।
२६. यदि त्रिकोण की रेखाएं बहुत चौड़ी हों तथा मंगल पर्वत पुष्ट हो तो
वह व्यक्ति बिना हिचकिचाहट के आगे बढ़ने वाला होता है ।
३०. यदि दोनों हाथों में चपटा त्रिभुज हो तो उस व्यक्ति का जीवन एक
प्रकार से महत्त्वहीन होता है ।