बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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के रोग से पीड़ित रहता है । यदि यह रेखा अन्त में दो भागों में बंट जाती है तो वह
व्यक्ति नपुंसक होता है। यदि इस रेखा का एक सिरा शुक्र पर्वत पर पहुंचता हो तो वह
व्यक्ति जरूरत से ज्यादा कामी तथा भोगी होता है ।
१५. मणिबन्ध रेखाएं :
कलाई पर तीन आड़ी रेखाएं मणिबन्ध रेखाएं
कहलाती हैं । कुछ लोगों के हाथों में दो मणिबन्ध रेखाएं
होती हैं तो कुछ के हाथों में चार मणिबन्ध रेखाएं भी देखी
गई हैं ये रेखाएं स्वास्थ्य धन, प्रतिष्ठा एवं सम्मान की सूचक
होती हैं ।
मणिबन्ध से यदि कोई रेखा निकलकर ऊपर की ओर
जाती हो तो उसकी मनोकामनाएं उसके जीवन में ही पूरी हो
जाती हैं । यदि मणिबन्ध से कोई रेखा निकलकर चन्द्र पर्वत की
ओर जा रही हो तो वह जीवन में कई बार विदेश यात्राएं
करता है ।
मणिबन्ध रेखाएं
सामुद्रिक-शास्त्र के अनुसार यदि कलाई पर चार मणिबन्ध रेखाएं हों तो
उसकी पूर्ण आयु १०० वर्ष होती है । जिसके हाथ में तीन मणिबन्ध रेखाएं होती हैं
उसकी आयु ७५ वर्ष, दो रेखाएं होने पर ५० वर्ष तथा एक मणिबन्ध रेखा होने पर
उसकी आयु २५ वर्ष होती है ।
यदि मणिबन्ध रेखाएं टूटी हुई या छिन्न-भिन्न हों तो उस व्यक्ति के जीवन में
बराबर बाधाएं आती रहती हैं। इसके विपरीत यदि ये रेखाएं निर्दोष तथा स्पष्ट हों
तो उसका प्रबल भाग्योदय होता है ।
यदि मणिबन्ध रेखा जंजीरदार हो तो उसके जीवन में बराबर बाधाएं
आती रहती हैं। इस पर यव का चिह्न सौभाग्य सूचक है। यदि बिन्दु हो तो उसे
जीवन में पेट से संबंधित रोग भोगने पड़ते हैं । यदि मणिबन्ध रेखा पर द्वीप का चिह्न
हो तो उसे जीवन में दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है । जंजीर के समान
मणिबन्ध रेखा दुर्भाग्य की सूचक कहलाती है ।
यदि दो मणिबन्ध रेखाएं आपस में मिल जाती हों तो दुर्घटना से उसका अंग-
भंग होता है । यदि ये रेखाएं नीली हों तो वह जीवन-भर बीमार बना रहता है ।
पीली मणिबन्ध रेखाएं इस बात की सूचक होती हैं कि विश्वासघात की वजह से उसे
जीवन में जरूरत से ज्यादा कष्ट उठाना पड़ेगा । वास्तव में मणिबन्ध रेखाएं जितनी
अधिक स्पष्ट गहरी तथा निर्दोष होती हैं उतनी ही ज्यादा श्रेष्ठ कही जाती हैं ।