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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 177, कुल 350 में से

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पृष्ठ 177

( १७६ )
४. यदि बुध पर्वत पर जाल हो तो वह व्यक्ति अपने ही किये गये कार्यों पर
पछताता है तथा परेशानियां उठाता है ।
५. यदि प्रजापति क्षेत्र पर जाल का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति के हाथ से
अवश्य ही हत्या होती है तथा उसे कारावास का दण्ड भोगना होता है ।
६. यदि चन्द्र क्षेत्र पर जाल का चिन्ह हो तो वह अस्थिर स्वभाव वाला तथा
असन्तुष्ट व्यक्तित्व का स्वामी होता है ।
७. यदि केतु पर्वत पर जाल हो तो वह जीवन भर बीमारियों से परेशान
रहता है ।
८. यदि शुक्र पर्वत पर जाल हो तो वह व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भोगी तथा
लम्पट होता है । समाज में उसका किसी प्रकार का कोई स्थान नहीं होता ।
६. यदि मंगल क्षेत्र पर जाल हो तो वह जीवन भर मानसिक दृष्टि से अशान्त
बना रहता है ।
१०. यदि राहू पर्वत पर जाल का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति दुर्भाग्य पूर्ण
जीवन व्यतीत करने के लिये बाध्य होता है ।
११. यदि मणिबन्ध रेखा पर हो तो उसका जरूरत से ज्यादा पतन होता है ।
१२. हथेली में कहीं पर भी जाल का चिन्ह अनुकूल फल देने वाला नहीं माना
जाता ।
८. नक्षत्र या तारा :
हथेली में कई स्थानों पर सूक्ष्मतापूर्वक देखने से नक्षत्र या
तारे दिखाई देते हैं । अलग-अलग स्थानों में होने से इनके
फलादेश में भी अन्तर आ जाता है ।
१. यदि गुरु पर्वत पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो वह
व्यक्ति निश्चय ही अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है ।
समाज में धन, मान, पद, प्रतिष्ठा, आदि की दृष्टि से उसके
जीवन में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती । वह निरन्तर
उन्नति की ओर अग्रसर रहता है तथा सम्माननीय पद प्राप्त
कर समाज में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है ।
२. यदि शनि पर्वत पर नक्षत्र या तारे का चिन्ह हो तो
ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय शीघ्र ही होता है । वह अपने लक्ष्य
की ओर अग्रसर रहता है तथा जीवन में पूर्ण यश तथा सम्मान प्राप्त करने में सफल
होता है ।